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जगदलपुर नगर निगम कार्यालय में आम बजट पेश करते समय हुआ जोरदार हंगामा, लगे जय श्री राम के नारे जगदलपुर नगर निगम कार्यालय में नगर निगम का आम बजट महापौर संजय पांडे ने किया पेश
SAMYAK NAHATA
जगदलपुर नगर निगम कार्यालय में आम बजट पेश करते समय हुआ जोरदार हंगामा, लगे जय श्री राम के नारे जगदलपुर नगर निगम कार्यालय में नगर निगम का आम बजट महापौर संजय पांडे ने किया पेश
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- नारायणपुर में कृषि को रसायन मुक्त और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा जैविक नियंत्रण विषय पर कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान किसानों को मित्र कीटों के माध्यम से फसल सुरक्षा की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई। नारायणपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में “आदिवासी उप परियोजना (Tribal Sub Plan)” के अंतर्गत अखिल भारतीय जैविक नियंत्रण अनुसंधान परियोजना के तहत 28 मार्च 2026 को जैविक नियंत्रण पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम केंद्र के प्रमुख डॉ. दिव्येंदु दास के कुशल मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. योगेश मेश्राम, मुख्य अन्वेषक (AICRP on Biological Control) ने किसानों को जैविक कीट नियंत्रण की अवधारणा और इसके महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मित्र कीट (Beneficial Insects) फसलों के लिए हानिकारक कीटों को नियंत्रित कर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखते हैं। डॉ. मेश्राम ने किसानों को तना छेदक जैसे हानिकारक कीटों के नियंत्रण के लिए ट्राइकोग्रामा प्रजाति के अंड परजीवी के उपयोग की जानकारी दी। इसके साथ ही इल्ली अवस्था के नियंत्रण हेतु रेडूविड बग (मित्र परभक्षी कीट) के प्रयोग की सलाह दी गई। उन्होंने बताया कि बैसिलस थुरिंजिएन्सिस (BT) का उपयोग भी फसलों में हानिकारक कीटों के प्रभावी नियंत्रण के लिए अत्यंत उपयोगी है। रस चूसने वाले कीटों के नियंत्रण के लिए मेटाराइजियम एनिसोप्ली के प्रयोग की सलाह दी गई, वहीं खेतों में पीला चिपचिपा प्रपंच (Yellow Sticky Trap) लगाने से भी कीट नियंत्रण में मदद मिलती है। गाजर घास जैसी खरपतवार के नियंत्रण के लिए मैक्सिकन बीटल जैसे मित्र जीवों के उपयोग के बारे में भी किसानों को जागरूक किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि जैविक कीट नियंत्रण न केवल फसलों को सुरक्षित रखता है, बल्कि पर्यावरण को भी प्रदूषण मुक्त बनाए रखता है। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और मानव स्वास्थ्य पर भी कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. हरेंद्र टोंडे, डॉ. ललित वर्मा, डॉ. आलिया अफरोज एवं डॉ. अंकिता सिंह ने भी किसानों को जैविक खेती और जैविक कीट नियंत्रण के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान केंद्र के अन्य कर्मचारी भी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के अंत में किसानों को जैविक कीट नियंत्रण के लिए मित्र जीवों का वितरण किया गया, ताकि वे इन तकनीकों को अपने खेतों में अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हुआ। इससे उन्हें रसायन मुक्त खेती अपनाने और जैविक तरीकों से फसल सुरक्षा करने की प्रेरणा मिली। कृषि विज्ञान केंद्र का यह प्रयास न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।1
- Post by Ashish parihar Parihar1
- छत्तीसगढ़ के बालोद शहर में गाली-गलौच, मारपीट और चाकू से जानलेवा हमला कर लूट की वारदात को अंजाम देने वाले तीन आरोपियों को बालोद पुलिस ने घटना के कुछ ही घंटों में गिरफ्तार कर लिया है। मिली जानकारी के अनुसार, 28 मार्च 2026 की रात करीब 9:30 बजे गंजपारा शराब भट्ठी मेन रोड पर आरोपियों ने जयप्रकाश साहू से शराब पीने के लिए पैसे मांगे। पैसे न देने पर आरोपियों ने गाली-गलौच करते हुए चाकू और लकड़ी के डंडे से हमला कर दिया। इस हमले में जयप्रकाश साहू गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि बीच-बचाव करने आए गजेंद्र साहू को भी चोटें आईं। घायलों को तत्काल जिला अस्पताल बालोद में भर्ती कराया गया, जहां से जयप्रकाश साहू की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें भिलाई के शंकराचार्य अस्पताल रेफर किया गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम गठित कर आरोपियों की घेराबंदी कर गिरफ्तार किया गया। • घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल (CG 07 AH 4376) • लूटा गया पोको कंपनी का मोबाइल • लोहे का धारदार चाकू आरोपियों के नाम 1. पीयूष उपाध्याय (19 वर्ष) 2. पुष्पेंद्र यादव उर्फ सोनू गट्टा (21 वर्ष) 3. सागर देवांगन (20 वर्ष) पुलिस ने आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। मामले में पुलिस टीम की तत्परता से बड़ी वारदात का जल्द खुलासा संभव हो सका।1
