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बलरामपुर जिले की ग्राम पंचायत विश्रामनगर के धनेशपुर में स्थित लुत्ती जलाशय बांध बाढ़ आपदा में टूटने के बाद भी अब तक सुधारा नहीं जा सका है। इस गंभीर स्थिति के कारण धनेशपुर, विश्रामनगर और सारंगपुर के ग्रामीणों के सामने सिंचाई और मवेशियों के लिए पानी का भारी संकट खड़ा हो गया है। क्षेत्र के लगभग 300-400 किसान इस समस्या से बेहद चिंतित हैं। ग्रामीणों और सरपंच द्वारा 26 फरवरी 2026 को ही प्रशासन को आवेदन सौंपे जाने के बावजूद, इस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है और फाइल ठंडे बस्ते में धूल खा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले साल भी इसी बांध के टूटने से कई घर उजड़ गए थे और कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस बड़े हादसे के बाद भी जिम्मेदार विभाग पूरी तरह कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है। बांध का पानी बह जाने से पूरे इलाके का जलस्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह होने की आशंका है। अब ग्रामीण जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू करने की मांग कर रहे हैं।

8 hrs ago
user_Ali Khan
Ali Khan
बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
8 hrs ago

बलरामपुर जिले की ग्राम पंचायत विश्रामनगर के धनेशपुर में स्थित लुत्ती जलाशय बांध बाढ़ आपदा में टूटने के बाद भी अब तक सुधारा नहीं जा सका है। इस गंभीर स्थिति के कारण धनेशपुर, विश्रामनगर और सारंगपुर के ग्रामीणों के सामने सिंचाई और मवेशियों के लिए पानी का भारी संकट खड़ा हो गया है। क्षेत्र के लगभग 300-400 किसान इस समस्या से बेहद चिंतित हैं। ग्रामीणों और सरपंच द्वारा 26 फरवरी 2026 को ही प्रशासन को आवेदन सौंपे जाने के बावजूद, इस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है और फाइल ठंडे बस्ते में धूल खा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले साल भी इसी बांध के टूटने से कई घर उजड़ गए थे और कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस बड़े हादसे के बाद भी जिम्मेदार विभाग पूरी तरह कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है। बांध का पानी बह जाने से पूरे इलाके का जलस्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह होने की आशंका है। अब ग्रामीण जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू करने की मांग कर रहे हैं।

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  • बलरामपुर जिले की ग्राम पंचायत विश्रामनगर के धनेशपुर में स्थित लुत्ती जलाशय बांध बाढ़ आपदा में टूटने के बाद भी अब तक सुधारा नहीं जा सका है। इस गंभीर स्थिति के कारण धनेशपुर, विश्रामनगर और सारंगपुर के ग्रामीणों के सामने सिंचाई और मवेशियों के लिए पानी का भारी संकट खड़ा हो गया है। क्षेत्र के लगभग 300-400 किसान इस समस्या से बेहद चिंतित हैं। ग्रामीणों और सरपंच द्वारा 26 फरवरी 2026 को ही प्रशासन को आवेदन सौंपे जाने के बावजूद, इस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है और फाइल ठंडे बस्ते में धूल खा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले साल भी इसी बांध के टूटने से कई घर उजड़ गए थे और कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस बड़े हादसे के बाद भी जिम्मेदार विभाग पूरी तरह कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है। बांध का पानी बह जाने से पूरे इलाके का जलस्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह होने की आशंका है। अब ग्रामीण जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
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    बलरामपुर जिले की ग्राम पंचायत विश्रामनगर के धनेशपुर में स्थित लुत्ती जलाशय बांध बाढ़ आपदा में टूटने के बाद भी अब तक सुधारा नहीं जा सका है। इस गंभीर स्थिति के कारण धनेशपुर, विश्रामनगर और सारंगपुर के ग्रामीणों के सामने सिंचाई और मवेशियों के लिए पानी का भारी संकट खड़ा हो गया है। क्षेत्र के लगभग 300-400 किसान इस समस्या से बेहद चिंतित हैं।

