85वें दिन भी जनहित सत्याग्रह जारी 17 दिसंबर को अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बाद भी नगर पालिका में भुगतान और टेंडर प्रक्रिया जारी रहने का आरोप ICICI बैंक से कथित 50 85वें दिन भी जनहित सत्याग्रह जारी 17 दिसंबर को अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बाद भी नगर पालिका में भुगतान और टेंडर प्रक्रिया जारी रहने का आरोप ICICI बैंक से कथित 50 करोड़ रुपये के भुगतान की उच्चस्तरीय जांच की मांग, जनता के पैसों का बैंक स्टेटमेंट सार्वजनिक करने की मांग कलेक्टर को पार्षदों ने सौंपा सामूहिक पत्र, 42.67 लाख रुपये के निरस्त टेंडर फार्म में कथित भुगतान और फर्जी हस्ताक्षर से ठहराव प्रस्ताव बनाए जाने पर उठाए सवाल सबलगढ़। नगर पालिका परिषद सबलगढ़ में कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर शुरू किया गया जनहित सत्याग्रह 85वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान पार्षदों ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए जिला कलेक्टर मुरैना को सामूहिक पत्र सौंपकर कथित बड़े वित्तीय घोटालों, भुगतान और टेंडर प्रक्रियाओं की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की। पार्षदों ने कहा कि नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ 17 दिसंबर 2025 को अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया की जा चुकी है। इसके बाद मामले में माननीय उच्च न्यायालय, ग्वालियर द्वारा भी शासन को निर्धारित समय-सीमा में आदेश का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। पार्षदों का आरोप है कि इसके बावजूद नगर पालिका में भुगतान और टेंडर संबंधी प्रक्रियाएं लगातार जारी हैं। “अविश्वास प्रस्ताव के बाद आंखें मूंदकर किए जा रहे बड़े भुगतान” पार्षदों का आरोप है कि अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव और न्यायालय के निर्देशों के बावजूद नगर पालिका में जिम्मेदार अधिकारी कथित अनियमितताओं पर आंखें मूंदे बैठे हैं। उनका कहना है कि इसी कारण नगर पालिका में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं और कथित घोटालों को अंजाम दिए जाने की आशंका है। पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका के ICICI बैंक खाते से करीब 50 करोड़ रुपये के कथित भुगतान की उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि संबंधित बैंक खातों के स्टेटमेंट, भुगतान की पूरी सूची, बिल-वाउचर, स्वीकृति, ठहराव प्रस्ताव और भुगतान की पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाए। साथ ही जनता के पैसों से संबंधित बैंक खाते का स्टेटमेंट सार्वजनिक किया जाए, ताकि जनता को भी नगर पालिका के वित्तीय लेन-देन की वास्तविक जानकारी मिल सके। 42.67 लाख रुपये के कथित भुगतान पर उठाए सवाल पार्षदों ने जिला कलेक्टर को दिए सामूहिक पत्र में आरोप लगाया कि जिला कलेक्टर की TL बैठक में निरस्त किए गए विद्युत सामग्री टेंडर से संबंधित करीब 42.67 लाख रुपये का कथित भुगतान बाद में किया गया। पार्षदों का सवाल है कि यदि संबंधित टेंडर निरस्त किया जा चुका था तो उसके आधार पर भुगतान किस नियम, किस प्रक्रिया और किस सक्षम स्वीकृति के तहत किया गया? पार्षदों ने इस मामले से जुड़े दस्तावेज भी जिला प्रशासन को सौंपे और मांग की कि निरस्त टेंडर से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की जाए। पार्षदों का कहना है कि इस मामले में जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। “हमारे फर्जी हस्ताक्षर कर बनाए जा रहे ठहराव प्रस्ताव” पार्षदों ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कथित फर्जी हस्ताक्षर कर ठहराव प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं और बिना विधिवत ठहराव प्रस्ताव के भुगतान एवं नए टेंडर लगाए जाने की शिकायत सामने आई है। पार्षदों ने मांग की कि नगर पालिका में पिछले समय में पारित सभी ठहराव प्रस्तावों की जांच कराई जाए तथा उनमें लगे हस्ताक्षरों का संबंधित पार्षदों से सत्यापन कराया जाए। यदि किसी दस्तावेज पर फर्जी हस्ताक्षर पाए जाते हैं तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। 