पांगी में दिखा दुर्लभ हिमालयन ग्रिफ़ॉन, खिनण DPF क्षेत्र में वन विभाग ने की पुष्टि PANGI NEWS 24 की खबर जनजातीय क्षेत्र पांगी की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के बीच एक दुर्लभ और विशालकाय पक्षी हिमालयन ग्रिफ़ॉन (Himalayan Griffon) देखे जाने से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। यह दुर्लभ श्रेणी में पाया जाने वाला गिद्ध प्रजाति का पक्षी खिनण डीपीएफ (DPF) के फिन्डूरू बीट क्षेत्र में देखा गया। वन विभाग पांगी के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) Ravi Guleria ने वीडियो साभार के माध्यम से इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि यह पक्षी पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसका पांगी क्षेत्र में दिखना जैव विविधता के लिहाज से सकारात्मक संकेत है। क्या है हिमालयन ग्रिफ़ॉन? Himalayan griffon एक बड़े आकार का गिद्ध है, जो मुख्य रूप से हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है। इसके पंखों का फैलाव लगभग 2.5 से 3 मीटर तक होता है। यह ऊंचाई वाले दुर्गम पर्वतीय इलाकों में निवास करता है और मृत पशुओं को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दुर्लभता और संरक्षण पिछले कुछ वर्षों में गिद्धों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है, जिसका मुख्य कारण दवाओं का दुष्प्रभाव और प्राकृतिक आवास में कमी रहा है। ऐसे में पांगी जैसे दूरस्थ और प्राकृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र में हिमालयन ग्रिफ़ॉन का दिखना संरक्षण प्रयासों की सफलता का संकेत माना जा रहा है। DFO रवि गुलेरिया ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे वन्यजीवों के संरक्षण में सहयोग करें और किसी भी दुर्लभ प्रजाति की सूचना तुरंत वन विभाग को दें। जैव विविधता के लिए शुभ संकेत विशेषज्ञों का मानना है कि पांगी की स्वच्छ वादियां और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र अभी भी कई दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल बने हुए हैं। हिमालयन ग्रिफ़ॉन की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्र की पारिस्थितिकी संतुलित और समृद्ध है। वन विभाग द्वारा क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि इस दुर्लभ पक्षी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
पांगी में दिखा दुर्लभ हिमालयन ग्रिफ़ॉन, खिनण DPF क्षेत्र में वन विभाग ने की पुष्टि PANGI NEWS 24 की खबर जनजातीय क्षेत्र पांगी की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के बीच एक दुर्लभ और विशालकाय पक्षी हिमालयन ग्रिफ़ॉन (Himalayan Griffon) देखे जाने से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। यह दुर्लभ श्रेणी में पाया जाने वाला गिद्ध प्रजाति का पक्षी खिनण डीपीएफ (DPF) के फिन्डूरू बीट क्षेत्र में देखा गया। वन विभाग पांगी के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) Ravi Guleria ने वीडियो साभार के माध्यम से इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि यह पक्षी पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसका पांगी क्षेत्र में दिखना जैव विविधता के लिहाज से सकारात्मक संकेत है। क्या है हिमालयन ग्रिफ़ॉन? Himalayan griffon एक बड़े आकार का गिद्ध है, जो मुख्य रूप से हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है। इसके पंखों का फैलाव लगभग 2.5 से 3 मीटर तक होता है। यह ऊंचाई वाले दुर्गम पर्वतीय इलाकों में निवास करता है और मृत पशुओं को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दुर्लभता और संरक्षण पिछले कुछ वर्षों में गिद्धों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है, जिसका मुख्य कारण दवाओं का दुष्प्रभाव और प्राकृतिक आवास में कमी रहा है। ऐसे में पांगी जैसे दूरस्थ और प्राकृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र में हिमालयन ग्रिफ़ॉन का दिखना संरक्षण प्रयासों की सफलता का संकेत माना जा रहा है। DFO रवि गुलेरिया ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे वन्यजीवों के संरक्षण में सहयोग करें और किसी भी दुर्लभ प्रजाति की सूचना तुरंत वन विभाग को दें। जैव विविधता के लिए शुभ संकेत विशेषज्ञों का मानना है कि पांगी की स्वच्छ वादियां और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र अभी भी कई दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल बने हुए हैं। हिमालयन ग्रिफ़ॉन की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्र की पारिस्थितिकी संतुलित और समृद्ध है। वन विभाग द्वारा क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि इस दुर्लभ पक्षी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
- जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी में मौनी अमावस्या के बाद चंद्र मास की दसवीं तिथि को जुकारू उत्सव के अंतर्गत मनाया जाने वाला दशालु मेला शुक्रवार को श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। घाटी के मिंधल, रेई, कुमार-परमार, हिल्लोर, शून और थांदल सहित लगभग दस गांवों में मेले की रौनक देखने को मिली। लोगों ने स्थानीय देवी-देवताओं के मंदिरों में पूजा-अर्चना कर माताओं का आशीर्वाद लिया और एक-दूसरे से गले मिलकर शुभकामनाएं दीं। पारंपरिक नृत्य-गान के साथ पूरा क्षेत्र उत्सवमय बना रहा। मिंधल गांव में आयोजित दशालु मेला विशेष रूप से अखंड चंडी मिंधलावासनी माता मंदिर से जुड़ी आस्था का केंद्र रहा। यह मेला माता की भक्तिन घुंगती को समर्पित है। मान्यता है कि माता ने अपनी भक्तिन को वरदान दिया था कि दशालु के दिन उसकी विशेष पूजा होगी और माता का चेला उसकी चादर ओढ़ने वाली सुई को मेला स्थल तक लाएगा। परंपरा के अनुसार जब चेला बर्फ की गिट्टी बनाकर मंदिर द्वार की ओर फेंकता है तो उसी के साथ मंदिर का द्वार खुलता है। मिंधल में यह रस्म आज भी पूरी श्रद्धा से निभाई जाती है। किलाड़ और धरवास क्षेत्र में चार दिनों तक चलने वाले उयांन मेले का आरंभ भी दसवीं तिथि से हुआ। किलाड़ के महालियत गांव स्थित प्राचीन शिव मंदिर से इस मेले की शुरुआत होती है। यहां दो नाग भाइयों—सिंघ वाहन और देंती नाग—का पावन मिलन होता है। देंती नाग का निवास स्थान हनसुन गांव में तथा सिंघ वाहन का पुंटो गांव में माना जाता है। दोनों देवताओं का मिलन वर्ष में दो बार—जुकारू उत्सव के दसवें दिन और फुलयात्रा के अवसर पर—प्राचीन शिव मंदिर में होता है। उयांन मेले के दौरान दसवीं तिथि को नाग देवता का, ग्यारहवीं को राजा का और बारहवीं को प्रजा का उयांन मनाया जाता है। नागे उयांन की सुबह महालियत गांव के प्राचीन शिव मंदिर में उल्टी ढोल (ढ़ढ़) बजाने की परंपरा है। लोकविश्वास के अनुसार यह प्रथा राणा द्वारा बंधक बनाए गए राक्षस परिवार को यह संकेत देने के लिए है कि गांव में कोई शुभ कार्य नहीं हो रहा। देंती नाग के देवलू (चेले) ढोल-नगाड़ों और पूजा सामग्री के साथ शिव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद हनसुन स्थित देंती नाग मंदिर में जाते हैं। वहां से वे प्रसाद के रूप में सिन्दूर-टिका और देवदार की छोटी टहनियां (छाबू) श्रद्धालुओं में वितरित करते हैं। श्रद्धालु इन्हें अपने घरों में सुख-शांति और समृद्धि की कामना से स्थापित करते हैं। मान्यता है कि हनसुन का क्षेत्र पहले कुफा के ठाकुर का खेत था, जो कालांतर में देवदार के घने जंगल में परिवर्तित हो गया। आज भी स्थानीय लोग उस जंगल की लकड़ी का उपयोग न इमारती कार्य में करते हैं और न ही ईंधन के लिए, इसे नाग देवता की पवित्र धरोहर माना जाता है। सिंघ वाहन के पुजारी धनदेव के अनुसार नागे उयांन के दिन दोनों नाग भाई महालियत गांव में भगवान शिव के दर्शन हेतु एकत्र होते हैं। वहीं मिंधल माता के पुजारी भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि दशालु मेले के दिन घुंगती की पवित्र सुई ‘सौ लहाड़’ नामक स्थान से लाकर विशेष पूजा के बाद माता के मंदिर में स्थापित की जाती है। यह सुई वर्ष में केवल एक बार, दशालु मेले के अवसर पर ही बाहर निकाली जाती है। पांगी घाटी में दशालु और उयांन मेलों के माध्यम से सदियों पुरानी लोक आस्थाएं, देव परंपराएं और सामुदायिक एकता की भावना आज भी जीवंत बनी हुई है।1
