उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने हथीन के गांव गहलब में त्रिवेणी धाम गौशाला में नए शेड का किया उद्घाटन - गाय को माना जाता है पोषण, समृद्धि और धर्म का प्रतीक : डॉ हरीश कुमार वशिष्ठ उपायुक्त हथीन /रोबिन माथुर : समीपवर्ती गांव गहलब स्थित त्रिवेणी धाम गौशाला में गोवंश की बेहतर देखभाल के उद्देश्य से बनाए गए दो नए शेड (क्रमशः 100×40 आकार के विशाल शेड का निर्माण अशोका डिस्टिलर्स एंड केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से और एसपीसीए निधि से शेड 100x50 का निर्माण) का रविवार को उपायुक्त पलवल डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने बतौर मुख्य अतिथि विधिवत उद्घाटन किया। मुख्य अतिथि डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि गौसेवा भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि गौशालाओं का विकास समाज के सहयोग से ही संभव है और इस दिशा में सामाजिक संस्थाओं व उद्योगों का योगदान सराहनीय है। उन्होंने अशोका डिस्टिलर्स एंड केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किए गए इस सहयोग की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायक हैं। भारत में प्राचीन काल से ही गाय को माता के समान सम्मान दिया जाता है। गाय को केवल एक पशु नहीं, बल्कि पोषण, समृद्धि और धर्म का प्रतीक माना जाता है। हमारे शास्त्रों और धार्मिक ग्रंथों में भी गौसेवा का विशेष महत्व बताया गया है। उपायुक्त ने कहा कि गाय मनुष्य के जीवन में अनेक प्रकार से उपयोगी है। गाय का दूध स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। इससे दही, घी, मक्खन और छाछ जैसे पौष्टिक पदार्थ बनाए जाते हैं। इसके अलावा गोबर और गोमूत्र का उपयोग खेती, ईंधन और आयुर्वेदिक औषधियों में भी किया जाता है। ग्रामीण जीवन में गाय आर्थिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारतीय संस्कृति में गौसेवा को पुण्य का कार्य माना गया है। लोग गायों को भोजन कराते हैं, उनकी देखभाल करते हैं और उन्हें संरक्षण देने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार गौसेवा केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक भी है। इसलिए हमें गायों की रक्षा और सेवा करके अपनी संस्कृति और परंपरा को जीवित रखना चाहिए। उन्होंने गौशाला परिसर में पौधारोपण करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। गौशाला परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत “जय गोमाता” के उद्घोष के साथ हुई। यहां 100×40 आकार के विशाल शेड का निर्माण अशोका डिस्टिलर्स एंड केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से कराया गया है और एसपीसीए निधि से शेड 100x50 का निर्माण करवाया गया है। यह शेड गौशाला में रह रहे गोवंश को गर्मी, सर्दी और वर्षा से सुरक्षित रखने के लिए तैयार किया गया है। नए शेड के निर्माण से गौशाला की क्षमता और सुविधाओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों, गौसेवकों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। गुरूग्राम विधायक मुकेश शर्मा के प्रतिनिधि हरविन्दर शर्मा ने इस मौके पर गौशाला के लिए ढाई लाख रुपये देने की घोषणा भी की। स्थानीय ग्रामीणों और गौसेवकों ने कहा कि नए शेड के निर्माण से गौशाला में रहने वाले पशुओं को बेहतर संरक्षण और आराम मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी गौशाला में इसी तरह के सेवा कार्य जारी रहेंगे। कार्यक्रम के अंत में गौसेवा और समाजसेवा के महत्व पर बल देते हुए सभी ने मिलकर गौमाता की सेवा करने और गौशालाओं के विकास में योगदान देने का संकल्प लिया। गुरूग्राम विधायक मुकेश शर्मा के प्रतिनिधि हरविन्दर शर्मा, पूर्व विधायक प्रवीण डागर के प्रतिनिधि सतीश डागर,उपनिदेशक पशुपालन एवं डेयरी विभाग पलवल डॉ वीरेंद्र राठी, अरुण सिंगला (सी.एम.डी.), गहलब गो सेवा समिति के राजेश, सुखराम रावत, रश्मि सहरावत, योगेन्द्र सहरावत, खुशीराम, सरपंच गहलब धर्मेंद्र, डॉ लेखराज, सहजराम, उदयवीर सहित आसपास के गांवों के पंच-सरपंच मौजूद रहे।
उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने हथीन के गांव गहलब में त्रिवेणी धाम गौशाला में नए शेड का किया उद्घाटन - गाय को माना जाता है पोषण, समृद्धि और धर्म का प्रतीक : डॉ हरीश कुमार वशिष्ठ उपायुक्त हथीन /रोबिन माथुर : समीपवर्ती गांव गहलब स्थित त्रिवेणी धाम गौशाला में गोवंश की बेहतर देखभाल के उद्देश्य से बनाए गए दो नए शेड (क्रमशः 100×40 आकार के विशाल शेड का निर्माण अशोका डिस्टिलर्स एंड केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से और एसपीसीए निधि से शेड 100x50 का निर्माण) का
रविवार को उपायुक्त पलवल डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने बतौर मुख्य अतिथि विधिवत उद्घाटन किया। मुख्य अतिथि डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि गौसेवा भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि गौशालाओं का विकास समाज के सहयोग से ही संभव है और इस दिशा में सामाजिक संस्थाओं व उद्योगों का योगदान सराहनीय है। उन्होंने अशोका डिस्टिलर्स एंड केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किए गए इस सहयोग की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज के
लिए प्रेरणादायक हैं। भारत में प्राचीन काल से ही गाय को माता के समान सम्मान दिया जाता है। गाय को केवल एक पशु नहीं, बल्कि पोषण, समृद्धि और धर्म का प्रतीक माना जाता है। हमारे शास्त्रों और धार्मिक ग्रंथों में भी गौसेवा का विशेष महत्व बताया गया है। उपायुक्त ने कहा कि गाय मनुष्य के जीवन में अनेक प्रकार से उपयोगी है। गाय का दूध स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। इससे दही, घी, मक्खन और छाछ जैसे पौष्टिक पदार्थ बनाए जाते हैं। इसके अलावा गोबर और
गोमूत्र का उपयोग खेती, ईंधन और आयुर्वेदिक औषधियों में भी किया जाता है। ग्रामीण जीवन में गाय आर्थिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारतीय संस्कृति में गौसेवा को पुण्य का कार्य माना गया है। लोग गायों को भोजन कराते हैं, उनकी देखभाल करते हैं और उन्हें संरक्षण देने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार गौसेवा केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक भी है। इसलिए हमें गायों की रक्षा और सेवा करके अपनी संस्कृति और
परंपरा को जीवित रखना चाहिए। उन्होंने गौशाला परिसर में पौधारोपण करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। गौशाला परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत “जय गोमाता” के उद्घोष के साथ हुई। यहां 100×40 आकार के विशाल शेड का निर्माण अशोका डिस्टिलर्स एंड केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से कराया गया है और एसपीसीए निधि से शेड 100x50 का निर्माण करवाया गया है। यह शेड गौशाला में रह रहे गोवंश को गर्मी, सर्दी और वर्षा से सुरक्षित रखने के लिए तैयार किया गया है। नए शेड के निर्माण से
गौशाला की क्षमता और सुविधाओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों, गौसेवकों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। गुरूग्राम विधायक मुकेश शर्मा के प्रतिनिधि हरविन्दर शर्मा ने इस मौके पर गौशाला के लिए ढाई लाख रुपये देने की घोषणा भी की। स्थानीय ग्रामीणों और गौसेवकों ने कहा कि नए शेड के निर्माण से गौशाला में रहने वाले पशुओं को बेहतर संरक्षण और आराम मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी गौशाला में इसी तरह के सेवा कार्य जारी रहेंगे। कार्यक्रम
