महेवा ब्लॉक और पूरे जिले की ग्राम पंचायतों में विकास का पहिया पिछले लगभग एक महीने से ठप पड़ा है, जिससे आम जनता छोटे-छोटे कार्यों के पूरा होने का इंतजार कर रही है। यह स्थिति गत 26 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद बनी है, जिससे ब्लॉक महेवा की 91 ग्राम पंचायतें समेत जिले की सभी पंचायतें प्रभावित हैं। शासन के आदेशानुसार, गत 27 मई को जिलाधिकारियों द्वारा निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही ग्राम प्रशासक नियुक्त किया गया था। हालांकि, अधिकार के नाम पर उनके सभी अधिकार जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) के अधीन कर दिए गए। अब ग्रामों में कोई भी कार्य कराने के लिए पत्रावली को सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) के माध्यम से DPRO को भेजना होगा, और जिलाधिकारी की सहमति मिलने के बाद ही कार्य हो पाएगा। इन जटिल बाधाओं और कार्य की अनुमति के चक्कर में अभी तक किसी भी पंचायत से एक भी पत्रावली नहीं भेजी गई है, जिसके चलते कोई भी विकास कार्य शुरू नहीं हो सका है। सड़क और खड़ंजा के कार्यों के अलावा, कई अति आवश्यक कार्य भी ठप पड़े हैं। बरसात के मौसम में नाले-नालियों की साफ-सफाई, उनकी मरम्मत, हैंडपंप की मरम्मत, हैंडपंप रीबोर और केयरटेकर व पंचायत सहायक के मानदेय जैसे कार्य भी भुगतान फंस जाने के डर से बाधित हैं। इसके अतिरिक्त, अगले वित्त वर्ष (2026-27) की कार्य योजना अभी तक विभाग की वेबसाइट पर फीड नहीं हुई है, जबकि ऑनलाइन स्थिति में गत वित्त वर्ष (2025-26) की कार्य योजना ही प्रदर्शित हो रही है। इस असमंजस के कारण प्रधान/प्रशासक परेशान हैं, वहीं कई ग्राम पंचायतों में पिछला भुगतान भी अभी तक लंबित है। कुछ सचिव और प्रधान आगामी 10 जुलाई को उच्च न्यायालय के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। इस संबंध में, प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष विजय प्रताप सिंह सेंगर ने दूरभाष पर बताया कि कार्य में आ रही इन सभी समस्याओं के बारे में वे शीघ्र ही जिलाधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी से मिलकर पूर्व जैसी व्यवस्था लागू करने की मांग करेंगे। वहीं, ब्लॉक अध्यक्ष प्रधान संघ धर्मेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि ग्राम प्रशासकों के लिए लगाई गई शर्तों से विकास कार्य बाधित हो रहे हैं और वे इस समस्या के समाधान हेतु उच्चाधिकारियों से संपर्क करेंगे। दूसरी ओर, जिला पंचायत राज अधिकारी रोहित कुमार ने दूरभाष पर आश्वस्त किया कि ग्राम प्रशासक व सचिव द्वारा जिस कार्य हेतु पत्रावली भेजी जाएगी, उसे जांच के उपरांत उचित पाए जाने पर तत्काल मंजूरी दी जाएगी।
महेवा ब्लॉक और पूरे जिले की ग्राम पंचायतों में विकास का पहिया पिछले लगभग एक महीने से ठप पड़ा है, जिससे आम जनता छोटे-छोटे कार्यों के पूरा होने का इंतजार कर रही है। यह स्थिति गत 26 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद बनी है, जिससे ब्लॉक महेवा की 91 ग्राम पंचायतें समेत जिले की सभी पंचायतें प्रभावित हैं। शासन के आदेशानुसार, गत 27 मई को जिलाधिकारियों द्वारा निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही ग्राम प्रशासक नियुक्त किया गया था। हालांकि, अधिकार के नाम पर उनके सभी अधिकार जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) के अधीन कर दिए गए। अब ग्रामों में कोई भी कार्य कराने के लिए पत्रावली को सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) के माध्यम से DPRO को भेजना होगा, और जिलाधिकारी की सहमति मिलने के बाद ही कार्य हो पाएगा। इन जटिल बाधाओं और कार्य की अनुमति के चक्कर में अभी तक किसी भी पंचायत से एक भी पत्रावली नहीं भेजी गई है, जिसके चलते कोई भी विकास कार्य शुरू नहीं हो सका है। सड़क और खड़ंजा के कार्यों के अलावा, कई अति आवश्यक कार्य भी ठप पड़े हैं। बरसात के मौसम में नाले-नालियों की साफ-सफाई, उनकी मरम्मत, हैंडपंप की मरम्मत, हैंडपंप रीबोर और केयरटेकर व पंचायत सहायक के मानदेय जैसे कार्य भी भुगतान फंस जाने के डर से बाधित हैं। इसके अतिरिक्त, अगले वित्त वर्ष (2026-27) की कार्य योजना अभी तक विभाग की वेबसाइट पर फीड नहीं हुई है, जबकि ऑनलाइन स्थिति में गत वित्त वर्ष (2025-26) की कार्य योजना ही प्रदर्शित हो रही है। इस असमंजस के कारण प्रधान/प्रशासक परेशान हैं, वहीं कई ग्राम पंचायतों में पिछला भुगतान भी अभी तक लंबित है। कुछ सचिव और प्रधान आगामी 10 जुलाई को उच्च न्यायालय के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। इस संबंध में, प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष विजय प्रताप सिंह