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गोरखपुर में ब्लैक आउट मॉक ड्रिल | 23 जनवरी को सायरन के साथ एक्सरसाइज | Civil Defence News
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गोरखपुर में ब्लैक आउट मॉक ड्रिल | 23 जनवरी को सायरन के साथ एक्सरसाइज | Civil Defence News
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- एक हफ्ते में ही टूट गई सड़क और नाली, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल खड्डा (कुशीनगर)। कुशीनगर जनपद के खड्डा तहसील अंतर्गत सिविल लाइन क्षेत्र में हाल ही में बनाई गई सड़क और नाली निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। निर्माण कार्य पूरा होने के महज एक सप्ताह के भीतर ही नाली टूटती हुई दिखाई देने लगी है, जिससे स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त है। बताया जा रहा है कि यह सड़क और नाली का निर्माण वार्ड के सभासद, नगर अध्यक्ष एवं विधायक के प्रयासों से कराया गया था। लेकिन निर्माण के कुछ ही दिनों बाद नाली का इस तरह क्षतिग्रस्त होना कार्य में लापरवाही की ओर इशारा करता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य में मानकों का पालन किया गया होता तो इतनी जल्दी नाली टूटने की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। अब सवाल यह उठ रहा है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है—ठेकेदार या निर्माण कार्य की निगरानी करने वाली संबंधित एजेंसी? फिलहाल लोगों की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि क्या संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नाली का पुनर्निर्माण कराएंगे या नहीं, और यदि कराएंगे तो कितने दिनों में कार्य पूरा होगा। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं। सागर पाठक की रिपोर्ट1
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- लेखपाल की मृत्यु के बाद परिवार रजिस्टर बना विवाद की जड़, युवती के वैवाहिक दर्जे पर सवाल अम्बेडकरनगर। विकास खंड रामनगर की ग्राम सभा शेखपुर मलपुरा में परिवार रजिस्टर में दर्ज प्रविष्टियों को लेकर उठा विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। स्वर्गीय सत्यनारायण, जो राजस्व विभाग में लेखपाल पद पर कार्यरत रह चुके थे, की मृत्यु के बाद उनकी पुत्री अर्चना के वैवाहिक दर्जे को लेकर गांव और प्रशासन के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अर्चना का आरोप है कि पिता की मृत्यु के बाद गांव की एक महिला ने स्वयं को सत्यनारायण की पत्नी बताते हुए परिवार रजिस्टर में अपना नाम दर्ज करा लिया, जबकि इसका कोई वैधानिक आधार नहीं है। इसी कथित गलत प्रविष्टि के बाद सत्यनारायण की चल-अचल संपत्ति को लेकर विवाद लगातार गहराता चला गया। वैवाहिक स्थिति बनी विवाद की धुरी अर्चना के वैवाहिक होने या न होने को लेकर गांव में दो स्पष्ट धड़े बन चुके हैं। एक पक्ष में ग्राम सभा के वर्तमान प्रधान, पूर्व प्रधान और अर्चना के मामा सहित 13 लोग शामिल हैं, जो अर्चना को विवाहित बता रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, गांव में आयोजित खुली बैठक में 26 ग्रामीणों ने अर्चना को अविवाहित बताते हुए समर्थन दिया, जिससे पूरे मामले में विरोधाभास सामने आया है। तीन वर्षों से नहीं सुलझ सका मामला अर्चना का कहना है कि वह पिछले तीन वर्षों से अपना नाम परिवार रजिस्टर में दर्ज कराने के लिए ग्राम पंचायत से लेकर विकास खंड कार्यालय तक के चक्कर काट रही है। हर बार जांच और विचार का आश्वासन तो मिला, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया। अर्चना का तर्क है कि यदि उसे विवाहित बताया जा रहा है तो संबंधित पक्ष को विवाह से जुड़े प्रमाण—जैसे विवाह पंजीकरण, पति का विवरण या अन्य वैधानिक दस्तावेज—प्रस्तुत करने चाहिए। उसका दावा है कि आज तक ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आ सका है। नियमों की अनदेखी का आरोप पंचायत और राजस्व नियमों के अनुसार परिवार रजिस्टर में किसी भी नाम को जोड़ने या संशोधित करने से पहले दस्तावेजी साक्ष्य और विधिवत सत्यापन आवश्यक होता है। ऐसे में बिना स्पष्ट प्रमाण के प्रविष्टि किए जाने के आरोप प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। संपत्ति विवाद से जुड़ा मामला जानकारों के अनुसार, सत्यनारायण के पास सरकारी सेवा के साथ-साथ पर्याप्त चल और अचल संपत्ति थी। परिवार रजिस्टर में प्रविष्टियों के आधार पर ही संपत्ति के उत्तराधिकार का निर्धारण होता है, इसलिए यह विवाद अब कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर गंभीर हो गया है। निष्पक्ष जांच की मांग गांव के लोगों और अर्चना ने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होगी, तब तक न केवल परिवार रजिस्टर बल्कि संपत्ति संबंधी विवाद भी सुलझ नहीं पाएगा। फिलहाल यह मामला ग्राम सभा की सीमाओं से निकलकर प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता और महिला के अधिकारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब तक नियमों के अनुसार कार्रवाई कर इस विवाद पर विराम लगाते हैं।1