मेहनत, मिट्टी और महिला शक्ति: ग्रामीण परिवर्तन की प्रेरक कहानी बाँसवाड़ा जिले के सज्जनगढ़ ब्लॉक के घोती की टोडी गांव की 43 वर्षीय कमलादेवी भगोरा ने परंपरा, परिश्रम और परिवर्तन का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। साधारण किसान परिवार से जुड़ी कमलादेवी ने अपने अनुभव, संघर्ष और सीख को नेतृत्व में बदलकर न केवल अपने परिवार बल्कि सात गांवों की सैकड़ों महिलाओं को नई दिशा दी। सामाजिक संस्था वागधारा से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने भूमि अधिकार, महिला सशक्तिकरण, पंचायत भागीदारी और टिकाऊ जैविक कृषि पर काम शुरू किया। उनके प्रयासों से सात गांवों में महिला सक्षम समूह और ग्राम स्वराज समूह गठित हुए, जिनमें करीब 280 महिला-पुरुष जुड़े। इन समूहों ने महिलाओं की पंचायत भागीदारी, आर्थिक निर्णयों में भूमिका और सामुदायिक नेतृत्व को मजबूत किया। कमलादेवी ने अपने खेत में जैविक खेती अपनाकर उदाहरण प्रस्तुत किया। दो गायों से तैयार जैविक खाद, दशपर्णी-निमास्त्र जैसे कीटनाशकों और स्थानीय बीजों के उपयोग से उन्होंने लागत घटाई और उत्पादन बेहतर किया। वर्ष 2021-2025 के बीच बकरी पालन से लगभग 1.02 लाख रुपये की आय अर्जित कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की। मक्का, तुवर और सब्जियों की खेती के साथ बीज संरक्षण की परंपरा को भी पुनर्जीवित किया। उनकी पहल से प्रेरित होकर आसपास की महिलाओं ने भी छोटे स्तर पर जैविक खेती शुरू की। अब तक वे 200 से अधिक महिला किसानों को प्रशिक्षण दे चुकी हैं और स्थानीय बीज बैंक स्थापित करने की दिशा में काम कर रही हैं। समूह सदस्य बताती हैं कि जैविक खेती से खर्च कम हुआ, बचत बढ़ी और आत्मविश्वास मजबूत हुआ। सामाजिक पूर्वाग्रहों और चुनौतियों के बावजूद कमलादेवी ने संवाद और धैर्य से बदलाव की राह बनाई। आज उनकी पहल केवल आर्थिक सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और महिला नेतृत्व का सशक्त उदाहरण बन चुकी है। उनकी आगे की योजना अधिक महिलाओं को संगठित कर जैविक उत्पादों के लिए बेहतर बाजार व्यवस्था विकसित करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां आत्मनिर्भर और स्वस्थ कृषि प्रणाली अपना सकें।
मेहनत, मिट्टी और महिला शक्ति: ग्रामीण परिवर्तन की प्रेरक कहानी बाँसवाड़ा जिले के सज्जनगढ़ ब्लॉक के घोती की टोडी गांव की 43 वर्षीय कमलादेवी भगोरा ने परंपरा, परिश्रम और परिवर्तन का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। साधारण किसान परिवार से जुड़ी कमलादेवी ने अपने अनुभव, संघर्ष और सीख को नेतृत्व में बदलकर न केवल अपने परिवार बल्कि सात गांवों की सैकड़ों महिलाओं को नई दिशा दी। सामाजिक संस्था वागधारा से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने भूमि अधिकार, महिला सशक्तिकरण, पंचायत भागीदारी और टिकाऊ जैविक कृषि पर काम शुरू किया। उनके प्रयासों से सात गांवों में महिला सक्षम समूह और ग्राम स्वराज समूह गठित हुए, जिनमें करीब 280 महिला-पुरुष जुड़े। इन समूहों ने महिलाओं की पंचायत भागीदारी, आर्थिक निर्णयों में भूमिका और सामुदायिक नेतृत्व को मजबूत किया। कमलादेवी ने अपने