50 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की उच्चस्तरीय जांच की मांग पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका में पिछले समय से करीब 50 करोड़ रुपये के कथित घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में केवल एक-दो मामलों की जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि नगर पालिका के सभी बैंक खातों, ऑनलाइन एवं ऑफलाइन भुगतानों, टेंडर, ठहराव प्रस्ताव, निर्माण कार्यों और बिल-वाउचर की व्यापक जांच कराई जानी चाहिए। पार्षदों ने कहा कि जनता के पैसों से जुड़े मामलों में पूरी पारदर्शिता आवश्यक है। उन्होंने जिला कलेक्टर मुरैना से मांग की कि पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच एजेंसी से जांच कराई जाए और जांच पूरी होने तक संदिग्ध भुगतानों एवं प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की जाए। पार्षदों ने स्पष्ट कहा कि जनहित सत्याग्रह नगर पालिका में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता के धन की सुरक्षा के लिए है। उनका कहना है कि उनके पास कथित अनियमितताओं से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं और वे सभी दस्तावेज जांच एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत करने को तैयार हैं। पार्षदों ने कहा—“17 दिसंबर को अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया किए जाने और माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद यदि नगर पालिका में बड़े भुगतान और टेंडर प्रक्रिया जारी है, तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। जनता के पैसों का हिसाब जनता के सामने आना चाहिए।” पार्षदों ने मांग की कि ICICI बैंक से हुए कथित भुगतान, निरस्त टेंडर, ऑनलाइन एवं ऑफलाइन भुगतान, टेंडर प्रक्रिया और कथित फर्जी ठहराव प्रस्तावों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। पार्षदों ने कहा कि जब तक नगर पालिका में कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच नहीं होती और जनता के पैसों का पूरा हिसाब सामने नहीं आता, तब तक उनका जनहित सत्याग्रह जारी रहेगा।
85वें दिन भी जनहित सत्याग्रह जारी 17 दिसंबर को अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बाद भी नगर पालिका में भुगतान और टेंडर प्रक्रिया जारी रहने का आरोप ICICI बैंक से कथित 50 85वें दिन भी जनहित सत्याग्रह जारी 17 दिसंबर को अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बाद भी नगर पालिका में भुगतान और टेंडर प्रक्रिया जारी रहने का आरोप ICICI बैंक से कथित 50 करोड़ रुपये के भुगतान की उच्चस्तरीय जांच की मांग, जनता के पैसों का बैंक स्टेटमेंट सार्वजनिक करने की मांग कलेक्टर को पार्षदों ने सौंपा सामूहिक पत्र, 42.67 लाख रुपये के निरस्त टेंडर फार्म में कथित भुगतान और फर्जी हस्ताक्षर से ठहराव प्रस्ताव बनाए जाने पर उठाए सवाल सबलगढ़। नगर पालिका परिषद सबलगढ़ में कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर शुरू किया गया जनहित सत्याग्रह 85वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान पार्षदों ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए जिला कलेक्टर मुरैना को सामूहिक पत्र सौंपकर कथित बड़े वित्तीय घोटालों, भुगतान और टेंडर प्रक्रियाओं की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की। पार्षदों