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26 अगस्त/इतिहास-स्मृति, चित्तौड़ का पहला जौहर : अस्मिता और आत्मसम्मान की अमर गाथा 26 अगस्त/इतिहास-स्मृति, चित्तौड़ का पहला जौहर : अस्मिता और आत्मसम्मान की अमर गाथा भारतीय इतिहास के पन्नों में कुछ घटनाएं ऐसी हैं, जिन्हें केवल युद्ध और पराजय के संदर्भ में नहीं देखा जा सकता। वे अपने भीतर समाज की सामूहिक चेतना, आत्मसम्मान, त्याग और प्रतिरोध की गहरी कहानी समेटे हुए हैं। चित्तौड़ का पहला साका-जौहर ऐसी ही ऐतिहासिक स्मृति है, जो आज भी राजस्थान की वीरभूमि के गौरवपूर्ण इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय मानी जाती है। 26 अगस्त 1303 को अलाउद्दीन खिलजी की सेना के हाथों चित्तौड़ के पतन से जुड़ी यह घटना भारतीय लोकस्मृति में रानी पद्मिनी और हजारों वीरांगनाओं के जौहर के रूप में प्रसिद्ध है। ‘जौहर’ मध्यकालीन युद्धों की उन अत्यंत त्रासद परिस्थितियों से जुड़ी परंपरा थी, जब किसी दुर्ग की अंतिम पराजय सामने होती थी और महिलाओं के बंदी बनाए जाने, हिंसा तथा अपमान का भय रहता था। ऐसी परिस्थिति में महिलाओं द्वारा सामूहिक आत्मदाह को तत्कालीन समाज में अपनी अस्मिता की रक्षा के अंतिम उपाय के रूप में देखा गया। इसके साथ पुरुष योद्धाओं के अंतिम युद्ध को ‘साका’ कहा जाता था। योद्धा केसरिया धारण कर रणभूमि में उतरते और मृत्यु तक संघर्ष करते थे। चित्तौड़ के प्रथम जौहर की सबसे प्रसिद्ध कथा रानी पद्मिनी से जुड़ी है। मलिक मुहम्मद जायसी के 16वीं शताब्दी के महाकाव्य ‘पद्मावत’ ने पद्मिनी की कथा को व्यापक लोकप्रियता प्रदान की। लोकपरंपरा में उनका मूल नाम पद्मावती बताया गया है और उन्हें सिंहलद्वीप के राजा की पुत्री तथा चित्तौड़ के राजा रतनसिंह की पत्नी के रूप में वर्णित किया जाता है। हालांकि पद्मिनी के जीवन और 1303 की घटनाओं से संबंधित अनेक विवरण समकालीन ऐतिहासिक स्रोतों में स्पष्ट रूप से नहीं मिलते। इसलिए इतिहासकारों के बीच इन कथाओं के विभिन्न अंशों को लेकर मतभेद भी हैं। लोककथा के अनुसार पद्मिनी की अनुपम सुंदरता की चर्चा अलाउद्दीन खिलजी तक पहुंची। चित्तौड़ पर अधिकार करने के उसके अभियान में रानी को पाने की इच्छा का प्रसंग बाद की परंपराओं में विशेष रूप से वर्णित हुआ। कथा के अनुसार उसने रतनसिंह से पद्मिनी को देखने की इच्छा व्यक्त की। संघर्ष को टालने के उद्देश्य से रतनसिंह ने दर्पण के माध्यम से रानी का प्रतिबिंब दिखाने की अनुमति दी।कथा का अगला प्रसंग छल और विश्वासघात से जुड़ा है। कहा जाता है कि चित्तौड़ से लौटते समय अलाउद्दीन के सैनिकों ने रतनसिंह को बंदी बना लिया और उनकी मुक्ति के बदले पद्मिनी को सौंपने की शर्त रखी। संकट की इस घड़ी में चित्तौड़ ने जिस योजना का सहारा लिया, वह लोकगाथा का अत्यंत रोमांचकारी हिस्सा बन गई। कहा जाता है कि पद्मिनी ने संदेश भेजा कि वह अकेली नहीं आएंगी। उनके साथ सैकड़ों सखियां और सेविकाएं भी पालकियों में आएंगी। किंतु उन पालकियों में स्त्रियों के स्थान पर सशस्त्र सैनिक बैठे थे। पालकियों को उठाने वाले कहार भी सैनिक बताए जाते हैं। योजना के अनुसार रतनसिंह को छुड़ाकर वापस भेज दिया गया और सैनिकों ने शत्रु शिविर पर धावा बोल दिया। इस घटना के बाद संघर्ष और तेज हुआ। अलाउद्दीन की सेना ने चित्तौड़ के दुर्ग को घेर लिया। लंबे समय तक चले युद्ध के बाद स्थिति रक्षकों के प्रतिकूल होती चली गई। अंततः चित्तौड़ के योद्धाओं के सामने अंतिम युद्ध और महिलाओं के सामने जौहर का निर्णय रह गया। लोकपरंपरा के अनुसार रानी पद्मिनी ने अन्य महिलाओं के साथ जौहर किया और पुरुष योद्धाओं ने केसरिया धारण कर अंतिम युद्ध लड़ा।