आत्मा का प्रकाश अनमोल है, ध्यान से ही मिलता है सच्चा धन: स्वामी व्यासानंद जी महाराज । किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड अंतर्गत चिल्हनियां पंचायत स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय, कुंवारी मैदान में आयोजित दो दिवसीय संतमत सत्संग के 16वें जिला महा अधिवेशन गहरी श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के बीच संपन्न हुआ। इस अवसर पर हरिद्वार से पधारे परम पूज्य स्वामी व्यासानंद जी महाराज ने अपने प्रेरणादायक प्रवचनों से हजारों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जागृति का संदेश दिया। अपने संबोधन में स्वामी जी ने कहा कि आत्मा में अपार और दिव्य प्रकाश विद्यमान है, जिसे पहचानना ही संतमत का मूल उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि मनुष्य जीवन भर बाहरी सुख और संपत्ति के पीछे भटकता रहता है, जबकि असली धन उसके अपने भीतर ही छिपा होता है। आत्मा की तुलना समुद्र से करते हुए उन्होंने समझाया कि जैसे समुद्र अनगिनत गुणों से भरा होता है, वैसे ही मानव आत्मा भी अनंत शक्तियों और संभावनाओं का भंडार है। स्वामी जी ने ध्यान और आत्मचिंतन को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण साधन बताते हुए कहा कि इन्हीं के माध्यम से मनुष्य अपने भीतर के उस दिव्य प्रकाश का अनुभव कर सकता है, जो उसे सच्ची शांति और संतोष प्रदान करता है। उन्होंने कहा, “आत्मा का प्रकाश इतना अनमोल है कि इसे पूरी सृष्टि देकर भी प्राप्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह हर व्यक्ति के भीतर पहले से ही मौजूद है।” सत्संग के दौरान बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु शांतिपूर्वक बैठकर प्रवचन सुनते रहे। पूरे परिसर में भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बना रहा, जिससे लोग भावविभोर दिखाई दिए। आयोजकों ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद, ठहरने, स्नान और स्वच्छता की समुचित व्यवस्था की गई है। इस महा अधिवेशन को लेकर पूरे क्षेत्र में खासा उत्साह देखा जा रहा है। श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में नैतिकता, सद्भाव और सकारात्मक सोच को मजबूत करते हैं तथा लोगों को आत्मिक शांति की ओर प्रेरित करते हैं।
आत्मा का प्रकाश अनमोल है, ध्यान से ही मिलता है सच्चा धन: स्वामी व्यासानंद जी महाराज । किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड अंतर्गत चिल्हनियां पंचायत स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय, कुंवारी मैदान में आयोजित दो दिवसीय संतमत सत्संग के 16वें जिला महा अधिवेशन गहरी श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के बीच संपन्न हुआ। इस अवसर पर हरिद्वार से पधारे परम पूज्य स्वामी व्यासानंद जी महाराज ने अपने प्रेरणादायक प्रवचनों से हजारों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जागृति का संदेश दिया। अपने संबोधन में स्वामी जी ने कहा कि आत्मा में अपार और दिव्य प्रकाश विद्यमान है, जिसे पहचानना ही संतमत का मूल उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि मनुष्य जीवन भर बाहरी सुख और संपत्ति के पीछे भटकता रहता है, जबकि असली धन उसके अपने भीतर ही छिपा होता है। आत्मा की तुलना समुद्र से करते हुए उन्होंने समझाया कि जैसे समुद्र अनगिनत गुणों से भरा होता है, वैसे ही मानव आत्मा भी अनंत शक्तियों और संभावनाओं का भंडार है। स्वामी जी ने ध्यान और आत्मचिंतन को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण साधन बताते हुए कहा कि इन्हीं के माध्यम से मनुष्य अपने भीतर के उस दिव्य प्रकाश का अनुभव कर सकता है, जो उसे सच्ची शांति और संतोष प्रदान करता है। उन्होंने कहा, “आत्मा का प्रकाश इतना अनमोल है कि इसे पूरी सृष्टि देकर भी प्राप्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह हर व्यक्ति के भीतर पहले से ही मौजूद है।” सत्संग के दौरान बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु शांतिपूर्वक बैठकर प्रवचन सुनते रहे। पूरे परिसर में भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बना रहा, जिससे लोग भावविभोर दिखाई दिए। आयोजकों ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद, ठहरने, स्नान और स्वच्छता की समुचित व्यवस्था की गई है। इस महा अधिवेशन को लेकर पूरे क्षेत्र में खासा उत्साह देखा जा रहा है। श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में नैतिकता, सद्भाव और सकारात्मक सोच को मजबूत करते हैं तथा लोगों को आत्मिक शांति की ओर प्रेरित करते हैं।
