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Vishal Kumar
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- User6811Kalyanpur, Purbi Champaran🙏1 day ago
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More news from बिहार and nearby areas
- भारत आज भी एक कृषि-प्रधान देश है। देश की बड़ी आबादी अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है। लेकिन यह भी एक कड़वा सच है कि जिस कृषि व्यवस्था पर देश की अर्थव्यवस्था टिकी है, उसी से जुड़ा किसान आज सबसे अधिक संकट में है। बढ़ती लागत, अनिश्चित मौसम, बाजार की अस्थिरता और फसलों के उचित मूल्य का अभाव—ये सभी कारक किसानों को हर मोर्चे पर संघर्ष करने को मजबूर कर रहे हैं। पारंपरिक खेती अब उनके लिए सम्मानजनक आय का माध्यम नहीं रह गई है, बल्कि कई बार घाटे का सौदा साबित हो रही है। ऐसे विषम हालात में प्रश्न उठता है कि आखिर किसानों के लिए रास्ता क्या है? क्या वे इसी चक्र में फंसे रहें या खेती के तौर-तरीकों में बदलाव कर नई संभावनाओं की ओर कदम बढ़ाएँ? इसका उत्तर अब खेतों से ही निकलकर सामने आ रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर, पश्चिम चम्पारण के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया कि बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न जैसी फसलें इस बदलाव की मजबूत बुनियाद बनती जा रही हैं। बेतिया जिले के विशुनपुर रघुनाथ क्षेत्र के युवा किसान रवि कुमार इस बदलाव की मिसाल बनकर उभरे हैं। उन्होंने पारंपरिक फसलों के दायरे से बाहर निकलकर बेबी कॉर्न की खेती को अपनाया और कम समय में बेहतर मुनाफा अर्जित किया। यह फसल मात्र 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसान एक वर्ष में कई चक्रों में उत्पादन लेकर अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं। बेबी कॉर्न की सबसे बड़ी विशेषता इसकी दोहरी उपयोगिता है: एक ओर इसका भुट्टा बाजार में अच्छी कीमत पर बिकता है, वहीं दूसरी ओर इसका हरा पौधा पशुओं के लिए उच्च गुणवत्ता का चारा बनता है। किसान संजय कुमार बताते हैं कि इसके चारे के उपयोग से मवेशियों की दूध देने की क्षमता बढ़ती है, जिससे अतिरिक्त आय का एक और स्रोत तैयार हो जाता है। अर्थात् एक ही फसल से किसान को दोहरा लाभ मिल रहा है—फसल और पशुपालन, दोनों। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव दिखने लगा है। ग्राम बैकुंठवा, प्रखंड नौतन के किसान राघोशरण प्रसाद मानते हैं कि बेबी कॉर्न की खेती ने किसानों की आर्थिक तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। अब किसान कम समय में नकदी फसल लेकर बाजार से सीधे जुड़ पा रहे हैं, जिससे बिचौलियों पर उनकी निर्भरता कम हो रही है। दूसरी ओर, स्वीट कॉर्न भी किसानों के लिए एक उभरता हुआ विकल्प है। बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों के कारण इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। शहरों में उबले और भुने हुए स्वीट कॉर्न की लोकप्रियता ने इसे एक स्थायी बाजार प्रदान किया है। यह फसल 65 से 75 दिनों में तैयार हो जाती है और इसकी बिक्री भी अपेक्षाकृत आसान होती है। सरकार भी इस परिवर्तन को प्रोत्साहित करने में सक्रिय भूमिका निभा रही है। स्वीट कॉर्न की खेती के लिए बीज पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है, ताकि किसान इसे अपनाने के लिए प्रेरित हों। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न की खेती वर्तमान समय में किसानों के लिए एक व्यावहारिक और लाभकारी विकल्प बनकर उभरी है। कम समय में तैयार होने वाली इन फसलों की बाजार में अच्छी मांग है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल रहा है। विभाग की ओर से किसानों को बीज, तकनीक और प्रशिक्षण के माध्यम से हर संभव सहयोग दिया जा रहा है, ताकि वे पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर व्यावसायिक खेती को अपना सकें। स्पष्ट है कि आज खेती केवल परिश्रम का नहीं, बल्कि दूरदर्शिता और रणनीति का भी विषय बन चुकी है। जो किसान बाजार की मांग और समय की आवश्यकता को समझ रहा है, वही आगे बढ़ रहा है। बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न इस बदलाव के प्रतीक हैं, जहाँ कम लागत, कम समय और अधिक मुनाफा:तीनों एक साथ संभव हो रहे हैं। डॉ. सिंह ने बताया कि अब आवश्यकता इस बात की है कि किसान अपनी सोच को सीमित दायरे से बाहर निकालें और नई फसलों को अपनाने का साहस दिखाएँ, क्योंकि आने वाला समय उसी का है जो खेती को सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक संगठित और लाभकारी व्यवसाय के रूप में देखेगा। इस अवसर पर माधोपुर पैक्स अध्यक्ष श्री शत्रुघ्न सिंह, रवि कुमार, सौरभ कुमार सहित अन्य किसान उपस्थित थे।1
