जांच से बचने में जुटा शिक्षा विभाग, कार्रवाई के बजाय सवाल-जवाब में उलझाया गया गंभीर मामला। एकमी स्कूल बंदी पर प्रधानाध्यापक का दोहरा बयान उजागर। पहले शादी, फिर मौत—कारण बदलकर बचाव की कोशिश। 155 छात्र, 11 शिक्षक—मौके पर सिर्फ एचएम, एमडीएम भी रहा बंद। विभागीय चुप्पी से वित्तीय अनियमितता की भी गहराती आशंका। दरभंगा। बहादुरपुर प्रखंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय एकमी (बल्लोपुर) का मामला अब महज लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्थित शैक्षणिक अनियमितता, कर्तव्यहीनता और संभावित आर्थिक खेल की ओर इशारा कर रहा है। बीते 28 सितंबर 2025 को इस विद्यालय की बदहाल स्थिति को लेकर देखते हुए 29 सितंबर 2025 को प्रकाशित खबर के बाद भी अब तक न तो प्रधानाध्यापक पर कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही उस दिन अनुपस्थित शिक्षकों पर विभाग ने कोई दंडात्मक कदम उठाया, जिससे शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। खबर में स्पष्ट रूप से बताया गया था कि कक्षा 1 से 5 तक कुल 155 छात्र नामांकित हैं, लेकिन दोपहर 1 बजे तक एक भी छात्र विद्यालय में उपस्थित नहीं था। विद्यालय में पदस्थापित 8 शिक्षक और 3 तालीमी मरकज सहित कुल 11 शिक्षकों में से सिर्फ प्रधानाध्यापक ही मौजूद पाए गए, जबकि शेष सभी शिक्षक विभिन्न बहानों में अनुपस्थित थे। मौके पर सभी कक्षाओं में ताले लटके हुए थे, पूरा विद्यालय परिसर सुनसान था। हैरानी की बात यह है कि विद्यालय में रसोइया मौजूद थीं, फिर भी मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) पूरी तरह बंद था। एमडीएम प्रभारी द्वारा जांच कर रिपोर्ट सौंपने की बात कही गई थी, लेकिन आज तक उस जांच का कोई निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया, जिससे यह संदेह और गहरा गया है कि कहीं जानबूझकर मामले को दबाया तो नहीं जा रहा। दोहरा बयान, भ्रामक स्पष्टीकरण खबर प्रकाशित होने के दिन प्रधानाध्यापक ने बयान दिया था कि बगल में शादी होने के कारण ग्रामीणों के कहने पर विद्यालय बंद कर दिया गया। इसी आधार पर खबर प्रकाशित हुई। लेकिन जब प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने स्पष्टीकरण मांगा, तो प्रधानाध्यापक ने अपने लिखित जवाब में शादी के बजाय गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु का हवाला देते हुए विद्यालय बंद रखने का कारण बताया। एक ही घटना के लिए अलग-अलग कारण देना स्पष्ट रूप से भ्रामक और गुमराह करने वाला स्पष्टीकरण है। विभागीय जानकारों के अनुसार, शिक्षा विभाग के किसी भी नियम में न तो विवाह और न ही किसी की मृत्यु के आधार पर पूरे विद्यालय को बंद करने का कोई प्रावधान है। ऐसे में यह साफ है कि कार्रवाई से बचने के लिए तथ्यों को बदला गया। एमडीएम और उपस्थिति में पैसों के खेल की आशंका। सबसे गंभीर सवाल यह है कि, जब छात्र शून्य, जब अधिकांश शिक्षक अनुपस्थित, जब एमडीएम बंद, तो फिर छात्र उपस्थिति,शिक्षक उपस्थिति और मध्यान्ह भोजन से जुड़े भुगतान कैसे और किस आधार पर किए गए? स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इस पूरे मामले में सरकारी राशि के दुरुपयोग की भी प्रबल आशंका है, जिसकी गहन जांच आवश्यक है। बावजूद इसके, अब तक न तो