जौहर का प्रसंग जितना वीरतापूर्ण स्मृति से जुड़ा है, उतना ही मानवीय पीड़ा से भी। आग में प्रवेश करना किसी भी दृष्टि से सरल नहीं था। इसे केवल रोमांचक वीरगाथा के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उस समय के युद्धकालीन भयावह वातावरण को समझना आवश्यक है। मध्यकालीन युद्धों में पराजित पक्ष के लोगों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा अत्यंत कठिन होती थी। इसी असुरक्षा और सामाजिक परिस्थितियों ने जौहर जैसी परंपराओं को जन्म दिया।चित्तौड़ के प्रथम साके की स्मृति केवल पद्मिनी तक सीमित नहीं रही। इसके केंद्र में वे हजारों ज्ञात-अज्ञात स्त्रियां और पुरुष योद्धा भी हैं, जिनकी व्यक्तिगत पहचान इतिहास के विस्तृत पन्नों में दर्ज नहीं हो सकी। यही कारण है कि चित्तौड़ की कथा लोकगीतों, कविताओं, कथाओं और जनश्रुतियों में लगातार जीवित रही।यह भी ध्यान रखना चाहिए कि चित्तौड़ के प्रथम जौहर से जुड़े 16,000 स्त्रियों, पालकियों में सैनिकों और घटनाओं के कुछ विशिष्ट विवरण बाद की साहित्यिक एवं लोकपरंपराओं में प्रमुखता से मिलते हैं। इन्हें समकालीन प्रमाणित इतिहास के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय लोकस्मृति और परंपरा के रूप में देखना अधिक उचित है। इससे घटना के प्रति श्रद्धा कम नहीं होती, बल्कि इतिहास को समझने की दृष्टि अधिक प्रमाणिक बनती है। चित्तौड़ की गाथा का सबसे बड़ा संदेश आत्मसम्मान और स्वतंत्रता की चेतना है। मेवाड़ की धरती ने आगे भी अनेक संघर्ष देखे। महाराणा हम्मीर, महाराणा कुंभा और महाराणा प्रताप जैसे योद्धाओं की परंपरा में चित्तौड़ का प्रतिरोध एक प्रेरणास्रोत बना रहा। राजनीतिक सत्ता बदल सकती है, दुर्ग पर किसी दूसरे का अधिकार हो सकता है, लेकिन किसी समाज की स्मृति और आत्मगौरव को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं होता। आज 26 अगस्त को चित्तौड़ के प्रथम जौहर का स्मरण करते हुए हमें इतिहास की उस त्रासदी और साहस दोनों को समझना चाहिए। आधुनिक भारत में सम्मान और स्वतंत्रता की रक्षा का मार्ग आत्मदाह या हिंसा नहीं, बल्कि संविधान, कानून, शिक्षा, सामाजिक एकता और न्याय के माध्यम से प्रशस्त होता है। इसलिए जौहर की स्मृति को आत्मदाह के महिमामंडन के रूप में नहीं, बल्कि मध्यकालीन समाज की कठिन परिस्थितियों, स्त्री की असुरक्षा और स्वतंत्रता तथा सम्मान के लिए संघर्ष की ऐतिहासिक स्मृति के रूप में समझना चाहिए।चित्तौड़ की ज्वालाएं बुझ गईं, रणभूमि शांत हो गई और सदियां बीत गईं, लेकिन उस संघर्ष की स्मृति आज भी जीवित है। रानी पद्मिनी की कथा इतिहास और लोकपरंपरा के बीच से गुजरते हुए भारतीय जनमानस में अस्मिता, त्याग और प्रतिरोध का प्रतीक बन गई। चित्तौड़ का पहला जौहर हमें यह स्मरण कराता है कि इतिहास केवल राजाओं और विजेताओं का विवरण नहीं, बल्कि उन असंख्य स्त्री-पुरुषों की स्मृतियों का भी नाम है, जिन्होंने अपने समय की कठिनतम परिस्थितियों में अपने विश्वास और सम्मान की रक्षा के लिए असाधारण निर्णय लिए। यही चित्तौड़ की अमर गाथा का सार है—दुर्ग पर अधिकार किया जा सकता है, लेकिन आत्मसम्मान और स्मृति पर विजय पाना इतना सरल नहीं। वरुण कुमार लेखक एवं कवि