ने कहा कि नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ 17 दिसंबर 2025 को अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया की जा चुकी है। इसके बाद मामले में माननीय उच्च न्यायालय, ग्वालियर द्वारा भी शासन को निर्धारित समय-सीमा में आदेश का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। पार्षदों का आरोप है कि इसके बावजूद नगर पालिका में भुगतान और टेंडर संबंधी प्रक्रियाएं लगातार जारी हैं। “अविश्वास प्रस्ताव के बाद आंखें मूंदकर किए जा रहे बड़े भुगतान” पार्षदों का आरोप है कि अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव और न्यायालय के निर्देशों के बावजूद नगर पालिका में जिम्मेदार अधिकारी कथित अनियमितताओं पर आंखें मूंदे बैठे हैं। उनका कहना है कि इसी कारण नगर पालिका में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं और कथित घोटालों को अंजाम दिए जाने की आशंका है। पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका के ICICI बैंक खाते से करीब 50 करोड़ रुपये के कथित भुगतान की उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि संबंधित बैंक खातों के स्टेटमेंट, भुगतान की पूरी सूची, बिल-वाउचर, स्वीकृति, ठहराव प्रस्ताव और भुगतान की पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाए। साथ ही जनता के पैसों से संबंधित बैंक खाते का स्टेटमेंट सार्वजनिक किया जाए, ताकि जनता को भी नगर पालिका के वित्तीय लेन-देन की वास्तविक जानकारी मिल सके। 42.67 लाख रुपये के कथित भुगतान पर उठाए सवाल पार्षदों ने जिला कलेक्टर को दिए सामूहिक पत्र में आरोप लगाया कि जिला कलेक्टर की TL बैठक में निरस्त किए गए विद्युत सामग्री टेंडर से संबंधित करीब 42.67 लाख रुपये का कथित भुगतान बाद में किया गया। पार्षदों का सवाल है कि यदि संबंधित टेंडर निरस्त किया जा चुका था तो उसके आधार पर भुगतान किस नियम, किस प्रक्रिया और किस सक्षम स्वीकृति के तहत किया गया? पार्षदों ने इस मामले से जुड़े दस्तावेज भी जिला प्रशासन को सौंपे और मांग की कि निरस्त टेंडर से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की जाए। पार्षदों का कहना है कि इस मामले में जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। “हमारे फर्जी हस्ताक्षर कर बनाए जा रहे ठहराव प्रस्ताव” पार्षदों ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कथित फर्जी हस्ताक्षर कर ठहराव प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं और बिना विधिवत ठहराव प्रस्ताव के भुगतान एवं नए टेंडर लगाए जाने की शिकायत सामने आई है। पार्षदों ने मांग की कि नगर पालिका में पिछले समय में पारित सभी ठहराव प्रस्तावों की जांच कराई जाए तथा उनमें लगे हस्ताक्षरों का संबंधित पार्षदों से सत्यापन कराया जाए। यदि किसी दस्तावेज पर फर्जी हस्ताक्षर पाए जाते हैं तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। 50 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की उच्चस्तरीय जांच की मांग पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका में पिछले समय से करीब 50 करोड़ रुपये के कथित घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में केवल एक-दो मामलों की जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि नगर पालिका के सभी बैंक खातों, ऑनलाइन एवं ऑफलाइन भुगतानों, टेंडर, ठहराव प्रस्ताव, निर्माण कार्यों और बिल-वाउचर की व्यापक जांच कराई जानी चाहिए। पार्षदों ने कहा कि जनता के पैसों से जुड़े मामलों में पूरी पारदर्शिता आवश्यक है। उन्होंने जिला कलेक्टर मुरैना से मांग की कि पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच एजेंसी से जांच कराई जाए और जांच पूरी होने तक