ग्रामीणों और सरपंच द्वारा 26 फरवरी 2026 को ही प्रशासन को आवेदन सौंपे जाने के बावजूद, इस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है और फाइल ठंडे बस्ते में धूल खा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले साल भी इसी बांध के टूटने से कई घर उजड़ गए थे और कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस बड़े हादसे के बाद भी जिम्मेदार विभाग पूरी तरह कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है।

बांध का पानी बह जाने से पूरे इलाके का जलस्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह होने की आशंका है। अब ग्रामीण जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
    user_Ali Khan
    Ali Khan
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    8 hrs ago
  • झारखंड सरकार की दिशा समिति के सदस्य दिवेश तिवारी ने मंगलवार को पलामू की बारी पंचायत का दौरा किया, जहाँ उन्होंने ग्रामीणों के साथ एक बैठक की। इस बैठक में शिक्षा, विकास और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। दिवेश तिवारी ने इस दौरान बताया कि सरकार का मुख्य लक्ष्य हर जाति और वर्ग के लड़के-लड़कियों को शिक्षा के समान अवसर प्रदान करना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार विभिन्न योजनाओं के तहत विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है, और देश या विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले छात्र-छात्राओं को भी हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। इस अवसर पर, बारी पंचायत की मुखिया निरोतमा कुमारी ने पंचायत की प्रमुख समस्याओं को रेखांकित करते हुए कई मांगें उठाईं। इनमें बारी मिडिल संकुल विद्यालय को हाई स्कूल में उन्नत करना, रांची रोड से पलामू किला तक पक्की सड़क का निर्माण, विभिन्न स्थानों पर यात्री शेडों का निर्माण, और औरंगा नदी पर बांध बनाकर मलय डैम में जल संचयन की व्यवस्था करना शामिल था। वहीं, मंडल प्रतिनिधि महेश्वर सिंह ने किसानों की समस्याओं को उठाते हुए बताया कि खेती-बाड़ी का समय शुरू हो चुका है, लेकिन मलय नहर का बांध अभी तक नहीं बनाया गया है; उन्होंने इस बांध निर्माण कार्य को शीघ्र शुरू करने की अपील की ताकि किसानों को लाभ मिल सके। बैठक में बिनय सिंह, सुरेश्वर सिंह, उमाकांत सिंह, पंचायत समिति सदस्य जुबैर खान, निर्मल सिंह, राहुल मेहता, कृष्णा महतो, अजय सिंह और दीप सिंह सहित कई अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि बैठक में उठाए गए इन मुद्दों पर सरकार और संबंधित विभाग जल्द ही सकारात्मक पहल करेंगे, जिससे क्षेत्र के विकास को एक नई गति मिल सकेगी।
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    झारखंड सरकार की दिशा समिति के सदस्य दिवेश तिवारी ने मंगलवार को पलामू की बारी पंचायत का दौरा किया, जहाँ उन्होंने ग्रामीणों के साथ एक बैठक की। इस बैठक में शिक्षा, विकास और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। दिवेश तिवारी ने इस दौरान बताया कि सरकार का मुख्य लक्ष्य हर जाति और वर्ग के लड़के-लड़कियों को शिक्षा के समान अवसर प्रदान करना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार विभिन्न योजनाओं के तहत विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है, और देश या विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले छात्र-छात्राओं को भी हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।

इस अवसर पर, बारी पंचायत की मुखिया निरोतमा कुमारी ने पंचायत की प्रमुख समस्याओं को रेखांकित करते हुए कई मांगें उठाईं। इनमें बारी मिडिल संकुल विद्यालय को हाई स्कूल में उन्नत करना, रांची रोड से पलामू किला तक पक्की सड़क का निर्माण, विभिन्न स्थानों पर यात्री शेडों का निर्माण, और औरंगा नदी पर बांध बनाकर मलय डैम में जल संचयन की व्यवस्था करना शामिल था। वहीं, मंडल प्रतिनिधि महेश्वर सिंह ने किसानों की समस्याओं को उठाते हुए बताया कि खेती-बाड़ी का समय शुरू हो चुका है, लेकिन मलय नहर का बांध अभी तक नहीं बनाया गया है; उन्होंने इस बांध निर्माण कार्य को शीघ्र शुरू करने की अपील की ताकि किसानों को लाभ मिल सके।