3 hrs ago
user_NUNU RAM MAHATO
NUNU RAM MAHATO
Local News Reporter गोविंदपुर (राजनगर), सरायकेला खरसावां, झारखंड•
3 hrs ago
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26 अगस्त/इतिहास-स्मृति, चित्तौड़ का पहला जौहर : अस्मिता और आत्मसम्मान की अमर गाथा 26 अगस्त/इतिहास-स्मृति, चित्तौड़ का पहला जौहर : अस्मिता और आत्मसम्मान की अमर गाथा भारतीय इतिहास के पन्नों में कुछ घटनाएं ऐसी हैं, जिन्हें केवल युद्ध और पराजय के संदर्भ में नहीं देखा जा सकता। वे अपने भीतर समाज की सामूहिक चेतना, आत्मसम्मान, त्याग और प्रतिरोध की गहरी कहानी समेटे हुए हैं। चित्तौड़ का पहला साका-जौहर ऐसी ही ऐतिहासिक स्मृति है, जो आज भी राजस्थान की वीरभूमि के गौरवपूर्ण इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय मानी जाती है। 26 अगस्त 1303 को अलाउद्दीन खिलजी की सेना के हाथों चित्तौड़ के पतन से जुड़ी यह घटना भारतीय लोकस्मृति में रानी पद्मिनी और हजारों वीरांगनाओं के जौहर के रूप में प्रसिद्ध है। ‘जौहर’ मध्यकालीन युद्धों की उन अत्यंत त्रासद परिस्थितियों से जुड़ी परंपरा थी, जब किसी दुर्ग की अंतिम पराजय सामने होती थी और महिलाओं के बंदी बनाए जाने, हिंसा तथा अपमान का भय रहता था। ऐसी परिस्थिति में महिलाओं द्वारा सामूहिक आत्मदाह को तत्कालीन समाज में अपनी अस्मिता की रक्षा के अंतिम उपाय के रूप में देखा गया। इसके साथ पुरुष योद्धाओं के अंतिम युद्ध को ‘साका’ कहा जाता था। योद्धा केसरिया धारण कर रणभूमि में उतरते और मृत्यु तक संघर्ष करते थे। चित्तौड़ के प्रथम जौहर की सबसे प्रसिद्ध कथा रानी पद्मिनी से जुड़ी है। मलिक मुहम्मद जायसी के 16वीं शताब्दी के महाकाव्य ‘पद्मावत’ ने पद्मिनी की कथा को व्यापक लोकप्रियता प्रदान की। लोकपरंपरा में उनका मूल नाम पद्मावती बताया गया है और उन्हें सिंहलद्वीप के राजा की पुत्री तथा चित्तौड़ के राजा रतनसिंह की पत्नी के रूप में वर्णित किया जाता है। हालांकि पद्मिनी के जीवन और 1303 की घटनाओं से संबंधित अनेक विवरण समकालीन ऐतिहासिक स्रोतों में स्पष्ट रूप से नहीं मिलते। इसलिए इतिहासकारों के बीच इन कथाओं के विभिन्न अंशों को लेकर मतभेद भी हैं। लोककथा के अनुसार पद्मिनी की अनुपम सुंदरता की चर्चा अलाउद्दीन खिलजी तक पहुंची। चित्तौड़ पर अधिकार करने के उसके अभियान में रानी को पाने की इच्छा का प्रसंग बाद की परंपराओं में विशेष रूप से वर्णित हुआ। कथा के अनुसार उसने रतनसिंह से पद्मिनी को देखने की इच्छा व्यक्त की। संघर्ष को टालने के उद्देश्य से रतनसिंह ने दर्पण के माध्यम से रानी का प्रतिबिंब दिखाने की अनुमति दी।