बस्ती जनपद के मुण्डेरवा थाना क्षेत्र में साइबर ठगी का शिकार हुए एक पीड़ित के चेहरे पर उस समय खुशी लौट आई, जब मुण्डेरवा पुलिस की सक्रियता से उसके खाते से उड़ाई गई लाखों की रकम वापस मिल गई। थानाध्यक्ष प्रदीप सिंह और उनकी टीम के इस सराहनीय कार्य की पूरे क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है। मिली जानकारी के अनुसार, खजौला निवासी रंजीत पुत्र हरिराम साइबर ठगी का शिकार हो गए थे। अज्ञात ठगों ने उनके बैंक खाते से ₹1,64,441 की बड़ी धनराशि निकाल ली थी, जिससे पीड़ित गहरे सदमे में था। उन्होंने तत्काल मुण्डेरवा थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए, थानाध्यक्ष प्रदीप सिंह ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी और बिना समय गंवाए साइबर सेल की टीम को सक्रिय किया। प्रभारी साइबर सेल अमरनाथ यादव, महिला आरक्षी शिमला मौर्या और महिला आरक्षी अंशिका गुप्ता की टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और त्वरित कार्रवाई के बल पर ठगों के नेटवर्क पर दबाव बनाया। इन अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप, ठगी गई रकम में से ₹1,36,960 पीड़ित रंजीत के खाते में सुरक्षित वापस आ गए। अपनी कार्यशैली और संवेदनशीलता के लिए जाने जाने वाले थानाध्यक्ष प्रदीप सिंह की इस कार्रवाई ने साइबर अपराधियों के बीच खौफ पैदा कर दिया है। रकम वापस मिलने पर पीड़ित रंजीत ने पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि ठगी गई रकम इतनी जल्दी वापस मिलेगी, और मुण्डेरवा पुलिस ने साबित किया है कि वे आम जनता की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर हैं। स्थानीय नागरिकों का भी मानना है कि यदि हर शिकायत पर इसी प्रकार त्वरित कार्रवाई की जाए, तो साइबर ठगों के हौसले पूरी तरह पस्त हो जाएंगे। यह घटना न केवल पीड़ित को न्याय दिलाने वाली रही, बल्कि आम जनमानस में खाकी के प्रति विश्वास को और अधिक मजबूत करने का काम किया है।
बस्ती जनपद के मुण्डेरवा थाना क्षेत्र में साइबर ठगी का शिकार हुए एक पीड़ित के चेहरे पर उस समय खुशी लौट आई, जब मुण्डेरवा पुलिस की सक्रियता से उसके खाते से उड़ाई गई लाखों की रकम वापस मिल गई। थानाध्यक्ष प्रदीप सिंह और उनकी टीम के इस सराहनीय कार्य की पूरे क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है। मिली जानकारी के अनुसार, खजौला निवासी रंजीत पुत्र हरिराम साइबर ठगी का शिकार हो गए थे। अज्ञात ठगों ने उनके बैंक खाते से ₹1,64,441 की बड़ी धनराशि निकाल ली थी, जिससे पीड़ित गहरे सदमे में था। उन्होंने तत्काल मुण्डेरवा थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए, थानाध्यक्ष प्रदीप सिंह ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी और बिना समय गंवाए साइबर सेल की टीम को सक्रिय किया। प्रभारी साइबर सेल अमरनाथ यादव, महिला आरक्षी शिमला मौर्या और महिला आरक्षी अंशिका गुप्ता की टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और त्वरित कार्रवाई के बल पर ठगों के नेटवर्क पर दबाव बनाया। इन अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप, ठगी गई रकम में से ₹1,36,960 पीड़ित रंजीत के खाते में सुरक्षित वापस आ गए। अपनी कार्यशैली और संवेदनशीलता के लिए जाने जाने वाले थानाध्यक्ष प्रदीप सिंह की इस कार्रवाई ने साइबर अपराधियों के बीच खौफ पैदा कर दिया है। रकम वापस मिलने पर पीड़ित रंजीत ने पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि ठगी गई रकम इतनी जल्दी वापस मिलेगी, और मुण्डेरवा पुलिस ने साबित किया है कि वे आम जनता की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर हैं। स्थानीय नागरिकों का भी मानना है कि यदि हर शिकायत पर इसी प्रकार त्वरित कार्रवाई की जाए, तो साइबर ठगों के हौसले पूरी तरह पस्त हो जाएंगे। यह घटना न केवल पीड़ित को न्याय दिलाने वाली रही, बल्कि आम जनमानस में खाकी के प्रति विश्वास को और अधिक मजबूत करने का काम किया है।