खेत में जैविक खेती अपनाकर उदाहरण प्रस्तुत किया। दो गायों से तैयार जैविक खाद, दशपर्णी-निमास्त्र जैसे कीटनाशकों और स्थानीय बीजों के उपयोग से उन्होंने लागत घटाई और उत्पादन बेहतर किया। वर्ष 2021-2025 के बीच बकरी पालन से लगभग 1.02 लाख रुपये की आय अर्जित कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की। मक्का, तुवर और सब्जियों की खेती के साथ बीज संरक्षण की परंपरा को भी पुनर्जीवित किया। उनकी पहल से प्रेरित होकर आसपास की महिलाओं ने भी छोटे स्तर पर जैविक खेती शुरू की। अब तक वे 200 से अधिक महिला किसानों को प्रशिक्षण दे चुकी हैं और स्थानीय बीज बैंक स्थापित करने की दिशा में काम कर रही हैं। समूह सदस्य बताती हैं कि जैविक खेती से खर्च कम हुआ, बचत बढ़ी और आत्मविश्वास मजबूत हुआ। सामाजिक पूर्वाग्रहों और चुनौतियों के बावजूद कमलादेवी ने संवाद और धैर्य से बदलाव की राह बनाई। आज उनकी पहल केवल आर्थिक सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और महिला नेतृत्व का सशक्त उदाहरण बन चुकी है। उनकी आगे की योजना अधिक महिलाओं को संगठित कर जैविक उत्पादों के लिए बेहतर बाजार व्यवस्था विकसित करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां आत्मनिर्भर और स्वस्थ कृषि प्रणाली अपना सकें।
- बांसवाड़ा जिले के मोटागांव क्षेत्र मे एक भीषण सड़क हादसे में दो चचेरे भाइयों की दर्दनाक मौत हो गई। जानकारी के अनुसार बोरदा निवासी नंदू पिता शंभू और विक्रम पिता लक्ष्मण बाइक से करगासिया से बोरदा लौट रहे थे। इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही मोटागांव थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। जहां इलाज के दौरान दोनों ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर ट्रैक्टर चालक की तलाश शुरू कर दी है वही परिजनों ने लिखित रिपोर्ट दी है ।1
- बाँसवाड़ा जिले के सज्जनगढ़ ब्लॉक के घोती की टोडी गांव की 43 वर्षीय कमलादेवी भगोरा ने परंपरा, परिश्रम और परिवर्तन का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। साधारण किसान परिवार से जुड़ी कमलादेवी ने अपने अनुभव, संघर्ष और सीख को नेतृत्व में बदलकर न केवल अपने परिवार बल्कि सात गांवों की सैकड़ों महिलाओं को नई दिशा दी। सामाजिक संस्था वागधारा से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने भूमि अधिकार, महिला सशक्तिकरण, पंचायत भागीदारी और टिकाऊ जैविक कृषि पर काम शुरू किया। उनके प्रयासों से सात गांवों में महिला सक्षम समूह और ग्राम स्वराज समूह गठित हुए, जिनमें करीब 280 महिला-पुरुष जुड़े। इन समूहों ने महिलाओं की पंचायत भागीदारी, आर्थिक निर्णयों में भूमिका और सामुदायिक नेतृत्व को मजबूत किया। कमलादेवी ने अपने खेत में जैविक खेती अपनाकर उदाहरण प्रस्तुत किया। दो गायों से तैयार जैविक खाद, दशपर्णी-निमास्त्र जैसे कीटनाशकों और स्थानीय बीजों के उपयोग से उन्होंने लागत घटाई और उत्पादन बेहतर किया। वर्ष 2021-2025 के बीच बकरी पालन से लगभग 1.02 लाख रुपये की आय अर्जित कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की। मक्का, तुवर और सब्जियों की खेती के साथ बीज संरक्षण की परंपरा को