पीलीभीत जिले की पूरनपुर तहसील के ग्राम माती माफी में स्थित आदि शक्ति मां गूंगा देवी का प्राचीन एवं प्रसिद्ध मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहाँ प्रत्येक माह की अमावस्या पर विशाल मेले का आयोजन होता है, लेकिन आषाढ़ माह का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। पूरे आषाढ़ माह में प्रत्येक तीसरे दिन लगने वाला विशाल मेला, जिसे स्थानीय लोग 'जातों का मेला' कहते हैं, दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा प्रतीक है। इस मेले में पीलीभीत और लखीमपुर-खीरी के अलावा शाहजहांपुर, बदायूं, हरदोई, सीतापुर, बरेली एवं एटा सहित विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर मां गूंगा देवी के दर्शन-पूजन करते हैं। श्रद्धालु माता के दरबार में अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और सुख-समृद्धि व परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बैठने और विश्राम की समुचित व्यवस्था की गई है। मंदिर के पुजारी एवं माता के सेवक उमेन्द्र सिंह ने बताया कि मां गूंगा देवी के दरबार में सच्चे मन से आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की मनोकामना पूर्ण होती है, यही कारण है कि यहाँ वर्षभर भक्तों का तांता लगा रहता है और आषाढ़ माह में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। धार्मिक आस्था, परंपरा और लोकविश्वास का यह संगम क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है। हर वर्ष आयोजित होने वाला जातों का मेला श्रद्धालुओं के लिए आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक मेल-मिलाप का भी प्रमुख केंद्र साबित हो रहा है।
पीलीभीत जिले की पूरनपुर तहसील के ग्राम माती माफी में स्थित आदि शक्ति मां गूंगा देवी का प्राचीन एवं प्रसिद्ध मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहाँ प्रत्येक माह की अमावस्या पर विशाल मेले का आयोजन होता है, लेकिन आषाढ़ माह का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। पूरे आषाढ़ माह में प्रत्येक तीसरे दिन लगने वाला विशाल मेला,
जिसे स्थानीय लोग 'जातों का मेला' कहते हैं, दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा प्रतीक है। इस मेले में पीलीभीत और लखीमपुर-खीरी के अलावा शाहजहांपुर, बदायूं, हरदोई, सीतापुर, बरेली एवं एटा सहित विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर मां गूंगा देवी के दर्शन-पूजन करते हैं। श्रद्धालु माता के दरबार में अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और सुख-समृद्धि व परिवार
की खुशहाली की कामना करते हैं। भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बैठने और विश्राम की समुचित व्यवस्था की गई है। मंदिर के पुजारी एवं माता के सेवक उमेन्द्र सिंह ने बताया कि मां गूंगा देवी के दरबार में सच्चे मन से आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की मनोकामना पूर्ण होती है, यही कारण है कि
यहाँ वर्षभर भक्तों का तांता लगा रहता है और आषाढ़ माह में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। धार्मिक आस्था, परंपरा और लोकविश्वास का यह संगम क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है। हर वर्ष आयोजित होने वाला जातों का मेला श्रद्धालुओं के लिए आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक मेल-मिलाप का भी प्रमुख केंद्र साबित हो रहा है।
- पीलीभीत जिले की पूरनपुर तहसील के ग्राम माती माफी में स्थित आदि शक्ति मां गूंगा देवी का प्राचीन एवं प्रसिद्ध मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहाँ प्रत्येक माह की अमावस्या पर विशाल मेले का आयोजन होता है, लेकिन आषाढ़ माह का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। पूरे आषाढ़ माह में प्रत्येक तीसरे दिन लगने वाला विशाल मेला, जिसे स्थानीय लोग 'जातों का मेला' कहते हैं, दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा प्रतीक है। इस मेले में पीलीभीत और लखीमपुर-खीरी के अलावा शाहजहांपुर, बदायूं, हरदोई, सीतापुर, बरेली एवं एटा सहित विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर मां गूंगा देवी के दर्शन-पूजन करते हैं। श्रद्धालु माता के दरबार में अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और सुख-समृद्धि व परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बैठने और विश्राम की समुचित व्यवस्था की गई है। मंदिर के पुजारी एवं माता के सेवक उमेन्द्र सिंह ने बताया कि मां गूंगा देवी के दरबार में सच्चे मन से आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की मनोकामना पूर्ण होती है, यही कारण है कि यहाँ वर्षभर भक्तों का तांता लगा रहता है और आषाढ़ माह में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। धार्मिक आस्था, परंपरा और लोकविश्वास का यह संगम क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है। हर वर्ष आयोजित होने वाला जातों का मेला श्रद्धालुओं के लिए आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक मेल-मिलाप का भी प्रमुख केंद्र साबित हो रहा है।4
- लखीमपुर खीरी के बेहजम ब्लॉक के ग्राम पैला में जल जीवन मिशन की धज्जियां उड़ रही हैं। यहाँ मिशन के तहत स्थापित की गई पानी की टंकी से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है, जिससे पाइप लीक होने के कारण प्रतिदिन हजारों लीटर पानी सड़कों पर व्यर्थ बह रहा है। इस गंभीर समस्या के सामने आने के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार शिकायत की है, लेकिन इसके बावजूद समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने टंकी की तत्काल मरम्मत करवाकर जल की बर्बादी रोकने तथा इस मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।1
