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मालाखेड़ा CHC में दवाइयों में गड़बड़ी का मामला आया सामने अलवर जिले के में दवा वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अस्पताल से मरीजों को दी जा रही दवाइयों की पैकिंग (strip) बाहर से पूरी तरह सील्ड दिखाई देती है, लेकिन खोलने पर उनमें निर्धारित मात्रा से कम गोलियाँ/कैप्सूल निकल रहे हैं। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और दवा आपूर्ति प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। मरीजों का कहना है कि इस प्रकार की लापरवाही से उनका इलाज प्रभावित हो सकता है और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।

18 hrs ago
user_एस एस मिडिया अलवर
एस एस मिडिया अलवर
Local News Reporter मालखेड़ा, अलवर, राजस्थान•
18 hrs ago

मालाखेड़ा CHC में दवाइयों में गड़बड़ी का मामला आया सामने अलवर जिले के में दवा वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अस्पताल से मरीजों को दी जा रही दवाइयों की पैकिंग (strip) बाहर से पूरी तरह सील्ड दिखाई देती है, लेकिन खोलने पर उनमें निर्धारित मात्रा से कम गोलियाँ/कैप्सूल निकल रहे हैं। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और दवा आपूर्ति प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। मरीजों का कहना है कि इस प्रकार की लापरवाही से उनका इलाज प्रभावित हो सकता है और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।

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  • अलवर जिले के में दवा वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अस्पताल से मरीजों को दी जा रही दवाइयों की पैकिंग (strip) बाहर से पूरी तरह सील्ड दिखाई देती है, लेकिन खोलने पर उनमें निर्धारित मात्रा से कम गोलियाँ/कैप्सूल निकल रहे हैं। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और दवा आपूर्ति प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। मरीजों का कहना है कि इस प्रकार की लापरवाही से उनका इलाज प्रभावित हो सकता है और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।
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    अलवर जिले के में दवा वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अस्पताल से मरीजों को दी जा रही दवाइयों की पैकिंग (strip) बाहर से पूरी तरह सील्ड दिखाई देती है, लेकिन खोलने पर उनमें निर्धारित मात्रा से कम गोलियाँ/कैप्सूल निकल रहे हैं।
इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और दवा आपूर्ति प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। मरीजों का कहना है कि इस प्रकार की लापरवाही से उनका इलाज प्रभावित हो सकता है और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।
    user_एस एस मिडिया अलवर
    एस एस मिडिया अलवर
    Local News Reporter मालखेड़ा, अलवर, राजस्थान•
    18 hrs ago
  • Post by हेमराज ठेकेदार
    1
    Post by हेमराज ठेकेदार
    user_हेमराज ठेकेदार
    हेमराज ठेकेदार
    Voice of people Alwar, Rajasthan•
    4 hrs ago
  • Post by महेंद्र सिंह
    1
    Post by महेंद्र सिंह
    user_महेंद्र सिंह
    महेंद्र सिंह
    Local News Reporter अलवर, अलवर, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • चित्तौड़गढ़ जिले के भदेसर उपखंड के धीर जी खेड़ा गांव के बेटे और भारतीय सेना के जवान पहलवान गुर्जर का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। हर कोई अपने लाल के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ा। गांव की गलियां “भारत माता की जय” और “जय हिंद” के नारों से गूंज उठीं, लेकिन इन नारों के पीछे हर चेहरे पर गहरा दुख साफ नजर आ रहा था। भारतीय सेना के जवानों ने पूरे सम्मान के साथ पहलवान गुर्जर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके बाद मौजूद लोगों ने नम आंखों से पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर विधायक चंद्रभान सिंह