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Bapulal Ahari
More news from राजस्थान and nearby areas
- Post by Bapulal Ahari1
- बांसवाड़ा, 18 फरवरी/गायत्री मण्डल की ओर से संचालित श्री पीताम्बरा आश्रम में एमजी अस्पताल के नर्सिंग अधीक्षक आशीष अधिकारी की अध्यक्षता में आध्यात्मिक संगोष्ठी एवं प्रयोगधर्मा साहित्यसर्जक व मनीषी चिन्तक हरीश आचार्य का एकल सनातन काव्य पाठ कार्यक्रम हुआ। इसमें धर्म-अध्यात्म के विभिन्न तत्त्वों की सारगर्भित चर्चा हुई। इसमें मेघा सराफ, पुष्पा व्यास, राजेन्द्र नानालाल जोशी, यश सराफ, जुगल जयशंकर त्रिवेदी (मुम्बई), चन्द्रेश व्यास, अनिल नरहरि भट्ट, अनिता अधिकारी, आचार्य योगिता व्यास आदि ने विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी के उपरान्त जाने-माने साहित्यकार हरीश आचार्य की आध्यात्मिक सांस्कृतिक रचनाओं पर केन्द्रित एकल काव्य पाठ ने काव्य रसिकों को आनंदित कर दिया। इस अवसर पर श्री पीताम्बरा आश्रम के साधक-साधिकाओं की ओर से पगड़ी, हार तथा उपरणे पहनाकर हरीश आचार्य का अभिनन्दन किया गया। इससे पूर्व आशीष अधिकारी एवं श्रीमती अनिता अधिकारी ने हनुमान पूजा की तथा आरती एवं पुष्पान्जलि विधान पूर्ण किया। हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ भी किए गए।1
- Post by Pintu Meena Meena1
- विधायक उमेश डामोर ने नियम 295 में उठाई बच्चों की सुरक्षा की आवाज जयपुर/डूंगरपुर। आसपुर क्षेत्र के जर्जर सरकारी विद्यालयों और उनके स्थानांतरण (मर्ज) का मुद्दा आज दिनांक 16.02.2026 को राजस्थान विधायक उमेश डामोर ने खोली शिक्षा विभाग की विधानसभा में जोरदार तरीके से गूंजा। आसपुर क्षेत्र के जनप्रिय विधायक विधायक उमेश डामोर ने नियम 295 के अंतर्गत विशेष उल्लेख के माध्यम से यह गंभीर मामला सदन में उठाया। विधायक उमेश डामोर ने पूरे तथ्य और आंकड़ों के साथ प्रस्ताव पढ़कर सरकार का ध्यान डूंगरपुर जिले की शिक्षा व्यवस्था की ओर आकर्षित किया। उनके द्वारा रखा गया यह प्रस्ताव सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है और क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। विधायक उमेश डामोर ने बताया कि डूंगरपुर जिले में 98 जर्जर विद्यालयों को स्थानांतरित करने के आदेश जारी किए गए हैं। इनमें 12 विद्यालय सिंगल शिफ्ट और 86 विद्यालय डबल शिफ्ट में चलाने की योजना है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय बिना अभिभावकों, ग्राम सभाओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से चर्चा किए लिया गया है, जिससे ग्रामीण जनता में नाराजगी है। विधायक उमेश डामोर ने सदन में बताया कि आसपुर विधानसभा क्षेत्र के 22 विद्यालय सीधे इस फैसले से प्रभावित हुए हैं। 44 विद्यालय पूरी तरह जर्जर हैं। 66 विद्यालयों में 263 कमरों की कमी है। 359 विद्यालयों के 1036 कक्ष अत्यंत खराब स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि कई स्कूलों की छत, दीवार और फर्श टूटे हुए हैं, जो बच्चों के लिए बड़ा खतरा है। विधायक उमेश डामोर ने उदाहरण देते हुए बताया कि ग्राम पंचायत हिराता के राजकीय प्राथमिक विद्यालय हामितेड के बच्चों को रोज मारगीया बांध पार कर नाव से स्कूल जाना पड़ता है। कई बच्चों को 3 से 4 किलोमीटर दूर पैदल जाना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह स्थिति बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है