नालंदा की ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध हस्तकरघा कला बावन बूटी को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिलने के बाद बुनकर समाज में भारी उत्साह का माहौल है। उद्योग विभाग और सरकार के सामूहिक प्रयासों से मिली इस महत्वपूर्ण उपलब्धि ने बावन बूटी की पहचान को अब राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी और अधिक मजबूत किया है। बुनकरों का मानना है कि इस GI टैग से उनके उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे हजारों परिवारों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। पद्मश्री सम्मानित बुनकर स्वर्गीय कपिलदेव प्रसाद के परिवार ने भी इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर अपनी खुशी व्यक्त करते हुए इसे नालंदा और पूरे बिहार के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवशाली क्षण बताया है। यह GI टैग बावन बूटी की विशिष्टता और अद्वितीयता को संरक्षण प्रदान करेगा, जिससे इसकी समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित और अक्षुण्ण बनाए रखने में मदद मिलेगी।
नालंदा की ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध हस्तकरघा कला बावन बूटी को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिलने के बाद बुनकर समाज में भारी उत्साह का माहौल है। उद्योग विभाग और सरकार के सामूहिक प्रयासों से मिली इस महत्वपूर्ण उपलब्धि ने बावन बूटी की पहचान को अब राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी और अधिक मजबूत किया है। बुनकरों का मानना है कि इस GI टैग से उनके उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे हजारों परिवारों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। पद्मश्री सम्मानित बुनकर स्वर्गीय कपिलदेव प्रसाद के परिवार ने भी इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर अपनी खुशी व्यक्त करते हुए इसे नालंदा और पूरे बिहार के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवशाली क्षण बताया है। यह GI टैग बावन बूटी की विशिष्टता और अद्वितीयता को संरक्षण प्रदान करेगा, जिससे इसकी समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित और अक्षुण्ण बनाए रखने में मदद मिलेगी।
- प्रेम और उमंग से भरा दिलों का मेला आता है, जो एक बार आकर फिर चला जाता है। यह अनुभव ठीक वैसे ही क्षणिक होता है जैसे कोई सुंदर एहसास मन में एक गहरा विचार छोड़ जाता है।1
- नालंदा की ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध हस्तकरघा कला बावन बूटी को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिलने के बाद बुनकर समाज में भारी उत्साह का माहौल है। उद्योग विभाग और सरकार के सामूहिक प्रयासों से मिली इस महत्वपूर्ण उपलब्धि ने बावन बूटी की पहचान को अब राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी और अधिक मजबूत किया है। बुनकरों का मानना है कि इस GI टैग से उनके उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे हजारों परिवारों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। पद्मश्री सम्मानित बुनकर स्वर्गीय कपिलदेव प्रसाद के परिवार ने भी इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर अपनी खुशी व्यक्त करते हुए इसे नालंदा और पूरे बिहार के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवशाली क्षण बताया है। यह GI टैग बावन बूटी की विशिष्टता और अद्वितीयता को संरक्षण प्रदान करेगा, जिससे इसकी समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित और अक्षुण्ण बनाए रखने में मदद मिलेगी।1
- सीपीआई (एमएल) की एमएलसी शशी यादव ने बिहारशरीफ (नालंदा) में बयान देते हुए कहा है कि "कंगन विवाद" असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का एक प्रयास मात्र है।1
- बिहारशरीफ (नालंदा) से वंदे भारत न्यूज़ संवाददाता रमेंद्र कुमार की खबर के अनुसार, सीपीआई (एमएल) की शशी यादव (एमएलसी) ने 'कंगन विवाद' को असली मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया है।1
- बिहार शरीफ, नालंदा स्थित रॉयल पैलेस होटल में सामाजिक न्याय मोर्चा के तत्वावधान में एक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में डॉ. भीमराव अंबेडकर संघर्ष विचार मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल पासवान ने हिस्सा लिया और सभा को संबोधित किया। यह कार्यक्रम 13 जून, 2026 को संपन्न हुआ।1
- भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में बिहार के भाजपा प्रदेश प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने आज बिहार शरीफ के परिषद भवन में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश के नाम किए गए कार्यों की विस्तार से चर्चा की।2
- जालोर जिले के चितलवाना क्षेत्र से एक दुखद घटना सामने आई है, जहाँ घर के बाहर टहल रहे एक बुजुर्ग व्यक्ति पर अचानक एक सांड ने हमला कर दिया। इस हमले में बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सांड ने बुजुर्ग को अपने सींगों से उठाकर उछाल दिया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। घायल अवस्था में उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है, और स्थानीय निवासियों ने आवारा पशुओं की समस्या पर गहरी चिंता व्यक्त की है।1
- यह पोस्ट एक भक्तिमय प्रार्थना प्रस्तुत करती है, जिसमें 'कर्पूर गौरम, करुणा वार्ताम्' और 'संसार सारम, भुजगेन्द्र हारम' जैसी पवित्र पंक्तियाँ शामिल हैं। यह पाठ एक आराध्य देव का गुणगान करता है, जिन्हें कर्पूर के समान श्वेत, करुणा का सागर, संसार का सार तत्व और नागराज को हार के रूप में धारण करने वाले के रूप में वर्णित किया गया है। यह रचना भक्ति और श्रद्धा से ओत-प्रोत है।1