- टेढ़ागाछ प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत मटियारी पंचायत में कनकई नदी के बढ़ते कटाव और बाढ़ के खतरे को लेकर ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। सोमवार को पंचायत प्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से विधायक तौसीफ आलम को आवेदन सौंपकर तटबंध निर्माण एवं बौल्डर पिचिंग कार्य शीघ्र शुरू कराने की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि हर वर्ष बाढ़ के दौरान माली टोला, बाभनटोली, सुंदरबाड़ी, गर्राटोली सहित कई गांवों में भारी तबाही होती है। कटाव तेज होने से गांवों का अस्तित्व संकट में है और प्रधानमंत्री सड़क पर भी खतरा मंडरा रहा है।आवेदन में 2017 की बाढ़ का जिक्र करते हुए बताया गया कि तब करीब 80 घर नदी में समा गए थे। मुखिया प्रतिनिधि मो. सफदर हुसैन अंसारी सहित कई जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि समय रहते कार्य नहीं हुआ तो कई गांव नदी में समा सकते हैं।1
- कृषि विभाग प्रखंड अधिकारी जिला अररिया बिहार | यूट्यूब पप्पू देव | उर्फ अमित खास बातचीत गरीबों का मक्का जो टूटा नुकसान के बारे में बातचीत करते हुए वीडियो ऑडियो रिकॉर्ड1
- प्रकृति की प्रहार से किसान पूरा परेशान मक्का का फसल बर्बाद हो गया 🫢 जैसे मानो कोई सीने से दिल निकाल लिया हो1
- Post by Mohammad Hasim1
- Post by Araria News1
- Bhagalpur jila Kalka vidhansabha Kshetra sanaula se Mahendra Singh Tak ka chakkar Road ki samasya bahut kharab hai Sarkar sangyan mein1
- Post by TRUTH DOCUMENTRY1
- किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड अंतर्गत चिल्हनियां पंचायत स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय, कुंवारी मैदान में आयोजित दो दिवसीय संतमत सत्संग के 16वें जिला महा अधिवेशन गहरी श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के बीच संपन्न हुआ। इस अवसर पर हरिद्वार से पधारे परम पूज्य स्वामी व्यासानंद जी महाराज ने अपने प्रेरणादायक प्रवचनों से हजारों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जागृति का संदेश दिया। अपने संबोधन में स्वामी जी ने कहा कि आत्मा में अपार और दिव्य प्रकाश विद्यमान है, जिसे पहचानना ही संतमत का मूल उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि मनुष्य जीवन भर बाहरी सुख और संपत्ति के पीछे भटकता रहता है, जबकि असली धन उसके अपने भीतर ही छिपा होता है। आत्मा की तुलना समुद्र से करते हुए उन्होंने समझाया कि जैसे समुद्र अनगिनत गुणों से भरा होता है, वैसे ही मानव आत्मा भी अनंत शक्तियों और संभावनाओं का भंडार है। स्वामी जी ने ध्यान और आत्मचिंतन को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण साधन बताते हुए कहा कि इन्हीं के माध्यम से मनुष्य अपने भीतर के उस दिव्य प्रकाश का अनुभव कर सकता है, जो उसे सच्ची शांति और संतोष प्रदान करता है। उन्होंने कहा, “आत्मा का प्रकाश इतना अनमोल है कि इसे पूरी सृष्टि देकर भी प्राप्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह हर व्यक्ति के भीतर पहले से ही मौजूद है।” सत्संग के दौरान बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु शांतिपूर्वक बैठकर प्रवचन सुनते रहे। पूरे परिसर में भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बना रहा, जिससे लोग भावविभोर दिखाई दिए। आयोजकों ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद, ठहरने, स्नान और स्वच्छता की समुचित व्यवस्था की गई है। इस महा अधिवेशन को लेकर पूरे क्षेत्र में खासा उत्साह देखा जा रहा है। श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में नैतिकता, सद्भाव और सकारात्मक सोच को मजबूत करते हैं तथा लोगों को आत्मिक शांति की ओर प्रेरित करते हैं।1