ई-पंजीकरण व्यवस्था का पुरजोर विरोध करते हुए अधिवक्ताओं, स्टांप विक्रेताओं और दस्तावेज लेखकों ने एकजुट होकर राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा है। उन्होंने इस व्यवस्था को 'काला कानून' बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। यह विरोध प्रदर्शन तहसील परिसर में हुआ, जहाँ अधिवक्ताओं ने नई रजिस्ट्री व्यवस्था में बदलाव के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ई-पंजीकरण प्रणाली उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा कर रही है और इससे हजारों लोगों के रोजगार पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि विधिक ज्ञान के अभाव के कारण नई व्यवस्था में त्रुटियां बढ़ेंगी, जिससे लोगों को परेशानी होगी। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ई-पंजीकरण आदेश को निरस्त नहीं किया गया, तो वे एक व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
ई-पंजीकरण व्यवस्था का पुरजोर विरोध करते हुए अधिवक्ताओं, स्टांप विक्रेताओं और दस्तावेज लेखकों ने एकजुट होकर राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा है। उन्होंने इस व्यवस्था को 'काला कानून' बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। यह विरोध प्रदर्शन तहसील परिसर में हुआ, जहाँ अधिवक्ताओं ने नई रजिस्ट्री व्यवस्था में बदलाव के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ई-पंजीकरण प्रणाली उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा कर रही है और इससे हजारों लोगों के रोजगार पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि विधिक ज्ञान के अभाव के कारण नई व्यवस्था में त्रुटियां बढ़ेंगी, जिससे लोगों को परेशानी होगी। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ई-पंजीकरण आदेश को निरस्त नहीं किया गया, तो वे एक व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
- ई-पंजीकरण व्यवस्था का पुरजोर विरोध करते हुए अधिवक्ताओं, स्टांप विक्रेताओं और दस्तावेज लेखकों ने एकजुट होकर राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा है। उन्होंने इस व्यवस्था को 'काला कानून' बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। यह विरोध प्रदर्शन तहसील परिसर में हुआ, जहाँ अधिवक्ताओं ने नई रजिस्ट्री व्यवस्था में बदलाव के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ई-पंजीकरण प्रणाली उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा कर रही है और इससे हजारों लोगों के रोजगार पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि विधिक ज्ञान के अभाव के कारण नई व्यवस्था में त्रुटियां बढ़ेंगी, जिससे लोगों को परेशानी होगी। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ई-पंजीकरण आदेश को निरस्त नहीं किया गया, तो वे एक व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।1
- शाहजहांपुर के विकास खंड मदनापुर की ग्राम पंचायत गुमटा के पंचायत भवन में कई अनियमितताएं और अव्यवस्थाएं सामने आई हैं। इन समस्याओं के कारण ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी सेवाओं का लाभ लेने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, पंचायत भवन के कंप्यूटर कक्ष में कंप्यूटर उपलब्ध नहीं है, जिससे आवश्यक कार्य बाधित हो रहे हैं। पेयजल व्यवस्था भी पूरी तरह बदहाल है; पानी की टंकी जमीन पर रखी हुई है और परिसर में लगा हैंडपंप लंबे समय से खराब पड़ा है, जिससे लोगों को पीने के पानी के लिए भी जूझना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज बनवाने के लिए उन्हें मदनापुर या अन्य जगहों के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिससे उनका समय और धन दोनों बर्बाद होता है। पंचायत सहायक सुनील कुमार ने मीडिया को बताया कि पंचायत भवन में मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण ग्रामीणों को सही ढंग से सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इन समस्याओं के समाधान की मांग की है, ताकि पंचायत भवन को सुचारु रूप से संचालित किया जा सके और ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर ही सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सके। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से पंचायत भवन की व्यवस्थाओं में सुधार करने और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है, जिससे उन्हें राहत मिल सके।2
- शनिवार सुबह फर्रुखाबाद के राजेपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में उस समय हड़कंप मच गया, जब डिप्टी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपक कटारिया सुबह ठीक 7:55 बजे औचक निरीक्षण पर पहुँच गए। बिना पूर्व सूचना के हुए इस निरीक्षण ने अस्पताल की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी, जिससे कर्मचारियों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। डॉ. कटारिया ने अस्पताल पहुँचते ही महिला वार्ड, पुरुष वार्ड, इमरजेंसी वार्ड, लेबर रूम और पूरे अस्पताल परिसर की साफ-सफाई व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने स्वच्छता को और अधिक मजबूत बनाने के निर्देश दिए, यह रेखांकित करते हुए कि मरीजों को साफ, सुरक्षित और बेहतर वातावरण देना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। निरीक्षण के दौरान कुछ स्वास्थ्य कर्मचारी ड्यूटी से नदारद मिले, जिस पर डॉ. कटारिया ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले दो से तीन कर्मचारियों के वेतन पर रोक लगाने के निर्देश दिए और स्पष्ट चेतावनी दी कि समय पर उपस्थिति और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देना हर कर्मचारी की जिम्मेदारी है। इसके अतिरिक्त, डिप्टी सीएमओ ने संस्थागत प्रसव कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने प्रसव से जुड़े भुगतान मामलों को प्राथमिकता पर निस्तारित करने और उसके बाद आशा कार्यकर्ताओं के लंबित भुगतान पूरे करने के निर्देश दिए। आयुष्मान भारत योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने पात्र लाभार्थियों के अधिक से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जाने पर जोर दिया, स्वास्थ्य कर्मियों को अभियान तेज करने के निर्देश दिए ताकि जरूरतमंद परिवारों तक मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुँच सके। उन्होंने अस्पताल में भर्ती प्रसूता महिलाओं से भी बातचीत की और उन्हें उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली, चिकित्सा स्टाफ को प्रसूताओं की देखभाल, स्वच्छता और सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कमी न होने देने के निर्देश दिए। इस दौरान राजेपुर सीएचसी प्रभारी डॉ. परमीत राजपूत भी मौजूद रहे। औचक निरीक्षण के बाद पूरे दिन अस्पताल परिसर में कर्मचारियों के बीच चर्चा और सतर्कता का माहौल बना रहा।4
- बदायूँ के मालवीय आवास गृह पर राष्ट्रीय दिव्यांग पार्टी की मासिक बैठक जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक के बाद सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री को दिव्यांगजनों के अधिकारों को लेकर एक सात-सूत्रीय मांग पत्र भेजा गया। मांग पत्र में यह मुद्दा उठाया गया है कि उत्तर प्रदेश में दिव्यांगजनों को अपने अधिकारों के लिए लगातार भटकना पड़ रहा है, उन्हें आए दिन परेशान किया जा रहा है, और फर्जी मुकदमों में फँसाया जा रहा है। दिव्यांगजनों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है, और अक्सर अधिकारी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं रहते, जिससे वे न्याय के लिए मजबूरन भटक रहे हैं। बैठक में सदस्यों ने दिव्यांगजनों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। विनोद सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए दिव्यांगजनों को अत्यधिक मशक्कत करनी पड़ती है, फिर भी दलाल उनसे ठगी करने से बाज नहीं आते, और शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। रामवाबू गुत्ता ने विकास भवन में दलालों की सक्रियता पर चिंता जताई, जो खुलेआम दिव्यांगजनों से ठगी करते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सशक्तीकरण विभाग में अधिकारी अपनी मौज ले रहे हैं, और कई बार शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। तेजपाल साहू ने रोडवेज बस चालकों की मनमानी का मुद्दा उठाया, जो दिव्यांगजनों को देखते ही बस दौड़ा देते हैं, जिसके कारण दिव्यांगजनों को मजबूरन निजी वाहनों में यात्रा करनी पड़ती है। इस मौके पर विनोद सिंह, रामबाबू गुत्ता, पपपू, भीमसेन, तेजपाल, ललित कुमार, सुंदर लाल, सुरेश, विनय कुमार, राम रहीम, अरविंद सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।1
- अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर, जिलाधिकारी अरविन्द सिंह ने एटा के जनपदवासियों से योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाने का आग्रह किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि योग न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक विकास में भी सहायक है। जिलाधिकारी ने रेखांकित किया कि भारत की इस प्राचीन परंपरा को आज वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया गया है और इसकी महत्ता को पूरी दुनिया ने अपनाया है। अरविन्द सिंह ने स्पष्ट किया कि योग केवल योग दिवस तक सीमित रहने वाली गतिविधि नहीं है, बल्कि इसे जीवन का एक अनिवार्य अंग बनाकर प्रतिदिन अभ्यास किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, नियमित योग अभ्यास से शरीर स्वस्थ और सशक्त बनता है, तनाव तथा चिंता में कमी आती है, एकाग्रता में वृद्धि होती है, और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है। उन्होंने यह भी बताया कि योग जीवनशैली से जुड़ी अनेक समस्याओं को दूर करने में सहायक है और व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। वर्तमान की व्यस्त दिनचर्या में, योग स्वस्थ रहने का एक सरल और प्रभावी माध्यम है, जो शरीर को निरोग रखने के साथ-साथ मन को भी शांत और संतुलित बनाए रखता है। जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से आगामी 21 जून को आयोजित होने वाले योग दिवस कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। इस योग दिवस का मुख्य कार्यक्रम पंडित गोविंद बल्लभ पंत स्टेडियम, एटा में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने सभी नागरिकों से इस कार्यक्रम में शामिल होकर स्वस्थ जीवनशैली के लिए योग को अपनाने का आह्वान किया।1
- उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के थाना मेरापुर अंतर्गत ग्राम ढर्रा शादी नगर में पूर्व प्रधान के भाई की हत्या हुए करीब आठ दिन बीत चुके हैं। इस गंभीर मामले में मेरापुर पुलिस पर अब तक कोई कार्रवाई न करने और उल्टे अभियुक्तों को शरण देने का गंभीर आरोप लगा है। जानकारी के अनुसार, अभियुक्त गण संजीव उर्फ सिंटू, शिव प्रकाश, पिंटू, कालू उर्फ राजीव और रामबरन — जो सभी विश्वेश्वर दयाल के पुत्र हैं — ने एक राय होकर इस हत्या को अंजाम दिया है। आरोप है कि पुलिस ने अपराधियों से सांठगांठ कर इस घटना को अंजाम देने में मदद की है और अब उन्हें बचाने का प्रयास कर रही है। पीड़ित महिला ममता देवी न्याय के लिए दर-दर की ठोकर खा रही हैं, लेकिन उन्हें किसी भी प्रकार का न्याय नहीं मिल रहा है। इस तरह की कानून व्यवस्था से जनता का भरोसा पूरी तरह उठ गया है। गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि योगी सरकार में ब्राह्मणों की हत्याएँ एक आम बात बन गई हैं, जिससे प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।1