सना और रोहित अच्छे दोस्त थे। होली की सुबह करीब 3 बजे रोहित सना के घर रंग खेलने पहुंच गया। चारों तरफ सन्नाटा था, लेकिन रोहित के चेहरे पर शरारती मुस्कान थी। उसने सोचा सब सो रहे होंगे, चुपके से रंग लगा दूंगा और भाग जाऊंगा। जैसे ही उसने दरवाज़ा खटखटाया, अंदर से सना की आवाज आई – "कौन है इतनी सुबह?" रोहित बोला – "खोलो जल्दी, होली है!" सना ने दरवाज़ा खोला तो देखा रोहित हाथ में गुलाल और पिचकारी लिए खड़ा है। सना मुस्कुराई और बोली – "इतनी भी क्या जल्दी थी? अभी तो सूरज भी नहीं निकला!" रोहित ने कहा – "दोस्ती में टाइम नहीं देखा जाता!" इतना कहते ही रोहित ने गुलाल लगा दिया। लेकिन उसे क्या पता था कि सना पहले से तैयार थी। अचानक पीछे से सना के भाई और दोस्तों ने रोहित पर रंग और पानी की बाल्टी उड़ेल दी। पूरा आंगन हंसी से गूंज उठा। सना ने हंसते हुए कहा – "होली है भई होली! यहां सरप्राइज देने नहीं, सरप्राइज लेने मिलते हैं!" उस दिन की होली उनकी दोस्ती को और भी रंगीन बना गई। सना और रोहित अच्छे दोस्त थे। होली की सुबह करीब 3 बजे रोहित सना के घर रंग खेलने पहुंच गया। चारों तरफ सन्नाटा था, लेकिन रोहित के चेहरे पर शरारती मुस्कान थी। उसने सोचा सब सो रहे होंगे, चुपके से रंग लगा दूंगा और भाग जाऊंगा। जैसे ही उसने दरवाज़ा खटखटाया, अंदर से सना की आवाज आई – "कौन है इतनी सुबह?" रोहित बोला – "खोलो जल्दी, होली है!" सना ने दरवाज़ा खोला तो देखा रोहित हाथ में गुलाल और पिचकारी लिए खड़ा है। सना मुस्कुराई और बोली – "इतनी भी क्या जल्दी थी? अभी तो सूरज भी नहीं निकला!" रोहित ने कहा – "दोस्ती में टाइम नहीं देखा जाता!" इतना कहते ही रोहित ने गुलाल लगा दिया। लेकिन उसे क्या पता था कि सना पहले से तैयार थी। अचानक पीछे से सना के भाई और दोस्तों ने रोहित पर रंग और पानी की बाल्टी उड़ेल दी। पूरा आंगन हंसी से गूंज उठा। सना ने हंसते हुए कहा – "होली है भई होली! यहां सरप्राइज देने नहीं, सरप्राइज लेने मिलते हैं!" उस दिन की होली उनकी दोस्ती को और भी रंगीन बना गई।
सना और रोहित अच्छे दोस्त थे। होली की सुबह करीब 3 बजे रोहित सना के घर रंग खेलने पहुंच गया। चारों तरफ सन्नाटा था, लेकिन रोहित के चेहरे पर शरारती मुस्कान थी। उसने सोचा सब सो रहे होंगे, चुपके से रंग लगा दूंगा और भाग जाऊंगा। जैसे ही उसने दरवाज़ा खटखटाया, अंदर से सना की आवाज आई – "कौन है इतनी सुबह?" रोहित बोला – "खोलो जल्दी, होली है!" सना ने दरवाज़ा खोला तो देखा रोहित हाथ में गुलाल और पिचकारी लिए खड़ा है। सना मुस्कुराई और बोली – "इतनी भी क्या जल्दी थी? अभी तो सूरज भी नहीं निकला!" रोहित ने कहा – "दोस्ती में टाइम नहीं देखा जाता!" इतना कहते ही रोहित ने गुलाल लगा दिया। लेकिन उसे क्या पता था कि सना पहले से तैयार थी। अचानक पीछे से सना के भाई और दोस्तों ने रोहित पर रंग और पानी की बाल्टी उड़ेल दी। पूरा आंगन हंसी से गूंज उठा। सना ने हंसते हुए कहा – "होली है भई होली! यहां सरप्राइज देने नहीं, सरप्राइज लेने मिलते हैं!" उस दिन की होली उनकी दोस्ती को और भी रंगीन बना गई। सना और रोहित अच्छे दोस्त थे। होली की सुबह करीब 3 बजे रोहित सना के घर रंग खेलने पहुंच गया। चारों तरफ सन्नाटा था, लेकिन रोहित के चेहरे पर शरारती मुस्कान थी। उसने सोचा सब सो रहे होंगे, चुपके से रंग लगा दूंगा और भाग जाऊंगा। जैसे ही उसने दरवाज़ा खटखटाया, अंदर से सना की आवाज आई – "कौन है इतनी सुबह?" रोहित बोला – "खोलो जल्दी, होली है!" सना ने दरवाज़ा खोला तो देखा रोहित हाथ में गुलाल और पिचकारी लिए खड़ा है। सना मुस्कुराई और बोली – "इतनी भी क्या जल्दी थी? अभी तो सूरज भी नहीं निकला!" रोहित ने कहा – "दोस्ती में टाइम नहीं देखा जाता!" इतना कहते ही रोहित ने गुलाल लगा दिया। लेकिन उसे क्या पता था कि सना पहले से तैयार थी। अचानक पीछे से सना के भाई और दोस्तों ने रोहित पर रंग और पानी की बाल्टी उड़ेल दी। पूरा आंगन हंसी से गूंज उठा। सना ने हंसते हुए कहा – "होली है भई होली! यहां सरप्राइज देने नहीं, सरप्राइज लेने मिलते हैं!" उस दिन की होली उनकी दोस्ती को और भी रंगीन बना गई।
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