हरियाणा के करनाल जिले के इंद्री उपमंडल स्थित सैयद छपरा गांव में 17 जून से लगातार मजलिसों का आयोजन किया जा रहा था, जिसका आज मोहर्रम की 10 तारीख को अंतिम दिन रहा। इस बेहद अहम दिन को योमे-ए आशुरा कहा जाता है, जब इमाम हुसैन ने हक और इंसाफ के लिए अपनी व अपने साथियों की जान कुर्बान कर दी थी। यह कुर्बानी आज भी इंसानियत, सब्र और ईमानदारी की मिसाल मानी जाती है। मौलाना अली मेहंदी ने अपनी तकरीर में बताया कि इस दिन शिया समुदाय के लोग इमाम हुसैन की याद में मातम करते हैं और काले कपड़े पहनकर जुलूस निकालते हैं। यह पूरा महीना शोक का महीना माना जाता है। उन्होंने कर्बला के मैदान में हुई जंग का जिक्र किया, जहाँ यजीद (उस समय का बादशाह) के सैनिकों और पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन के बीच लड़ाई हुई थी, और मोहर्रम की 10 तारीख को इमाम हुसैन सहित उनके 72 साथी शहीद हो गए थे। मौलाना ने इस्लाम में इंसानियत के महत्व पर जोर देते हुए भारत की गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी मेल मिलाप और भाईचारे को पूरी दुनिया में एक मिसाल बताया। गांव में मजलिस के तुरंत बाद इमाम हुसैन का जूल्जना (घोड़ा) और ताबूत बरामद हुआ, जिसके बाद जंजीर का मातम भी किया गया। रजा अब्बास के अनुसार, शिया समुदाय मोहर्रम का चांद देखते ही कई दिनों तक मजलिसों का आयोजन करता है, जिसमें मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद किया जाता है। सभी गांव वाले इस मौके पर मौजूद रहे, और मोहर्रम के अवसर पर ताजिया भी निकाला गया।
हरियाणा के करनाल जिले के इंद्री उपमंडल स्थित सैयद छपरा गांव में 17 जून से लगातार मजलिसों का आयोजन किया जा रहा था, जिसका आज मोहर्रम की 10 तारीख को अंतिम दिन रहा। इस बेहद अहम दिन को योमे-ए आशुरा कहा जाता है, जब इमाम हुसैन ने हक और इंसाफ के लिए अपनी व अपने साथियों की जान कुर्बान कर दी थी। यह कुर्बानी आज भी इंसानियत, सब्र और ईमानदारी की मिसाल मानी जाती है। मौलाना अली मेहंदी ने अपनी तकरीर में बताया कि इस दिन शिया समुदाय के लोग इमाम हुसैन की याद में मातम करते हैं और काले कपड़े पहनकर जुलूस निकालते हैं। यह पूरा महीना शोक का महीना माना जाता है। उन्होंने कर्बला के मैदान में हुई जंग का जिक्र किया, जहाँ यजीद (उस समय का बादशाह) के सैनिकों और पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन के बीच लड़ाई हुई थी, और मोहर्रम की 10 तारीख को इमाम हुसैन सहित उनके 72 साथी शहीद हो गए थे। मौलाना ने इस्लाम में इंसानियत के महत्व पर जोर देते हुए भारत की गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी मेल मिलाप और भाईचारे को पूरी दुनिया में एक मिसाल बताया। गांव में मजलिस के तुरंत बाद इमाम हुसैन का जूल्जना (घोड़ा) और ताबूत बरामद हुआ, जिसके बाद जंजीर का मातम भी किया गया। रजा अब्बास के अनुसार, शिया समुदाय मोहर्रम का चांद देखते ही कई दिनों तक मजलिसों का आयोजन करता है, जिसमें मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद किया जाता है। सभी गांव वाले इस मौके पर मौजूद रहे, और मोहर्रम के अवसर पर ताजिया भी निकाला गया।
