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प्रदेश के हर दिल अज़ीज़ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रयागराज पहुँच चुके हैं। वे विशेष रूप से प्रेरणा स्थल पर उपस्थित हैं।
नावेद खान पत्रकार
प्रदेश के हर दिल अज़ीज़ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रयागराज पहुँच चुके हैं। वे विशेष रूप से प्रेरणा स्थल पर उपस्थित हैं।
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- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर जमकर गरजते हुए राष्ट्रहित का महत्व समझाया। इस दौरान उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों पर विशेष जोर दिया।1
- प्रयागराज के जसरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में मरीजों को मुफ्त दवा देने के सरकारी दावे केवल कागजों तक ही सीमित हैं। यहां तैनात डॉक्टरों पर गंभीर आरोप है कि वे कमीशन के लालच में सरकारी पर्चे पर भी बाहर की महंगी दवाएं लिखते हैं, जिसके कारण गरीब मरीज सरकारी अस्पताल आने के बावजूद उन्हें बाहर से खरीदने को मजबूर हैं। एक शिकायतकर्ता ने बताया कि 4 जुलाई को बुखार और कमजोरी की शिकायत लेकर वे CHC गए थे, जहां डॉक्टर ने सरकारी पर्चे पर पांच दवाएं लिखीं। मेडिकल स्टोर पर पता चला कि अस्पताल में इनमें से एक भी दवा उपलब्ध नहीं है और सभी प्राइवेट कंपनी की थीं, जिसके लिए उन्हें ₹680 खर्च कर बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ीं। यह केवल एक मामला नहीं है, बल्कि कई अन्य मरीजों के साथ भी ऐसा ही हो रहा है। पर्चे पर 'सरकारी अस्पताल जसरा' लिखा होने के बावजूद, नीचे लिखी दवाएं अस्पताल की सूची में शामिल ही नहीं होतीं। एक ANM ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जसरा CHC में प्रतिदिन 200 से अधिक मरीज आते हैं और इनमें से लगभग 70% पर्चों पर बाहर की दवाएं लिखी जाती हैं, जिन्हें गरीब लोग मजबूरी में चुपचाप खरीद लेते हैं। सूत्रों के अनुसार, CHC के पास स्थित 10 से 15 निजी मेडिकल स्टोर के साथ डॉक्टरों की मिलीभभगत है। आरोप है कि जितनी महंगी और ब्रांडेड दवा लिखी जाती है, डॉक्टरों को उतना ही अधिक कमीशन मिलता है। मरीजों से अक्सर कह दिया जाता है कि 'सरकारी दवा खत्म है, बाहर से ले लीजिए'। इस कमीशनखोरी का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है; मजदूरी करने वाले गरीब मरीज ₹500-₹800 की दवाएं खरीदने में असमर्थ होते हैं। उन्हें पहले लाइन लगाकर डॉक्टर को दिखाना पड़ता है और फिर बाहर जाकर दवा खरीदनी पड़ती है। इसके अलावा, अधिकांश ग्रामीण मरीजों को यह भी जानकारी नहीं होती कि कौन सी दवा सरकारी है और कौन सी प्राइवेट। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रयागराज के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) से जसरा CHC के पर्चों की गहन जांच कराने की मांग की है। उन्होंने दोषी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने और अस्पताल में दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि सरकार भले ही 'आयुष्मान' और 'मुफ्त इलाज' का ढिंढोरा पीट रही हो, लेकिन जसरा CHC में व्याप्त इस कमीशनखोरी के कारण मरीजों को आर्थिक और मानसिक, दोनों तरह से 'दोहरी मार' झेलनी पड़ रही है। कुल मिलाकर, कमीशन के इस खेल में जसरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का पूरा सिस्टम दम तोड़ता नजर आ रहा है, जिससे मरीज लगातार परेशान हैं।1
- कांग्रेस शासित प्रदेश तेलंगाना में 800 साल पुराने एक मंदिर को कांग्रेस की सरकार ने बुलडोजर से ध्वस्त करा दिया है। बताया जा रहा है कि जिस मंदिर को गिराया गया है, वह शिव मंदिर था।1
