भवनविहीन प्राथमिक विद्यालय बगही: खुले आसमान के नीचे 66 बच्चों का भविष्य, बुनियादी सुविधाओं के अभाव में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल पश्चिम चंपारण जिले के बैरिया प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय बगही नया टोला आज शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करता एक ऐसा आईना बन चुका है, जो सरकारी दावों और धरातल की सच्चाई के बीच की गहरी खाई को साफ दिखाता है। यह वही विद्यालय है जहां 66 नौनिहालों के कंधों पर कल का भारत टिका है, लेकिन वे आज भी खुले आसमान के नीचे, प्लास्टिक के बोरे बिछाकर पढ़ने को मजबूर हैं। कक्षा एक से पांचवीं तक संचालित इस विद्यालय में चार महिला शिक्षिकाएं और एक पुरुष शिक्षक अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा के साथ निभा रहे हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी ने पूरी शिक्षा व्यवस्था को असहज और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। न तो यहां पक्के भवन हैं, न स्थायी कक्षाएं, न डेस्क-बेंच और न ही ब्लैकबोर्ड की समुचित व्यवस्था। बच्चे हर दिन स्कूल पहुंचकर पहले खुद बैठने की जगह साफ करते हैं, फिर जमीन पर प्लास्टिक बिछाकर पढ़ाई शुरू करते हैं। गर्मी की चिलचिलाती धूप हो या सर्दियों की कंपकंपा देने वाली ठंड, इन बच्चों की पढ़ाई किसी भी मौसम में नहीं रुकती, लेकिन हालात बेहद कठिन हो जाते हैं। बारिश के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब झोपड़ीनुमा ढांचा टपकने लगता है और पूरा विद्यालय परिसर पानी से भर जाता है। ऐसे में पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो जाती है। बच्चों ने बताया कि बारिश के दौरान सांप, बिच्छू और मेंढकों के निकल आने से डर का माहौल बन जाता है। सबसे गंभीर बात यह है कि विद्यालय में शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। चार महिला शिक्षिकाओं और छात्राओं को मजबूरी में आसपास के घरों या खेतों का सहारा लेना पड़ता है, जो किसी भी सभ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। शिक्षकों के अनुसार इस समस्या की जानकारी कई बार शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। स्थानीय प्रशासन की ओर से बैरिया बीडीओ द्वारा विद्यालय को पंचायत के सामुदायिक भवन में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया गया है, लेकिन वहां भी शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे समस्या जस की तस बनी हुई है। इधर शिक्षा विभाग की ओर से डीपीओ गार्गी कुमारी ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है और यह देखा जा रहा है कि विद्यालय के पास भूमि उपलब्ध है या नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार की स्पष्ट गाइडलाइन है कि बच्चों को खुले में नहीं पढ़ाया जा सकता, ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था कर नजदीकी विद्यालय से टैग कर बच्चों की पढ़ाई सुनिश्चित की जाएगी। इस बीच विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की आंखों में एक ही उम्मीद झलकती है—एक पक्की छत, सुरक्षित कक्षा और सामान्य सुविधाओं वाला स्कूल, जहां वे बिना डर और बाधा के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। प्राथमिक विद्यालय बगही नया टोला की यह तस्वीर न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करती है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि जब डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास और आधुनिक विद्यालयों की बातें हो रही हैं, तब ऐसे 66 बच्चे आज भी जमीन पर बैठकर अपने भविष्य की बुनियाद क्यों रख रहे हैं। यह केवल एक विद्यालय की कहानी नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की उस सच्चाई का प्रतिनिधित्व है, जो अब तत्काल सुधार की मांग कर रही है।