संदिग्ध भुगतानों एवं प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की जाए। पार्षदों ने स्पष्ट कहा कि जनहित सत्याग्रह नगर पालिका में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता के धन की सुरक्षा के लिए है। उनका कहना है कि उनके पास कथित अनियमितताओं से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं और वे सभी दस्तावेज जांच एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत करने को तैयार हैं। पार्षदों ने कहा—“17 दिसंबर को अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया किए जाने और माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद यदि नगर पालिका में बड़े भुगतान और टेंडर प्रक्रिया जारी है, तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। जनता के पैसों का हिसाब जनता के सामने आना चाहिए।” पार्षदों ने मांग की कि ICICI बैंक से हुए कथित भुगतान, निरस्त टेंडर, ऑनलाइन एवं ऑफलाइन भुगतान, टेंडर प्रक्रिया और कथित फर्जी ठहराव प्रस्तावों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। पार्षदों ने कहा कि जब तक नगर पालिका में कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच नहीं होती और जनता के पैसों का पूरा हिसाब सामने नहीं आता, तब तक उनका जनहित सत्याग्रह जारी रहेगा।
- 85वें दिन भी जनहित सत्याग्रह जारी 17 दिसंबर को अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बाद भी नगर पालिका में भुगतान और टेंडर प्रक्रिया जारी रहने का आरोप ICICI बैंक से कथित 50 85वें दिन भी जनहित सत्याग्रह जारी 17 दिसंबर को अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बाद भी नगर पालिका में भुगतान और टेंडर प्रक्रिया जारी रहने का आरोप ICICI बैंक से कथित 50 करोड़ रुपये के भुगतान की उच्चस्तरीय जांच की मांग, जनता के पैसों का बैंक स्टेटमेंट सार्वजनिक करने की मांग कलेक्टर को पार्षदों ने सौंपा सामूहिक पत्र, 42.67 लाख रुपये के निरस्त टेंडर फार्म में कथित भुगतान और फर्जी हस्ताक्षर से ठहराव प्रस्ताव बनाए जाने पर उठाए सवाल सबलगढ़। नगर पालिका परिषद सबलगढ़ में कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर शुरू किया गया जनहित सत्याग्रह 85वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान पार्षदों ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए जिला कलेक्टर मुरैना को सामूहिक पत्र सौंपकर कथित बड़े वित्तीय घोटालों, भुगतान और टेंडर प्रक्रियाओं की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की। पार्षदों ने कहा कि नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ 17 दिसंबर 2025 को अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया की जा चुकी है। इसके बाद मामले में माननीय उच्च न्यायालय, ग्वालियर द्वारा भी शासन को निर्धारित समय-सीमा में आदेश का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। पार्षदों का आरोप है कि इसके बावजूद नगर पालिका में भुगतान और टेंडर संबंधी प्रक्रियाएं लगातार जारी हैं। “अविश्वास प्रस्ताव के बाद आंखें मूंदकर किए जा रहे बड़े भुगतान” पार्षदों का आरोप है कि अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव और न्यायालय के निर्देशों के बावजूद नगर पालिका में जिम्मेदार अधिकारी कथित अनियमितताओं पर आंखें मूंदे बैठे हैं। उनका कहना है कि इसी कारण नगर पालिका में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं और कथित घोटालों को अंजाम दिए जाने की आशंका है। पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका के ICICI बैंक खाते से करीब 50 करोड़ रुपये के कथित भुगतान की उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि संबंधित बैंक खातों के स्टेटमेंट, भुगतान की पूरी सूची, बिल-वाउचर, स्वीकृति, ठहराव प्रस्ताव और भुगतान की पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाए। साथ ही जनता के पैसों से संबंधित बैंक खाते का स्टेटमेंट सार्वजनिक किया जाए, ताकि जनता को भी नगर पालिका के वित्तीय लेन-देन की वास्तविक जानकारी मिल सके। 