- नक्सल विरोधी अभियान के तहत जिला पुलिस, डीआरजी एवं आईटीबीपी फोर्स ने संयुक्त कार्रवाई में माओवादियों द्वारा छुपाए गए हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद किया है। सर्चिंग के दौरान जंगल क्षेत्र से एक AK-47 रायफल (26 राउंड) एवं एक INSAS रायफल (20 राउंड) मैगजीन सहित कुल 46 जिंदा कारतूस जब्त किए गए। यह कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में मुखबिर सूचना के आधार पर की गई। बरामद हथियारों के संबंध में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। पुलिस के अनुसार लगातार चल रहे अभियानों से जिले में नक्सली गतिविधियां लगभग समाप्त हो चुकी हैं और 31 मार्च से पहले जिले को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।1
- *रायपुर विधानसभा रोड जीरो प्वाइंट के पास एक भीषण सड़क हादसा सामने आया है, जहां डीआई (छोटा मालवाहक वाहन) और ट्रेलर के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रेलर, डीआई वाहन के ऊपर चढ़ गया*। रायपुर में भीषण सड़क हादसा: ट्रेलर ने डीआई वाहन को रौंदा, चालक फरार रायपुर। राजधानी रायपुर के विधानसभा रोड स्थित जीरो प्वाइंट के पास सोमवार को एक भीषण सड़क हादसा सामने आया। यहां डीआई (छोटा मालवाहक वाहन) और एक तेज रफ्तार ट्रेलर के बीच जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भयावह थी कि ट्रेलर, डीआई वाहन के ऊपर चढ़ गया, जिससे वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और आसपास के लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर की आवाज दूर तक सुनाई दी, जिससे लोग घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। गनीमत रही कि इस दुर्घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि, हादसे के तुरंत बाद दोनों वाहनों के चालक मौके पर ही वाहन छोड़कर फरार हो गए। घटना के चलते विधानसभा रोड पर कुछ समय के लिए यातायात बाधित हो गया और जाम की स्थिति निर्मित हो गई। सूचना मिलते ही रायपुर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करते हुए यातायात व्यवस्था को बहाल किया। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और फरार वाहन चालकों की तलाश के साथ-साथ दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।1
- Post by दैनिक मूक पत्रिका1
- नारायणपुर में कृषि को नई दिशा देने और आदिवासी किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में किसानों को सोयाबीन की उन्नत खेती और आधुनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। नारायणपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आदिवासी उपयोजना के अंतर्गत अखिल भारतीय समन्वित सोयाबीन अनुसंधान परियोजना के तहत एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. दिबेंदु दास ने की। इस अवसर पर [thoughtful] डॉ. दिबेंदु दास ने नारायणपुर अंचल से पहुंचे आदिवासी किसानों को सोयाबीन फसल के महत्व, इसके पोषण और आर्थिक लाभों के साथ-साथ उन्नत किस्मों के उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती अपनाकर उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित [clears throat] डॉ. हरेंद्र कुमार टोंडे ने किसानों को सोयाबीन की उन्नत खेती की पूरी प्रक्रिया समझाई। उन्होंने उत्तम बीज चयन, बीज उपचार की विधि, बुवाई का सही समय और तकनीक, खाद एवं उर्वरक प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण, फसल कटाई का उचित समय और बीज भंडारण के वैज्ञानिक तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही फसल चक्र अपनाने से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के उपाय भी बताए। इसी क्रम में [thoughtful] डॉ. आलिया अफरोज ने सोयाबीन फसल में लगने वाले प्रमुख कीटों की पहचान और उनके प्रभावी प्रबंधन के उपायों पर किसानों को प्रशिक्षित किया। वहीं श्री इंद्र कुमार ने फसल में होने वाले विभिन्न रोगों की पहचान और उनके नियंत्रण के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी। कार्यक्रम में डॉ. ललित वर्मा, डॉ. अंकिता सिंह सहित कृषि विज्ञान केंद्र के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के बाद किसानों को प्रक्षेत्र भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने उन्नत तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखा और समझा, जिससे उनकी जानकारी और अधिक मजबूत हुई। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आदिवासी किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हुआ। इससे न केवल किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों की जानकारी मिली, बल्कि वे भविष्य में सोयाबीन उत्पादन बढ़ाकर अपनी आय में वृद्धि करने के लिए भी प्रेरित हुए। कृषि विज्ञान केंद्र का यह प्रयास क्षेत्र में कृषि विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।1