- लखीमपुर खीरी के लखीमपुर शहर में शुक्रवार को भगवान श्री जगन्नाथ की भव्य शोभायात्रा पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। इस दौरान आकर्षक रूप से सुसज्जित रथ पर विराजमान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाओं के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं ने "जय जगन्नाथ" का जयघोष किया, जिससे पूरा शहर भक्तिमय माहौल में सराबोर हो गया। शोभायात्रा के दौरान जगह-जगह पुष्पवर्षा कर भगवान का भव्य स्वागत किया गया। भजन-कीर्तन, ढोल-नगाड़ों और सुंदर धार्मिक झांकियों ने इस यात्रा की भव्यता को और बढ़ा दिया। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी इस यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन के साथ-साथ स्वयंसेवक भी पूरे रास्ते तैनात रहे। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि और शांति की कामना की और इसे सनातन संस्कृति व धार्मिक परंपराओं का भव्य उत्सव बताते हुए हर वर्ष इसी तरह के आयोजन की कामना की।1
- लखीमपुर खीरी के मुख्य मार्गों से शुक्रवार को भगवान श्री जगन्नाथ जी की भव्य रथ यात्रा अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। इस पावन रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा के दिव्य दर्शन पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस धार्मिक आयोजन के दौरान पूरा वातावरण "जय जगन्नाथ" और "हरे कृष्ण" के भक्तिमय जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ रथ के साथ चलते हुए कई स्थानों पर पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया, जिसमें महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा, जिससे पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।1
- लखीमपुर खीरी के शैक्षणिक संस्थानों के इतिहास में पहली बार माधव चिल्ड्रेंस एकेडमी एवं माधव गुरुकुलम छात्रावास के तत्वावधान में भगवान श्री जगन्नाथ रथ यात्रा महोत्सव का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। पूरे परिसर में "जय जगन्नाथ" के उद्घोष गूंजते रहे और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि गढ़ी चौकी इंचार्ज स्नेहा मौर्या एवं विद्यालय की सह-प्रबंधक रुचि ऋतुराज ने माँ सरस्वती, भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं माता सुभद्रा के चित्रों पर पुष्पार्चन एवं माल्यार्पण कर किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने अपनी आकर्षक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। अथर्व पांडे, सार्थक और अधीरा ने क्रमशः भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र एवं माता सुभद्रा का स्वरूप धारण कर सभी को भाव-विभोर कर दिया। आराध्या सिंह ने गणेश वंदना प्रस्तुत की, जबकि प्रियांशी शाह ने स्वागत गीत से अतिथियों का अभिनंदन किया। इसके बाद अनूरा, अर्पिता डे, आन्या मौर्या, आराध्या गुप्ता, आराध्या सिंह, माही एवं नंदिनी ने भगवान श्री जगन्नाथ पर आधारित मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर खूब तालियाँ बटोरीं। इस अवसर पर मुख्य अतिथि स्नेहा मौर्या ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों से बच्चों में भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान और सामाजिक जागरूकता विकसित होती है। उन्होंने सभी बच्चों से अपने आसपास के प्रत्येक बच्चे को शिक्षा के प्रति प्रेरित करने का आह्वान किया। विद्यालय की सह-प्रबंधक रुचि ऋतुराज ने श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी से जुड़ी ऐतिहासिक एवं धार्मिक मान्यताओं का उल्लेख करते हुए रथ यात्रा के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अनेक आक्रमणों के बावजूद भगवान श्री जगन्नाथ की परंपरा और आस्था आज भी अडिग है। इस अवसर पर विकास बाजपेई ने कहा कि विद्यालय में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ भारतीय सभ्यता, संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का निरंतर प्रयास किया जाता है। कार्यक्रम का सफल संचालन माधव स्मार्ट किड्स की कोऑर्डिनेटर पूजा गुप्ता ने किया, जिसमें अमन वर्मा, मानसी मिश्रा, रुचि यादव, रोली गुप्ता, पलक सहित समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस ऐतिहासिक आयोजन में बड़ी संख्या में अभिभावक, नगर के बुद्धिजीवी, गणमान्य नागरिक एवं पत्रकार उपस्थित रहे।3
- प्रभु श्री जगन्नाथ जी की पावन रथ यात्रा के शुभ अवसर पर बेहद ही मनमोहक और भक्तिमय झलकियाँ सामने आई हैं। इस विशेष और पावन उत्सव के अवसर पर प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की दिव्य कृपा सभी लोगों पर सदैव बनी रहे, यही मंगल कामना की गई है। पूरा वातावरण "जय जगन्नाथ!" के पवित्र और श्रद्धापूर्ण उद्घोष से गुंजायमान हो रहा है।1
- उत्तर प्रदेश के बहराइच में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जहां धान रोपाई के बाद हाथ-पैर धुलने गए एक 12 वर्ष के बालक को मगरमच्छ ने अपना निवाला बना लिया। यह दर्दनाक हादसा तब हुआ जब बालक खेत में धान की रोपाई का काम पूरा करने के बाद अपने हाथ-पैर साफ करने गया था और तभी मगरमच्छ ने उस पर हमला कर उसे अपना शिकार बना लिया।1