- Post by Jitendra Kumar1
- आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर, हर्रैया के लोकप्रिय विधायक माननीय श्री अजय सिंह जी ने राम रेखा मंदिर के प्रांगण में आयोजित एक योग शिविर में भागीदारी की। इस दौरान योग को भारतीय संस्कृति की एक अमूल्य धरोहर बताया गया, जो स्वस्थ शरीर, शांत मन और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देता है। आज के व्यस्त जीवन में योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाता है, बल्कि मानसिक संतुलन और आत्मिक शांति भी प्रदान करता है। यह महत्वपूर्ण दिन देश और दुनिया भर में मनाया गया, जहाँ करोड़ों लोगों ने योग करके स्वास्थ्य और संतुलित जीवन का संदेश दिया।1
- आज दिनांक 21 जून 2026 को संतकबीरनगर के पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पुलिस लाइन परेड ग्राउंड में पुलिस कर्मियों के साथ योगाभ्यास किया। इस दिन को एक उत्सव के रूप में मनाया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य पुलिसकर्मियों को शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रखना था। योगाभ्यास के दौरान, एक योग प्रशिक्षक ने सूक्ष्म व्यायाम, अनुलोम-विलोम, कपालभाति, पद्मासन, वज्रासन, सिद्धासन, मत्स्यासन, वक्रासन, पवनमुक्तासन, नौकासन, श्वासन, ताड़ासन, शीर्षासन और सूर्य नमस्कार जैसे विभिन्न आसनों का अभ्यास कराया। पुलिसकर्मियों को आसन, प्राणायाम और मुद्रा से लाभ प्राप्त करने के लिए सुरक्षित और नियमित अभ्यास हेतु प्रोत्साहित किया गया। यह भी बताया गया कि योग न केवल बीमारियों का उपचार करता है, बल्कि इसे अपनाकर कई शारीरिक और मानसिक कमियों को भी दूर किया जा सकता है। स्वस्थ रहने और तन व मन दोनों को सेहतमंद बनाए रखने के लिए नियमित रूप से योग को जीवन में अपनाना आवश्यक है। इसी क्रम में, पुलिस अधीक्षक महोदय के निर्देशन में जनपद के समस्त थानों पर भी योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस कार्यक्रम में अपर पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर सुशील कुमार सिंह और क्षेत्राधिकारी मेंहदावल सर्वदवन सिंह सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारीगण भी सम्मिलित रहे, जिससे 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर संतकबीरनगर रिजर्व पुलिस लाइन में सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम सफल रहा।4
- संतकबीरनगर जिले के निखरकपार चौराहे पर सर्वोदय लघु माध्यमिक विद्यालय से लगभग 200 मीटर की दूरी पर "HOPE PHARMACY AND POLYCLINIC" का भव्य उद्घाटन हुआ। एमबीबीएस, एमडी मेडिसिन डॉ. एस.सी. वर्मा ने फीता काटकर इसका शुभारम्भ किया। डॉ. वर्मा यहाँ मधुमेह, चेस्ट, मस्तिष्क और गैस्ट्रो रोगों का विशेष इलाज प्रदान कर रहे हैं। इस क्लिनिक पर कमर दर्द, ब्लड प्रेशर, शुगर, फैटी लिवर, पीलिया, बच्चों की निमोनिया, नींद और नसों से जुड़ी बीमारियों सहित विभिन्न रोगों का उपचार उपलब्ध है। प्रबंधन के अनुसार, सभी मरीजों को विशेष सुविधाएँ और दवाओं पर छूट भी दी जाएगी। इस अस्पताल को विशेष रूप से गरीबों की सेवा के लिए समर्पित किया गया है, ताकि आम जनता और गरीब लोगों को इलाज के लिए गोरखपुर या बस्ती भटकना न पड़े और वे समय पर अपना उपचार करा सकें। इस कार्यक्रम में प्रोपराइटर परवेज आलम और समसुल आजम के साथ असगर अली, इदरीश अली, मोहम्मद इसराइल, सियरासाथा के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि शोएब अहमद, मिगुसिह, रामनयन यादव, अनिरुद्ध उपाध्याय और प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष शोएब अहमद सहित सैकड़ों अन्य लोग उपस्थित रहे।2
