मथुरा जिले के कोसी कलां थाना क्षेत्र के ऐंच गांव में अवैध चकरोड (रास्ते) से कब्जा हटवाने को लेकर उपजे विवाद में एक पीड़ित पर बदले की भावना से हरे शीशम के दो पेड़ काटने का झूठा आरोप लगाया गया है। यह मामला तब सामने आया जब लेखा, सुरेश पुत्र भजनी, महेन्द्र सिंह डालचंद, और भूदेव पुत्र नारायण ने छाता तहसील में प्रार्थना पत्र देकर शिकायत की कि गांव के अर्जुन पुत्र सेरसिंह, राम, लछमन पुत्र मुरारी, और कमल पुत्र हरी ने चकरोड पर अवैध कब्जा कर रखा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस शिकायत के बाद दिनांक 23/6/26 को तहसीलदार सचिन पवार की देखरेख में अवैध कब्जा हटवाने के लिए एक टीम गठित की गई थी। हालांकि, दिनांक 26/6/26 को अर्जुन, राम, लखन और कमल आदि ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि उनके खेत में खड़े दो शीशम के पेड़ लेखा, सुरेश, महेन्द्र और डालचंद आदि ने काट दिए हैं। यह मामला वन विभाग और स्थानीय पुलिस तक पहुँच गया है। वन विभाग के रेंजर विनोद परमार ने आश्वासन दिया है कि मामले की जांच-पड़ताल की जा रही है और दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाएगी। शाहपुर चौकी प्रभारी श्री विनीत नेहरा जी ने भी कहा है कि जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीण इलाकों में इस तरह के भूमि विवादों में अक्सर एक-दूसरे को फंसाने के लिए ऐसे हथकंडे अपनाए जाते हैं। मामले का मुख्य घटनाक्रम इस प्रकार है: पहले पीड़ित व्यक्ति ने सरकारी या सार्वजनिक चकरोड पर किए गए अवैध अतिक्रमण को हटवाया, फिर कब्जा हटने से नाराज दूसरे पक्ष ने पीड़ित को कानूनन फंसाने की साजिश रची, और अंततः विपक्षियों ने पीड़ित पर वन संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन कर हरे शीशम के पेड़ काटने का झूठा आरोप मढ़ दिया। इस स्थिति में, यदि किसी निर्दोष व्यक्ति पर ऐसा झूठा आरोप लगता है, तो राजस्व विभाग से जांच की मांग की जा सकती है, जिसमें उपजिलाधिकारी (एसडीएम) या तहसीलदार को आवेदन देकर मौके की पैमाइश कराई जाए। इससे यह साबित हो सकता है कि चकरोड से कब्जा कानूनी तौर पर हटा था और पेड़ किसने काटे या वे वहां थे भी या नहीं। पीड़ितों ने इस पूरे षड्यंत्र की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, क्योंकि उन्हें अवैध चकरोड से कब्जा हटवाने के बदले में ही हरे शीशम के दो पेड़ काटने के झूठे आरोप में फंसाया गया है।
मथुरा जिले के कोसी कलां थाना क्षेत्र के ऐंच गांव में अवैध चकरोड (रास्ते) से कब्जा हटवाने को लेकर उपजे विवाद में एक पीड़ित पर बदले की भावना से हरे शीशम के दो पेड़ काटने का झूठा आरोप लगाया गया है। यह मामला तब सामने आया जब लेखा, सुरेश पुत्र भजनी, महेन्द्र सिंह डालचंद, और भूदेव पुत्र नारायण ने छाता तहसील में प्रार्थना पत्र देकर शिकायत की कि गांव के अर्जुन पुत्र सेरसिंह, राम, लछमन पुत्र मुरारी, और कमल पुत्र हरी ने चकरोड पर अवैध कब्जा कर रखा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस शिकायत के बाद दिनांक
23/6/26 को तहसीलदार सचिन पवार की देखरेख में अवैध कब्जा हटवाने के लिए एक टीम गठित की गई थी। हालांकि, दिनांक 26/6/26 को अर्जुन, राम, लखन और कमल आदि ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि उनके खेत में खड़े दो शीशम के पेड़ लेखा, सुरेश, महेन्द्र और डालचंद आदि ने काट दिए हैं। यह मामला वन विभाग और स्थानीय पुलिस तक पहुँच गया है। वन विभाग के रेंजर विनोद परमार ने आश्वासन दिया है कि मामले की जांच-पड़ताल की जा रही है और दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाएगी। शाहपुर चौकी प्रभारी श्री