आक्या और पूर्व विधायक भी पहुंचे और उन्होंने भी जवान को श्रद्धांजलि दी। माहौल इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। परिवार का दर्द देख हर कोई हो गया भावुक इस दौरान सबसे ज्यादा दिल को झकझोर देने वाला दृश्य जवान के परिवार का था। पत्नी विद्या का रो-रोकर बुरा हाल हो गया था, वह अपने पति के पार्थिव शरीर को देखकर खुद को संभाल नहीं पा रही थी। सेना के जवानों ने पत्नी को तिरंगा सौंपा। वहीं मां उदी बाई ने अपने आंसुओं को रोकते हुए बेटे के अंतिम दर्शन किए, लेकिन उनके चेहरे पर गहरा दुख साफ दिखाई दे रहा था। पिता रामलाल गुर्जर जब अपने बेटे को अंतिम बार देखने पहुंचे तो वह भी खुद को रोक नहीं सके और फूट-फूट कर रोने लगे। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। 3 साल की बेटी की सलामी ने हर किसी को रुला दिया इस दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने हर किसी को अंदर तक झकझोर दिया। पहलवान गुर्जर की मात्र 3 साल की मासूम बच्ची कृतिका अपने नाना के साथ वहां पहुंची। उसने अपने पिता के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किए और मासूम आवाज में “जय हिंद” बोलकर सलामी दी। यह पल इतना भावुक था कि वहां खड़े हर व्यक्ति की आंखों से आंसू बहने लगे। किसी ने भी नहीं सोचा था कि इतनी छोटी बच्ची इतनी बड़ी हिम्मत दिखाएगी। इसके बाद भारतीय सेना के जवानों ने बंदूक से सलामी देकर अपने साथी को अंतिम विदाई दी। दिल्ली से गांव तक अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब इससे पहले पहलवान गुर्जर का पार्थिव शरीर दिल्ली से उदयपुर लाया गया, जहां से सड़क मार्ग के जरिए उन्हें उनके गांव तक लाया गया। रास्ते में गंगरार, चंदेरिया, रोलहेड़ा बाईपास और धीर जी का खेड़ा गांव में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए थे। हर कोई अपने जवान को अंतिम सलामी देना चाहता था। लोग सड़क किनारे खड़े होकर पुष्प अर्पित कर रहे थे और नम आंखों से अपने गांव के बेटे को विदाई दे रहे थे। फिर धीर जी का खेड़ा से शव यात्रा को होड़ा चौराहे पर लाया गया, जहां भारी भीड़ जमा हो गई, जहां लोगों ने अपने तरीके से श्रद्धांजलि दी। अचानक आई मौत ने तोड़ दिया परिवार बताया गया कि पहलवान गुर्जर का गुरुवार सुबह दिल्ली में हार्ट अटैक से निधन हो गया था। उनकी तबीयत ड्यूटी के दौरान अचानक खराब हो गई थी। यह खबर जैसे ही परिवार तक पहुंची, सभी सदमे में आ गए। शाम तक परिवार के लोग दिल्ली पहुंच गए थे। किसी को भी यकीन नहीं हो रहा था कि जो बेटा कल तक ठीक था, वह अचानक इस दुनिया को छोड़कर चला जाएगा। सेना में भर्ती होने का सपना किया था पूरा पहलवान गुर्जर का सेना में जाने का सपना बचपन से ही था। उन्होंने दो बार कोशिश की थी। पहली बार चेन्नई में जाकर तैयारी की, लेकिन किसी कारण से चयन नहीं हो पाया। इसके बाद उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरी बार झुंझुनू जाकर तैयारी की, जहां उनका चयन हो गया। 20 मार्च 2017 को वह भारतीय सेना में भर्ती हुए। उनकी पोस्टिंग राजपूत रेजीमेंट की एक बटालियन में थी और वर्तमान में वह नई दिल्ली में सेवा दे रहे थे। परिवार से जुड़ा था हर दिन का रिश्ता पहलवान गुर्जर अपने परिवार से बेहद जुड़े हुए थे। उनके पिता ने बताया कि वह दिन में कभी फोन नहीं करते थे, लेकिन हर रात 8 बजे ड्यूटी से लौटकर घर जरूर फोन करते थे। वह अपने परिवार की हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखते थे। उनकी पत्नी पिछले 20-25 दिनों से दिल्ली में ही उनके साथ रह रही थी। पहलवान गुर्जर आखिरी बार करीब 5-6 महीने पहले अपने गांव आए थे। कुछ दिन पहले ही उन्होंने घरवालों को फोन कर कहा था कि दिल्ली में बारिश हो रही है, इसलिए गेहूं की फसल को सुरक्षित रख लें। हो सकता है राजस्थान में भी बारिश हो जाए। अगर ऐसा हुआ तो फसल खराब हो जाएगी। इससे साफ पता चलता है कि वह दूर रहकर भी अपने घर और खेती की चिंता करते थे। बहन की बीमारी को लेकर रहते थे चिंतित पहलवान गुर्जर अपनी बड़ी बहन कंकू से भी बहुत लगाव रखते