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- सोमवार को हुई नगर पंचायत की सामान्य बैठक रही हंगामेदार। नल-जल,सड़क-नाली,बिजली,सफाई, और घटिया किस्म के करोड़ों की खरीददारी पर हुआ जम कर शोरगुल। पार्षदों ने वार्डों में बराबर विकास नही करने,खरीददारी में मनमानी करने का आरोप लगाया।जिस पर प्रत्येक वार्डों में एक-एक योजनाओं की ही मंजूरी के लिए भेजी गई। पार्षदों ने कार्यपालक पदाधिकारी पर मुख्य पार्षद के पक्ष में काम करने और पार्षदों की अनदेखी का आरोप लगाया।1
- बेतिया के मच्छर गावा चौक से एक बड़ा आरोप सामने आ रहा है, जहां लोगों ने एक्साइज विभाग के अधिकारियों पर जब्त शराब को ही बेचने का गंभीर आरोप लगाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग द्वारा दिखाई जाने वाली कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता है, जबकि जब्त शराब को बाद में बाजार में बेचा जा रहा है। इसको लेकर इलाके में नाराजगी बढ़ती जा रही है। हालांकि इस पूरे मामले में अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो यह एक बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।1
- योगापट्टी प्रखंड के बलुआ भवानीपुर पंचायत के कौवलापुर गांव में सरकारी योजनाओं की हकीकत एक दिव्यांग की बेबसी में साफ नजर आ रही है। यहां के निवासी धर्मेंद्र राम, जो शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं, पिछले एक महीने से शौचालय निर्माण की प्रोत्साहन राशि पाने के लिए प्रखंड कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें उनका हक नहीं मिल सका है। धर्मेंद्र राम ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण के लिए कर्ज लेकर किसी तरह अपना काम पूरा किया। उन्हें उम्मीद थी कि सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता राशि समय पर मिल जाएगी, जिससे वे अपना कर्ज चुका सकेंगे। लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी जब उनके खाते में पैसा नहीं पहुंचा, तो उनकी परेशानियां और बढ़ गईं। अपनी समस्या को लेकर धर्मेंद्र कई बार प्रखंड कार्यालय पहुंचे, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला, समाधान नहीं। उनका आरोप है कि अधिकारियों द्वारा स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही और उन्हें बार-बार टाल दिया जाता है। उन्होंने स्वच्छता प्रवेक्षक टुना शर्मा पर भी लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि हर बार यही कहा जाता है कि पैसा भेज दिया गया है, जबकि उनके बैंक खाते में अब तक कोई राशि नहीं आई है। दूसरी ओर, स्वच्छता प्रवेक्षक टुना शर्मा ने दावा किया है कि राशि लाभुक के खाते में ट्रांसफर कर दी गई है और देरी की वजह बैंकिंग प्रक्रिया या तकनीकी समस्या हो सकती है। उन्होंने धर्मेंद्र को बैंक जाकर अपने खाते की पूरी जानकारी जांचने की सलाह दी है। यह मामला न सिर्फ एक व्यक्ति की परेशानी को उजागर करता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि आखिर सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर जरूरतमंदों तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है। एक दिव्यांग व्यक्ति को अपने हक के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाना पड़ रहा है, जो व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग इस मामले में त्वरित जांच कर सच्चाई सामने लाए और जल्द से जल्द धर्मेंद्र राम को उनकी प्रोत्साहन राशि दिलाई जाए, ताकि उन्हें इस आर्थिक और मानसिक संकट से राहत मिल सके।1
- भारत सरकार की महत्वकांक्षी योजना ज्ञान भारतम में सहयोग करने वाले बेतिया के विशिष्ट नागरिकों को जिला पदाधिकारी माननीय श्री तरण जोत सिंह ने सम्मानित किया। 20.04.2026.1
- गांव में एक्साइज विभाग की टीम पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि जब्त की गई शराब को नष्ट नहीं किया जाता। आरोप के मुताबिक वही शराब दोबारा बाजार में भेज दी जाती है। इसको लेकर ग्रामीणों में लंबे समय से आक्रोश था। छापेमारी के दौरान ही स्थिति अचानक बिगड़ गई। ग्रामीणों ने विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाए। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।1
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