- संतकबीरनगर में एक महिला पत्रकार के साथ कथित दुर्व्यवहार और उनके पत्रकारिता कार्य में बाधा डालने के गंभीर मामले में राष्ट्रीय पत्रकार एकता संघ और प्रेस क्लब उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग, लखनऊ में शिकायत दर्ज कराई है। संगठनों ने इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है। राष्ट्रीय पत्रकार एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल सिंह और राष्ट्रीय संगठन मंत्री करिश्मा राव एडवोकेट द्वारा भेजे गए शिकायत पत्र के अनुसार, यह घटना 21 जून 2026 को तहसील धनघटा में आयोजित जनसुनवाई/तहसील दिवस कार्यक्रम के दौरान हुई। इसमें पत्रकार विंध्यवासिनी यादव जनहित से जुड़े विषयों की कवरेज कर रही थीं। आरोप है कि इसी दौरान एसडीएम धनघटा रविकांत चौबे ने महिला पत्रकार को वीडियो बनाने से रोका और उनके पत्रकारिता कार्य में बाधा उत्पन्न की। शिकायत पत्र में यह भी कहा गया है कि वार्ता के दौरान संबंधित अधिकारी ने केवल 'चुनिंदा बड़े समाचार पत्रों' को मान्यता देने जैसी टिप्पणी की, जिससे पत्रकारों के सम्मान और समान अधिकारों पर सवाल खड़े होते हैं। संगठनों का तर्क है कि जनसुनवाई और तहसील समाधान दिवस जैसे कार्यक्रम सार्वजनिक हित और पारदर्शिता से संबंधित होते हैं, और इनकी कवरेज करना पत्रकारों का अधिकार व दायित्व है। पत्र में इस प्रकार के व्यवहार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्र पत्रकारिता की भावना के विपरीत बताते हुए, भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि पत्रकारों के साथ उनके संस्थान के आधार पर भेदभाव करना उचित नहीं है। राज्य महिला आयोग से मांग की गई है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। संगठनों ने महिला पत्रकार विंध्यवासिनी यादव के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार की जांच करने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही, महिला पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्र रूप से कार्य करने के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग की गई है। संघ ने विश्वास जताया है कि महिला आयोग इस मामले का संज्ञान लेकर न्यायोचित कार्रवाई करेगा।1
- बिहार के भोजपुर जिले में भरत तिवारी का एनकाउंटर किए जाने का मामला सामने आया है। बताया गया है कि यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि वे गरीबों के हक में आवाज उठाते थे। इस घटना को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर बिहार सरकार इस मामले में क्या कर रही है। पूछा गया है कि भारत में गरीबों के लिए हक मांगना क्या अपराध है और अगर ऐसा है, तो ऐसी 'अपराध' की यही सजा है।1
- यह सोशल मीडिया पोस्ट भरत तिवारी को 'आज का भगत सिंह' बताते हुए उनकी शहादत का जिक्र करता है। पोस्ट में कहा गया है कि जिस तरह भगत सिंह ने संघर्ष करते हुए अपनी शहादत दी, उसी तरह भरत तिवारी भी लड़ते हुए शहीद हुए। दोनों की शहादत में मुख्य अंतर यह बताया गया है कि भगत सिंह को अंग्रेजों ने शहीद किया, जबकि भरत तिवारी को 'अपनों' ने शहीद किया।1