थे। उनकी बहन के पैर में बीमारी थी, जिसको लेकर वह हमेशा चिंतित रहते थे। फोन पर अक्सर बहन के इलाज और तबीयत के बारे में पूछते थे। वह चाहते थे कि उनकी बहन जल्दी ठीक हो जाए। अधूरी रह गई जिंदगी की कहानी पहलवान गुर्जर ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव में ही की थी। इसके बाद 11वीं और 12वीं की पढ़ाई भदेसर में पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए वह चित्तौड़गढ़ गए, जहां वह कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे। लेकिन दूसरे साल में ही उनका चयन सेना में हो गया और उन्होंने पढ़ाई छोड़कर देश सेवा का रास्ता चुन लिया। पंचतत्व में विलीन हुआ गांव का लाल धीरजी खेड़ा में पूरे सैन्य सम्मान के साथ पहलवान गुर्जर का अंतिम संस्कार किया गया। सेना के जवानों ने उन्हें सलामी दी और पूरा गांव नम आंखों से अपने बेटे को विदाई देता रहा। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हुआ, वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं।
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    चित्तौड़गढ़ जिले के भदेसर उपखंड के धीर जी खेड़ा गांव के बेटे और भारतीय सेना के जवान पहलवान गुर्जर का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। हर कोई अपने लाल के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ा। 
गांव की गलियां “भारत माता की जय” और “जय हिंद” के नारों से गूंज उठीं, लेकिन इन नारों के पीछे हर चेहरे पर गहरा दुख साफ नजर आ रहा था। भारतीय सेना के जवानों ने पूरे सम्मान के साथ पहलवान गुर्जर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। 
इसके बाद मौजूद लोगों ने नम आंखों से पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर विधायक चंद्रभान सिंह आक्या और पूर्व विधायक भी पहुंचे और उन्होंने भी जवान को श्रद्धांजलि दी। माहौल इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
परिवार का दर्द देख हर कोई हो गया भावुक
इस दौरान सबसे ज्यादा दिल को झकझोर देने वाला दृश्य जवान के परिवार का था। पत्नी विद्या का रो-रोकर बुरा हाल हो गया था, वह अपने पति के पार्थिव शरीर को देखकर खुद को संभाल नहीं पा रही थी। सेना के जवानों ने पत्नी को तिरंगा सौंपा।
वहीं मां उदी बाई ने अपने आंसुओं को रोकते हुए बेटे के अंतिम दर्शन किए, लेकिन उनके चेहरे पर गहरा दुख साफ दिखाई दे रहा था। पिता रामलाल गुर्जर जब अपने बेटे को अंतिम बार देखने पहुंचे तो वह भी खुद को रोक नहीं सके और फूट-फूट कर रोने लगे। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
3 साल की बेटी की सलामी ने हर किसी को रुला दिया
इस दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने हर किसी को अंदर तक झकझोर दिया। पहलवान गुर्जर की मात्र 3 साल की मासूम बच्ची कृतिका अपने नाना के साथ वहां पहुंची। उसने अपने पिता के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किए और मासूम आवाज में “जय हिंद” बोलकर सलामी दी। 
यह पल इतना भावुक था कि वहां खड़े हर व्यक्ति की आंखों से आंसू बहने लगे। किसी ने भी नहीं सोचा था कि इतनी छोटी बच्ची इतनी बड़ी हिम्मत दिखाएगी। 
इसके बाद भारतीय सेना के जवानों ने बंदूक से सलामी देकर अपने साथी को अंतिम विदाई दी। 
दिल्ली से गांव तक अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
इससे पहले पहलवान गुर्जर का पार्थिव शरीर दिल्ली से उदयपुर लाया गया, जहां से सड़क मार्ग के जरिए उन्हें उनके गांव तक लाया गया। रास्ते में गंगरार, चंदेरिया, रोलहेड़ा बाईपास और धीर जी का खेड़ा गांव में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए थे। हर कोई अपने जवान को अंतिम सलामी देना चाहता था। 
लोग सड़क किनारे खड़े होकर पुष्प अर्पित कर रहे थे और नम आंखों से अपने गांव के बेटे को विदाई दे रहे थे। 
फिर धीर जी का खेड़ा से शव यात्रा को होड़ा चौराहे पर लाया गया, जहां भारी भीड़ जमा हो गई, जहां लोगों ने अपने तरीके से श्रद्धांजलि दी। 
अचानक आई मौत ने तोड़ दिया परिवार