- Post by Ashish parihar Parihar1
- नमस्कार,मैं हूं योगेश कुमार साहू और आप देख रहे हैं द छत्तीसगढ़। आज छत्तीसगढ़ की अदालत ने एक ऐसे मामले में फैसला सुनाया है जिसने कानूनी और सामाजिक बहस को फिर से तेज कर दिया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि एक बालिग और शादीशुदा महिला की मर्जी और पूरी सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध रेप की श्रेणी में नहीं आते। कोर्ट ने इस आधार पर एक युवक को 4 साल पुराने रेप केस से पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया। आइए जानते हैं इस पूरे मामले को विस्तार से। दरअसल, मामला बेमेतरा जिले का है। वर्ष 2022 में एक शादीशुदा महिला ने आरोपी युवक के खिलाफ रेप का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला बेमेतरा के एक एग्रीकल्चरल कॉलेज में मजदूरी का काम करती थी। वहीं गांव का ही एक युवक भी मजदूरी के लिए आता था। दोनों के बीच धीरे-धीरे बातचीत शुरू हुई। महिला की शिकायत के अनुसार, 19 जून 2022 को आरोपी ने उससे बात शुरू की और शादी का वादा करके उसे बहलाने की कोशिश की। महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी ने बार-बार शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया। 25 जुलाई 2022 की सुबह करीब 4 बजे, जब महिला शौच के लिए जा रही थी, तब आरोपी उससे मिला। उसने फिर शादी का भरोसा दिलाया और महिला को अपने घर ले जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। उस समय महिला 3 महीने की गर्भवती थी। महिला ने बताया कि सामाजिक बदनामी के डर से उसने इस घटना की जानकारी किसी को नहीं बताई। बाद में जब पति ने पूछताछ की तो उसने सारी बात बता दी और फिर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामले की जांच की और आरोपी के खिलाफ चालान पेश किया। ट्रायल कोर्ट ने गवाहों के बयानों, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूतों का गहन अध्ययन किया। कोर्ट को यह साबित नहीं हो सका कि संबंध बिना सहमति के या जबरदस्ती बने थे। नतीजतन, ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। इस फैसले के खिलाफ पीड़िता महिला ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई। हाईकोर्ट में विस्तृत सुनवाई हुई। कोर्ट ने गवाहों के बयानों, महिला के अपने कोर्ट बयान और उपलब्ध मेडिकल एवं अन्य सबूतों को ध्यान से देखा। हाईकोर्ट ने पाया कि: • गवाहों के बयानों से यह साबित नहीं होता कि आरोपी ने जान से मारने या चोट पहुंचाने की कोई धमकी देकर सहमति हासिल की थी। • ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे साबित हो कि महिला को यह भ्रम था कि वह कानूनी रूप से आरोपी की पत्नी है। • महिला के बयान से साफ जाहिर होता है कि संबंध सहमति से बने थे। • महिला पहले से शादीशुदा थी और उस समय गर्भवती भी थी। • यह भी साबित नहीं हुआ कि महिला नशे में थी, उसकी मानसिक स्थिति खराब थी या वह सहमति देने की स्थिति में नहीं थी। हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में सख्त शब्दों में कहा: “एक बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी मर्जी और सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध रेप का जुर्म नहीं बनते।” कोर्ट ने महिला की याचिका को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के दोषमुक्त करने वाले फैसले को बरकरार रखा। आरोपी युवक को इस मामले से पूरी राहत मिल गई। दोस्तों, यह फैसला कानूनी रूप से सहमति की अहमियत को रेखांकित करता है। भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के तहत रेप की परिभाषा में सहमति का अभाव एक महत्वपूर्ण तत्व है। जब कोई महिला बालिग हो, समझदार हो और अपनी स्वतंत्र मर्जी से संबंध बनाती है, तो अदालतें इसे रेप नहीं मानतीं। हालांकि, झूठे वादे या धोखे से सहमति हासिल करने के मामलों में अलग व्याख्या हो सकती है, लेकिन इस केस में सबूत सहमति की ओर इशारा करते थे। यह मामला हमें याद दिलाता है कि कानून सबूतों और तथ्यों पर आधारित होता है, न कि सिर्फ आरोपों पर। साथ ही, समाज में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के साथ-साथ निर्दोष व्यक्तियों को भी न्याय मिलना चाहिए। योगेश कुमार साहू के साथ द छत्तीसगढ़ का यह विशेष रिपोर्ट आपको कैसा लगा? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं। क्या आपको लगता है कि सहमति वाले मामलों में अदालतों को और सख्त होना चाहिए या सबूतों को प्राथमिकता देनी चाहिए? कानून की सच्चाई हमेशा सबूतों में छुपी होती है, और न्याय तभी सार्थक होता है जब वह निष्पक्ष और तथ्यपरक हो। सतर्क रहें, जागरूक रहें।धन्यवाद, जय छत्तीसगढ़! द छत्तीसगढ़ – सच्चाई की आवाज।1