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Today liveAarti Darshan जयमां भद्रकाली किले वाली माता मंदिर जम्मूकश्मीर प्रवेश द्वार लखनपुर
Shivinder singh Bhadwal
Today liveAarti Darshan जयमां भद्रकाली किले वाली माता मंदिर जम्मूकश्मीर प्रवेश द्वार लखनपुर
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- चंबा: न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम’ के विरोध में 1 मार्च को चंबा में गरजेंगे प्राथमिक शिक्षक, मुख्यमंत्री को सौंपेंगे ज्ञापन। मोहम्मद आशिक चंबा हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा 23 सितंबर 2025 को जारी ‘न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम’ अधिसूचना और शिक्षकों की अन्य लंबित मांगों के विरोध में 1 मार्च 2026 को जिला मुख्यालय चंबा में रैली आयोजित की जाएगी। राज्य कार्यकारिणी ने सरकार द्वारा लगातार मांगों की अनदेखी किए जाने पर यह कड़ा निर्णय लिया है। रैली का मुख्य उद्देश्य जिला उपायुक्त के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर विवादित अधिसूचना को वापस लेने और शिक्षकों की विभिन्न मांगों को शीघ्र पूरा करने की मांग करना है। संगठन ने सभी ब्लॉक अध्यक्षों को निर्देश जारी करते हुए अपने-अपने ब्लॉक के सभी प्राथमिक शिक्षकों को रैली की जानकारी देने और शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही रैली के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने, अनुशासन का पालन करने और गरिमापूर्ण भाषा के प्रयोग के निर्देश भी दिए गए हैं। शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। बाइट राजकीय प्राथमिक शिक्षा संघ जिला अध्यक्ष पुनीत निराला।1
- Post by Mahakal Mishra1
- district reasi govt middle school kheral ma abi tak road ni mala hai1
- सुजानपुर सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र के सबसे पुराने और बड़े कढियार आयुर्वैदिक अस्पताल की उपेक्षा को लेकर एनसीपी अध्यक्ष एवं समाजसेवी रविन्द्र सिंह डोगरा ने पूर्व और वर्तमान सरकार के साथ-साथ उनके प्रतिनिधियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों से इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान की अनदेखी की जा रही है, जिससे क्षेत्र की जनता को बेहतर आयुर्वेदिक उपचार सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। डोगरा ने पूर्व विधायक और वर्तमान विधायक पर निशाना साधते हुए कहा कि सुजानपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण को लेकर उनका कोई स्पष्ट दृष्टिकोण नजर नहीं आता। उन्होंने आयुर्वेद विभाग के उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और कहा कि आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए विभाग के पास कोई ठोस विज़न नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आज लोग पंचकर्म और आयुर्वेदिक उपचार के लिए केरल और चंडीगढ़ जैसे राज्यों का रुख कर रहे हैं, जबकि कढियार अस्पताल जैसे पुराने और बड़े संस्थान को विकसित कर स्थानीय स्तर पर ही बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। रविन्द्र सिंह डोगरा ने साक्ष्यों सहित लिखित प्रार्थना पत्र मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को सुजानपुर वासियों की ओर से भेजा है। ज्ञापन में अस्पताल की सभी कमियों को दूर करने और इसे पुनः सशक्त बनाने की मांग की गई है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि क्षेत्र की 11 पंचायतों—जंदडू, चारियां दी धार, पौंहंज, लगदेवी, ऊटपुर, ऊहल, भटेड़, स्पाहल, कक्कड़, पुरली और गवारडू—के लगभग 20 हजार लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अस्पताल में पुनः एसएमओ की पोस्ट बहाल की जाएगी।इसके साथ ही 2 एएमओ, 3 एनएम, 1 महिला मसाजर तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियमित तैनाती की भी मांग की गई है, ताकि अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से संचालित हो सकें और स्थानीय लोगों को आयुर्वेदिक उपचार का समुचित लाभ मिल सके।2
- जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी में मौनी अमावस्या के बाद चंद्र मास की दसवीं तिथि को जुकारू उत्सव के अंतर्गत मनाया जाने वाला दशालु मेला शुक्रवार को श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। घाटी के मिंधल, रेई, कुमार-परमार, हिल्लोर, शून और थांदल सहित लगभग दस गांवों में मेले की रौनक देखने को मिली। लोगों ने स्थानीय देवी-देवताओं के मंदिरों में पूजा-अर्चना कर माताओं का आशीर्वाद लिया और एक-दूसरे से गले मिलकर शुभकामनाएं दीं। पारंपरिक नृत्य-गान के साथ पूरा क्षेत्र उत्सवमय बना रहा। मिंधल गांव में आयोजित दशालु मेला विशेष रूप से अखंड चंडी मिंधलावासनी माता मंदिर से जुड़ी आस्था का केंद्र रहा। यह मेला माता की भक्तिन घुंगती को समर्पित है। मान्यता है कि माता ने अपनी भक्तिन को वरदान दिया था कि दशालु के दिन उसकी विशेष पूजा होगी और माता का चेला उसकी चादर ओढ़ने वाली सुई को मेला स्थल तक लाएगा। परंपरा के अनुसार जब चेला बर्फ की गिट्टी बनाकर मंदिर द्वार की ओर फेंकता है तो उसी के साथ मंदिर का द्वार खुलता है। मिंधल में यह रस्म आज भी पूरी श्रद्धा से निभाई जाती है। किलाड़ और धरवास क्षेत्र में चार दिनों तक चलने वाले उयांन मेले का आरंभ भी दसवीं तिथि से हुआ। किलाड़ के महालियत गांव स्थित प्राचीन शिव मंदिर से इस मेले की शुरुआत होती है। यहां दो नाग भाइयों—सिंघ वाहन और देंती नाग—का पावन मिलन होता है। देंती नाग का निवास स्थान हनसुन गांव में तथा सिंघ वाहन का पुंटो गांव में माना जाता है। दोनों देवताओं का मिलन वर्ष में दो बार—जुकारू उत्सव के दसवें दिन और फुलयात्रा के अवसर पर—प्राचीन शिव मंदिर में होता है। उयांन मेले के दौरान दसवीं तिथि को नाग देवता का, ग्यारहवीं को राजा का और बारहवीं को प्रजा का उयांन मनाया जाता है। नागे उयांन की सुबह महालियत गांव के प्राचीन शिव मंदिर में उल्टी ढोल (ढ़ढ़) बजाने की परंपरा है। लोकविश्वास के अनुसार यह प्रथा राणा द्वारा बंधक बनाए गए राक्षस परिवार को यह संकेत देने के लिए है कि गांव में कोई शुभ कार्य नहीं हो रहा। देंती नाग के देवलू (चेले) ढोल-नगाड़ों और पूजा सामग्री के साथ शिव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद हनसुन स्थित देंती नाग मंदिर में जाते हैं। वहां से वे प्रसाद के रूप में सिन्दूर-टिका और देवदार की छोटी टहनियां (छाबू) श्रद्धालुओं में वितरित करते हैं। श्रद्धालु इन्हें अपने घरों में सुख-शांति और समृद्धि की कामना से स्थापित करते हैं। मान्यता है कि हनसुन का क्षेत्र पहले कुफा के ठाकुर का खेत था, जो कालांतर में देवदार के घने जंगल में परिवर्तित हो गया। आज भी स्थानीय लोग उस जंगल की लकड़ी का उपयोग न इमारती कार्य में करते हैं और न ही ईंधन के लिए, इसे नाग देवता की पवित्र धरोहर माना जाता है। सिंघ वाहन के पुजारी धनदेव के अनुसार नागे उयांन के दिन दोनों नाग भाई महालियत गांव में भगवान शिव के दर्शन हेतु एकत्र होते हैं। वहीं मिंधल माता के पुजारी भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि दशालु मेले के दिन घुंगती की पवित्र सुई ‘सौ लहाड़’ नामक स्थान से लाकर विशेष पूजा के बाद माता के मंदिर में स्थापित की जाती है। यह सुई वर्ष में केवल एक बार, दशालु मेले के अवसर पर ही बाहर निकाली जाती है। पांगी घाटी में दशालु और उयांन मेलों के माध्यम से सदियों पुरानी लोक आस्थाएं, देव परंपराएं और सामुदायिक एकता की भावना आज भी जीवंत बनी हुई है।1