कथा का अगला प्रसंग छल और विश्वासघात से जुड़ा है। कहा जाता है कि चित्तौड़ से लौटते समय अलाउद्दीन के सैनिकों ने रतनसिंह को बंदी बना लिया और उनकी मुक्ति के बदले पद्मिनी को सौंपने की शर्त रखी। संकट की इस घड़ी में चित्तौड़ ने जिस योजना का सहारा लिया, वह लोकगाथा का अत्यंत रोमांचकारी हिस्सा बन गई। कहा जाता है कि पद्मिनी ने संदेश भेजा कि वह अकेली नहीं आएंगी। उनके साथ सैकड़ों सखियां और सेविकाएं भी पालकियों में आएंगी। किंतु उन पालकियों में स्त्रियों के स्थान पर सशस्त्र सैनिक बैठे थे। पालकियों को उठाने वाले कहार भी सैनिक बताए जाते हैं। योजना के अनुसार रतनसिंह को छुड़ाकर वापस भेज दिया गया और सैनिकों ने शत्रु शिविर पर धावा बोल दिया। इस घटना के बाद संघर्ष और तेज हुआ। अलाउद्दीन की सेना ने चित्तौड़ के दुर्ग को घेर लिया। लंबे समय तक चले युद्ध के बाद स्थिति रक्षकों के प्रतिकूल होती

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चली गई। अंततः चित्तौड़ के योद्धाओं के सामने अंतिम युद्ध और महिलाओं के सामने जौहर का निर्णय रह गया। लोकपरंपरा के अनुसार रानी पद्मिनी ने अन्य महिलाओं के साथ जौहर किया और पुरुष योद्धाओं ने केसरिया धारण कर अंतिम युद्ध लड़ा।जौहर का प्रसंग जितना वीरतापूर्ण स्मृति से जुड़ा है, उतना ही मानवीय पीड़ा से भी। आग में प्रवेश करना किसी भी दृष्टि से सरल नहीं था। इसे केवल रोमांचक वीरगाथा के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उस समय के युद्धकालीन भयावह वातावरण को समझना आवश्यक है। मध्यकालीन युद्धों में पराजित पक्ष के लोगों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा अत्यंत कठिन होती थी। इसी असुरक्षा और सामाजिक परिस्थितियों ने जौहर जैसी परंपराओं को जन्म दिया।चित्तौड़ के प्रथम साके की स्मृति केवल पद्मिनी तक सीमित नहीं रही। इसके केंद्र में वे हजारों ज्ञात-अज्ञात स्त्रियां और पुरुष योद्धा भी हैं, जिनकी व्यक्तिगत पहचान इतिहास के विस्तृत पन्नों में दर्ज नहीं हो सकी। यही कारण है कि चित्तौड़ की कथा लोकगीतों, कविताओं, कथाओं और जनश्रुतियों में लगातार जीवित रही।यह भी ध्यान रखना चाहिए कि चित्तौड़ के प्रथम जौहर से जुड़े 16,000 स्त्रियों, पालकियों में सैनिकों और घटनाओं के कुछ विशिष्ट विवरण बाद की साहित्यिक एवं लोकपरंपराओं में प्रमुखता से मिलते हैं। इन्हें समकालीन प्रमाणित इतिहास के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय लोकस्मृति और परंपरा के रूप में देखना अधिक उचित है। इससे घटना के प्रति श्रद्धा कम नहीं होती, बल्कि इतिहास को समझने की दृष्टि अधिक प्रमाणिक बनती है। चित्तौड़ की गाथा का सबसे बड़ा संदेश आत्मसम्मान और स्वतंत्रता की चेतना है। मेवाड़ की धरती ने आगे भी अनेक संघर्ष देखे। महाराणा हम्मीर, महाराणा कुंभा और महाराणा प्रताप जैसे योद्धाओं की परंपरा में चित्तौड़ का प्रतिरोध एक प्रेरणास्रोत बना रहा। राजनीतिक सत्ता बदल सकती है, दुर्ग पर किसी दूसरे का अधिकार हो सकता है, लेकिन किसी समाज की स्मृति और आत्मगौरव को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं होता। आज 26 अगस्त को चित्तौड़ के प्रथम जौहर का स्मरण करते हुए हमें इतिहास की उस त्रासदी और साहस दोनों को समझना चाहिए। आधुनिक भारत में सम्मान और स्वतंत्रता की रक्षा का मार्ग आत्मदाह या हिंसा नहीं, बल्कि संविधान, कानून, शिक्षा, सामाजिक एकता और न्याय के माध्यम से प्रशस्त होता है। इसलिए जौहर की स्मृति को आत्मदाह के महिमामंडन के रूप में नहीं, बल्कि मध्यकालीन समाज की कठिन परिस्थितियों, स्त्री की असुरक्षा और स्वतंत्रता तथा सम्मान के लिए संघर्ष की ऐतिहासिक स्मृति के रूप में समझना चाहिए।