के अंत में गौसेवा और समाजसेवा के महत्व पर बल देते हुए सभी ने मिलकर गौमाता की सेवा करने और गौशालाओं के विकास में योगदान देने का संकल्प लिया। गुरूग्राम विधायक मुकेश शर्मा के प्रतिनिधि हरविन्दर शर्मा, पूर्व विधायक प्रवीण डागर के प्रतिनिधि सतीश डागर,उपनिदेशक पशुपालन एवं डेयरी विभाग पलवल डॉ वीरेंद्र राठी, अरुण सिंगला (सी.एम.डी.), गहलब गो सेवा समिति के राजेश, सुखराम रावत, रश्मि सहरावत, योगेन्द्र सहरावत, खुशीराम, सरपंच गहलब धर्मेंद्र, डॉ लेखराज, सहजराम, उदयवीर सहित आसपास के गांवों के पंच-सरपंच मौजूद रहे।
- हथीन /रोबिन माथुर : समीपवर्ती गांव गहलब स्थित त्रिवेणी धाम गौशाला में गोवंश की बेहतर देखभाल के उद्देश्य से बनाए गए दो नए शेड (क्रमशः 100×40 आकार के विशाल शेड का निर्माण अशोका डिस्टिलर्स एंड केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से और एसपीसीए निधि से शेड 100x50 का निर्माण) का रविवार को उपायुक्त पलवल डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने बतौर मुख्य अतिथि विधिवत उद्घाटन किया। मुख्य अतिथि डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि गौसेवा भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि गौशालाओं का विकास समाज के सहयोग से ही संभव है और इस दिशा में सामाजिक संस्थाओं व उद्योगों का योगदान सराहनीय है। उन्होंने अशोका डिस्टिलर्स एंड केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किए गए इस सहयोग की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायक हैं। भारत में प्राचीन काल से ही गाय को माता के समान सम्मान दिया जाता है। गाय को केवल एक पशु नहीं, बल्कि पोषण, समृद्धि और धर्म का प्रतीक माना जाता है। हमारे शास्त्रों और धार्मिक ग्रंथों में भी गौसेवा का विशेष महत्व बताया गया है। उपायुक्त ने कहा कि गाय मनुष्य के जीवन में अनेक प्रकार से उपयोगी है। गाय का दूध स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। इससे दही, घी, मक्खन और छाछ जैसे पौष्टिक पदार्थ बनाए जाते हैं। इसके अलावा गोबर और गोमूत्र का उपयोग खेती, ईंधन और आयुर्वेदिक औषधियों में भी किया जाता है। ग्रामीण जीवन में गाय आर्थिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारतीय संस्कृति में गौसेवा को पुण्य का कार्य माना गया है। लोग गायों को भोजन कराते हैं, उनकी देखभाल करते हैं और उन्हें संरक्षण देने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार गौसेवा केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक भी है। इसलिए हमें गायों की रक्षा और सेवा करके अपनी संस्कृति और परंपरा को जीवित रखना चाहिए। उन्होंने गौशाला परिसर में पौधारोपण करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। गौशाला परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत “जय गोमाता” के उद्घोष के साथ हुई। यहां 100×40 आकार के विशाल शेड का निर्माण अशोका डिस्टिलर्स एंड केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से कराया गया है और एसपीसीए निधि से शेड 100x50 का निर्माण करवाया गया है। यह शेड गौशाला में रह रहे गोवंश को गर्मी, सर्दी और वर्षा से सुरक्षित रखने के लिए तैयार किया गया है। नए शेड के निर्माण से गौशाला की क्षमता और सुविधाओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों, गौसेवकों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। गुरूग्राम विधायक मुकेश शर्मा के प्रतिनिधि हरविन्दर शर्मा ने इस मौके पर गौशाला के लिए ढाई लाख रुपये देने की घोषणा भी की। स्थानीय ग्रामीणों और गौसेवकों ने कहा कि नए शेड के निर्माण से गौशाला में रहने वाले पशुओं को बेहतर संरक्षण और आराम मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी गौशाला में इसी तरह के सेवा कार्य जारी रहेंगे। कार्यक्रम के अंत में गौसेवा और समाजसेवा के महत्व पर बल देते हुए सभी ने मिलकर गौमाता की सेवा करने और गौशालाओं के विकास में योगदान देने का संकल्प लिया। गुरूग्राम विधायक मुकेश शर्मा के प्रतिनिधि हरविन्दर शर्मा, पूर्व विधायक प्रवीण डागर के प्रतिनिधि सतीश डागर,उपनिदेशक पशुपालन एवं डेयरी विभाग पलवल डॉ वीरेंद्र राठी, अरुण सिंगला (सी.एम.डी.), गहलब गो सेवा समिति के राजेश, सुखराम रावत, रश्मि सहरावत, योगेन्द्र सहरावत, खुशीराम, सरपंच गहलब धर्मेंद्र, डॉ लेखराज, सहजराम, उदयवीर सहित आसपास के गांवों के पंच-सरपंच मौजूद रहे।7