- जनजातीय क्षेत्र पांगी की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के बीच एक दुर्लभ और विशालकाय पक्षी हिमालयन ग्रिफ़ॉन (Himalayan Griffon) देखे जाने से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। यह दुर्लभ श्रेणी में पाया जाने वाला गिद्ध प्रजाति का पक्षी खिनण डीपीएफ (DPF) के फिन्डूरू बीट क्षेत्र में देखा गया। वन विभाग पांगी के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) Ravi Guleria ने वीडियो साभार के माध्यम से इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि यह पक्षी पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसका पांगी क्षेत्र में दिखना जैव विविधता के लिहाज से सकारात्मक संकेत है। क्या है हिमालयन ग्रिफ़ॉन? Himalayan griffon एक बड़े आकार का गिद्ध है, जो मुख्य रूप से हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है। इसके पंखों का फैलाव लगभग 2.5 से 3 मीटर तक होता है। यह ऊंचाई वाले दुर्गम पर्वतीय इलाकों में निवास करता है और मृत पशुओं को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दुर्लभता और संरक्षण पिछले कुछ वर्षों में गिद्धों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है, जिसका मुख्य कारण दवाओं का दुष्प्रभाव और प्राकृतिक आवास में कमी रहा है। ऐसे में पांगी जैसे दूरस्थ और प्राकृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र में हिमालयन ग्रिफ़ॉन का दिखना संरक्षण प्रयासों की सफलता का संकेत माना जा रहा है। DFO रवि गुलेरिया ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे वन्यजीवों के संरक्षण में सहयोग करें और किसी भी दुर्लभ प्रजाति की सूचना तुरंत वन विभाग को दें। जैव विविधता के लिए शुभ संकेत विशेषज्ञों का मानना है कि पांगी की स्वच्छ वादियां और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र अभी भी कई दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल बने हुए हैं। हिमालयन ग्रिफ़ॉन की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्र की पारिस्थितिकी संतुलित और समृद्ध है। वन विभाग द्वारा क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि इस दुर्लभ पक्षी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।1
- चम्बा: सुरेंद्र ठाकुर पंचायती राज चुनावों से पहले जिला परिषद वार्डों के पुनः सीमांकन को लेकर जिला चम्बा में विवाद गहराता जा रहा है। विधानसभा क्षेत्र चुराह के अंतर्गत आने वाले चान्जू जिला परिषद वार्ड से 7 पंचायतों — भावला, करेरी, चरोड़ी, कल्हेल, कोहाल, चौली और सपरोट — को चकलू वार्ड में शामिल किए जाने के निर्णय का स्थानीय लोगों ने विरोध किया है। ग्राम पंचायत चरोड़ी, करेरी, भावला और कल्हेल के प्रतिनिधि मंडल ने माननीय उपायुक्त, चम्बा को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि वर्ष 2020 की स्थिति के अनुसार इन पंचायतों को पुनः जिला परिषद वार्ड चान्जू में यथावत रखा जाए। प्रतिनिधियों का कहना है कि इस पुनः सीमांकन से प्रशासनिक, भौगोलिक और राजनीतिक स्तर पर क्षेत्रवासियों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। उनका आरोप है कि पंचायतों को अन्य वार्ड में जोड़ने से स्थानीय प्रतिनिधित्व कमजोर होगा और विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि वर्तमान परिवर्तन निरस्त नहीं किए गए तो क्षेत्रीय असंतुलन और राजनीतिक उपेक्षा की आशंका बढ़ सकती है। प्रतिनिधि मंडल ने जनहित में शीघ्र उचित कार्यवाही की मांग की है।1
- प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अंकु बड़याल ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2014 से छात्र संघ चुनाव बंद किए गए हैं। इन चुनावों के न होने से छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है जबकि पहले छात्र संघ के माध्यम से छात्रों की समस्याओं का निदान हो जाता था। इसलिए सरकार जल्द छात्र संघ चुनाव बहाल करे। उन्होंने कहा कि इसके अलावा सरकार जल्द कृषि विविद्यालय पालमपुर को उनकी 112 हैकटर भूमि वापिस करे ताकि इस भूमि पर छात्रों को प्रैक्टिकल इत्यादि करवाए जा सकें। वहीं विद्यार्थी परिषद मांग करती है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय को स्थायी भवन उयलब्ध करवाया जाए और इस भवन निर्माण के लिए प्रदेश सरकार से प्रस्तावित 30 करोड़ की धनराशि जल्द जारी की जाए। अंकु बड़याल ने कहा कि सरकार ने सत्ता में आने से पूर्व प्रदेश के 5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी प्रदान करने की बात कही थी लेकिन इस बारे भी युवाओं को ठगा गया है और अब तक इस वादे को सरकार ने पूरा नहीं किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जल्द विद्यार्थी परिषद की इन मांगों को पूरा नहीं किया गया तो आने वाले समय में उग्र आंदोलन किया जाएगा। बाइट : अंकु बड़याल, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य विद्यार्थी परिषद2