चित्तौड़ की ज्वालाएं बुझ गईं, रणभूमि शांत हो गई और सदियां बीत गईं, लेकिन उस संघर्ष की स्मृति आज भी जीवित है। रानी पद्मिनी की कथा इतिहास और लोकपरंपरा के बीच से गुजरते हुए भारतीय जनमानस में अस्मिता, त्याग और प्रतिरोध का प्रतीक बन गई। चित्तौड़ का पहला जौहर हमें यह स्मरण कराता है कि इतिहास केवल राजाओं और विजेताओं का विवरण नहीं, बल्कि उन असंख्य स्त्री-पुरुषों की स्मृतियों का भी नाम है, जिन्होंने अपने समय की कठिनतम परिस्थितियों में अपने विश्वास और सम्मान की रक्षा के लिए असाधारण निर्णय लिए। यही चित्तौड़ की अमर गाथा का सार है—दुर्ग पर अधिकार किया जा सकता है, लेकिन आत्मसम्मान और स्मृति पर विजय पाना इतना सरल नहीं। वरुण कुमार लेखक एवं कवि

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  • सरायकेला में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी पर निकला भव्य जुलूस, जगह-जगह हुआ लंगर का आयोजन। शुरू ऐप न्यूज़ चैनल से रवि गुप्ता की रिपोर्ट। सरायकेला में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर अंजुमन इस्लामिया कमेटी, सरायकेला के तत्वावधान में भव्य जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हुए। पूरे मार्ग में उत्साह और भाईचारे का माहौल देखने को मिला। जुलूस मस्जिद से शुरू होकर कालूराम चौक, बस स्टैंड, राजा घर, पुराना सिविल कोर्ट, पोस्ट ऑफिस रोड और धर्मशाला रोड होते हुए पुनः कालूराम चौक पहुंचा। इसके बाद जुलूस राजबांध इमामबाड़ा, सरायकेला टाटा रोड पहुंचकर समाप्त हुआ। जुलूस के दौरान विभिन्न स्थानों पर अंजुमन इस्लामिया कमेटी की ओर से श्रद्धालुओं एवं आम लोगों के लिए लंगर का वितरण किया गया। जुलूस में शामिल लोगों ने आपसी भाईचारे, शांति और सौहार्द का संदेश दिया। सरायकेला से रवि गुप्ता की रिपोर्ट।
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    सरायकेला में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी पर निकला भव्य जुलूस, जगह-जगह हुआ लंगर का आयोजन।
शुरू ऐप न्यूज़ चैनल से 
रवि गुप्ता की रिपोर्ट।
सरायकेला में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर अंजुमन इस्लामिया कमेटी, सरायकेला के तत्वावधान में भव्य जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हुए। पूरे मार्ग में उत्साह और भाईचारे का माहौल देखने को मिला।
जुलूस मस्जिद से शुरू होकर कालूराम चौक, बस स्टैंड, राजा घर, पुराना सिविल कोर्ट, पोस्ट ऑफिस रोड और धर्मशाला रोड होते हुए पुनः कालूराम चौक पहुंचा। इसके बाद जुलूस राजबांध इमामबाड़ा, सरायकेला टाटा रोड पहुंचकर समाप्त हुआ।
जुलूस के दौरान विभिन्न स्थानों पर अंजुमन इस्लामिया कमेटी की ओर से श्रद्धालुओं एवं आम लोगों के लिए लंगर का वितरण किया गया। जुलूस में शामिल लोगों ने आपसी भाईचारे, शांति और सौहार्द का संदेश दिया।