बैठक में बिनय सिंह, सुरेश्वर सिंह, उमाकांत सिंह, पंचायत समिति सदस्य जुबैर खान, निर्मल सिंह, राहुल मेहता, कृष्णा महतो, अजय सिंह और दीप सिंह सहित कई अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि बैठक में उठाए गए इन मुद्दों पर सरकार और संबंधित विभाग जल्द ही सकारात्मक पहल करेंगे, जिससे क्षेत्र के विकास को एक नई गति मिल सकेगी।
    user_अपडेट पलामू न्यूज़
    अपडेट पलामू न्यूज़
    Press advisory मेदिनीनगर (डाल्टनगंज), पलामू, झारखंड•
    4 hrs ago
  • राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में स्थित एक निजी कोचिंग सेंटर में भीषण आग लगने से कम से कम 13 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर मुख्यमंत्री योगी ने तत्काल संज्ञान लिया और राहत एवं बचाव कार्यों के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए। आग बुझाने के लिए दमकल की तीन गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर अथक प्रयास किए। इस भयावह दृश्य और जनहानि को देखकर, एक माँ-बाप को अपने पुत्र के शोक और वियोग से होने वाले दर्द को भली-भांति समझा जा सकता है।
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    राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में स्थित एक निजी कोचिंग सेंटर में भीषण आग लगने से कम से कम 13 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर मुख्यमंत्री योगी ने तत्काल संज्ञान लिया और राहत एवं बचाव कार्यों के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए।

आग बुझाने के लिए दमकल की तीन गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर अथक प्रयास किए। इस भयावह दृश्य और जनहानि को देखकर, एक माँ-बाप को अपने पुत्र के शोक और वियोग से होने वाले दर्द को भली-भांति समझा जा सकता है।
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Voice of people गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    8 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ के नागरिकों से उन बच्चों की मदद के लिए आगे आने की मार्मिक अपील की गई है जो काम की तलाश में बाहर गए हैं। इस गुहार में विशेष रूप से 'किसी की बेटी' का जिक्र किया गया है और सभी बच्चों के लिए सहायता मांगी गई है। लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे इस संदेश को सभी गांवों में यथासंभव साझा करें और इन बच्चों की सहायता करें, क्योंकि यह संभावना है कि इनमें से कोई अपना या संबंधी हो।
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    छत्तीसगढ़ के नागरिकों से उन बच्चों की मदद के लिए आगे आने की मार्मिक अपील की गई है जो काम की तलाश में बाहर गए हैं। इस गुहार में विशेष रूप से 'किसी की बेटी' का जिक्र किया गया है और सभी बच्चों के लिए सहायता मांगी गई है। लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे इस संदेश को सभी गांवों में यथासंभव साझा करें और इन बच्चों की सहायता करें, क्योंकि यह संभावना है कि इनमें से कोई अपना या संबंधी हो।
    user_Mannu lal
    Mannu lal
    अंबिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    13 hrs ago
  • कबीरधाम जिले के ग्राम दामापुर बाजार निवासी 108 वर्षीय गजानंद सिंह परिहार आज के दौर में प्रेरणा के बड़े स्तंभ बनकर उभरे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी वे शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हैं, जिसका श्रेय वे पिछले 70 वर्षों से कर रहे नियमित योगाभ्यास को देते हैं। गजानंद सिंह आज भी योग के कठिन आसन और प्राणायाम बेहद सहजता के साथ कर लेते हैं, जो लोगों के लिए आश्चर्य का विषय है। उनकी जीवनशैली इतनी अनुशासित है कि 108 वर्ष की आयु में भी वे प्रतिदिन सुबह-शाम 8 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हैं। उनका दावा है कि योग और सात्विक दिनचर्या के बल पर ही उन्होंने कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को हराकर जीवन की जंग जीती है। गजानंद सिंह का मानना है कि दीर्घायु और निरोग रहने के लिए संतुलित खान-पान और सकारात्मक सोच का होना अनिवार्य है। गजानंद सिंह ने आज की युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि यदि युवा आज से ही योग को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बना लें, तो वे भविष्य में कई गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं। एक लंबी उम्र जीने के बाद भी उनकी सक्रियता समाज के लिए स्वस्थ जीवन जीने का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।
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    कबीरधाम जिले के ग्राम दामापुर बाजार निवासी 108 वर्षीय गजानंद सिंह परिहार आज के दौर में प्रेरणा के बड़े स्तंभ बनकर उभरे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी वे शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हैं, जिसका श्रेय वे पिछले 70 वर्षों से कर रहे नियमित योगाभ्यास को देते हैं। गजानंद सिंह आज भी योग के कठिन आसन और प्राणायाम बेहद सहजता के साथ कर लेते हैं, जो लोगों के लिए आश्चर्य का विषय है।