42.67 लाख रुपये के कथित भुगतान पर उठाए सवाल पार्षदों ने जिला कलेक्टर को दिए सामूहिक पत्र में आरोप लगाया कि जिला कलेक्टर की TL बैठक में निरस्त किए गए विद्युत सामग्री टेंडर से संबंधित करीब 42.67 लाख रुपये का कथित भुगतान बाद में किया गया। पार्षदों का सवाल है कि यदि संबंधित टेंडर निरस्त किया जा चुका था तो उसके आधार पर भुगतान किस नियम, किस प्रक्रिया और किस सक्षम स्वीकृति के तहत किया गया? पार्षदों ने इस मामले से जुड़े दस्तावेज भी जिला प्रशासन को सौंपे और मांग की कि निरस्त टेंडर से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की जाए। पार्षदों का कहना है कि इस मामले में जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। “हमारे फर्जी हस्ताक्षर कर बनाए जा रहे ठहराव प्रस्ताव” पार्षदों ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कथित फर्जी हस्ताक्षर कर ठहराव प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं और बिना विधिवत ठहराव प्रस्ताव के भुगतान एवं नए टेंडर लगाए जाने की शिकायत सामने आई है। पार्षदों ने मांग की कि नगर पालिका में पिछले समय में पारित सभी ठहराव प्रस्तावों की जांच कराई जाए तथा उनमें लगे हस्ताक्षरों का संबंधित पार्षदों से सत्यापन कराया जाए। यदि किसी दस्तावेज पर फर्जी हस्ताक्षर पाए जाते हैं तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। 50 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की उच्चस्तरीय जांच की मांग पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका में पिछले समय से करीब 50 करोड़ रुपये के कथित घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में केवल एक-दो मामलों की जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि नगर पालिका के सभी बैंक खातों, ऑनलाइन एवं ऑफलाइन भुगतानों, टेंडर, ठहराव प्रस्ताव, निर्माण कार्यों और बिल-वाउचर की व्यापक जांच कराई जानी चाहिए। पार्षदों ने कहा कि जनता के पैसों से जुड़े मामलों में पूरी पारदर्शिता आवश्यक है। उन्होंने जिला कलेक्टर मुरैना से मांग की कि पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच एजेंसी से जांच कराई जाए और जांच पूरी होने तक संदिग्ध भुगतानों एवं प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की जाए। पार्षदों ने स्पष्ट कहा कि जनहित सत्याग्रह नगर पालिका में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता के धन की सुरक्षा के लिए है। उनका कहना है कि उनके पास कथित अनियमितताओं से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं और वे सभी दस्तावेज जांच एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत करने को तैयार हैं। पार्षदों ने कहा—“17 दिसंबर को अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया किए जाने और माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद यदि नगर पालिका में बड़े भुगतान और टेंडर प्रक्रिया जारी है, तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। जनता के पैसों का हिसाब जनता के सामने आना चाहिए।” पार्षदों ने मांग की कि ICICI बैंक से हुए कथित भुगतान, निरस्त टेंडर, ऑनलाइन एवं ऑफलाइन भुगतान, टेंडर प्रक्रिया और कथित फर्जी ठहराव प्रस्तावों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। पार्षदों ने कहा कि जब तक नगर पालिका में कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच नहीं होती और जनता के पैसों का पूरा हिसाब सामने नहीं आता, तब तक उनका जनहित सत्याग्रह जारी रहेगा।1