सरायकेला से रवि गुप्ता की रिपोर्ट।
    user_Ravi Gupta
    Ravi Gupta
    सरायकेला, सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    6 hrs ago
  • विधायक सोनाराम सिंकू बने कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष, चाईबासा में हुआ भव्य स्वागत #कांग्रेस #सोनारामसिंकू #चाईबासा #कांग्रेसजिलाध्यक्ष #भव्यस्वागत #विधायकसोनारामसिंकू #पश्चिमीसिंहभूम #चाईबासान्यूज़ #कांग्रेसपार्टी #झारखंडकांग्रेस #राजनीति #KolhanBreakingNews
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    विधायक सोनाराम सिंकू बने कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष, चाईबासा में हुआ भव्य स्वागत 
#कांग्रेस #सोनारामसिंकू #चाईबासा #कांग्रेसजिलाध्यक्ष #भव्यस्वागत #विधायकसोनारामसिंकू #पश्चिमीसिंहभूम #चाईबासान्यूज़ #कांग्रेसपार्टी #झारखंडकांग्रेस #राजनीति #KolhanBreakingNews
    user_कोल्हान ब्रेकिंग न्यूज
    कोल्हान ब्रेकिंग न्यूज
    Local News Reporter चाईबासा, पश्चिम सिंहभूम, झारखंड•
    54 min ago
  • लोनी में भाजपा का यह वो विकास है जिसकी तारीफ़ करने के लिए भाजपा विधायक के पास शब्द नहीं हैं लोनी में भाजपा का यह वो विकास है जिसकी तारीफ़ करने के लिए भाजपा विधायक के पास शब्द नहीं हैं
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    लोनी में भाजपा का यह वो विकास है
जिसकी तारीफ़ करने के लिए भाजपा विधायक के पास शब्द नहीं हैं
लोनी में भाजपा का यह वो विकास है
जिसकी तारीफ़ करने के लिए भाजपा विधायक के पास शब्द नहीं हैं
    user_Mohammad Adnan
    Mohammad Adnan
    Local News Reporter गोलमुरी-कम-जुगसलाई, पूर्वी सिंहभूम, झारखंड•
    4 hrs ago
  • चक्रधरपुर थाना परिसर में एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन करंजो द्वारा आयोजित किया गया रक्षाबंधन कार्यक्रम। महिलाओं और छात्राओं ने पुलिस अधिकारियों और जवानों को बाँधा राखी। चाईबासा के चक्रधरपुर थाना परिसर में एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन करंजो द्वारा आयोजित किया गया रक्षाबंधन कार्यक्रम। महिलाओं और छात्राओं ने पुलिस अधिकारियों और जवानों को बाँधा राखी। चाईबासा के चक्रधरपुर थाना परिसर में एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन करंजो द्वारा रक्षाबंधन कार्यक्रम आयोजित किया गया। मौके पर एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन करंजो की अध्यक्ष नीतू साहू के साथ महिलाओं और छात्राओं ने थाना परिसर पहुंचकर थाना प्रभारी अवधेश कुमार समेत अन्य पुलिस अधिकारियों और जवानों को राखी बांधकर उनके प्रति सम्मान और भाई-बहन के अटूट रिश्ते का संदेश दिया। मौके पर एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन करंजो की छात्राओं ने अपने हाथ से बनाया हुआ राखी पुलिस अधिकारियों और जवानों को राखी बाँधा। मौके पर महिलाओं ने कहा कि पुलिसकर्मी समाज की सुरक्षा में दिन-रात तत्पर रहते हैं। रक्षा बंधन जैसे पर्व पर उन्हें राखी बांधकर सम्मानित करना समाज और पुलिस के बीच आपसी विश्वास एवं भाईचारे को मजबूत करता है। बाईट - नीतू साहू, अध्यक्ष, एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन, करंजो बाईट - डॉ० शरणदीप कौर, सदस्य, एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन, करंजो बाईट - एकल महिला समिति करंजो की छात्राएं
