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Sajad Ahmed
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- Post by Till The End News1
- WORST CONDITION OF THE STREET. NO MUNICIPAL DUSTBIN FOR THROUGHING GARBAGE . JMC PLEASE PAY A KIND ATTENTION TOWARDS GUJJAR NAGAR JAMMU NEAR TAWI. NECESSARY ACTION SHOULD BE TAKEN WITHIN SHORT PERIOD OF TIME IT'S A HUMBLE REQUEST.3
- Kupwara Awoora Manwan Choudhary mohlla to manwan balla without road connectvity1
- चंबा : छात्र हितों की अनदेखी पर भड़की परिषद, मांगें न मानीं तो होगा चरणबद्ध आंदोलन : ललित वर्मा। मोहम्मद आशिक चंबा हिमाचल प्रदेश जिला संयोजक ललित वर्मा ने कहा है कि प्रदेश में छात्र हितों एवं शिक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की उदासीनता के चलते परिषद को आंदोलन का मार्ग अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि परिषद की प्रमुख मांगों में छात्र संघ चुनावों की बहाली, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पूर्ण रूप से लागू करना, विश्वविद्यालयों में नियमित शिक्षकों एवं गैर-शिक्षक कर्मचारियों की नियुक्ति सुनिश्चित करना तथा शिक्षा के बढ़ते व्यावसायीकरण पर रोक लगाना शामिल है। ललित वर्मा ने प्रदेश विश्वविद्यालयों में मूल्यांकन प्रक्रिया को सुदृढ़ करने, शोधार्थियों के लिए “मुख्यमंत्री शोध प्रोत्साहन योजना” शीघ्र शुरू करने तथा केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला परिसर के निर्माण कार्य को जल्द प्रारंभ करवाने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर सृजित किए जाएं और बिगड़ती कानून व्यवस्था व बढ़ती नशा प्रवृत्ति पर कठोर कदम उठाए जाएं। जिला संयोजक ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही इन मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की, तो परिषद जिला स्तर पर चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिषद सदैव छात्र हित, शिक्षा की गुणवत्ता और प्रदेश के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है।1
- Post by Shivinder singh Bhadwal1
- जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी में मौनी अमावस्या के बाद चंद्र मास की दसवीं तिथि को जुकारू उत्सव के अंतर्गत मनाया जाने वाला दशालु मेला शुक्रवार को श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। घाटी के मिंधल, रेई, कुमार-परमार, हिल्लोर, शून और थांदल सहित लगभग दस गांवों में मेले की रौनक देखने को मिली। लोगों ने स्थानीय देवी-देवताओं के मंदिरों में पूजा-अर्चना कर माताओं का आशीर्वाद लिया और एक-दूसरे से गले मिलकर शुभकामनाएं दीं। पारंपरिक नृत्य-गान के साथ पूरा क्षेत्र उत्सवमय बना रहा। मिंधल गांव में आयोजित दशालु मेला विशेष रूप से अखंड चंडी मिंधलावासनी माता मंदिर से जुड़ी आस्था का केंद्र रहा। यह मेला माता की भक्तिन घुंगती को समर्पित है। मान्यता है कि माता ने अपनी भक्तिन को वरदान दिया था कि दशालु के दिन उसकी विशेष पूजा होगी और माता का चेला उसकी चादर ओढ़ने वाली सुई को मेला स्थल तक लाएगा। परंपरा के अनुसार जब चेला बर्फ की गिट्टी बनाकर मंदिर द्वार की ओर फेंकता है तो उसी के साथ मंदिर का द्वार खुलता है। मिंधल में यह रस्म आज भी पूरी श्रद्धा से निभाई जाती है। किलाड़ और धरवास क्षेत्र में चार दिनों तक चलने वाले उयांन मेले का आरंभ भी दसवीं तिथि से हुआ। किलाड़ के महालियत गांव स्थित प्राचीन शिव मंदिर से इस मेले