- ब्रैकिग मुरैना*अम्बाह में अवैध कब्जों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई, 41 बीघा से अधिक भूमि मुक्त कराकर वास्तविक भूमिस्वामियों को दिलाया कब्जा* *वर्ष 2003 में आवंटित पट्टों पर 23 वर्ष बाद मिला अधिकार, कलेक्टर के निर्देशन में जारी है अभियान* मुरैना, 31 जुलाई 2026/मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप गरीब एवं पात्र भूमिस्वामियों को उनकी भूमि का वास्तविक अधिकार दिलाने के लिए जिले में अवैध कब्जों के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी है। इसी क्रम में कलेक्टर श्री लोकेश कुमार जांगिड़ के निर्देशन एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अम्बाह श्रीमती प्रतिज्ञा शर्मा के मार्गदर्शन में तहसील अम्बाह के ग्राम लुधावली में राजस्व विभाग द्वारा कार्रवाई करते हुए 41 बीघा से अधिक भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराकर वास्तविक पट्टाधारियों को कब्जा दिलाया गया। कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ के निर्देशानुसार गठित राजस्व दल द्वारा ग्राम लुधावली स्थित सर्वे क्रमांक 302 एवं 306 की भूमि का सीमांकन कर कुल 8 पट्टाधारियों की 41 बीघा से अधिक भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया। कार्रवाई तहसीलदार श्री नरेश शर्मा के नेतृत्व एवं राजस्व निरीक्षक राजकुमार शर्मा की उपस्थिति में संपादित की गई। सीमांकन उपरांत नियमानुसार संबंधित वास्तविक भूमिस्वामियों को उनकी भूमि का कब्जा सौंपा गया। कार्रवाई में राजस्व निरीक्षक राजकुमार शर्मा के साथ पटवारी संजीव शर्मा, भोला शर्मा, प्रवीण सिंह जादौन एवं पुष्पेन्द्र कुमार शर्मा शामिल रहे। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 23 जुलाई 2026 को भी ग्राम लुधावली में राजस्व विभाग द्वारा 14 पट्टाधारियों को सीमांकन उपरांत उनकी भूमि का कब्जा दिलाया गया था। शुक्रवार को जिन हितग्राहियों को उनकी भूमि का अधिकार प्राप्त हुआ, उनमें कदुमी, कैलाशी, ओमप्रकाश, आशाराम, रामबरन, करूआ, इतवारी, मुन्नालाल सिंह, रामसेवक, बंटी एवं मुकेश सहित ग्राम लुधावली के पात्र पट्टाधारी एवं उनके वैधानिक उत्तराधिकारी शामिल हैं। राजस्व अधिकारियों ने बताया कि इन हितग्राहियों को वर्ष 2003 में शासन द्वारा आजीविका के उद्देश्य से भूमि के पट्टे आवंटित किए गए थे, लेकिन अवैध कब्जों के कारण वे वर्षों तक अपनी भूमि का उपयोग नहीं कर सके। कई मूल पट्टाधारियों का इस दौरान निधन हो चुका था, इसलिए उनके वैधानिक वारिसों का सीमांकन कर उन्हें भूमि का विधिवत कब्जा सौंपा गया। तहसीलदार द्वारा बताया गया कि तहसील अम्बाह में गरीब, भूमिहीन एवं असहाय पात्र हितग्राहियों की भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई प्राथमिकता के आधार पर निरंतर जारी रहेगी, ताकि प्रत्येक पात्र भूमिस्वामी को उसका वैधानिक अधिकार सुनिश्चित किया जा सके।1
- सरमथुरा महाकालेश्वर मंदिर पर सर्व समाज की मीटिंग की गई आयोजित सरमथुरा महाकालेश्वर मंदिर पर सर्व समाज की मीटिंग की गई आयोजित1
- थाना विजयपुर क्षेत्र में कोचिंग वाहन की टक्कर से 7 वर्षीय मासूम की मौत थाना विजयपुर अंतर्गत ग्राम हीरापुरा में शुक्रवार दोपहर लगभग 3:00 बजे एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। जानकारी के अनुसार, निजी कोचिंग वाहन (बोलेरो) क्रमांक MP33 BB 1401 के चालक द्वारा कथित रूप से लापरवाही से वाहन चलाने के दौरान घर के बाहर खेल रहे अरुण पुत्र सुगल्ली कुशवाह (उम्र 7 वर्ष) निवासी हीरापुरा को कुचल दिया। हादसे के बाद घायल बालक को तत्काल विजयपुर अस्पताल लाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए विजयपुर अस्पताल भेज दिया है। मामले में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई जारी है।3
