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पारस लाल चंद्रवंशी
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- Post by मांगीलाल सोलंकी (पत्रकार)✍️✍️1
- गंगधार झालावाड़ दूध वाहन और बाइक सवार की भिड़ंत एक गंभीर घायल उन्हेल थाना क्षेत्र के खेरखेडा के समीप की घटना उन्हेल पुलिस पहुंचीं मौके पर राहगीरों की मदद से घायल नन्द सिंह पिता कल्याण सिंह निवासी भानपुरा मध्य प्रदेश को सीएचसी चौमहला पहुंचाया जहा से प्राथमिक उपचार के दौरान किया जिला अस्पताल रैफर साथ ही पुलिस ने वाहन जप्त कर अज्ञात पिकअप चालक के खिलाफ़ मामला किया दर्ज1
- मंदसौर जिले के सुरजनी गांव में 5 हजार रुपये के इनामी और 10 किलो एमडी ड्रग्स मामले में फरार चल रहे कुख्यात तस्कर भय्यू उर्फ वाहिद लाला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि आरोपी पुलिस से बचने के लिए घर में रखी पेटी में छिपा था और दम घुटने से उसकी मौत हुई। वहीं मृतक की पत्नी रुकसाना ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पुलिस ने घर में घुसकर मारपीट की, जिससे उसके पति की मौत हुई। घटना के बाद परिजनों ने लदुना चौराहे पर चक्का जाम कर पैनल से पोस्टमार्टम और निष्पक्ष जांच की मांग की। एडिशनल एसपी मौके पर पहुंचीं और जांच का आश्वासन दिया। आखिर उस रात क्या हुआ था? सच्चाई क्या है — दम घुटने से मौत या मारपीट? पूरा वीडियो देखें और अपनी राय कमेंट में जरूर दें।1
- बांसवाड़ा जिले के मोटागांव क्षेत्र मे एक भीषण सड़क हादसे में दो चचेरे भाइयों की दर्दनाक मौत हो गई। जानकारी के अनुसार बोरदा निवासी नंदू पिता शंभू और विक्रम पिता लक्ष्मण बाइक से करगासिया से बोरदा लौट रहे थे। इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही मोटागांव थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। जहां इलाज के दौरान दोनों ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर ट्रैक्टर चालक की तलाश शुरू कर दी है वही परिजनों ने लिखित रिपोर्ट दी है ।1
- बाँसवाड़ा जिले के सज्जनगढ़ ब्लॉक के घोती की टोडी गांव की 43 वर्षीय कमलादेवी भगोरा ने परंपरा, परिश्रम और परिवर्तन का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। साधारण किसान परिवार से जुड़ी कमलादेवी ने अपने अनुभव, संघर्ष और सीख को नेतृत्व में बदलकर न केवल अपने परिवार बल्कि सात गांवों की सैकड़ों महिलाओं को नई दिशा दी। सामाजिक संस्था वागधारा से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने भूमि अधिकार, महिला सशक्तिकरण, पंचायत भागीदारी और टिकाऊ जैविक कृषि पर काम शुरू किया। उनके प्रयासों से सात गांवों में महिला सक्षम समूह और ग्राम स्वराज समूह गठित हुए, जिनमें करीब 280 महिला-पुरुष जुड़े। इन समूहों ने महिलाओं की पंचायत भागीदारी, आर्थिक निर्णयों में भूमिका और सामुदायिक नेतृत्व को मजबूत किया। कमलादेवी ने अपने खेत में जैविक खेती अपनाकर उदाहरण प्रस्तुत किया। दो गायों से तैयार जैविक खाद, दशपर्णी-निमास्त्र जैसे कीटनाशकों और स्थानीय बीजों के उपयोग से उन्होंने लागत घटाई और उत्पादन बेहतर किया। वर्ष 2021-2025 के बीच बकरी पालन से लगभग 1.02 लाख रुपये की आय अर्जित कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की। मक्का, तुवर और सब्जियों की खेती के साथ बीज संरक्षण की परंपरा को भी पुनर्जीवित किया। उनकी पहल से प्रेरित होकर आसपास की महिलाओं ने भी छोटे स्तर पर जैविक खेती शुरू की। अब तक वे 200 से अधिक महिला किसानों को प्रशिक्षण दे चुकी हैं और स्थानीय बीज बैंक स्थापित करने की दिशा में काम कर रही हैं। समूह सदस्य बताती हैं कि जैविक खेती से खर्च कम हुआ, बचत बढ़ी और आत्मविश्वास मजबूत हुआ। सामाजिक पूर्वाग्रहों और चुनौतियों के बावजूद कमलादेवी ने संवाद और धैर्य से बदलाव की राह बनाई। आज उनकी पहल केवल आर्थिक सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और महिला नेतृत्व का सशक्त उदाहरण बन चुकी है। उनकी आगे की योजना अधिक महिलाओं को संगठित कर जैविक उत्पादों के लिए बेहतर बाजार व्यवस्था विकसित करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां आत्मनिर्भर और स्वस्थ कृषि प्रणाली अपना सकें।1
- भानपुरा पुलिस थाना क्षेत्र की चंदवासा चौकी टीम ने पकड़ी ट्रक में गुप्त तरीके से केबिन बनाकर ले जा रहे अंग्रेज शराब की पेटीया हरियाणा की दो आरोपियों को पकड़ते हुए की कार्यवाही..1
- Post by Arjun rathore29941
- पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का घाटोल में आगमन और मंडप दर्शन केसाथ प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की झलकीयां1
- मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में चिराई के दौरान हुई बेमौसम बारिश से अफ़ीम किसानों को भारी नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि डोडों से निकली कच्ची अफ़ीम का बड़ा हिस्सा बारिश से धुल गया। लगातार बदलते मौसम और ‘खाखरिया’ रोग से पहले ही फसल प्रभावित थी। ऐसे में अचानक हुई बारिश ने स्थिति और गंभीर कर दी। अफ़ीम की खेती केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की निगरानी में होती है, जिससे उत्पादन लक्ष्य को लेकर किसानों पर दबाव बना रहता है। क्या प्रशासन किसानों को राहत देगा? देखिए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट। नवराज्य टाइम्स, मंदसौर1