भवनविहीन प्राथमिक विद्यालय बगही: खुले आसमान के नीचे 66 बच्चों का भविष्य, बुनियादी सुविधाओं के अभाव में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल पश्चिम चंपारण जिले के बैरिया प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय बगही नया टोला आज शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करता एक ऐसा आईना बन चुका है, जो सरकारी दावों और धरातल की सच्चाई के बीच की गहरी खाई को साफ दिखाता है। यह वही विद्यालय है जहां 66 नौनिहालों के कंधों पर कल का भारत टिका है, लेकिन वे आज भी खुले आसमान के नीचे, प्लास्टिक के बोरे बिछाकर पढ़ने को मजबूर हैं। कक्षा एक से पांचवीं तक संचालित इस विद्यालय में चार महिला शिक्षिकाएं और एक पुरुष शिक्षक अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा के साथ निभा रहे हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी ने पूरी शिक्षा व्यवस्था को असहज और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। न तो यहां पक्के भवन हैं, न स्थायी कक्षाएं, न डेस्क-बेंच और न ही ब्लैकबोर्ड की समुचित व्यवस्था। बच्चे हर दिन स्कूल पहुंचकर पहले खुद बैठने की जगह साफ करते हैं, फिर जमीन पर प्लास्टिक बिछाकर पढ़ाई शुरू करते हैं। गर्मी की चिलचिलाती धूप हो या सर्दियों की कंपकंपा देने वाली ठंड, इन बच्चों की पढ़ाई किसी भी मौसम में नहीं रुकती, लेकिन हालात बेहद कठिन हो जाते हैं। बारिश के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब झोपड़ीनुमा ढांचा टपकने लगता है और पूरा विद्यालय परिसर पानी से भर जाता है। ऐसे में पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो जाती है। बच्चों ने बताया कि बारिश के दौरान सांप, बिच्छू और मेंढकों के निकल आने से डर का माहौल बन जाता है। सबसे गंभीर बात यह है कि विद्यालय में शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। चार महिला शिक्षिकाओं और छात्राओं को मजबूरी में आसपास के घरों या खेतों का सहारा लेना पड़ता है, जो किसी भी सभ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। शिक्षकों के अनुसार इस समस्या की जानकारी कई बार शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। स्थानीय प्रशासन की ओर से बैरिया बीडीओ द्वारा विद्यालय को पंचायत के सामुदायिक भवन में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया गया है, लेकिन वहां भी शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे समस्या जस की तस बनी हुई है। इधर शिक्षा विभाग की ओर से डीपीओ गार्गी कुमारी ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है और यह देखा जा रहा है कि विद्यालय के पास भूमि उपलब्ध है या नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार की स्पष्ट गाइडलाइन है कि बच्चों को खुले में नहीं पढ़ाया जा सकता, ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था कर नजदीकी विद्यालय से टैग कर बच्चों की पढ़ाई सुनिश्चित की जाएगी। इस बीच विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की आंखों में एक ही उम्मीद झलकती है—एक पक्की छत, सुरक्षित कक्षा और सामान्य सुविधाओं वाला स्कूल, जहां वे बिना डर और बाधा के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। प्राथमिक विद्यालय बगही नया टोला की यह तस्वीर न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करती है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि जब डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास और आधुनिक विद्यालयों की बातें हो रही हैं, तब ऐसे 66 बच्चे आज भी जमीन पर बैठकर अपने भविष्य की बुनियाद क्यों रख रहे हैं। यह केवल एक विद्यालय की कहानी नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की उस सच्चाई का प्रतिनिधित्व है, जो अब तत्काल सुधार की मांग कर रही है।
- मेधावी छात्र-छात्राओं को हर जगह मिलता है सम्मान: मुखिया सुभाशनी देवी धूम नगर पंचायत में प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन नौतन। धूम नगर पंचायत में रविवार को हर वर्ष की तरह इस बार भी प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें मैट्रिक व इंटर परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान मुखिया सुभाशनी देवी ने कहा कि मेधावी छात्र-छात्राओं को हर जगह मान-सम्मान मिलता है। इससे न केवल विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ता है, बल्कि शिक्षकों और अभिभावकों का भी मनोबल ऊंचा होता है। समारोह का संचालन आदित्य कुमार ने किया। मुखिया