की शुरुआत होती है। यहां दो नाग भाइयों—सिंघ वाहन और देंती नाग—का पावन मिलन होता है। देंती नाग का निवास स्थान हनसुन गांव में तथा सिंघ वाहन का पुंटो गांव में माना जाता है। दोनों देवताओं का मिलन वर्ष में दो बार—जुकारू उत्सव के दसवें दिन और फुलयात्रा के अवसर पर—प्राचीन शिव मंदिर में होता है। उयांन मेले के दौरान दसवीं तिथि को नाग देवता का, ग्यारहवीं को राजा का और बारहवीं को प्रजा का उयांन मनाया जाता है। नागे उयांन की सुबह महालियत गांव के प्राचीन शिव मंदिर में उल्टी ढोल (ढ़ढ़) बजाने की परंपरा है। लोकविश्वास के अनुसार यह प्रथा राणा द्वारा बंधक बनाए गए राक्षस परिवार को यह संकेत देने के लिए है कि गांव में कोई शुभ कार्य नहीं हो रहा। देंती नाग के देवलू (चेले) ढोल-नगाड़ों और पूजा सामग्री के साथ शिव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद हनसुन स्थित देंती नाग मंदिर में जाते हैं। वहां से वे प्रसाद के रूप में सिन्दूर-टिका और देवदार की छोटी टहनियां (छाबू) श्रद्धालुओं में वितरित करते हैं। श्रद्धालु इन्हें अपने घरों में सुख-शांति और समृद्धि की कामना से स्थापित करते हैं। मान्यता है कि हनसुन का क्षेत्र पहले कुफा के ठाकुर का खेत था, जो कालांतर में देवदार के घने जंगल में परिवर्तित हो गया। आज भी स्थानीय लोग उस जंगल की लकड़ी का उपयोग न इमारती कार्य में करते हैं और न ही ईंधन के लिए, इसे नाग देवता की पवित्र धरोहर माना जाता है। सिंघ वाहन के पुजारी धनदेव के अनुसार नागे उयांन के दिन दोनों नाग भाई महालियत गांव में भगवान शिव के दर्शन हेतु एकत्र होते हैं। वहीं मिंधल माता के पुजारी भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि दशालु मेले के दिन घुंगती की पवित्र सुई ‘सौ लहाड़’ नामक स्थान से लाकर विशेष पूजा के बाद माता के मंदिर में स्थापित की जाती है। यह सुई वर्ष में केवल एक बार, दशालु मेले के अवसर पर ही बाहर निकाली जाती है। पांगी घाटी में दशालु और उयांन मेलों के माध्यम से सदियों पुरानी लोक आस्थाएं, देव परंपराएं और सामुदायिक एकता की भावना आज भी जीवंत बनी हुई है।1
- Post by Sajad Ahmed1
- Post by Till The End News1
- चंबा: न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम’ के विरोध में 1 मार्च को चंबा में गरजेंगे प्राथमिक शिक्षक, मुख्यमंत्री को सौंपेंगे ज्ञापन। मोहम्मद आशिक चंबा हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा 23 सितंबर 2025 को जारी ‘न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम’ अधिसूचना और शिक्षकों की अन्य लंबित मांगों के विरोध में 1 मार्च 2026 को जिला मुख्यालय चंबा में रैली आयोजित की जाएगी। राज्य कार्यकारिणी ने सरकार द्वारा लगातार मांगों की अनदेखी किए जाने पर यह कड़ा निर्णय लिया है। रैली का मुख्य उद्देश्य जिला उपायुक्त के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर विवादित अधिसूचना को वापस लेने और शिक्षकों की विभिन्न मांगों को शीघ्र पूरा करने की मांग करना है। संगठन ने सभी ब्लॉक अध्यक्षों को निर्देश जारी करते हुए अपने-अपने ब्लॉक के सभी प्राथमिक शिक्षकों को रैली की जानकारी देने और शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही रैली के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने, अनुशासन का पालन करने और गरिमापूर्ण भाषा के प्रयोग के निर्देश भी दिए गए हैं। शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। बाइट राजकीय प्राथमिक शिक्षा संघ जिला अध्यक्ष पुनीत निराला।1