बताया गया कि पहलवान गुर्जर का गुरुवार सुबह दिल्ली में हार्ट अटैक से निधन हो गया था। उनकी तबीयत ड्यूटी के दौरान अचानक खराब हो गई थी। यह खबर जैसे ही परिवार तक पहुंची, सभी सदमे में आ गए। 
शाम तक परिवार के लोग दिल्ली पहुंच गए थे। किसी को भी यकीन नहीं हो रहा था कि जो बेटा कल तक ठीक था, वह अचानक इस दुनिया को छोड़कर चला जाएगा। 
सेना में भर्ती होने का सपना किया था पूरा
पहलवान गुर्जर का सेना में जाने का सपना बचपन से ही था। उन्होंने दो बार कोशिश की थी। पहली बार चेन्नई में जाकर तैयारी की, लेकिन किसी कारण से चयन नहीं हो पाया। इसके बाद उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरी बार झुंझुनू जाकर तैयारी की, जहां उनका चयन हो गया। 
20 मार्च 2017 को वह भारतीय सेना में भर्ती हुए। उनकी पोस्टिंग राजपूत रेजीमेंट की एक बटालियन में थी और वर्तमान में वह नई दिल्ली में सेवा दे रहे थे। 
परिवार से जुड़ा था हर दिन का रिश्ता
पहलवान गुर्जर अपने परिवार से बेहद जुड़े हुए थे। उनके पिता ने बताया कि वह दिन में कभी फोन नहीं करते थे, लेकिन हर रात 8 बजे ड्यूटी से लौटकर घर जरूर फोन करते थे। 
वह अपने परिवार की हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखते थे। उनकी पत्नी पिछले 20-25 दिनों से दिल्ली में ही उनके साथ रह रही थी। पहलवान गुर्जर आखिरी बार करीब 5-6 महीने पहले अपने गांव आए थे। 
कुछ दिन पहले ही उन्होंने घरवालों को फोन कर कहा था कि दिल्ली में बारिश हो रही है, इसलिए गेहूं की फसल को सुरक्षित रख लें। हो सकता है राजस्थान में भी बारिश हो जाए। अगर ऐसा हुआ तो फसल खराब हो जाएगी। इससे साफ पता चलता है कि वह दूर रहकर भी अपने घर और खेती की चिंता करते थे।
बहन की बीमारी को लेकर रहते थे चिंतित
पहलवान गुर्जर अपनी बड़ी बहन कंकू से भी बहुत लगाव रखते थे। उनकी बहन के पैर में बीमारी थी, जिसको लेकर वह हमेशा चिंतित रहते थे। 
फोन पर अक्सर बहन के इलाज और तबीयत के बारे में पूछते थे। वह चाहते थे कि उनकी बहन जल्दी ठीक हो जाए। 
अधूरी रह गई जिंदगी की कहानी
पहलवान गुर्जर ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव में ही की थी। इसके बाद 11वीं और 12वीं की पढ़ाई भदेसर में पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए वह चित्तौड़गढ़ गए, जहां वह कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे। 
लेकिन दूसरे साल में ही उनका चयन सेना में हो गया और उन्होंने पढ़ाई छोड़कर देश सेवा का रास्ता चुन लिया। 
पंचतत्व में विलीन हुआ गांव का लाल
धीरजी खेड़ा में पूरे सैन्य सम्मान के साथ पहलवान गुर्जर का अंतिम संस्कार किया गया। सेना के जवानों ने उन्हें सलामी दी और पूरा गांव नम आंखों से अपने बेटे को विदाई देता रहा। 
जैसे ही उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हुआ, वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं।
    user_Neeraj Maheshwari
    Neeraj Maheshwari
    Reporters राजगढ़, अलवर, राजस्थान•
    14 hrs ago
  • Post by सलीम खान
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    Post by सलीम खान
    user_सलीम खान
    सलीम खान
    अलवर, अलवर, राजस्थान•
    19 hrs ago
  • भिवाड़ी: रिलेक्सो फुटवेयर कंपनी कहरानी में दूसरे दिन भी वेतन बढ़ोतरी को लेकर प्रदर्शन
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    भिवाड़ी: रिलेक्सो फुटवेयर कंपनी कहरानी में दूसरे दिन भी वेतन बढ़ोतरी को लेकर प्रदर्शन
    user_सुनील कान्त गोल्डी
    सुनील कान्त गोल्डी
    रिपोर्टर किशनगढ़ बास, अलवर, राजस्थान•
    1 hr ago
  • Post by Pawan sharma
    1
    Post by Pawan sharma
    user_Pawan sharma
    Pawan sharma
    बानसूर, अलवर, राजस्थान•
    14 hrs ago
  • Post by महेंद्र सिंह
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    Post by महेंद्र सिंह
    user_महेंद्र सिंह
    महेंद्र सिंह
    Local News Reporter अलवर, अलवर, राजस्थान•
    4 hrs ago
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