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मुरैना वन आरक्षक की मृत्यु के बाद टास्कफोर्स द्वारा नदी की तलहटी में एकत्रित रेत को विनिष्ट किया जा रहा है।
Malkhan parmar
मुरैना वन आरक्षक की मृत्यु के बाद टास्कफोर्स द्वारा नदी की तलहटी में एकत्रित रेत को विनिष्ट किया जा रहा है।
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- 🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ | अंबाह पीपल चौराहा के पास संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का भव्य समापन, भंडारे में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ अंबाह क्षेत्र में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का आज भक्तिमय वातावरण में भव्य समापन हुआ। यह पावन आयोजन पूज्य श्री श्री 108 करुदास महाराज जी के आशीर्वाद से सम्पन्न हुआ, जिसमें क्षेत्रभर से श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कथा के अंतिम दिन पंडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। पूरा वातावरण भक्ति और आस्था से सराबोर रहा, जहां उपस्थित भक्तों ने भावपूर्वक कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। समापन अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खीर, पुंआ और आलू की सब्जी के प्रसाद का वितरण किया गया, जिसे लोगों ने श्रद्धा भाव से ग्रहण किया। साथ ही, हनुमान जी के सानिध्य में भव्य भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में क्षेत्रवासियों का विशेष सहयोग रहा। इस धार्मिक आयोजन ने पूरे अंबाह क्षेत्र में भक्ति, एकता और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश प्रसारित किया।1
- #kushwah1
- अंबाह। थरा उप सरपंच पति और समाजसेवी व भाजपा के थरा मंडल के मंत्री राम सिंह कुशवाहा इन दोनों हरियाणा की दौरे पर हैं वह हरियाणा से हिमाचल प्रदेश कुल्लू मनाली पर जाएंगे इसी दौरान वीडियो जारी किया उन्होंने कहा है हरियाणा में भी कृषि कार्य जोरों शोरों चल रहा है1
- अम्बाह मे पुरानी रंजिश के चलते युवक के साथ हुऐ विवाद मे उसके भाई के हाथ मे लगी गौली जिला अस्पताल मुरैना मे किया गया भर्ती1
- Post by Banti shrivas1
- Post by Malkhan parmar1
- *▪️भीषण आग का तांडव: सेवढ़ा के इंटोदा ग्राम में 300 बीघा गेहूं की फसल जलकर खाक* सेवढ़ा क्षेत्र के ग्राम इंटोदा में उस वक्त हड़कंप मच गया जब खेतों में खड़ी गेहूं की फसल में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने इतना विकराल रूप धारण कर लिया कि लगभग 200 से 300 बीघा में फैली गेहूं की पकी हुई फसल जलकर पूरी तरह खाक हो गई। अज्ञात कारणों से भड़की आग आग लगने का स्पष्ट कारण अभी तक सामने नहीं आ पाया है। ग्रामीणों ने जब तक आग पर काबू पाने की कोशिश की, तब तक तेज हवाओं के कारण लपटें काफी दूर तक फैल चुकी थीं। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और फायर ब्रिगेड को सूचित किया गया, लेकिन तब तक किसानों का भारी नुकसान हो चुका था। किसानों पर दोहरी मार गौरतलब है कि इस क्षेत्र के किसान पहले ही कुदरत की मार झेल रहे थे। कुछ समय पहले हुई ओलावृष्टि ने फसलों को काफी नुकसान पहुँचाया था। जो फसल बची थी, उसे इस भीषण आग ने अपनी चपेट में ले लिया। पकी हुई फसल के इस तरह नष्ट होने से पीड़ित किसानों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। मुआवजे की मांग सैकड़ों बीघा फसल जलने के बाद प्रभावित किसानों ने शासन-प्रशासन से उचित सर्वे करवकर1
- 11 अप्रैल को महात्मा ज्योतिबा फुले जी की जयंती के अवसर पर मुरैना में कुशवाहा समाज द्वारा एक भव्य चल समारोह (शोभायात्रा) का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में एकत्रित होकर अपनी एकता और श्रद्धा का प्रदर्शन किया। यहाँ इस आयोजन की मुख्य झलकियाँ दी गई हैं: 🌸 आयोजन की प्रमुख विशेषताएँ भव्य शोभायात्रा: चल समारोह शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरा, जिसमें महात्मा ज्योतिबा फुले और माता सावित्रीबाई फुले की प्रतिमाओं को सुसज्जित वाहन पर विराजमान किया गया था। कुशवाहा समाज की सहभागिता: इस कार्यक्रम में मुरैना शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों से भी कुशवाहा समाज के पुरुष, महिलाएँ और युवा भारी संख्या में शामिल हुए। सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ: समारोह के दौरान बैंड-बाजे, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक गीतों के साथ समाज के युवाओं में भारी उत्साह देखा गया। पुष्प वर्षा: जगह-जगह शहरवासियों और विभिन्न संगठनों द्वारा चल समारोह का स्वागत पुष्प वर्षा और जलपान के साथ किया गया। 💡 ज्योतिबा फुले जी का संदेश वक्ताओं ने इस अवसर पर महात्मा फुले के विचारों पर प्रकाश डालते हुए समाज को निम्नलिखित बातों के लिए प्रेरित किया: शिक्षा पर जोर: "विद्या बिना मति गई"—शिक्षा के महत्व को समझना। सामाजिक एकता: समाज के उत्थान के लिए संगठित रहना। महिला सशक्तिकरण: सावित्रीबाई फुले के पदचिन्हों पर चलते हुए बेटियों को शिक्षित करना। नोट: महात्मा ज्योतिबा फुले जी की जयंती (11 अप्रैल) को कुशवाहा, शाक्य, सैनी और मौर्य समाज द्वारा सामाजिक समरसता और गौरव दिवस के रूप में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। यह आयोजन न केवल एक उत्सव था, बल्कि समाज की सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता का प्रतीक भी रहा।1