उनकी जीवनशैली इतनी अनुशासित है कि 108 वर्ष की आयु में भी वे प्रतिदिन सुबह-शाम 8 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हैं। उनका दावा है कि योग और सात्विक दिनचर्या के बल पर ही उन्होंने कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को हराकर जीवन की जंग जीती है। गजानंद सिंह का मानना है कि दीर्घायु और निरोग रहने के लिए संतुलित खान-पान और सकारात्मक सोच का होना अनिवार्य है।

गजानंद सिंह ने आज की युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि यदि युवा आज से ही योग को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बना लें, तो वे भविष्य में कई गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं। एक लंबी उम्र जीने के बाद भी उनकी सक्रियता समाज के लिए स्वस्थ जीवन जीने का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।
    user_Raza
    Raza
    अंबिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    14 hrs ago
  • सोनभद्र जिले के ग्राम पंचायत धरती डोलवा निवासी 20 वर्षीय आशीष पासवान की गुजरात में एक दर्दनाक सड़क हादसे में मौत हो गई है। जानकारी के अनुसार, गुजरात के मुद्रा कक्ष के पास वह एक ट्रेलर की चपेट में आ गए, जिससे उनकी जान चली गई। आशीष अपने परिवार का एकमात्र सहारा थे, क्योंकि पिता के निधन के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। वह बेहतर रोजगार और परिवार के भरण-पोषण के लिए गुजरात गए थे, जहाँ वह ड्राइवरी का कार्य करते थे। आशीष अक्सर अपनी माँ से अपनी बहन की धूमधाम से शादी कराने का वादा करते थे, लेकिन इस दुखद हादसे ने उनके इन सपनों को अधूरा छोड़ दिया। मृतक का शव गांव पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था, वहीं गांव के लोगों की आँखें भी नम हो गईं। घटना की सूचना मिलने पर उत्तर प्रदेश सोनभद्र ड्राइवर महासंगठन के पदाधिकारी, प्रदेश अध्यक्ष तादाद मनेर मुल्तान भाई के नेतृत्व में, मृतक के घर पहुँचे और परिवार के प्रति अपनी शोक संवेदना व्यक्त की। संगठन की ओर से मृतक की माँ को आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई, साथ ही भविष्य में हर संभव मदद का आश्वासन भी दिया गया। इस अवसर पर प्रदेश संचालक रामबरत यादव, जिला अध्यक्ष सुरेश पटेल, जिला उपाध्यक्ष सुरेंद्र कुमार, जिला संघचालक बनारसी पासवान, जिला कोषाध्यक्ष गौरीशंकर सिंह, जिला सचिव संदीप भाई, दुद्धी ब्लॉक अध्यक्ष रतन प्रकाश मोदनवाल, सतीश भाई, सुरेंद्र गुप्ता और देवानंद मौर्य सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे। संगठन के पदाधिकारियों ने सभी ड्राइवर साथियों से एक-दूसरे की सुरक्षा और सहयोग के लिए संगठन से जुड़ने की अपील की। आशीष का अंतिम संस्कार गांव के नदी तट पर गमगीन माहौल में किया गया, और उनकी असमय मौत से पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है।
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    सोनभद्र जिले के ग्राम पंचायत धरती डोलवा निवासी 20 वर्षीय आशीष पासवान की गुजरात में एक दर्दनाक सड़क हादसे में मौत हो गई है। जानकारी के अनुसार, गुजरात के मुद्रा कक्ष के पास वह एक ट्रेलर की चपेट में आ गए, जिससे उनकी जान चली गई। आशीष अपने परिवार का एकमात्र सहारा थे, क्योंकि पिता के निधन के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। वह बेहतर रोजगार और परिवार के भरण-पोषण के लिए गुजरात गए थे, जहाँ वह ड्राइवरी का कार्य करते थे। आशीष अक्सर अपनी माँ से अपनी बहन की धूमधाम से शादी कराने का वादा करते थे, लेकिन इस दुखद हादसे ने उनके इन सपनों को अधूरा छोड़ दिया।