- जनजातीय क्षेत्र पांगी की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के बीच एक दुर्लभ और विशालकाय पक्षी हिमालयन ग्रिफ़ॉन (Himalayan Griffon) देखे जाने से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। यह दुर्लभ श्रेणी में पाया जाने वाला गिद्ध प्रजाति का पक्षी खिनण डीपीएफ (DPF) के फिन्डूरू बीट क्षेत्र में देखा गया। वन विभाग पांगी के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) Ravi Guleria ने वीडियो साभार के माध्यम से इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि यह पक्षी पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसका पांगी क्षेत्र में दिखना जैव विविधता के लिहाज से सकारात्मक संकेत है। क्या है हिमालयन ग्रिफ़ॉन? Himalayan griffon एक बड़े आकार का गिद्ध है, जो मुख्य रूप से हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है। इसके पंखों का फैलाव लगभग 2.5 से 3 मीटर तक होता है। यह ऊंचाई वाले दुर्गम पर्वतीय इलाकों में निवास करता है और मृत पशुओं को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दुर्लभता और संरक्षण पिछले कुछ वर्षों में गिद्धों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है, जिसका मुख्य कारण दवाओं का दुष्प्रभाव और प्राकृतिक आवास में कमी रहा है। ऐसे में पांगी जैसे दूरस्थ और प्राकृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र में हिमालयन ग्रिफ़ॉन का दिखना संरक्षण प्रयासों की सफलता का संकेत माना जा रहा है। DFO रवि गुलेरिया ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे वन्यजीवों के संरक्षण में सहयोग करें और किसी भी दुर्लभ प्रजाति की सूचना तुरंत वन विभाग को दें। जैव विविधता के लिए शुभ संकेत विशेषज्ञों का मानना है कि पांगी की स्वच्छ वादियां और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र अभी भी कई दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल बने हुए हैं। हिमालयन ग्रिफ़ॉन की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्र की पारिस्थितिकी संतुलित और समृद्ध है। वन विभाग द्वारा क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि इस दुर्लभ पक्षी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।1
- Post by Till The End News1
- सुजानपुर ऐतिहासिक चौगान मैदान में 1 से 4 मार्च तक आयोजित होने जा रहे राष्ट्र स्तरीय होली उत्सव-2026 को लेकर तैयारियां तेज़ी से अंतिम रूप ले रही हैं। चार दिवसीय इस भव्य उत्सव में सांस्कृतिक, धार्मिक और पारंपरिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। सोशल मीडिया पर प्रसारित निमंत्रण पत्र के अनुसार प्रसिद्ध पंजाबी कलाकार बब्बू मान, मनकीरत औलाख और सुनंदा शर्मा विभिन्न सांस्कृतिक संध्याओं में अपनी प्रस्तुतियां देंगे। हालांकि प्रशासन की ओर से कलाकारों की सूची को लेकर उपायुक्त हमीरपुर गन्धर्वा राठौड़ ने पुष्टि की है, लेकिन निमंत्रण पत्र ने लोगों में उत्साह भर दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू 1 मार्च को शाम लगभग साढ़े चार बजे भव्य शोभायात्रा के साथ ऐतिहासिक मुरली मनोहर मंदिर में पूजा-अर्चना कर उत्सव का विधिवत शुभारंभ करेंगे। इसके पश्चात वह चौगान मैदान में विभिन्न विभागों, बोर्डों, निगमों, सार्वजनिक उपक्रमों, संस्थाओं और स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाई जाने वाली प्रदर्शनियों का उद्घाटन करेंगे। वही उपायुक्त हमीरपुर गन्धर्वा राठौड़ ने कहा कि इन प्रदर्शनियों में सरकारी योजनाओं, स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा।उसी दिन शाम को कला केंद्र में दीप प्रज्वलन के साथ पहली सांस्कृतिक संध्या का आगाज होगा। इस संध्या के मुख्य आकर्षण बब्बू मान और ‘हार्मनी ऑफ द पाइन्स’ रहेंगे, जिनकी प्रस्तुति को लेकर युवाओं में खासा उत्साह है। दूसरी सांस्कृतिक संध्या में नगर एवं ग्राम नियोजन, आवास तथा तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर मनकीरत औलख के साथ अन्य हिमाचली कलाकार मंच पर रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। तीसरी सांस्कृतिक संध्या में भोरंज के विधायक सुरेश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। इस संध्या में सुनंदा शर्मा, अनुज शर्मा और अन्य कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। लोकगीत, पंजाबी गाने और हिमाचली सांस्कृतिक झलकियां इस शाम को यादगार बनाएंगी।मेले के समापन अवसर पर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम के अनुसार शाम चार बजे मुरली मनोहर मंदिर में पूजा-अर्चना के उपरांत साढ़े पांच बजे चौगान मैदान में प्रदर्शनियों का अवलोकन किया जाएगा। चौथी एवं अंतिम सांस्कृतिक संध्या में कुमार साहिल तथा अन्य मशहूर हिमाचली कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से समापन समारोह को भव्य बनाएंगे। चार दिनों तक चलने वाला यह राष्ट्र स्तरीय होली उत्सव सुजानपुर में रंग, संस्कृति और संगीत का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा।2
- डॉ. जनक राज, विधायक भरमौर–पांगी विधानसभा क्षेत्र, ने आज मैहला में आयोजित “सरकार गांव के द्वार” कार्यक्रम के दौरान अपनी बात रखते हुए कहा कि पांगी–भरमौर की जनता ने उन्हें चुनकर विधानसभा भेजा है ताकि वे उनकी तकलीफों और समस्याओं को मजबूती से सदन में उठा सकें। उन्होंने कहा कि वे पिछले तीन वर्षों से लगातार क्षेत्र की समस्याएं विधानसभा में उठाते आ रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। विधायक ने कहा, “आज सरकार खुद जनता के द्वार आई है, तो उम्मीद है कि जनता के प्रतिनिधि के रूप में हमारी बात भी सुनी जाएगी।” उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में लगभग दो से ढाई सौ लोग मौजूद थे, जबकि वे स्वयं प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की समस्याएं सुनते हैं और उन्हें संबंधित विभागों तक पहुंचाते हैं। डॉ. जनक राज ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध पूरी तरह लोकतांत्रिक था। उन्होंने कहा कि उन्होंने और उनके समर्थकों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखी और किसी प्रकार का हंगामा या अव्यवस्था नहीं होने दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा माहौल खराब करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने लोकतंत्र और देश की गरिमा को बनाए रखने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि पांगी और भरमौर जैसे दूरदराज़ जनजातीय क्षेत्रों की समस्याएं गंभीर हैं—सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर जनता लंबे समय से परेशान है। “जनता ने हमें भरोसा देकर भेजा है, और हम उनकी आवाज उठाते रहेंगे,” उन्होंने दोहराया। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों ने भी अपनी विभिन्न मांगें सरकार के समक्ष रखीं और त्वरित समाधान की अपेक्षा जताई। अब देखना यह होगा कि “सरकार गांव के द्वार” पहल के तहत उठे मुद्दों पर प्रशासन और सरकार कितनी शीघ्र कार्रवाई करती है।1