विनीत नेहरा जी ने भी कहा है कि जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीण इलाकों में इस तरह के भूमि विवादों में अक्सर एक-दूसरे को फंसाने के लिए ऐसे हथकंडे अपनाए जाते हैं। मामले का मुख्य घटनाक्रम इस प्रकार है: पहले पीड़ित व्यक्ति ने सरकारी या सार्वजनिक चकरोड पर किए गए अवैध अतिक्रमण को हटवाया, फिर कब्जा हटने से नाराज दूसरे पक्ष ने पीड़ित को कानूनन फंसाने की साजिश रची, और अंततः विपक्षियों ने पीड़ित पर वन संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन कर हरे शीशम के पेड़ काटने का झूठा आरोप मढ़ दिया। इस स्थिति में, यदि
किसी निर्दोष व्यक्ति पर ऐसा झूठा आरोप लगता है, तो राजस्व विभाग से जांच की मांग की जा सकती है, जिसमें उपजिलाधिकारी (एसडीएम) या तहसीलदार को आवेदन देकर मौके की पैमाइश कराई जाए। इससे यह साबित हो सकता है कि चकरोड से कब्जा कानूनी तौर पर हटा था और पेड़ किसने काटे या वे वहां थे भी या नहीं। पीड़ितों ने इस पूरे षड्यंत्र की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, क्योंकि उन्हें अवैध चकरोड से कब्जा हटवाने के बदले में ही हरे शीशम के दो पेड़ काटने के झूठे आरोप में फंसाया गया है।
- बरसाना धाम में एक 13 वर्षीय आराध्य नामक बच्चे ने श्री राधा रानी के प्रति अपनी अनूठी भक्ति का प्रदर्शन कर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया है। आगरा निवासी कमलेश गुप्ता और सीमा गुप्ता के जुड़वाँ पुत्र आराध्य, 7 किलोमीटर लंबे बरसाना धाम के पक्के परिक्रमा मार्ग पर हाथों के बल परिक्रमा कर रहे हैं। उनके इस असाधारण प्रदर्शन को देखकर भक्त और श्रद्धालु अपनी दाँतों तले उंगलियाँ दबा रहे हैं और उनकी अद्वितीय भक्ति की सराहना कर रहे हैं। आराध्य ने बताया कि वे बचपन से ही धार्मिक स्वभाव के रहे हैं और अपनी यह अनूठी परिक्रमा अपनी स्वर्गीय दादी को समर्पित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वे 8 वर्ष की उम्र से इस कार्य का अभ्यास कर रहे हैं और उनकी माताजी हमेशा उनका हौसला बढ़ाती रही हैं। इस आश्चर्यजनक कारनामे के लिए आराध्य ने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन भी किया है। हालाँकि, रिकॉर्ड बुक में नाम दर्ज होगा या नहीं, यह भविष्य के गर्भ में है, लेकिन फिलहाल 13 वर्षीय आराध्य की राधा रानी के प्रति यह भक्ति और चकित करने वाला अनूठा प्रदर्शन चारों ओर चर्चा का विषय बना हुआ है।3
- उत्तर प्रदेश के बरसाना धाम में आगरा निवासी 13 वर्षीय आराध्य, भगवान राधा रानी के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा का एक अद्भुत और अनोखा उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। कमलेश गुप्ता और सीमा गुप्ता के पुत्र आराध्य हाथों के बल लगभग 7 किलोमीटर लंबी बरसाना की पक्की परिक्रमा कर रहे हैं। उनके इस कठिन और दृढ़ संकल्प को देखकर श्रद्धालु न केवल आश्चर्यचकित हैं, बल्कि उनकी भक्ति की सराहना भी कर रहे हैं। आराध्य ने बताया कि वह बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति के हैं और अपनी यह विशेष परिक्रमा अपनी स्वर्गीय दादी को समर्पित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वे 