- ब्रैकिग मुरैना*अम्बाह में अवैध कब्जों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई, 41 बीघा से अधिक भूमि मुक्त कराकर वास्तविक भूमिस्वामियों को दिलाया कब्जा* *वर्ष 2003 में आवंटित पट्टों पर 23 वर्ष बाद मिला अधिकार, कलेक्टर के निर्देशन में जारी है अभियान* मुरैना, 31 जुलाई 2026/मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप गरीब एवं पात्र भूमिस्वामियों को उनकी भूमि का वास्तविक अधिकार दिलाने के लिए जिले में अवैध कब्जों के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी है। इसी क्रम में कलेक्टर श्री लोकेश कुमार जांगिड़ के निर्देशन एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अम्बाह श्रीमती प्रतिज्ञा शर्मा के मार्गदर्शन में तहसील अम्बाह के ग्राम लुधावली में राजस्व विभाग द्वारा कार्रवाई करते हुए 41 बीघा से अधिक भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराकर वास्तविक पट्टाधारियों को कब्जा दिलाया गया। कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ के निर्देशानुसार गठित राजस्व दल द्वारा ग्राम लुधावली स्थित सर्वे क्रमांक 302 एवं 306 की भूमि का सीमांकन कर कुल 8 पट्टाधारियों की 41 बीघा से अधिक भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया। कार्रवाई तहसीलदार श्री नरेश शर्मा के नेतृत्व एवं राजस्व निरीक्षक राजकुमार शर्मा की उपस्थिति में संपादित की गई। सीमांकन उपरांत नियमानुसार संबंधित वास्तविक भूमिस्वामियों को उनकी भूमि का कब्जा सौंपा गया। कार्रवाई में राजस्व निरीक्षक राजकुमार शर्मा के साथ पटवारी संजीव शर्मा, भोला शर्मा, प्रवीण सिंह जादौन एवं पुष्पेन्द्र कुमार शर्मा शामिल रहे। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 23 जुलाई 2026 को भी ग्राम लुधावली में राजस्व विभाग द्वारा 14 पट्टाधारियों को सीमांकन उपरांत उनकी भूमि का कब्जा दिलाया गया था। शुक्रवार को जिन हितग्राहियों को उनकी भूमि का अधिकार प्राप्त हुआ, उनमें कदुमी, कैलाशी, ओमप्रकाश, आशाराम, रामबरन, करूआ, इतवारी, मुन्नालाल सिंह, रामसेवक, बंटी एवं मुकेश सहित ग्राम लुधावली के पात्र पट्टाधारी एवं उनके वैधानिक उत्तराधिकारी शामिल हैं। राजस्व अधिकारियों ने बताया कि इन हितग्राहियों को वर्ष 2003 में शासन द्वारा आजीविका के उद्देश्य से भूमि के पट्टे आवंटित किए गए थे, लेकिन अवैध कब्जों के कारण वे वर्षों तक अपनी भूमि का उपयोग नहीं कर सके। कई मूल पट्टाधारियों का इस दौरान निधन हो चुका था, इसलिए उनके वैधानिक वारिसों का सीमांकन कर उन्हें भूमि का विधिवत कब्जा सौंपा गया। तहसीलदार द्वारा बताया गया कि तहसील अम्बाह में गरीब, भूमिहीन एवं असहाय पात्र हितग्राहियों की भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई प्राथमिकता के आधार पर निरंतर जारी रहेगी, ताकि प्रत्येक पात्र भूमिस्वामी को उसका वैधानिक अधिकार सुनिश्चित किया जा सके।1
- जाट खेड़ा हनुमान जी पेट्रोल पंप के पास बड़ा सड़क हादसा आज जाट खेड़ा हनुमान जी पेट्रोल पंप के पास दो फोर-व्हीलर वाहनों के बीच भीषण एक्सीडेंट हो गया। भगवान की कृपा से सभी लोग बाल-बाल बच गए। हादसा इतना जोरदार था कि मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।सड़क पर वाहन चलाते समय हमेशा सावधानी रखें, गति सीमित रखें और यातायात नियमों का पालन करें। आपकी एक छोटी-सी सावधानी किसी की जान बचा सकती है। बल्लू टी स्टॉल फेमस श्योपुर, मध्य प्रदेश की ओर से सभी के सुरक्षित और स्वस्थ रहने की कामना। 🙏❤️ #Sheopur #RoadAccident #SafetyFirst #BalluTeaStall #MadhyaPradesh #JatKheda1