- हरियाणा के करनाल जिले के इंद्री उपमंडल स्थित सैयद छपरा गांव में 17 जून से लगातार मजलिसों का आयोजन किया जा रहा था, जिसका आज मोहर्रम की 10 तारीख को अंतिम दिन रहा। इस बेहद अहम दिन को योमे-ए आशुरा कहा जाता है, जब इमाम हुसैन ने हक और इंसाफ के लिए अपनी व अपने साथियों की जान कुर्बान कर दी थी। यह कुर्बानी आज भी इंसानियत, सब्र और ईमानदारी की मिसाल मानी जाती है। मौलाना अली मेहंदी ने अपनी तकरीर में बताया कि इस दिन शिया समुदाय के लोग इमाम हुसैन की याद में मातम करते हैं और काले कपड़े पहनकर जुलूस निकालते हैं। यह पूरा महीना शोक का महीना माना जाता है। उन्होंने कर्बला के मैदान में हुई जंग का जिक्र किया, जहाँ यजीद (उस समय का बादशाह) के सैनिकों और पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन के बीच लड़ाई हुई थी, और मोहर्रम की 10 तारीख को इमाम हुसैन सहित उनके 72 साथी शहीद हो गए थे। मौलाना ने इस्लाम में इंसानियत के महत्व पर जोर देते हुए भारत की गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी मेल मिलाप और भाईचारे को पूरी दुनिया में एक मिसाल बताया। गांव में मजलिस के तुरंत बाद इमाम हुसैन का जूल्जना (घोड़ा) और ताबूत बरामद हुआ, जिसके बाद जंजीर का मातम भी किया गया। रजा अब्बास के अनुसार, शिया समुदाय मोहर्रम का चांद देखते ही कई दिनों तक मजलिसों का आयोजन करता है, जिसमें मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद किया जाता है। सभी गांव वाले इस मौके पर मौजूद रहे, और मोहर्रम के अवसर पर ताजिया भी निकाला गया।1
- हरियाणा के करनाल जिले में दुकान और शोरूम के लिए हिंदी वीडियो बनवाने की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह सेवाएं करनाल जिले के हर शहर में प्रदान की जाती हैं। ग्राहक अपनी दुकान या शोरूम के लिए हिंदी वीडियो के साथ-साथ किसी भी अन्य प्रकार की वीडियो बनवाने हेतु सीधे संपर्क कर सकते हैं।1
- करनाल में एक मानसिक तौर पर परेशान महिला की जलने से दुखद मृत्यु हो गई। इस दर्दनाक घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तत्काल मौके पर पहुँच गईं।1
- उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के नकुड़ तहसील और सरसावा थाना क्षेत्र के गदरहेड़ी गांव निवासी नवीन चौधरी ने अपने खेत की चकरोड को पक्की कराने की मांग की है। इस चकरोड की लंबाई लगभग 400 से 500 मीटर बताई गई है। चौधरी के अनुसार, इस संबंध में कई बार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायतें और मांगें दर्ज कराने के बावजूद आज तक इस चकरोड का निर्माण नहीं हो पाया है। उन्होंने अब अधिकारियों से निवेदन किया है कि चकरोड पर खड़ाऊँजा लगवाकर उसे पक्की करवाया जाए।1
- आरोग्य पंख फाउंडेशन के तत्वावधान में एक निःशुल्क नेत्र एवं दंत जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में पाठक अस्पताल (आई-क्यू सुपर स्पेशियलिटी आंखों का अस्पताल) के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने लोगों की आंखों की जांच की और उन्हें आवश्यक परामर्श प्रदान किया।1
- शामली के झिंझाना में स्थित टोल प्लाजा पर टोल टैक्स मांगने को लेकर भारी बवाल हो गया। दबंगों ने टोल कर्मी अजय राठौर पर ईंट-पत्थरों से जानलेवा हमला कर दिया, साथ ही टोल बूथ में भी तोड़फोड़ की। पीड़ित संदीप की शिकायत के आधार पर पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।1
- शामली जिले में स्थित सतलोक आश्रम में एक आध्यात्मिक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। इस प्रदर्शनी को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े, जिससे वहां काफी भीड़भाड़ देखी गई।1
- राज्यसभा सांसद संजय भाटिया ने पंजाब के मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि उनकी भूमिका एक मुख्यमंत्री से कहीं ज़्यादा एक जोकर की रही है।1