- प्रयागराज के नगर पंचायत शंकरगढ़ स्थित वार्ड संख्या-2 की डूडा कॉलोनी में बदहाली और गंदगी का गंभीर आलम है। हाल की कई खबरों में इस कॉलोनी की दयनीय स्थिति पर चिंता जताई गई है, जहाँ जर्जर भवन और चारों ओर फैली गंदगी लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। वर्ष 2008 में गरीबों के लिए निर्मित आवास अब खंडहर में तब्दील हो चुके हैं, जिससे निवासी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सफाई कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण नालियां जाम पड़ी हैं और कूड़े का उचित निस्तारण नहीं हो रहा है। कुल मिलाकर, डूडा कॉलोनी में गंदगी, टूटी नालियां, कचरे के ढेर और अवैध कब्जों के कारण हालात 'नारकीय' बताए जा रहे हैं।1
- प्रयागराज के झुसी इलाकों में तेंदुए के आतंक से दहशत फैल गई है। यह ताज़ा खबर है कि तेंदुए की मौजूदगी ने पूरे क्षेत्र में भय का माहौल बना दिया है।1
- प्रयागराज के बम्हरौली क्षेत्र में तीन भाइयों पर बम से हमला किया गया है। इस हमले के बाद पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करने में जुट गई है।1
- प्रदेश के हर दिल अज़ीज़ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रयागराज पहुँच चुके हैं। वे विशेष रूप से प्रेरणा स्थल पर उपस्थित हैं।1
- प्रयागराज के मेजा थाना क्षेत्र के खानपुर गांव में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस दौरान एक पक्ष ने पुलिस की मौजूदगी में हुए लिखित समझौते को दरकिनार करते हुए जबरन निर्माण कार्य शुरू कर दिया। जब दूसरे पक्ष के धीरज कुमार पटेल ने इसका विरोध किया और सबूत के तौर पर वीडियो बनाने लगे, तो उन पर धारदार हथियार (फावड़े) और लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया गया। बीच-बचाव करने आईं उनकी मां और बहन के साथ भी मारपीट की गई। धीरज कुमार पटेल द्वारा मेजा थाना प्रभारी को दी गई शिकायत के अनुसार, उनके गांव में गाटा संख्या 27 की जमीन की हदबंदी का आदेश हो चुका है, लेकिन अभी तक सरकारी पैमाइश नहीं हुई है। इसके बावजूद दूसरे पक्ष के संदीप कुमार पटेल और उनके सहयोगियों ने वहां जबरन निर्माण कार्य शुरू कर दिया। पीड़ित ने बताया कि बीते 27 जून 2026 को थाना दिवस पर दोनों पक्षों के बीच लिखित समझौता हुआ था कि जब तक जमीन की सरकारी नाप नहीं हो जाती, तब तक कोई भी पक्ष निर्माण कार्य नहीं करेगा। आरोप है कि 5 जुलाई की सुबह लगभग 7 बजे दूसरे पक्ष ने इस समझौते को तोड़ते हुए अवैध रूप से निर्माण कार्य शुरू कर दिया। तहरीर के मुताबिक, जब धीरज कुमार पटेल ने मौके पर पहुंचकर उन्हें मना किया और अपने मोबाइल से घटना का वीडियो बनाने लगे, तो विपक्षी भड़क गए। दिलीप पटेल ने धीरज के सिर पर फावड़े से जोरदार हमला कर दिया, जिससे वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े और अचेत हो गए। बीच-बचाव करने आईं महिलाओं के बाल नोचे गए और उन्हें भी बुरी तरह पीटा गया। शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए, जिससे हमलावर वहां से भाग निकले और पीड़ित की जान बच सकी। पीड़ित धीरज कुमार पटेल ने बताया कि पूरी मारपीट और घटना का वीडियो उनके मोबाइल में रिकॉर्ड है। उन्होंने मेजा थाने में दिलीप कुमार, रंजीत कुमार, प्रदीप कुमार पटेल, अजीत कुमार, संदीप की पत्नी और प्रीति पटेल के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराते हुए अपनी जान-माल की सुरक्षा और आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस तहरीर के आधार पर मामले की जांच कर रही है।1