स्थल निरीक्षण हुआ और न ही रसोइया समेत संबंधित कर्मियों से औपचारिक पूछताछ की गई। अभिभावकों में आक्रोश। ग्रामीणों और अभिभावकों ने निष्पक्ष जांच, वित्तीय ऑडिट और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिक्षा व्यवस्था पर करारा सवाल एकमीघाट प्राथमिक विद्यालय बल्लोपुर का यह मामला सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और विभागीय जवाबदेही की नींव हिला देने वाला है। अब सवाल यह नहीं कि स्पष्टीकरण आया या नहीं, सवाल यह है कि कार्रवाई कब होगी। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के लिए यह अग्नि-परीक्षा है— या तो नियमों के तहत प्रधानाध्यापक समेत दोषी शिक्षकों पर कठोर कार्रवाई कर मिसाल पेश की जाए, या फिर यह मान लिया जाए कि सरकारी विद्यालयों में अनियमितता अब व्यवस्था का हिस्सा बन चुकी।
जांच से बचने में जुटा शिक्षा विभाग, कार्रवाई के बजाय सवाल-जवाब में उलझाया गया गंभीर मामला। एकमी स्कूल बंदी पर प्रधानाध्यापक का दोहरा बयान उजागर। पहले शादी, फिर मौत—कारण बदलकर बचाव की कोशिश। 155 छात्र, 11 शिक्षक—मौके पर सिर्फ एचएम, एमडीएम भी रहा बंद। विभागीय चुप्पी से वित्तीय अनियमितता की भी गहराती आशंका। दरभंगा। बहादुरपुर प्रखंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय एकमी (बल्लोपुर) का मामला अब महज लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्थित शैक्षणिक अनियमितता, कर्तव्यहीनता और संभावित आर्थिक खेल की ओर इशारा कर रहा है। बीते 28 सितंबर 2025 को इस विद्यालय की बदहाल स्थिति को लेकर देखते हुए 29 सितंबर 2025 को प्रकाशित खबर के बाद भी अब तक न तो प्रधानाध्यापक पर कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही उस दिन अनुपस्थित शिक्षकों पर विभाग ने कोई दंडात्मक कदम उठाया, जिससे शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। खबर में स्पष्ट रूप से बताया गया था कि कक्षा 1 से 5 तक कुल 155 छात्र नामांकित हैं, लेकिन दोपहर 1 बजे तक एक भी छात्र विद्यालय में उपस्थित नहीं था। विद्यालय में पदस्थापित 8 शिक्षक और 3 तालीमी मरकज सहित कुल 11 शिक्षकों में से सिर्फ प्रधानाध्यापक ही मौजूद पाए गए, जबकि शेष सभी शिक्षक विभिन्न बहानों में अनुपस्थित थे। मौके पर सभी कक्षाओं में ताले लटके हुए थे, पूरा विद्यालय परिसर सुनसान था। हैरानी की बात यह है कि विद्यालय में रसोइया मौजूद थीं, फिर भी मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) पूरी तरह बंद था। एमडीएम प्रभारी द्वारा जांच कर रिपोर्ट सौंपने की बात कही गई थी, लेकिन आज तक उस जांच का कोई निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया, जिससे यह संदेह और गहरा गया है कि कहीं जानबूझकर मामले को दबाया तो नहीं जा रहा। दोहरा बयान, भ्रामक स्पष्टीकरण खबर प्रकाशित होने के दिन प्रधानाध्यापक ने बयान दिया था कि बगल में शादी होने के कारण ग्रामीणों के कहने पर विद्यालय बंद कर दिया गया। इसी आधार पर खबर प्रकाशित हुई। लेकिन जब प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने स्पष्टीकरण मांगा, तो प्रधानाध्यापक ने अपने लिखित जवाब में शादी के बजाय गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु का हवाला देते हुए विद्यालय बंद रखने