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1914: इतिहास के बारे में अक्सर कहा जाता है कि समय का पहिया घूमकर फिर वहीं आ जाता है। लेकिन क्या कभी ऐसा भी हो सकता है कि सिर्फ घटनाएं ही नहीं बल्कि तारीखें और कैलेंडर भी खुद को दोहराने लगें? इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसी ही चर्चा तेजी से वायरल हो रही है। दावा किया जा रहा है कि वर्ष 2026 का कैलेंडर बिल्कुल वैसा ही है जैसा 1914 और 1942 में था। 1914 वही साल था जब प्रथम विश्व युद्ध शुरू हुआ और दुनिया की राजनीति हमेशा के लिए बदल गई। वहीं 1942 द्वितीय विश्व युद्ध का सबसे निर्णायक और रक्तरंजित दौर माना जाता है। अब जब 2026 का कैलेंडर इन दोनों वर्षों से मेल खाता बताया जा रहा है, तो कई लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या इतिहास एक बार फिर किसी बड़े मोड़ की ओर बढ़ रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कैलेंडर की यह समानता महज गणितीय संयोग है, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों ने इस चर्चा को और भी दिलचस्प बना दिया है। आइए जानते हैं इस पर विस्तार से - कैलेंडर का गणित और दोहराव का वैज्ञानिक कारण कैलेंडर के गणित को समझने वाले विशेषज्ञ बताते हैं कि ग्रेगोरियन कैलेंडर में तारीखों और दिनों का क्रम हमेशा एक जैसा नहीं रहता, लेकिन कुछ वर्षों के बाद यह पैटर्न फिर से दोहर सकता है। लीप ईयर और सामान्य वर्षों के संयोजन के कारण यह चक्र बनता है। गणितीय गणना के अनुसार 2026 का कैलेंडर ठीक वैसा ही है जैसा 1914 में था। यानी 112 साल बाद वही तारीखें और वही दिन दोबारा दिखाई दे रहे हैं। इसी तरह 1942 और 2026 के बीच 84 साल का अंतर है और इस वजह से इन दोनों वर्षों का कैलेंडर भी काफी हद तक एक जैसा दिखाई देता है। कैलेंडर का यह दोहराव खगोलशास्त्र और गणित का सामान्य नियम है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसमें कोई रहस्य या भविष्यवाणी छिपी नहीं होती, लेकिन जब किसी खास साल से जुड़ी बड़ी ऐतिहासिक घटनाएं हों तो लोग इसे अलग नजरिए से देखने लगते हैं।

17 hrs ago
user_Sunita Jain
Sunita Jain
Saharanpur, Uttar Pradesh•
17 hrs ago

1914: इतिहास के बारे में अक्सर कहा जाता है कि समय का पहिया घूमकर फिर वहीं आ जाता है। लेकिन क्या कभी ऐसा भी हो सकता है कि सिर्फ घटनाएं ही नहीं बल्कि तारीखें और कैलेंडर भी खुद को दोहराने लगें? इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसी ही चर्चा तेजी से वायरल हो रही है। दावा किया जा रहा है कि वर्ष 2026 का कैलेंडर बिल्कुल वैसा ही है जैसा 1914 और 1942 में था। 1914 वही साल था जब प्रथम विश्व युद्ध शुरू हुआ और दुनिया की राजनीति हमेशा के लिए बदल गई। वहीं 1942 द्वितीय विश्व युद्ध का सबसे निर्णायक और रक्तरंजित दौर माना जाता है। अब जब 2026 का कैलेंडर इन दोनों वर्षों से मेल खाता बताया जा रहा है, तो कई लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या इतिहास एक बार फिर किसी बड़े मोड़ की ओर बढ़ रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कैलेंडर की यह समानता महज गणितीय संयोग है, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों ने इस चर्चा को और भी दिलचस्प बना दिया है। आइए जानते हैं इस पर विस्तार से - कैलेंडर का गणित और दोहराव का वैज्ञानिक कारण कैलेंडर के गणित को समझने वाले विशेषज्ञ बताते हैं कि ग्रेगोरियन कैलेंडर में तारीखों और दिनों का क्रम हमेशा एक जैसा नहीं रहता, लेकिन कुछ वर्षों के बाद यह पैटर्न फिर से दोहर सकता है। लीप ईयर और सामान्य वर्षों के संयोजन के कारण यह चक्र बनता है। गणितीय गणना के अनुसार 2026 का कैलेंडर ठीक वैसा ही है जैसा 1914 में था। यानी 112 साल बाद वही तारीखें और वही दिन दोबारा दिखाई दे रहे हैं। इसी तरह 1942 और 2026 के बीच 84 साल का अंतर है और इस वजह से इन दोनों वर्षों का कैलेंडर भी काफी हद तक एक जैसा दिखाई देता है। कैलेंडर का यह दोहराव खगोलशास्त्र और गणित का सामान्य नियम है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसमें कोई रहस्य या भविष्यवाणी छिपी नहीं होती, लेकिन जब किसी खास साल से जुड़ी बड़ी ऐतिहासिक घटनाएं हों तो लोग इसे अलग नजरिए से देखने लगते हैं।

  • user_DK
    DK
    Aron, Guna
    chudel khevdi ye baal ko katwa hi de na baar baar hata Rahi he na shakal ki na soorat ki kalyugi orat
    8 hrs ago
  • user_दीवानराम, नैनीताल उत्तराखंड
    दीवानराम, नैनीताल उत्तराखंड
    ओखलकांडा, नैनीताल, उत्तराखंड
    👌
    10 hrs ago
  • user_Ranjeet kumar Thakur
    Ranjeet kumar Thakur
    मंसूरचक, बेगूसराय, बिहार
    💣
    12 hrs ago
  • user_User9664
    User9664
    Bhainsdehi, Betul
    💣