और खासकर बालिकाओं की पढ़ाई पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट ने भी जर्जर विद्यालयों की स्थिति पर सख्त टिप्पणी की है। न्यायालय ने कहा कि यदि स्कूलों में पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, तो यह गंभीर लापरवाही है। सदन में विधायक उमेश डामोर ने मांग की, कि जर्जर विद्यालयों का तुरंत तकनीकी सर्वे कराया जाए। नए बजट की स्वीकृति देकर पुनर्निर्माण कार्य शुरू किया जाए। बच्चों की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए। निर्णय लेने से पहले स्थानीय ग्राम सभा और अभिभावकों से चर्चा की जाए। उन्होंने कहा कि स्कूलों को बंद करना समाधान नहीं है, बल्कि मजबूत और सुरक्षित भवन बनाना ही स्थायी समाधान है। विधायक उमेश डामोर द्वारा सदन में मजबूती से मुद्दा उठाने के बाद आसपुर क्षेत्र की जनता में खुशी और भरोसा बढ़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि विधायक उमेश डामोर ने बच्चों के भविष्य की रक्षा के लिए सशक्त आवाज उठाई है। अब यह मुद्दा केवल भवनों का नहीं, बल्कि ग्रामीण शिक्षा, बच्चों की सुरक्षा और सरकार की जवाबदेही का बन चुका है। क्षेत्र की जनता को उम्मीद है कि विधायक उमेश डामोर के प्रयासों से जल्द ही जर्जर विद्यालयों का पुनर्निर्माण होगा और बच्चों को सुरक्षित माहौल में शिक्षा मिल सकेगी।1
- कुशलगढ़ जिला बांसवाड़ा राजस्थान रिपोर्टर धर्मेन्द्र कुमार सोनी बिजोरी छोटी में हुआ हिन्दू सम्मेलन : सनातनी परम्परा, माँ शबरी, रत्नाकर और एकलव्य का प्रेरक उदाहरण बताया राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उप खंड क्षेत्र के खेड़ा धरती घाटा क्षेत्र के गांव बिजोरी छोटी में आयोजित हिन्दू सम्मेलन में सनातन संस्कृति की महान परम्पराओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि सनातन धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, समरसता और गुरु-भक्ति का जीवन दर्शन है। सम्मेलन में माँ शबरी का उदाहरण देते हुए बताया गया कि सच्ची भक्ति में जाति-पाति का कोई भेद नहीं होता। शबरी माता ने प्रेम और श्रद्धा से भगवान श्रीराम को बेर अर्पित किए, और भगवान ने उनकी भावना को स्वीकार किया। यह प्रसंग समरसता और समानता का संदेश देता है। इसी प्रकार रत्नाकर का उल्लेख किया गया, जो बाद में महर्षि वाल्मीकि बने और उन्होंने रामायण जैसे महान ग्रंथ की रचना की। यह उदाहरण दर्शाता है कि सनातन धर्म में आत्मपरिवर्तन और साधना के द्वारा महानता प्राप्त की जा सकती है। साथ ही एकलव्य का प्रेरक उदाहरण भी प्रस्तुत किया गया। एकलव्य ने गुरु द्रोणाचार्य को मन ही मन गुरु मानकर कठिन साधना की और अद्वितीय धनुर्धर बने। जब गुरु दक्षिणा के रूप में अंगूठा मांगा गया, तो उन्होंने बिना संकोच उसे अर्पित कर दिया। यह प्रसंग गुरु-भक्ति, समर्पण और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। सम्मेलन में यह संदेश दिया गया कि सनातन परम्परा हमें भक्ति (शबरी), आत्मपरिवर्तन (रत्नाकर) और गुरु-निष्ठा (एकलव्य) का मार्ग दिखाती है। समाज को इन आदर्शों को अपनाकर समरस, संस्कारित और संगठित बनाना चाहिए। इस अवसर पर वक्ता मधुसूदन व्यास नरसिंह गिरी महाराज लालचन्द भाभोर मानसीह डाबी सहित अन्य लोग भी मौजूद थे उक्त जानकारी भरत जी कुमावत ने दी4
- Post by Balvant Bhai Ahari1
- Post by राघवेन्द्र सिंह1
- Post by Bapulal Ahari1