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कथित तौर पर यह एक हिंदुस्तानी पार्टी नहीं है। इस पर सवाल उठाया गया है कि 'कॉकरोच पार्टी' का भविष्य क्या होगा, क्योंकि लोग उसे 'चबाकर खा रहे' हैं।
प्रदेश खुलासा न्यूज
कथित तौर पर यह एक हिंदुस्तानी पार्टी नहीं है। इस पर सवाल उठाया गया है कि 'कॉकरोच पार्टी' का भविष्य क्या होगा, क्योंकि लोग उसे 'चबाकर खा रहे' हैं।
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- इंदौर में पानी के एक बड़े घोटाले का आरोप सामने आया है, जहाँ दावा किया जा रहा है कि हर महीने ₹7.08 करोड़ का पानी सीधे सिस्टम से चोरी हो रहा है। आरोप के मुताबिक, 20% जनता की प्यास बुझाने के नाम पर पूरे 100% इंदौर को 'टैंकर माफिया' के हवाले कर दिया गया है। पोस्ट में यह गंभीर दावा किया गया है कि टंकियों का प्रेशर जानबूझकर तोड़ा जा रहा है, ताकि लोगों के नलों में पानी न पहुँचे और उन्हें टैंकरों से पानी खरीदने पर मजबूर होना पड़े। इस स्थिति को इंदौर नगर निगम की 'आत्मघाती नीति' बताते हुए, इस पर सवाल उठाने की माँग की गई है।2
- इंदौर में पुलिस ने शराब तस्करों के खिलाफ एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई की है। इस प्रहार के जरिए पुलिस ने शराब तस्करी के नेटवर्क पर शिकंजा कसा है।1
- मध्य प्रदेश के भोपाल में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के फॉलोअर्स की संख्या 20 मिलियन (दो करोड़) तक पहुंच गई है। इस बड़ी उपलब्धि को लेकर पार्टी में खुशी का माहौल है।1
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- प्रदोष काल कब होता है और इस दौरान किन कार्यों को करना चाहिए, इन महत्वपूर्ण ज्योतिषीय विषयों पर जानकारी उपलब्ध है। ज्योतिष गुरु नलिन दीक्षित इस संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए उपलब्ध हैं। इच्छुक व्यक्ति उनसे संपर्क करने के लिए मोबाइल नंबर 8109207940 का उपयोग कर सकते हैं।1
- इंदौर के गीता भवन सत्संग सभागृह में मंगल परिवार की मेजबानी में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन श्रीधाम वृंदावन के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद ने प्रवचन दिए। उन्होंने मातुश्री श्रीमती कमलादेवी-बाबूलाल मंगल की पुण्य स्मृति में आयोजित इस कथा के दौरान कहा कि दूसरों के दुख दूर करने और उनके आंसू पोंछने से बड़ी कोई सेवा नहीं हो सकती। स्वामी भास्करानंद ने जोर दिया कि भगवान बुद्धि से नहीं, बल्कि भक्ति और विश्वास से मिलते हैं, और श्रद्धा व विश्वास के बिना की गई भक्ति तथा सेवा निरर्थक होती है; सेवा हमेशा निष्काम भाव से होनी चाहिए। कथा शुभारंभ से पहले आयोजन समिति की ओर से समाजसेवी प्रेमचंद गोयल, टीकमचंद गर्ग, विष्णु बिंदल, शैलेन्द्र गुप्ता, विजय-कृष्णा गोयल सहित अन्य लोगों ने व्यासपीठ का पूजन किया। कथा श्रवण के लिए आज भी गीता भवन में भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। संगीतमय कथा के बीच साध्वी कृष्णानंद द्वारा प्रस्तुत मधुर भजन भी भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। यह कथा 30 मई तक प्रतिदिन दोपहर 3.30 बजे से शाम 7 बजे तक चलेगी, जिसमें विभिन्न उत्सव भी मनाए जाएँगे। महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद ने शुकदेव आगमन प्रसंग की कथा के दौरान यह भी समझाया कि भगवान का भजन एकमात्र ऐसा कार्य है जिसे करने के लिए किसी ताम-झाम, संसाधन या अतिरिक्त पुरुषार्थ की आवश्यकता नहीं होती; इसे नियमित काम करते हुए भी किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि भगवान हमारा अदृश्य साथी है, जो बिना दिखाई दिए भी कदम-कदम पर हमारी मदद करता है, और जन्म-जन्मांतर का सच्चा सखा केवल परमात्मा ही हो सकता है। इसलिए, परमात्मा से जुड़े बिना जीवन धन्य नहीं हो सकता। आगामी दिनों में कथा के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन भी किया गया है: तृतीय दिवस 26 मई को शिव-पार्वती विवाह, 27 मई को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, 28 मई को गोवर्धन पूजा एवं 56 भोग, 29 मई को रुक्मणी विवाह और समापन दिवस शनिवार 30 मई को सुदामा चरित्र के पश्चात फूलों की होली खेली जाएगी।1