सेंगर ने दूरभाष पर बताया कि कार्य में आ रही इन सभी समस्याओं के बारे में वे शीघ्र ही जिलाधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी से मिलकर पूर्व जैसी व्यवस्था लागू करने की मांग करेंगे। वहीं, ब्लॉक अध्यक्ष प्रधान संघ धर्मेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि ग्राम प्रशासकों के लिए लगाई गई शर्तों से विकास कार्य बाधित हो रहे हैं और वे इस समस्या के समाधान हेतु उच्चाधिकारियों से संपर्क करेंगे। दूसरी ओर, जिला पंचायत राज अधिकारी रोहित कुमार ने दूरभाष पर आश्वस्त किया कि ग्राम प्रशासक व सचिव द्वारा जिस कार्य हेतु पत्रावली भेजी जाएगी, उसे जांच के उपरांत उचित पाए जाने पर तत्काल मंजूरी दी जाएगी।
- Post by Reena mathur etawah1
- इटावा से समाजवादी पार्टी के सांसद जितेंद्र दोहरे और विधायक राघवेंद्र गौतम ने ओमप्रकाश राजभर पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि राजभर बौखलाए हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा में 'मलाई खाने' से पहले जब ओमप्रकाश राजभर समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे थे, तब वे योगी जी और मोदी जी के खिलाफ क्या बयान देते थे। सपा नेताओं के अनुसार, ओमप्रकाश राजभर के बयानों को कोई गंभीरता से नहीं लेता है। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने आगे दावा किया कि अगले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी पूर्ण बहुमत से सरकार बना रही है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि समाजवादी पार्टी प्रभु श्री राम की विरोधी नहीं है, बल्कि उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी इटावा में भगवान शंकर का भव्य मंदिर बनवा रहे हैं। सपा के लोग प्रभु श्री राम में दिल से आस्था रखते हैं और इसी के साथ उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह प्रभु श्री राम के मंदिर में मिले दान की चोरी करती है।1
- पुलिस अधीक्षक औरैया ने आगामी मोहर्रम त्यौहार को शांतिपूर्ण और सकुशल तरीके से संपन्न कराने के उद्देश्य से एक बाईट जारी की है।1
- इटावा के पचदेवरा रोड स्थित मानिकपुर विशु गांव क्षेत्र में मिट्टी से भरे डंपरों के लगातार आवागमन से ग्रामीण और किसान गंभीर रूप से परेशान हैं। ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि इन डंपरों की वजह से बंबा की पटरी और चकरोड़ लगातार खराब हो रही है, जिसके चलते उन्हें आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और उनके खेती से जुड़े कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने इस मामले में प्रशासन से तत्काल जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है। किसानों ने यह भी कहा है कि यदि उनकी इस समस्या का समाधान जल्द नहीं किया गया, तो वे जिलाधिकारी इटावा से सीधे शिकायत करेंगे।3
- इटावा के पूर्व सांसद और एससी-एसटी आयोग के पूर्व चेयरमैन डॉ. राम शंकर कठेरिया ने जिलाधिकारी शुभ्रांत शुक्ल से मुलाकात कर किसानों की समस्याओं पर चर्चा की। इस दौरान, उन्होंने जिलाधिकारी इटावा को चंबल नदी में बाढ़ आने से पहले ही समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए। इस बैठक में जिलाध्यक्ष अन्नू गुप्ता और पूर्व जिलाध्यक्ष गोपाल मोहन शर्मा भी उपस्थित रहे।1
- लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक कोचिंग सेंटर में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लगने से 15 होनहार बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना में एक दर्जन से अधिक बच्चे गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं, जिन्हें स्थानीय लोगों की मदद से K.G.M.U मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। बताया गया है कि यह कोचिंग सेंटर एक भीड़भाड़ वाले इलाके में चल रही लाइब्रेरी की दूसरी मंजिल पर अवैध रूप से संचालित हो रहा था और इसके पास फायर एनओसी नहीं थी। घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ घायलों को देखने अस्पताल पहुंचे। उन्होंने प्रत्येक मृतक बच्चे के परिवार को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। इस दुखद घटना ने जनपद में चल रहे सैकड़ों अन्य अवैध कोचिंग सेंटरों की ओर ध्यान खींचा है, जिनके पास फायर एनओसी नहीं है। शहर के मु. चौगुर्जी और फ्रेंड्स कॉलोनी सहित कई मुहल्लों में शिक्षा माफियाओं द्वारा एक ही हॉल के कमरों में पचास से सौ से अधिक बच्चों को कई-कई शिफ्टों में कोचिंग के नाम पर पढ़ाया जा रहा है। पत्रकार रजत यादव ने मांग की है कि ऐसे सभी अवैध कोचिंग सेंटरों के खिलाफ तत्काल जांच कर कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए।4