8 वर्ष की आयु से ही इस कठिन अभ्यास की तैयारी कर रहे थे। उनकी माता सीमा गुप्ता ने इस दौरान हर कदम पर उनका उत्साहवर्धन किया है। अपनी इस अनूठी उपलब्धि को दर्ज कराने के लिए आराध्य ने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में आवेदन भी किया है। हालांकि, उनका नाम इन रिकॉर्ड्स में दर्ज होगा या नहीं, यह भविष्य की बात है, लेकिन फिलहाल उनकी इस अद्भुत भक्ति और असाधारण दृढ़ संकल्प की चर्चा पूरे बरसाना धाम और सभी श्रद्धालुओं के बीच हो रही है, जिससे सभी भाव-विभोर हैं।1
- भारतीय किसान यूनियन सुनील के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर किराम में एक भव्य कार्य किया।1
- मथुरा कल्याण करोति परिसर के निकट रामलीला मैदान के पास पिपलेश्वर बालाजी महाराज और ठा.श्री राम दरबार की भव्य प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। विद्वान आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण और विधि-विधान से मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई। इस समारोह से पूर्व निकाली गई शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। मथुरा और आसपास के क्षेत्रों से आए भक्तों ने बालाजी महाराज और श्री राम दरबार के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। पूरे रामलीला मैदान का क्षेत्र भजन-कीर्तन और धार्मिक जयकारों से गुंजायमान रहा। प्राण प्रतिष्ठा के पश्चात बालाजी महाराज और ठा.श्री राम दरबार के दर्शन के लिए मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए हैं। स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं के लिए यह एक पावन अवसर है।4
- बाबा बवंडर के कड़े तेवरों के चलते नशा कारोबारी खौफजदा हो गए हैं। इस बीच, स्वयं बाबा धरने पर बैठे हुए हैं, जिसकी वजह से क्षेत्र में नशा का धंधा करने वालों में हड़कंप मच गया है।1
- गुरुवार की सुबह मांट के वंशीवट क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया, जब भारी पुलिस बल और बुलडोजर ('पीला पंजा') के साथ प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और रास्तों तथा सार्वजनिक भूमि पर वर्षों से बने अतिक्रमणों पर कार्रवाई शुरू कर दी। उप जिलाधिकारी मांट, दीपिका मेहर, के नेतृत्व में चले इस अभियान के तहत प्रशासन ने कुल 48 अवैध दुकानों और 21 कुटियों को ध्वस्त करते हुए 69 अतिक्रमण हटाए। कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल देखा गया, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी लगातार व्यवस्था संभालने में जुटे रहे। इस अभियान में नायब तहसीलदार आँचल सिंगला, नायब तहसीलदार जितेंद्र, बीडीओ अभिमन्यु सेठ, थाना प्रभारी जसवीर सिंह, और चौकी प्रभारी आकाश चौहान सहित राजस्व और पुलिस विभाग की कई टीमें मौजूद रहीं। एसडीएम मांट, दीपिका मेहर, ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि सार्वजनिक भूमि और रास्तों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि आम जनता के आवागमन में बाधा बनने वाले किसी भी अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन की इस व्यापक कार्रवाई के बाद वंशीवट क्षेत्र में रास्ते पूरी तरह से खुल गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों ने बड़ी राहत महसूस की और अभियान की सराहना की।1