प्रतिनिधि भोला साह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजें और राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे योग्य शिक्षकों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करें। कार्यक्रम में उच्च माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रश्मि रमा कुमारी एवं मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक अनिल कुमार ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने मुखिया द्वारा आयोजित इस पहल की सराहना करते हुए छात्रों को निरंतर परिश्रम कर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर साजना कुमारी, पवन कुमार, रितु सिंह, श्वेता कुमारी, निशा कुमारी, अमरदीप कुमार, सुफिया प्रवीण, निखिल कुमार, रिशा कुमारी सहित कई प्रतिभावान छात्रों को मेडल, कलम, कॉपी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। समारोह में वार्ड सदस्य मुख लाल राम, मनोज कुमार, अमर पटेल, विधा साह, कृष्णा प्रसाद, बिरवल प्रसाद, दिनेश कुमार, सालिक राम सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।1
- Post by Vishal Kumar1
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- पश्चिम चंपारण जिले के नरकटियागंज में श्री हनुमान मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व रविवार को आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब 1001 कुंवारी कन्याओं ने सिर पर कलश लेकर भव्य जलयात्रा निकाली। यह दिव्य यात्रा मठिया चौक स्थित नवनिर्मित मंदिर परिसर से प्रारंभ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीण और आयोजन समिति के सदस्य शामिल हुए। पूरे मार्ग में वातावरण “जय श्रीराम” और “जय बजरंगबली” के जयघोष से गूंज उठा, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। यह कलश यात्रा जयमंगलापुर और हरदिया चौक होते हुए पवित्र हरबोड़ा नदी तट तक पहुंची, जहां वैदिक विधि-विधान के साथ कलशों में जल भराई की गई। इसके बाद श्रद्धा और भक्ति से परिपूर्ण यह यात्रा पुनः मंदिर परिसर लौटी, जहां पहले से ही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महायज्ञ की शुरुआत की गई थी। कलश यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक था। मार्ग में जगह-जगह लोगों ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया और कन्याओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। पूरा वातावरण धार्मिक ऊर्जा और आस्था से ओतप्रोत नजर आया। मंदिर परिसर पहुंचने के बाद यज्ञाचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ विधिवत महायज्ञ का शुभारंभ किया गया, जिसमें क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की गई। इस अवसर पर पंचायत के मुखिया अजित दुबे उर्फ बाला दुबे ने बताया कि यह भव्य कलश यात्रा श्री हनुमान मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में निकाली गई है, जिसका उद्देश्य पूरे क्षेत्र में शांति, समृद्धि और सौहार्द का संदेश देना है। उन्होंने कहा कि इस धार्मिक आयोजन में पूरे पंचायत के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया है, जो समाज में एकता और आस्था का प्रतीक है। महायज्ञ में प्रमोद मिश्र को यजमान के रूप में शामिल किया गया है। वहीं आयोजन समिति के सदस्य विवेक मिश्र, विचण्डी राउत, बलिराम दुबे, गोपाल शर्मा, अनिल मिश्र और मनोज मिश्र ने बताया कि यह भव्य धार्मिक अनुष्ठान लगातार पांच दिनों तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना, वैदिक हवन और भव्य लंगर का आयोजन किया जाएगा। साथ ही प्रतिदिन श्रीराम कथा का आयोजन भी होगा, जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्वान आचार्य अपने प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और जीवन मूल्यों का संदेश देंगे। मंदिर परिसर के आसपास इस अवसर पर एक आकर्षक मेले का भी आयोजन किया गया है, जहां दूर-दराज से आए श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। धार्मिक आस्था, संस्कृति और परंपरा का यह अद्भुत संगम नरकटियागंज क्षेत्र को पूरी तरह से भक्तिमय वातावरण में बदल रहा है।1
- Post by A9Bharat News1
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