मृतक का शव गांव पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था, वहीं गांव के लोगों की आँखें भी नम हो गईं। घटना की सूचना मिलने पर उत्तर प्रदेश सोनभद्र ड्राइवर महासंगठन के पदाधिकारी, प्रदेश अध्यक्ष तादाद मनेर मुल्तान भाई के नेतृत्व में, मृतक के घर पहुँचे और परिवार के प्रति अपनी शोक संवेदना व्यक्त की। संगठन की ओर से मृतक की माँ को आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई, साथ ही भविष्य में हर संभव मदद का आश्वासन भी दिया गया।

इस अवसर पर प्रदेश संचालक रामबरत यादव, जिला अध्यक्ष सुरेश पटेल, जिला उपाध्यक्ष सुरेंद्र कुमार, जिला संघचालक बनारसी पासवान, जिला कोषाध्यक्ष गौरीशंकर सिंह, जिला सचिव संदीप भाई, दुद्धी ब्लॉक अध्यक्ष रतन प्रकाश मोदनवाल, सतीश भाई, सुरेंद्र गुप्ता और देवानंद मौर्य सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे। संगठन के पदाधिकारियों ने सभी ड्राइवर साथियों से एक-दूसरे की सुरक्षा और सहयोग के लिए संगठन से जुड़ने की अपील की। आशीष का अंतिम संस्कार गांव के नदी तट पर गमगीन माहौल में किया गया, और उनकी असमय मौत से पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है।
    user_OM PRAKASH RAWAT
    OM PRAKASH RAWAT
    Social worker दुद्धी, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • सोनभद्र के दुद्धी तहसील क्षेत्र में घघरी से बभनी तक मुख्य मार्ग के निर्माण की मांग तेज़ हो गई है, जहाँ ग्राम पंचायत घघरी के ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने मंगलवार को जिलाधिकारी सोनभद्र को जनहित ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने बताया कि वन क्षेत्र से होकर गुजरने वाला यह मार्ग पिछले कई दशकों से निर्माण की प्रतीक्षा में है और यह लगभग 3,000 से अधिक लोगों के आवागमन का प्रमुख साधन है। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि इस जर्जर सड़क का उपयोग प्रतिदिन छात्र-छात्राएं, किसान, मजदूर, महिलाएं, बुजुर्ग और मरीज सहित अन्य ग्रामीण करते हैं। मार्ग की खराब स्थिति के कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, खासकर बरसात के मौसम में यह कई स्थानों पर दुर्गम हो जाता है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि कार्यों और व्यापारिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, मार्ग वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में होने के कारण निर्माण कार्य वर्षों से लंबित है और समय-समय पर किए गए प्रयासों के बावजूद अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है, जिससे हजारों ग्रामीण अच्छी सड़क सुविधा से वंचित हैं। ग्रामीणों ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मांग की है कि प्रस्तावित मार्ग का संबंधित विभागों द्वारा संयुक्त निरीक्षण किया जाए। उन्होंने वन विभाग और लोक निर्माण विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर सड़क निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने का आग्रह किया है। साथ ही, उन्होंने किसी भी तकनीकी, कानूनी या पर्यावरणीय बाधा का समयबद्ध निस्तारण करने और निर्माण कार्य के लिए आवश्यक स्वीकृतियां व बजट उपलब्ध कराने की भी मांग की। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले में तत्काल कार्रवाई कर क्षेत्र के विकास और जनहित को प्राथमिकता देने की अपील की है। इस ज्ञापन की प्रतियां उत्तर प्रदेश शासन, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, मंडलायुक्त मिर्जापुर और रॉबर्ट्सगंज लोकसभा क्षेत्र के सांसद को भी भेजी गई हैं, जिसमें सड़क निर्माण को क्षेत्र के विकास और जनसुविधा के लिए अत्यंत आवश्यक बताया गया है।
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    सोनभद्र के दुद्धी तहसील क्षेत्र में घघरी से बभनी तक मुख्य मार्ग के निर्माण की मांग तेज़ हो गई है, जहाँ ग्राम पंचायत घघरी के ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने मंगलवार को जिलाधिकारी सोनभद्र को जनहित ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने बताया कि वन क्षेत्र से होकर गुजरने वाला यह मार्ग पिछले कई दशकों से निर्माण की प्रतीक्षा में है और यह लगभग 3,000 से अधिक लोगों के आवागमन का प्रमुख साधन है।

ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि इस जर्जर सड़क का उपयोग प्रतिदिन छात्र-छात्राएं, किसान, मजदूर, महिलाएं, बुजुर्ग और मरीज सहित अन्य ग्रामीण करते हैं। मार्ग की खराब स्थिति के कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, खासकर बरसात के मौसम में यह कई स्थानों पर दुर्गम हो जाता है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि कार्यों और व्यापारिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, मार्ग वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में होने के कारण निर्माण कार्य वर्षों से लंबित है और समय-समय पर किए गए प्रयासों के बावजूद अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है, जिससे हजारों ग्रामीण अच्छी सड़क सुविधा से वंचित हैं।

ग्रामीणों ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मांग की है कि प्रस्तावित मार्ग का संबंधित विभागों द्वारा संयुक्त निरीक्षण किया जाए। उन्होंने वन विभाग और लोक निर्माण विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर सड़क निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने का आग्रह किया है। साथ ही, उन्होंने किसी भी तकनीकी, कानूनी या पर्यावरणीय बाधा का समयबद्ध निस्तारण करने और निर्माण कार्य के लिए आवश्यक स्वीकृतियां व बजट उपलब्ध कराने की भी मांग की। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले में तत्काल कार्रवाई कर क्षेत्र के विकास और जनहित को प्राथमिकता देने की अपील की है। इस ज्ञापन की प्रतियां उत्तर प्रदेश शासन, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, मंडलायुक्त मिर्जापुर और रॉबर्ट्सगंज लोकसभा क्षेत्र के सांसद को भी भेजी गई हैं, जिसमें सड़क निर्माण को क्षेत्र के विकास और जनसुविधा के लिए अत्यंत आवश्यक बताया गया है।
    user_Jitendr Prshad
    Jitendr Prshad
    Court reporter दुद्धी, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • भरत तिवारी को 'शहीद भरत भूषण तिवारी' का दर्जा देते हुए, उनके बलिदान पर गहरा आक्रोश और न्याय की प्रबल मांग व्यक्त की गई है। समर्थकों का कहना है कि उनका यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और आरोप लगाया है कि 'गीदड़ों' ने 'शेर' जैसे भरत को घेरने के लिए जाल बिछाया था, और हथियार डालने के बाद भी 'कायरों' ने उन पर पीठ पीछे वार किया, जिससे 'सिस्टम' का असली चेहरा सामने आया। इस घटना को केवल इस्तीफे की मांग तक सीमित न रखकर, 'राष्ट्र जागरण' को ही सच्ची श्रद्धांजलि बताया गया है, और 'देश को नई आज़ादी' दिलाने का संकल्प दोहराया गया है। इस 'बलिदान' की स्मृति में, लोगों से अपील की गई है कि वे भरत तिवारी के नाम की जर्सी पहनकर कार्यालय जाएँ, ताकि अटके हुए काम शायद हो सकें। न्याय के लिए 'कलम कागज' से 'सिस्टम' से लड़ने की बात कही गई है, न कि हिंसा का सहारा लेने की। यह भी दोहराया गया है कि न्याय के लिए अनशन हमेशा