- देश में नौतपा की शुरुआत हो गई है, जो साल के उन नौ दिनों को दर्शाता है जब गर्मी अपने सबसे खतरनाक स्तर पर पहुँच जाती है। 25 मई से 2 जून 2026 तक चलने वाले इस नौतपा के दौरान, मौसम विभाग ने कई राज्यों में तापमान 45°C के पार जाने की आशंका व्यक्त करते हुए हीटवेव अलर्ट जारी किया है। विभाग ने लोगों को दोपहर की धूप से बचने की खास सलाह दी है। आसान शब्दों में, नौतपा वह अवधि होती है जब सूर्य की किरणें धरती पर अधिक सीधी और तीव्र पड़ती हैं, जिससे जमीन तेजी से गर्म होती है और लू चलने लगती है। इस समय दिन में सड़कें भी तपने लगती हैं, और रात में भी गर्म हवा का एहसास होता है। इसके परिणामस्वरूप, लोगों में डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है, साथ ही पानी और बिजली से संबंधित समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। डॉक्टरों ने इस भीषण गर्मी से बचाव के लिए कई महत्वपूर्ण सलाह दी हैं। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पानी पीने, हल्का भोजन करने और विशेष रूप से दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप में निकलने से बचने का आग्रह किया है। यह अवधि नौतपा के कारण पड़ने वाली भीषण गर्मी के कहर से बचने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।1
- इंदौर से 'प्रदेश खुलासा' के संपादकीय में भीषण गर्मी के बीच जनता की दोहरी मानसिकता पर सुलगते सवाल उठाए गए हैं। मौजूदा 45 डिग्री के रिकॉर्ड तोड़ तापमान में हर व्यक्ति पेड़ों की घनी छांव तलाश रहा है और ट्रैफिक सिग्नल पर गाड़ी रोकने से पहले पेड़ ढूंढता है। संपादकीय में कहा गया है कि धूप का सितम ऐसा है कि जिन्होंने कभी गमले तक में पानी नहीं डाला, वे भी आज सोशल मीडिया पर पेड़ों की महिमा का गुणगान कर रहे हैं। हालांकि, इसके साथ ही एक कड़वा सवाल भी उठाया गया है कि छांव चाहने वाले इन लाखों लोगों में से कितनों ने कभी अपने हाथों से एक पौधा लगाया है या उसे पानी देकर बचाया है। लेख के अनुसार, बारिश की पहली फुहार गिरते ही यह 'मौसमी पर्यावरण प्रेम' हवा हो जाएगा, और यही पेड़ लोगों को 'परेशानी' लगने लगेंगे। कोई पत्तों के गिरने से गंदगी की शिकायत करेगा, किसी को चिड़ियों से कार गंदी होने का डर सताएगा, और कोई रसूखदार अपनी दुकान का बोर्ड पेड़ की टहनियों से छिपता पाएगा। यह समाज की उस दोहरी मानसिकता को दर्शाता है कि लोगों को सिर्फ अपनी जरूरत के समय पेड़ों की छांव चाहिए होती है, जबकि बाकी समय 'विकास' के नाम पर कुल्हाड़ी तैयार रहती है। इस खोखली मानसिकता के विपरीत, 'संस्था रामराज्य स्थापना परिषद्' और 'प्रदेश खुलासा न्यूज़' पिछले डेढ़ दशक से एक मौन क्रांति चला रहे हैं। साल 2010 से हर वर्ष, ये बिना किसी सरकारी सहयोग के 400 से अधिक पौधों का रोपण करते हैं और उनकी 365 दिन निगरानी करते हैं ताकि वे सुरक्षित पेड़ बन सकें। इसी कड़ी में, प्रकृति का ऋण चुकाने और आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित कल देने के उद्देश्य से, आगामी 1 जुलाई 2026 से "एक पेड़ लगाओ, अपना जीवन बचाओ" महाअभियान का अगला चरण शुरू होने जा रहा है। इस बार टीम और अधिक व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण और जन-जागृति का कार्य करेगी। 'प्रदेश खुलासा' ने इस पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि एसी कमरों में बैठकर ग्लोबल वॉर्मिंग पर चिंता जताना आसान है, लेकिन जब तक व्यक्ति खुद कुदाल उठाकर मिट्टी में पौधा नहीं रोपते, उनका पर्यावरण प्रेम बेईमानी है। कंक्रीट के जंगलों में बदलते शहरों को बचाने के लिए 'काटो और बढ़ो' की नीति छोड़कर 'लगाओ और बचाओ' के मार्ग पर चलना होगा। संपादकीय ने लोगों से 1 जुलाई 2026 से शुरू हो रहे इस महाअभियान का हिस्सा बनने का आह्वान किया है, यह याद दिलाते हुए कि आज लगाया हुआ एक पौधा कल किसी राहगीर की जिंदगी बचा सकता है।1