देवास के खातेगांव तहसील के अंतर्गत नगर पंचायत नेमावर में स्वच्छता अभियान का असली सच सामने आया है, जहां लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद नर्मदा नदी के किनारे भारी मात्रा में कचरा डंप किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कचरा नगर पंचायत के ट्रैक्टरों से लाकर यहाँ डाला गया है, जो न केवल घोर लापरवाही है बल्कि मां नर्मदा के प्रति एक गंभीर अपराध है। प्रशासन एक तरफ गणेश जी और नवदुर्गा विसर्जन के समय मूर्तियों के लिए अलग कुंड बनवाता है ताकि नर्मदा स्वच्छ रहे, लेकिन नगर पंचायत के ट्रैक्टरों द्वारा कचरा डाले जाने पर अब पूरी तरह मौन बना हुआ है। नर्मदा किनारे कचरा फेंकने की इस करतूत से नागरिकों में भारी नाराजगी है, क्योंकि शिक्षक, डॉक्टर, समाजसेवी और आम लोग पिछले डेढ़ साल से हर रविवार को स्वयं नर्मदा तट की सफाई कर रहे हैं। इस सफाई अभियान में खुद प्रशासन के अधिकारी जैसे एसडीएम, सीएमओ और देवास कलेक्टर डॉक्टर मोहन यादव भी भाग लेते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद नदी किनारे कचरे के ढेर लगाए जा रहे हैं।
देवास के खातेगांव तहसील के अंतर्गत नगर पंचायत नेमावर में स्वच्छता अभियान का असली सच सामने आया है, जहां लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद नर्मदा नदी के किनारे भारी मात्रा में कचरा डंप किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कचरा नगर पंचायत के ट्रैक्टरों से लाकर यहाँ डाला गया है, जो न केवल घोर लापरवाही है बल्कि मां नर्मदा के प्रति एक गंभीर अपराध है। प्रशासन एक तरफ गणेश जी और नवदुर्गा विसर्जन के समय मूर्तियों के लिए अलग कुंड बनवाता है ताकि नर्मदा स्वच्छ रहे, लेकिन नगर पंचायत के ट्रैक्टरों द्वारा कचरा डाले जाने पर अब पूरी तरह मौन बना हुआ है। नर्मदा किनारे कचरा फेंकने की इस करतूत से नागरिकों में भारी नाराजगी है, क्योंकि शिक्षक, डॉक्टर, समाजसेवी और आम लोग पिछले डेढ़ साल से हर रविवार को स्वयं नर्मदा तट की सफाई कर रहे हैं। इस सफाई अभियान में खुद प्रशासन के अधिकारी जैसे एसडीएम, सीएमओ और देवास कलेक्टर डॉक्टर मोहन यादव भी भाग लेते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद नदी किनारे कचरे के ढेर लगाए जा रहे हैं।
- देवास के खातेगांव तहसील के अंतर्गत नगर पंचायत नेमावर में स्वच्छता अभियान का असली सच सामने आया है, जहां लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद नर्मदा नदी के किनारे भारी मात्रा में कचरा डंप किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कचरा नगर पंचायत के ट्रैक्टरों से लाकर यहाँ डाला गया है, जो न केवल घोर लापरवाही है बल्कि मां नर्मदा के प्रति एक गंभीर अपराध है। प्रशासन एक तरफ गणेश जी और नवदुर्गा विसर्जन के समय मूर्तियों के लिए अलग कुंड बनवाता है ताकि नर्मदा स्वच्छ रहे, लेकिन नगर पंचायत के ट्रैक्टरों द्वारा कचरा डाले जाने पर अब पूरी तरह मौन बना हुआ है। नर्मदा किनारे कचरा फेंकने की इस करतूत से नागरिकों में भारी नाराजगी है, क्योंकि शिक्षक, डॉक्टर, समाजसेवी और आम लोग पिछले डेढ़ साल से हर रविवार को स्वयं नर्मदा तट की सफाई कर रहे हैं। इस सफाई अभियान में खुद प्रशासन के अधिकारी जैसे एसडीएम, सीएमओ और देवास कलेक्टर डॉक्टर मोहन यादव भी भाग लेते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद नदी किनारे कचरे के ढेर लगाए जा रहे हैं।1
- इंदौर में चल रहे छात्र आंदोलन को विधायक हीरालाल अलावा का समर्थन मिला है। उन्होंने छात्रों के इस आंदोलन के साथ खड़े होते हुए घोषणा की है कि अब इस आंदोलन की आवाज़ सड़क से लेकर सीधे विधानसभा तक उठाई जाएगी।1
- बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां अपनी ₹1100 की मासिक पेंशन निकालने बैंक पहुंचे 82 वर्षीय बुजुर्ग रामचंद्र वर्मा के खाते में करीब ₹759 करोड़ 59 लाख की भारी-भरकम राशि दिखाई दी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के अनुसार, इस अविश्वसनीय रकम को देखकर बैंक कर्मचारी और वहां मौजूद अन्य लोग पूरी तरह हैरान रह गए। दावा किया जा रहा है कि कुछ ही मिनटों के बाद यह विशाल राशि उनके खाते से अचानक गायब भी हो गई, जिसके बाद इस पूरे मामले को बैंकिंग सिस्टम की किसी तकनीकी गड़बड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी तक बैंक प्रशासन या संबंधित अधिकारियों द्वारा इस राशि को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग कर रहे हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके।1