- पलवल जिले के गहलब गांव स्थित त्रिवेणी धाम गौशाला में गोवंश की बेहतर देखभाल के उद्देश्य से बनाए गए दो नए शेड (क्रमशः 100×40 आकार के विशाल शेड का निर्माण अशोका डिस्टिलर्स एंड केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से और एसपीसीए निधि से शेड 100x50 का निर्माण) का रविवार को उपायुक्त पलवल डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने बतौर मुख्य अतिथि विधिवत उद्घाटन किया। मुख्य अतिथि डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि गौसेवा भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि गौशालाओं का विकास समाज के सहयोग से ही संभव है और इस दिशा में सामाजिक संस्थाओं व उद्योगों का योगदान सराहनीय है। उन्होंने अशोका डिस्टिलर्स एंड केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किए गए इस सहयोग की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायक हैं। भारत में प्राचीन काल से ही गाय को माता के समान सम्मान दिया जाता है। गाय को केवल एक पशु नहीं, बल्कि पोषण, समृद्धि और धर्म का प्रतीक माना जाता है। हमारे शास्त्रों और धार्मिक ग्रंथों में भी गौसेवा का विशेष महत्व बताया गया है। उपायुक्त ने कहा कि गाय मनुष्य के जीवन में अनेक प्रकार से उपयोगी है। गाय का दूध स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। इससे दही, घी, मक्खन और छाछ जैसे पौष्टिक पदार्थ बनाए जाते हैं। इसके अलावा गोबर और गोमूत्र का उपयोग खेती, ईंधन और आयुर्वेदिक औषधियों में भी किया जाता है। ग्रामीण जीवन में गाय आर्थिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारतीय संस्कृति में गौसेवा को पुण्य का कार्य माना गया है। लोग गायों को भोजन कराते हैं, उनकी देखभाल करते हैं और उन्हें संरक्षण देने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार गौसेवा केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक भी है। इसलिए हमें गायों की रक्षा और सेवा करके अपनी संस्कृति और परंपरा को जीवित रखना चाहिए। उन्होंने गौशाला परिसर में पौधारोपण करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। गौशाला परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत “जय गोमाता” के उद्घोष के साथ हुई। यहां 100×40 आकार के विशाल शेड का निर्माण अशोका डिस्टिलर्स एंड केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से कराया गया है और एसपीसीए निधि से शेड 100x50 का निर्माण करवाया गया है। यह शेड गौशाला में रह रहे गोवंश को गर्मी, सर्दी और वर्षा से सुरक्षित रखने के लिए तैयार किया गया है। नए शेड के निर्माण से गौशाला की क्षमता और सुविधाओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों, गौसेवकों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। गुरूग्राम विधायक मुकेश शर्मा के प्रतिनिधि हरविन्दर शर्मा ने इस मौके पर गौशाला के लिए ढाई लाख रुपये देने की घोषणा भी की स्थानीय ग्रामीणों और गौसेवकों ने कहा कि नए शेड के निर्माण से गौशाला में रहने वाले पशुओं को बेहतर संरक्षण और आराम मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी गौशाला में इसी तरह के सेवा कार्य जारी रहेंगे। कार्यक्रम के अंत में गौसेवा और समाजसेवा के महत्व पर बल देते हुए सभी ने मिलकर गौमाता की सेवा करने और गौशालाओं के विकास में योगदान देने का संकल्प लिया।1
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