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इटावा के पचदेवरा रोड स्थित मानिकपुर विशु गांव क्षेत्र में मिट्टी से भरे डंपरों के लगातार आवागमन से ग्रामीण और किसान गंभीर रूप से परेशान हैं। ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि इन डंपरों की वजह से बंबा की पटरी और चकरोड़ लगातार खराब हो रही है, जिसके चलते उन्हें आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और उनके खेती से जुड़े कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने इस मामले में प्रशासन से तत्काल जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है। किसानों ने यह भी कहा है कि यदि उनकी इस समस्या का समाधान जल्द नहीं किया गया, तो वे जिलाधिकारी इटावा से सीधे शिकायत करेंगे।
Anshu Sharma
इटावा के पचदेवरा रोड स्थित मानिकपुर विशु गांव क्षेत्र में मिट्टी से भरे डंपरों के लगातार आवागमन से ग्रामीण और किसान गंभीर रूप से परेशान हैं। ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि इन डंपरों की वजह से बंबा की पटरी और चकरोड़ लगातार खराब हो रही है, जिसके चलते उन्हें आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और उनके खेती से जुड़े कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने इस मामले में प्रशासन से तत्काल जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है। किसानों ने यह भी कहा है कि यदि उनकी इस समस्या का समाधान जल्द नहीं किया गया, तो वे जिलाधिकारी इटावा से सीधे शिकायत करेंगे।
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- इटावा के पचदेवरा रोड स्थित मानिकपुर विशु गांव क्षेत्र में मिट्टी से भरे डंपरों के लगातार आवागमन से ग्रामीण और किसान गंभीर रूप से परेशान हैं। ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि इन डंपरों की वजह से बंबा की पटरी और चकरोड़ लगातार खराब हो रही है, जिसके चलते उन्हें आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और उनके खेती से जुड़े कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने इस मामले में प्रशासन से तत्काल जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है। किसानों ने यह भी कहा है कि यदि उनकी इस समस्या का समाधान जल्द नहीं किया गया, तो वे जिलाधिकारी इटावा से सीधे शिकायत करेंगे।3
- लोगों द्वारा अपने कष्टों के निवारण हेतु 'जय बजरंगबली' और 'जय बालाजी सरकार' का उद्घोष किया गया है।1
- उत्तर प्रदेश के इटावा में एक महिला अपने तीन बच्चों के साथ घर से लापता हो गई है। उस पर अपने साथ ₹8 लाख के जेवरात ले जाने का आरोप है। इस पूरे मामले में महिला की माँ पर भी मिलीभगत का शक जताया जा रहा है।2
- जनपद इटावा में रविवार को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG) 2026 का आयोजन निर्धारित केंद्रों पर शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्रशासन ने अभ्यर्थियों की सुरक्षा और परीक्षा की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की थीं। इन व्यवस्थाओं के तहत, परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, साथ ही सीसीटीवी निगरानी और आवश्यक दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया गया, जिसके बीच परीक्षार्थियों ने अपनी परीक्षा दी। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की पहचान और प्रवेश प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल ने लगातार निरीक्षण करके सभी व्यवस्थाओं का जायजा लिया, जिससे यह सुनिश्चित हो सका कि परीक्षा निष्पक्ष और व्यवस्थित वातावरण में संपन्न हो। परीक्षा समाप्त होने के बाद अभ्यर्थियों के चेहरों पर संतोष एवं उत्साह दिखाई दिया। इस सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, शिक्षा विभाग और सभी परीक्षा केंद्रों के अधिकारियों-कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।1
- महाराष्ट्र के परभणी जिले के यशवाड़ी क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन हनुमान मंदिर की छत अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे वहां मौजूद कई श्रद्धालु मलबे में दब गए। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और लोगों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और राहत-बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थानीय लोगों की मदद से मलबे में दबे श्रद्धालुओं को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। इस हादसे का एक सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है, जिसमें मंदिर की छत गिरने के बाद मची अफरा-तफरी और लोगों को बचाने के प्रयासों को साफ देखा जा सकता है, यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने घटना में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है, साथ ही घायलों के बेहतर इलाज के लिए प्रशासन को आवश्यक निर्देश भी दिए हैं। प्रशासन ने मंदिर की छत गिरने के कारणों की जांच के आदेश दे दिए हैं और राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है, अधिकारियों की टीम स्थिति पर नजर बनाए हुए है।1
- उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में थाना सिविल लाइन पुलिस ने डीजीपी के स्पष्ट आदेशों का उल्लंघन करते हुए एक 68 वर्षीय वरिष्ठ पत्रकार और एक महिला पत्रकार सहित पांच लोगों के खिलाफ बिना किसी जांच या साक्ष्य के मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस घटना से पूरे प्रदेश में इटावा पुलिस की किरकिरी हुई है और निष्पक्ष एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव की तैनाती के बावजूद थाना सिविल लाइन पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। डीजीपी उत्तर प्रदेश का साफ आदेश है कि पत्रकारों और उनके परिजनों पर जांच के बाद ही मुकदमा दर्ज किया जाए। यह मामला तब सामने आया जब इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन के दो दर्जन से अधिक पदाधिकारी जिलाधिकारी इटावा को विपक्षी आशीष बाजपेई और अन्य के खिलाफ शिकायत करके लौट रहे थे। एसोसिएशन फर्जी पत्रकार इटावा लाइव के तथाकथित संपादक आशीष बाजपेई और एक ब्लैकमेलर महिला गैंग के खिलाफ जांच की मांग को लेकर ज्ञापन देने वाले थे। आशीष बाजपेई को इसकी भनक लगने पर उसने एक दिन पहले व्हाट्सएप पर मैसेज करके सैफई के पूर्व पत्रकार सुघर सिंह को धमकाया। ज्ञापन देने के बाद लौट रही महिला पत्रकारों को आशीष बाजपेई ने 'रंडी' और 'वेश्या' कहकर अपमानित किया और जान से मारने की धमकी दी, जिसके जवाब में महिला पत्रकार और उनके पति ने आशीष बाजपेई को थप्पड़ मार दिए। इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुघर सिंह जाटव के अनुसार, एसोसिएशन के जिला संरक्षक मेघ सिंह वर्मा के नेतृत्व में दो दर्जन पत्रकार एक ब्लैकमेलर महिला और इटावा लाइव के तथाकथित पत्रकार आशीष बाजपेई की शिकायत करने एसएसपी और जिलाधिकारी इटावा के पास पहुंचे थे। ज्ञापन सौंपने के बाद जब पत्रकार कोल्ड ड्रिंक पी रहे थे, तभी आशीष बाजपेई, जो खुद को इटावा लाइव का संपादक बताता है जबकि वह विकास भवन में पिछड़ा वर्ग विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर है और ड्यूटी पर नहीं जाता, ने महिला पत्रकारों को देखकर अपमानजनक टिप्पणी की। इस पर महिला पत्रकारों ने उसे थप्पड़ मारने शुरू कर दिए। मौके पर मौजूद पुलिस ने भी कोई कार्रवाई नहीं की, क्योंकि एक महिला को सरेआम अपमानित किया जा रहा था। आशीष बाजपेयी जान से मारने की धमकी देते हुए वहां से भाग गया। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें दो पत्रकार और एक महिला आशीष बाजपेई को थप्पड़ मारते हुए दिख रहे हैं। वीडियो में मेघ सिंह वर्मा कहीं भी मारपीट करते हुए नहीं दिख रहे हैं, इसके बावजूद पुलिस ने 68 वर्षीय मेघ सिंह वर्मा और पीड़ित महिला पत्रकार को भी अभियुक्त बना दिया। थाना सिविल लाइन पुलिस ने डीजीपी के स्पष्ट आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए बिना जांच के, पत्रकार की उम्र देखे बिना, 68 साल के वृद्ध पत्रकार को भी अभियुक्त बना दिया। पीड़ित महिला पत्रकार ने आरोप लगाया है कि थाना सिविल लाइन के प्रभारी निरीक्षक के.के. मिश्र ने जातिवाद निभाते हुए मुकदमा दर्ज किया है। महिला पत्रकार ने यह भी बताया कि जब वह थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने गईं, तो कांस्टेबल पुष्कर शुक्ला ने उनके साथ अभद्रता की और गंदी-गंदी गालियां दीं। इस मामले में वृद्ध पत्रकार और महिला पत्रकार ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राज्य महिला आयोग का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।1
- इटावा जिले के जसवंतनगर थाना क्षेत्र के नगला इच्छा गाँव में पुरानी रंजिश के चलते एक युवक पर कुल्हाड़ी से हमला किया गया, जिसमें उसे बचाने आए परिवार के अन्य सदस्य भी घायल हो गए। यह घटना 20 जून 2026 की शाम करीब 8:30 बजे हुई, जब महेश चन्द्र पुत्र रामस्वरूप, रामऔतार पुत्र रामस्वरूप, विष्णु पुत्र रामऔतार और राज पुत्र रक्षपाल नामक चार लोग लाठी-डंडों, कुल्हाड़ी और तमंचे के साथ वीरू पुत्र सरनाम सिंह के घर पर धावा बोल दिया। पीड़ित वीरू की तहरीर के अनुसार, आरोपियों ने घर पहुँचते ही गाली-गलौज शुरू कर दी। जब वीरू ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो महेश चन्द्र और राज ने कहा कि वह 'ज्यादा नेता बनता है'। इसके तुरंत बाद, रामऔतार ने वीरू के सिर पर कुल्हाड़ी से वार कर दिया। वीरू की चीख-पुकार सुनकर उसके पिता, भाई और माँ उसे बचाने के लिए दौड़े। इसी दौरान, राज ने अपने तमंचे की बट से वीरू के पिता के सिर पर हमला किया, जबकि राज और विष्णु ने लाठी-डंडों से माँ और पिता की भी बेरहमी से पिटाई की, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। गाँव के लोगों द्वारा ललकारे जाने पर सभी आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए। इस मामले में पीड़ित वीरू की शिकायत पर जसवंतनगर पुलिस ने चारों नामजद आरोपियों महेश चन्द्र, रामऔतार, विष्णु और राज के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। थानाध्यक्ष कमल भाटी ने बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए जाँच शुरू कर दी गई है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।1
- भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जोरदार मांग उठाई गई है। इस मांग का प्राथमिक उद्देश्य सत्य को सामने लाना और यह सुनिश्चित करना है कि न्याय की स्थापना हो सके। बिहार के आरा से जुड़े इस संवेदनशील मामले में, मानवाधिकार और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिसकी गूंज #JusticeForBharatTiwari और #न्याय_की_मांग जैसे हैशटैग के माध्यम से लगातार देखी जा रही है।1