भी पुनर्जीवित किया। उनकी पहल से प्रेरित होकर आसपास की महिलाओं ने भी छोटे स्तर पर जैविक खेती शुरू की। अब तक वे 200 से अधिक महिला किसानों को प्रशिक्षण दे चुकी हैं और स्थानीय बीज बैंक स्थापित करने की दिशा में काम कर रही हैं। समूह सदस्य बताती हैं कि जैविक खेती से खर्च कम हुआ, बचत बढ़ी और आत्मविश्वास मजबूत हुआ। सामाजिक पूर्वाग्रहों और चुनौतियों के बावजूद कमलादेवी ने संवाद और धैर्य से बदलाव की राह बनाई। आज उनकी पहल केवल आर्थिक सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और महिला नेतृत्व का सशक्त उदाहरण बन चुकी है। उनकी आगे की योजना अधिक महिलाओं को संगठित कर जैविक उत्पादों के लिए बेहतर बाजार व्यवस्था विकसित करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां आत्मनिर्भर और स्वस्थ कृषि प्रणाली अपना सकें।1
- Post by Pintu Meena Meena1
- Post by Bapulal Ahari1
- कुशलगढ़ जिला बांसवाड़ा राजस्थान रिपोर्टर धर्मेन्द्र कुमार सोनी बिजोरी छोटी में हुआ हिन्दू सम्मेलन : सनातनी परम्परा, माँ शबरी, रत्नाकर और एकलव्य का प्रेरक उदाहरण बताया राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उप खंड क्षेत्र के खेड़ा धरती घाटा क्षेत्र के गांव बिजोरी छोटी में आयोजित हिन्दू सम्मेलन में सनातन संस्कृति की महान परम्पराओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि सनातन धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, समरसता और गुरु-भक्ति का जीवन दर्शन है। सम्मेलन में माँ शबरी का उदाहरण देते हुए बताया गया कि सच्ची भक्ति में जाति-पाति का कोई भेद नहीं होता। शबरी माता ने प्रेम और श्रद्धा से भगवान श्रीराम को बेर अर्पित किए, और भगवान ने उनकी भावना को स्वीकार किया। यह प्रसंग समरसता और समानता का संदेश देता है। इसी प्रकार रत्नाकर का उल्लेख किया गया, जो बाद में महर्षि वाल्मीकि बने और उन्होंने रामायण जैसे महान ग्रंथ की रचना की। यह उदाहरण दर्शाता है कि सनातन धर्म में आत्मपरिवर्तन और साधना के द्वारा महानता प्राप्त की जा सकती है। साथ ही एकलव्य का प्रेरक उदाहरण भी प्रस्तुत किया गया। एकलव्य ने गुरु द्रोणाचार्य को मन ही मन गुरु मानकर कठिन साधना की और अद्वितीय धनुर्धर बने। जब गुरु दक्षिणा के रूप में अंगूठा मांगा गया, तो उन्होंने बिना संकोच उसे अर्पित कर दिया। यह प्रसंग गुरु-भक्ति, समर्पण और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। सम्मेलन में यह संदेश दिया गया कि सनातन परम्परा हमें भक्ति (शबरी), आत्मपरिवर्तन (रत्नाकर) और गुरु-निष्ठा (एकलव्य) का मार्ग दिखाती है। समाज को इन आदर्शों को अपनाकर समरस, संस्कारित और संगठित बनाना चाहिए। इस अवसर पर वक्ता मधुसूदन व्यास नरसिंह गिरी महाराज लालचन्द भाभोर मानसीह डाबी सहित अन्य लोग भी मौजूद थे उक्त जानकारी भरत जी कुमावत ने दी4
- Post by VAGAD news241
- Jay aadivasi hamari Sanskriti Jhabua jila Madhya Pradesh Jago bhai Jay Johar Jay aadivasi1
- पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का घाटोल में आगमन और मंडप दर्शन केसाथ प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की झलकीयां1