    12 hrs ago
More news from Uttar Pradesh and nearby areas
  • सहारनपुर। मिर्जापुर थाना क्षेत्र के गांव नानूवाला में आपसी विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया। एक ही समुदाय के दो पक्ष आमने-सामने आ गए, जिसके बाद जमकर लाठी-डंडे चले।जानकारी के अनुसार, नशे में धुत एक युवक ने पहले एक महिला पर डंडे से हमला कर उसे घायल कर दिया। महिला को बचाने पहुंची दूसरी युवती भी हमले का शिकार हो गई। इस घटना के बाद दोनों पक्षों में तनाव बढ़ गया और देखते ही देखते झड़प हिंसक हो गई।सूचना मिलते ही डायल 112 पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन उग्र भीड़ द्वारा पुलिस वाहन पर हमला किए जाने की भी खबर है, जिसमें गाड़ी का शीशा टूटने की बात सामने आ रही है। मौके पर पहुंची थाना पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर हालात को काबू में किया। घायल दोनों महिलाओं को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है।फिलहाल गांव में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है, हालांकि पुलिस की मौजूदगी में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। वीडियो:-
    1
    सहारनपुर।
मिर्जापुर थाना क्षेत्र के गांव नानूवाला में आपसी विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया। एक ही समुदाय के दो पक्ष आमने-सामने आ गए, जिसके बाद जमकर लाठी-डंडे चले।जानकारी के अनुसार, नशे में धुत एक युवक ने पहले एक महिला पर डंडे से हमला कर उसे घायल कर दिया। महिला को बचाने पहुंची दूसरी युवती भी हमले का शिकार हो गई। इस घटना के बाद दोनों पक्षों में तनाव बढ़ गया और देखते ही देखते झड़प हिंसक हो गई।सूचना मिलते ही डायल 112 पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन उग्र भीड़ द्वारा पुलिस वाहन पर हमला किए जाने की भी खबर है, जिसमें गाड़ी का शीशा टूटने की बात सामने आ रही है। मौके पर पहुंची थाना पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर हालात को काबू में किया। घायल दोनों महिलाओं को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है।फिलहाल गांव में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है, हालांकि पुलिस की मौजूदगी में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
वीडियो:-
    user_Quazi Shahid Ahmed
    Quazi Shahid Ahmed
    Saharanpur, Uttar Pradesh•
    2 hrs ago
  • 1914: इतिहास के बारे में अक्सर कहा जाता है कि समय का पहिया घूमकर फिर वहीं आ जाता है। लेकिन क्या कभी ऐसा भी हो सकता है कि सिर्फ घटनाएं ही नहीं बल्कि तारीखें और कैलेंडर भी खुद को दोहराने लगें? इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसी ही चर्चा तेजी से वायरल हो रही है। दावा किया जा रहा है कि वर्ष 2026 का कैलेंडर बिल्कुल वैसा ही है जैसा 1914 और 1942 में था। 1914 वही साल था जब प्रथम विश्व युद्ध शुरू हुआ और दुनिया की राजनीति हमेशा के लिए बदल गई। वहीं 1942 द्वितीय विश्व युद्ध का सबसे निर्णायक और रक्तरंजित दौर माना जाता है। अब जब 2026 का कैलेंडर इन दोनों वर्षों से मेल खाता बताया जा रहा है, तो कई लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या इतिहास एक बार फिर किसी बड़े मोड़ की ओर बढ़ रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कैलेंडर की यह समानता महज गणितीय संयोग है, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों ने इस चर्चा को और भी दिलचस्प बना दिया है। आइए जानते हैं इस पर विस्तार से - कैलेंडर का गणित और दोहराव का वैज्ञानिक कारण कैलेंडर के गणित को समझने वाले विशेषज्ञ बताते हैं कि ग्रेगोरियन कैलेंडर में तारीखों और दिनों का क्रम हमेशा एक जैसा नहीं रहता, लेकिन कुछ वर्षों के बाद यह पैटर्न फिर से दोहर सकता है। लीप ईयर और सामान्य वर्षों के संयोजन के कारण यह चक्र बनता है। गणितीय गणना के अनुसार 2026 का कैलेंडर ठीक वैसा ही है जैसा 1914 में था। यानी 112 साल बाद वही तारीखें और वही दिन दोबारा दिखाई दे रहे हैं। इसी तरह 1942 और 2026 के बीच 84 साल का अंतर है और इस वजह से इन दोनों वर्षों का कैलेंडर भी काफी हद तक एक जैसा दिखाई देता है। कैलेंडर का यह दोहराव खगोलशास्त्र और गणित का सामान्य नियम है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसमें कोई रहस्य या भविष्यवाणी छिपी नहीं होती, लेकिन जब किसी खास साल से जुड़ी बड़ी ऐतिहासिक घटनाएं हों तो लोग इसे अलग नजरिए से देखने लगते हैं।
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    1914: इतिहास के बारे में अक्सर कहा जाता है कि समय का पहिया घूमकर फिर वहीं आ जाता है। लेकिन क्या कभी ऐसा भी हो सकता है कि सिर्फ घटनाएं ही नहीं बल्कि तारीखें और कैलेंडर भी खुद को दोहराने लगें?
इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसी ही चर्चा तेजी से वायरल हो रही है। दावा किया जा रहा है कि वर्ष 2026 का कैलेंडर बिल्कुल वैसा ही है जैसा 1914 और 1942 में था।
1914 वही साल था जब प्रथम विश्व युद्ध शुरू हुआ और दुनिया की राजनीति हमेशा के लिए बदल गई। वहीं 1942 द्वितीय विश्व युद्ध का सबसे निर्णायक और रक्तरंजित दौर माना जाता है। अब जब 2026 का कैलेंडर इन दोनों वर्षों से मेल खाता बताया जा रहा है, तो कई लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या इतिहास एक बार फिर किसी बड़े मोड़ की ओर बढ़ रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कैलेंडर की यह समानता महज गणितीय संयोग है, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों ने इस चर्चा को और भी दिलचस्प बना दिया है। आइए जानते हैं इस पर विस्तार से -
कैलेंडर का गणित और दोहराव का वैज्ञानिक कारण
कैलेंडर के गणित को समझने वाले विशेषज्ञ बताते हैं कि ग्रेगोरियन कैलेंडर में तारीखों और दिनों का क्रम हमेशा एक जैसा नहीं रहता, लेकिन कुछ वर्षों के बाद यह पैटर्न फिर से दोहर सकता है। लीप ईयर और सामान्य वर्षों के संयोजन के कारण यह चक्र बनता है। गणितीय गणना के अनुसार 2026 का कैलेंडर ठीक वैसा ही है जैसा 1914 में था। यानी 112 साल बाद वही तारीखें और वही दिन दोबारा दिखाई दे रहे हैं। इसी तरह 1942 और 2026 के बीच 84 साल का अंतर है और इस वजह से इन दोनों वर्षों का कैलेंडर भी काफी हद तक एक जैसा दिखाई देता है। कैलेंडर का यह दोहराव खगोलशास्त्र और गणित का सामान्य नियम है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसमें कोई रहस्य या भविष्यवाणी छिपी नहीं होती, लेकिन जब किसी खास साल से जुड़ी बड़ी ऐतिहासिक घटनाएं हों तो लोग इसे अलग नजरिए से देखने लगते हैं।
    user_Sunita Jain
    Sunita Jain
    Saharanpur, Uttar Pradesh•
    17 hrs ago
  • कस्बा गंगोह में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत की ओडिशा में किसान पंचायत के दौरान गिरफ्तारी की खबर से किसानों में भारी आक्रोश फैल गया - पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस घटना को लेकर किसानों में रोष देखने को मिल रहा है। इसी के विरोध में सोमवार को गंगोह कोतवाली परिसर में भाकियू कार्यकर्ताओं ने जोरदार धरना प्रदर्शन किया-भाकियू टिकैत गुट के गंगोह ब्लॉक अध्यक्ष चौधरी तहसीन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान कोतवाली परिसर में इकट्ठा हुए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए- किसानों ने टिकैत की गिरफ्तारी को किसानों की आवाज दबाने की साजिश बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई-धरने पर बैठे किसानों ने मांग की कि राकेश टिकैत को तुरंत रिहा किया जाए, अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा-इस दौरान क्षेत्र के कई किसान नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे
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    कस्बा गंगोह में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत की ओडिशा में किसान पंचायत के दौरान गिरफ्तारी की खबर से किसानों में भारी आक्रोश फैल गया - पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस घटना को लेकर किसानों में रोष देखने को मिल रहा है। इसी के विरोध में सोमवार को गंगोह कोतवाली परिसर में भाकियू कार्यकर्ताओं ने जोरदार धरना प्रदर्शन किया-भाकियू टिकैत गुट के गंगोह ब्लॉक अध्यक्ष चौधरी तहसीन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान कोतवाली परिसर में इकट्ठा हुए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए- किसानों ने टिकैत की गिरफ्तारी को किसानों की आवाज दबाने की साजिश बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई-धरने पर बैठे किसानों ने मांग की कि राकेश टिकैत को तुरंत रिहा किया जाए, अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा-इस दौरान क्षेत्र के कई किसान नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे
    user_मिस सोनिया
    मिस सोनिया