- जिला संयोजक ललित वर्मा ने कहा कि प्रदेश में छात्र हितों एवं शिक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की निरंतर अनदेखी की जा रही है, जिसके चलते परिषद को आंदोलन का मार्ग अपनाना पड़ रहा है। परिषद की प्रमुख मांगों में छात्र संघ चुनावों की बहाली, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पूर्ण रूप से लागू करना, विश्वविद्यालयों में नियमित शिक्षकों एवं गैर-शिक्षक कर्मचारियों की नियुक्ति सुनिश्चित करना तथा शिक्षा के बढ़ते व्यावसायीकरण पर रोक लगाना शामिल है। उन्होंने प्रदेश विश्वविद्यालयों में मूल्यांकन प्रक्रिया को सुदृढ़ करने, शोधार्थियों के लिए “मुख्यमंत्री शोध प्रोत्साहन योजना” शीघ्र प्रारंभ करने तथा केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला परिसर के निर्माण कार्य को जल्द शुरू करवाने की भी मांग उठाई। इसके अतिरिक्त प्रदेश में स्थायी रोजगार के अवसर प्रदान करने और बिगड़ती कानून व्यवस्था व बढ़ती नशा प्रवृत्ति पर कठोर कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया। ललित वर्मा ने कहा कि यदि सरकार शीघ्र ही इन मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं करती है तो परिषद जिला स्तर पर चरणबद्ध आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। परिषद सदैव छात्र हित, शिक्षा की गुणवत्ता और प्रदेश के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। जारीकर्ता: ललित वर्मा जिला संयोजक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद1
- Post by Mahakal Mishra1
- Baba Veer Nath1
- डॉ. जनक राज, विधायक भरमौर–पांगी विधानसभा क्षेत्र, ने आज मैहला में आयोजित “सरकार गांव के द्वार” कार्यक्रम के दौरान अपनी बात रखते हुए कहा कि पांगी–भरमौर की जनता ने उन्हें चुनकर विधानसभा भेजा है ताकि वे उनकी तकलीफों और समस्याओं को मजबूती से सदन में उठा सकें। उन्होंने कहा कि वे पिछले तीन वर्षों से लगातार क्षेत्र की समस्याएं विधानसभा में उठाते आ रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। विधायक ने कहा, “आज सरकार खुद जनता के द्वार आई है, तो उम्मीद है कि जनता के प्रतिनिधि के रूप में हमारी बात भी सुनी जाएगी।” उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में लगभग दो से ढाई सौ लोग मौजूद थे, जबकि वे स्वयं प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की समस्याएं सुनते हैं और उन्हें संबंधित विभागों तक पहुंचाते हैं। डॉ. जनक राज ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध पूरी तरह लोकतांत्रिक था। उन्होंने कहा कि उन्होंने और उनके समर्थकों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखी और किसी प्रकार का हंगामा या अव्यवस्था नहीं होने दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा माहौल खराब करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने लोकतंत्र और देश की गरिमा को बनाए रखने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि पांगी और भरमौर जैसे दूरदराज़ जनजातीय क्षेत्रों की समस्याएं गंभीर हैं—सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर जनता लंबे समय से परेशान है। “जनता ने हमें भरोसा देकर भेजा है, और हम उनकी आवाज उठाते रहेंगे,” उन्होंने दोहराया। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों ने भी अपनी विभिन्न मांगें सरकार के समक्ष रखीं और त्वरित समाधान की अपेक्षा जताई। अब देखना यह होगा कि “सरकार गांव के द्वार” पहल के तहत उठे मुद्दों पर प्रशासन और सरकार कितनी शीघ्र कार्रवाई करती है।1