से ही एक प्रमुख हथियार रहा है, और इस मांग के साथ 'पूरा बिहार' एकजुट खड़ा है। सचिन मिश्र नामक एक व्यक्ति ने घोषणा की है कि जब तक भरत तिवारी को न्याय नहीं मिल जाता, वह अनशन पर बैठे रहेंगे, और सरकार को चुनौती देते हुए कहा, 'आओ कितने भरत को मरोगे।।' यह आह्वान सिर्फ प्रतीकात्मक प्रतिक्रियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि 'आत्ममंथन, उत्तरदायित्व और राष्ट्रीय पुनर्निर्माण' की मांग करता है। संदेश में यह भी जोर दिया गया है कि 'सरकार किसी की भी हो', उसकी कमियों को निडर होकर उजागर करना एक अच्छे नागरिक होने का प्रमाण है और यही सच्ची देशभक्ति है। इसके विपरीत, 'तलवे चाटने वाले' देशभक्त नहीं बल्कि 'दलाल' होते हैं, इस बात पर बल देते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल जी को भी याद किया गया है।
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    भरत तिवारी को 'शहीद भरत भूषण तिवारी' का दर्जा देते हुए, उनके बलिदान पर गहरा आक्रोश और न्याय की प्रबल मांग व्यक्त की गई है। समर्थकों का कहना है कि उनका यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और आरोप लगाया है कि 'गीदड़ों' ने 'शेर' जैसे भरत को घेरने के लिए जाल बिछाया था, और हथियार डालने के बाद भी 'कायरों' ने उन पर पीठ पीछे वार किया, जिससे 'सिस्टम' का असली चेहरा सामने आया। इस घटना को केवल इस्तीफे की मांग तक सीमित न रखकर, 'राष्ट्र जागरण' को ही सच्ची श्रद्धांजलि बताया गया है, और 'देश को नई आज़ादी' दिलाने का संकल्प दोहराया गया है।

इस 'बलिदान' की स्मृति में, लोगों से अपील की गई है कि वे भरत तिवारी के नाम की जर्सी पहनकर कार्यालय जाएँ, ताकि अटके हुए काम शायद हो सकें। न्याय के लिए 'कलम कागज' से 'सिस्टम' से लड़ने की बात कही गई है, न कि हिंसा का सहारा लेने की। यह भी दोहराया गया है कि न्याय के लिए अनशन हमेशा से ही एक प्रमुख हथियार रहा है, और इस मांग के साथ 'पूरा बिहार' एकजुट खड़ा है। सचिन मिश्र नामक एक व्यक्ति ने घोषणा की है कि जब तक भरत तिवारी को न्याय नहीं मिल जाता, वह अनशन पर बैठे रहेंगे, और सरकार को चुनौती देते हुए कहा, 'आओ कितने भरत को मरोगे।।'

यह आह्वान सिर्फ प्रतीकात्मक प्रतिक्रियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि 'आत्ममंथन, उत्तरदायित्व और राष्ट्रीय पुनर्निर्माण' की मांग करता है। संदेश में यह भी जोर दिया गया है कि 'सरकार किसी की भी हो', उसकी कमियों को निडर होकर उजागर करना एक अच्छे नागरिक होने का प्रमाण है और यही सच्ची देशभक्ति है। इसके विपरीत, 'तलवे चाटने वाले' देशभक्त नहीं बल्कि 'दलाल' होते हैं, इस बात पर बल देते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल जी को भी याद किया गया है।
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Voice of people गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    8 hrs ago
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