    Lawyer नकुड़, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • माता मनसा देवी के दर्शनों के बाद. खुशी से झूम उठे श्रद्धालू... माता के भजन गाकर और नाचकर खुशी का इजहार किया। माता मनसा देवी के दर्शनों को उमड़ रहे है भक्तजन।
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    माता मनसा देवी के दर्शनों के बाद. खुशी से झूम उठे श्रद्धालू... माता के भजन गाकर और नाचकर खुशी का इजहार किया। माता मनसा देवी के दर्शनों को उमड़ रहे है भक्तजन।
    user_Gulshan Dhiman
    Gulshan Dhiman
    रादौर, यमुनानगर, हरियाणा•
    3 hrs ago
  • Post by HR02 City News
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    Post by HR02 City News
    user_HR02 City News
    HR02 City News
    News Anchor जगाधरी, यमुनानगर, हरियाणा•
    7 hrs ago
  • सुनिए भारतीय किसान यूनियन राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत को
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    सुनिए भारतीय किसान यूनियन राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत को
    user_M News National digital
    M News National digital
    Local News Reporter मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश•
    28 min ago
  • मुजफ्फरनगर ब्रेकिंग खतौली जीटी रोड पर हुआ एक सड़क हादसा सड़क हादसे के दौरान कवरेज कर रहे पत्रकार के साथ दरोगा ने की अभद्रता हाथ पकड़ कर खींच कर जोर से धक्का दिया दरोगा कर्मवीर के पब्लिक से अच्छे रिलेशन ना होने की वजह से चौकी लाडपुर से हटाया जा चुका है पत्रकार के साथ अभद्रता का वीडियो हुआ वायरल जहां एक और जिले के कप्तान संजय कुमार वर्मा पब्लिक से अच्छे संबंध बनाने को जोर दे रहे हैं वहीं दूसरी ओर एस आई की अभद्रता का वीडियो सोशल मीडिया पर हुआ वायरल खतौली पत्रकारों में रोश
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    मुजफ्फरनगर ब्रेकिंग
खतौली जीटी रोड पर हुआ एक सड़क हादसा
सड़क हादसे के दौरान कवरेज कर रहे पत्रकार के साथ
दरोगा ने की अभद्रता हाथ पकड़ कर खींच कर जोर से धक्का दिया
दरोगा कर्मवीर के पब्लिक से अच्छे रिलेशन ना होने की वजह से चौकी लाडपुर से हटाया जा चुका है
पत्रकार के साथ अभद्रता का वीडियो हुआ वायरल
जहां एक और जिले के कप्तान संजय कुमार वर्मा पब्लिक से अच्छे संबंध बनाने को जोर दे रहे हैं
वहीं दूसरी ओर एस आई की अभद्रता का वीडियो सोशल मीडिया पर हुआ वायरल
खतौली पत्रकारों में रोश
    user_Fareed Ahmad
    Fareed Ahmad
    मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • सहारनपुर। थाना नगर कोतवाली क्षेत्र में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक युवक का शव उसके घर के अंदर फंदे से लटका हुआ पाया गया। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और आसपास के लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। सूचना के बाद स्थानीय पुलिस और फॉरेंसिक टीम तुरंत मौके पर पहुँची। और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। तथा शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस मामले की हर पहलू की गहनता से जांच कर रही है। वैसे मौत की असली वजह का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा। वीडियो:- जांच करती पुलिस तथा जानकारी देते परिजन
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    सहारनपुर।
थाना नगर कोतवाली क्षेत्र में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक युवक का शव उसके घर के अंदर फंदे से लटका हुआ पाया गया। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और आसपास के लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।
सूचना के बाद स्थानीय पुलिस और फॉरेंसिक टीम तुरंत मौके पर पहुँची। और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। तथा शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस मामले की हर पहलू की गहनता से जांच कर रही है। वैसे मौत की असली वजह का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा।
वीडियो:- जांच करती पुलिस तथा  जानकारी देते परिजन
    user_Quazi Shahid Ahmed
    Quazi Shahid Ahmed
    Saharanpur, Uttar Pradesh•
    6 hrs ago
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