- जीआरपी ने चलती ट्रेनों में चोरी की वारदातों को अंजाम देने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई अशोकनगर जिले के नरखेड़ निवासी आबिद खान की शिकायत के बाद शुरू हुई। आबिद खान ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वह बीना-ग्वालियर पैसेंजर ट्रेन के जनरल कोच में यात्रा कर रहे थे, तभी अज्ञात बदमाशों ने उनके ट्रॉली बैग की चेन काटकर उसमें रखे सोने-चांदी के जेवर चोरी कर लिए थे। इस मामले की जांच के लिए जीआरपी गुना द्वारा एक विशेष टीम का गठन किया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले मुख्य आरोपी राजकुमार यादव को गिरफ्तार किया, जो उत्तर प्रदेश के एटा का रहने वाला है। मुख्य आरोपी की निशानदेही पर गिरोह के अन्य सदस्यों को भी दबोचा गया। इसके बाद पूछताछ में एक और चोरी का खुलासा हुआ, जिसके बाद दो और आरोपियों को पकड़ा गया। इस तरह पुलिस ने गिरोह के कुल 9 सदस्यों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। जीआरपी इंदौर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देवेंद्र धुर्वे के अनुसार, यह शातिर गिरोह मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में चलती ट्रेनों को अपना निशाना बनाता था। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड खंगाल रही है, जिसमें पता चला है कि मुख्य सरगना राजकुमार यादव और एक अन्य आरोपी पर पहले से ही करीब 14 आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब ₹15 लाख मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात भी बरामद किए हैं।1
- उज्जैन के महाकाल लोक के निर्माण के बाद से मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और मंदिर की आय में भारी उछाल आया है। इतिहास में पहली बार महाकाल मंदिर समिति की कुल संपत्ति और सालाना आय-व्यय के आधिकारिक आंकड़े सामने आए हैं, जिसने दान के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बाबा महाकाल के खजाने में अरबों रुपये की संपत्ति और भारी मात्रा में सोना-चांदी जमा है। मंदिर समिति के पास कुल ₹472 करोड़ की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) है, जबकि मंदिर के नाम पर 90 एकड़ बेशकीमती जमीन है। इसके अलावा, विभिन्न बैंक खातों में ₹16 करोड़ नगद जमा हैं। मंदिर के पास ₹300 करोड़ से ज्यादा मूल्य का सोना और ₹60 करोड़ की 20 क्विंटल से अधिक चांदी मौजूद है। महाकाल लोक बनने के बाद मंदिर में रोजाना 40 से 50 हजार श्रद्धालु और विशेष दिनों में इससे भी कहीं अधिक भक्त दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-2026 में महाकाल मंदिर की कुल आय करीब ₹142 करोड़ रही, जो अलग-अलग माध्यमों से प्राप्त हुई है। इसमें सामान्य दान से लगभग ₹78 करोड़, दान पेटियों से ₹62 करोड़, नगद काउंटर से ₹5.5 करोड़, ऑनलाइन माध्यम से ₹3.5 करोड़, अन्नक्षेत्र से ₹3.5 करोड़ और गुप्त दान से करीब ₹4.5 करोड़ मिले हैं। साल 2025 में करीब 6 करोड़ श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे थे, जिस दौरान दान पेटियों से ₹43 करोड़, शीघ्र दर्शन व्यवस्था (VIP दर्शन) से ₹64 करोड़, 592 किलो से अधिक चांदी, 1.5 किलो सोना और लड्डू प्रसादी की बिक्री से करीब ₹65 करोड़ की आय हुई थी। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के कारण मंदिर प्रबंधन और व्यवस्थाओं को बनाए रखने के लिए मंदिर समिति का मासिक और सालाना खर्च भी काफी बढ़ गया है। महाकाल लोक बनने से पहले मंदिर का मासिक खर्च करीब ₹2.5 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹11 करोड़ प्रति महीना हो गया है। इसके साथ ही मंदिर का कुल सालाना खर्च करीब ₹135 करोड़ तक पहुंच गया है। यह भारी-भरकम राशि कर्मचारियों के वेतन, सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, रखरखाव, नए निर्माण कार्यों, अन्नक्षेत्र में निःशुल्क भोजन, गौशाला, वैदिक शोध संस्थान और विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों पर व्यय की जाती है। भक्तों की अगाध श्रद्धा और महाकाल लोक की भव्यता के चलते ही मंदिर समिति की आय और संपत्ति में यह ऐतिहासिक वृद्धि देखी गई है।1
- सोशल मीडिया पर साझा की गई एक स्टोरी और बनाई गई रील को लेकर यह भावुक इच्छा जताई गई है कि काश यह हर घर की सच्चाई बन जाए। यदि यह कहानी और रील हर परिवार की हकीकत बन जाती है, तो देश में वृद्ध आश्रम की कोई आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही, दुनिया भर से 80 प्रतिशत केस भी गायब हो जाएंगे।1
- मध्य प्रदेश के इंदौर में धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ 'इस्तीफा दो' की मांग को लेकर पैदल यात्रा निकाली जाएगी। आगामी 14 जुलाई को इस पैदल यात्रा का आयोजन किया जाएगा, जिसके तहत कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया जाएगा।1
- इंदौर के तेजाजी नगर थाना क्षेत्र की ग्वाला कॉलोनी में गौ माताओं की लगातार हो रही मौतों और सड़क हादसों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कुछ डेयरी संचालक दूध निकालने के बाद गौ माताओं को खुले में सड़कों पर छोड़ देते हैं। इस लापरवाही के कारण आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं और गौ माताओं की जान जा रही है।1