- मथुरा जनपद के छाता क्षेत्र स्थित ग्राम दौताना में मोहर्रम के पावन अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने रक्तदान किया। इस रक्तदान शिविर में मुख्य रूप से युवा वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिससे यह पर्व सेवा भाव से मनाया गया।1
- शुक्रवार शाम करीब छह बजे मथुरा शहर में हजरत इमाम हुसैन की याद में एक भव्य ताजिया जुलूस निकाला गया। यह जुलूस बैंड-बाजों की धुन और पारंपरिक अखाड़ों के कलाकारों द्वारा दिखाए गए करतबों के साथ शहर के विभिन्न मार्गों से होता हुआ वृंदावन गेट स्थित कर्बला पहुँचा। यहाँ धार्मिक परंपराओं के अनुसार ताजिया को सुपुर्द-ए-खाक किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। विभिन्न स्थानों पर लोगों ने जुलूस का स्वागत किया और शर्बत व पेयजल की व्यवस्था की, जबकि अखाड़ों के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक युद्धक कलाओं का प्रदर्शन कर सबका ध्यान आकर्षित किया। जुलूस में शामिल श्रद्धालुओं ने पूरे मार्ग पर शांति और अनुशासन बनाए रखा। इस्लामी इतिहास के अनुसार, मोहर्रम इस्लामी वर्ष का पहला महीना है, और इसकी 10वीं तारीख, जिसे आशूरा कहा जाता है, वर्ष 680 ईस्वी में कर्बला की जंग में पैगंबर हजरत मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत की याद दिलाती है। हजरत इमाम हुसैन ने सत्य, न्याय, इंसानियत और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। इस आयोजन से जुड़े सूफी अहमद खान और आवेद वतन खान ने बताया कि मोहर्रम केवल मातम का पर्व नहीं, बल्कि मानवता, भाईचारे, सब्र, त्याग और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और इंसानियत की रक्षा की प्रेरणा देती रहेगी। जुलूस को सकुशल संपन्न कराने के लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, जिसके तहत पूरे मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहा और अधिकारियों ने लगातार निगरानी रखी। शांतिपूर्ण माहौल में ताजिया जुलूस संपन्न होने पर प्रशासन ने सभी समुदायों के लोगों के सहयोग और सौहार्द की सराहना की।4
- बरसाना धाम में इन दिनों एक ऐसा अनूठा नजारा देखने को मिल रहा है, जिसने सभी का ध्यान खींचा है। आगरा के कमलेश गुप्ता और सीमा गुप्ता के 13 वर्षीय जुड़वा पुत्र आराध्य, राधा रानी के प्रति अपनी गहन आस्था और अद्वितीय भक्ति का प्रदर्शन कर रहे हैं। आराध्य 7 किलोमीटर लंबे बरसाना धाम के पक्के परिक्रमा मार्ग पर हाथों के बल राधा रानी की परिक्रमा लगा रहे हैं, जिसे देखकर तमाम भक्त और श्रद्धालु आश्चर्यचकित हैं और बच्चे की अनूठी भक्ति की सराहना कर रहे हैं। नन्हे आराध्य ने बताया कि वे बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति के रहे हैं और अपनी यह विशेष परिक्रमा अपनी स्वर्गीय दादी को समर्पित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी साझा किया कि वे 8 वर्ष की उम्र से ही इस परिक्रमा का अभ्यास कर रहे हैं और उनकी माताजी ने इस कार्य में हमेशा उनका हौसला बढ़ाया है। आराध्य ने अपने इस आश्चर्यजनक कारनामे के लिए इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी अपना नाम दर्ज कराने हेतु प्रार्थना पत्र दिया है। भविष्य में उनका नाम रिकॉर्ड बुक में दर्ज हो पाएगा या नहीं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल 13 वर्षीय आराध्य की राधा रानी के प्रति इस अनूठी भक्ति और चकित करने वाले प्रदर्शन की चारों ओर खूब चर्चा हो रही है।1