का कारण बताया। एक ही घटना के लिए अलग-अलग कारण देना स्पष्ट रूप से भ्रामक और गुमराह करने वाला स्पष्टीकरण है। विभागीय जानकारों के अनुसार, शिक्षा विभाग के किसी भी नियम में न तो विवाह और न ही किसी की मृत्यु के आधार पर पूरे विद्यालय को बंद करने का कोई प्रावधान है। ऐसे में यह साफ है कि कार्रवाई से बचने के लिए तथ्यों को बदला गया। एमडीएम और उपस्थिति में पैसों के खेल की आशंका। सबसे गंभीर सवाल यह है कि, जब छात्र शून्य, जब अधिकांश शिक्षक अनुपस्थित, जब एमडीएम बंद, तो फिर छात्र उपस्थिति,शिक्षक उपस्थिति और मध्यान्ह भोजन से जुड़े भुगतान कैसे और किस आधार पर किए गए? स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इस पूरे मामले में सरकारी राशि के दुरुपयोग की भी प्रबल आशंका है, जिसकी गहन जांच आवश्यक है। बावजूद इसके, अब तक न तो स्थल निरीक्षण हुआ और न ही रसोइया समेत संबंधित कर्मियों से औपचारिक पूछताछ की गई। अभिभावकों में आक्रोश। ग्रामीणों और अभिभावकों ने निष्पक्ष जांच, वित्तीय ऑडिट और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिक्षा व्यवस्था पर करारा सवाल एकमीघाट प्राथमिक विद्यालय बल्लोपुर का यह मामला सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और विभागीय जवाबदेही की नींव हिला देने वाला है। अब सवाल यह नहीं कि स्पष्टीकरण आया या नहीं, सवाल यह है कि कार्रवाई कब होगी। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के लिए यह अग्नि-परीक्षा है— या तो नियमों के तहत प्रधानाध्यापक समेत दोषी शिक्षकों पर कठोर कार्रवाई कर मिसाल पेश की जाए, या फिर यह मान लिया जाए कि सरकारी विद्यालयों में अनियमितता अब व्यवस्था का हिस्सा बन चुकी।
- गुप्त रोग शीघ्रपतन शुक्राणु स्वप्नदोष मर्दाना ताकत संपर्क करें डॉक्टर पंकज कुमार 9572291304, 70910778981
- Post by Prashant Kumar2
- mahubani1
- समस्तीपुर: सिंघिया प्रखंड अंतर्गत हरदिया पंचायत के बहदुरा गांव में पंचायत सरकार भवन के लिए चिन्हित भूमि का भौतिक सत्यापन अनुमंडल पदाधिकारी संदीप कुमार के द्वारा किया गया। मौके पर प्रखंड विकास पदाधिकारी विवेक रंजन, अंचलाधिकारी सरिता रानी एवं प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी कृष्ण कुमार सिंह मौजूद थे।1
- बच्चों ने क्या बोला सुनिए अब किसी को गाली नहीं दूंगा मोबाइल नहीं देखूंगा पढ़ने लिखने जाऊंगा1
- सीतामढ़ी से इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीर,पुपरी में मछली लदे पिकअप की चपेट में आकर सातवीं कक्षा के छात्र नितेश कुमार उर्फ गोलू की मौत हो गई। सड़क किनारे मासूम का शव पड़ा रहा और लोग उसे अस्पताल पहुँचाने या पुलिस-एम्बुलेंस बुलाने की बजाय मछली लूटते रहे। यह दृश्य पूछता है—क्या हम इतने संवेदनहीन हो चुके हैं? #Sitamarhi #Pupri #InsaniyatSharmshar #HumanityDead #Golu #NitishKumar #ShameOnUs #BiharNews #ViralVideo #SocialResponsibility #exposesitamarhi1
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- समस्तीपुर जिले के सिंघिया थाना क्षेत्र अंतर्गत कलाली चौक के पास दुकान में लगी भीषण आग, स्थानीय लोगों एवं फायर ब्रिगेड की की टीम ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया हैं!1
- Post by Ahsok Sah1