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    चक्रधरपुर थाना परिसर में एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन करंजो द्वारा आयोजित किया गया रक्षाबंधन कार्यक्रम। महिलाओं और छात्राओं ने पुलिस अधिकारियों और जवानों को बाँधा राखी। 

चाईबासा के चक्रधरपुर थाना परिसर में एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन करंजो द्वारा आयोजित किया गया रक्षाबंधन कार्यक्रम। महिलाओं और छात्राओं ने पुलिस अधिकारियों और जवानों को बाँधा राखी। 
चाईबासा के चक्रधरपुर थाना परिसर में एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन करंजो द्वारा रक्षाबंधन कार्यक्रम आयोजित किया गया। मौके पर एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन करंजो की अध्यक्ष नीतू साहू के साथ महिलाओं और छात्राओं ने थाना परिसर पहुंचकर थाना प्रभारी अवधेश कुमार समेत अन्य पुलिस अधिकारियों और जवानों को राखी बांधकर उनके प्रति सम्मान और भाई-बहन के अटूट रिश्ते का संदेश दिया। मौके पर एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन करंजो की छात्राओं ने अपने हाथ से बनाया हुआ राखी पुलिस अधिकारियों और जवानों को राखी बाँधा। मौके पर महिलाओं ने कहा कि पुलिसकर्मी समाज की सुरक्षा में दिन-रात तत्पर रहते हैं। रक्षा बंधन जैसे पर्व पर उन्हें राखी बांधकर सम्मानित करना समाज और पुलिस के बीच आपसी विश्वास एवं भाईचारे को मजबूत करता है।
बाईट - नीतू साहू, अध्यक्ष, एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन, करंजो
बाईट - डॉ० शरणदीप कौर, सदस्य, एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन, करंजो
बाईट - एकल महिला समिति करंजो की छात्राएं
    user_CITI LIVE Jharkhand
    CITI LIVE Jharkhand
    Court reporter चाईबासा, पश्चिम सिंहभूम, झारखंड•
    6 hrs ago
  • jharkhand | chandil : बरवाअड्डा थाना हंगामा मामले में जयराम महतो समेत 11 पर प्राथमिकी, जेएलकेएम ने पुलिस पर उठाए सवाल.... #viral #jlkm jharkhand | chandil : बरवाअड्डा थाना हंगामा मामले में जयराम महतो समेत 11 पर प्राथमिकी, जेएलकेएम ने पुलिस पर उठाए सवाल.... धनबाद के बरवाअड्डा थाना में कथित हंगामे को लेकर विधायक जयराम महतो समेत 11 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज हुई है। पुलिस ने गाली-गलौज, धमकी, धक्का-मुक्की, सरकारी कार्य में बाधा और बंद आरोपित को छुड़ाने के प्रयास के आरोप लगाए हैं। जयराम महतो ने आरोपों से इनकार किया है। जेएलकेएम ने निष्पक्ष जांच की मांग की | jharkhandnews | jlkm | jiladarpan | viralvideochallenge
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    jharkhand | chandil : बरवाअड्डा थाना हंगामा मामले में जयराम महतो समेत 11 पर प्राथमिकी, जेएलकेएम ने पुलिस पर उठाए सवाल....
#viral #jlkm
jharkhand | chandil : बरवाअड्डा थाना हंगामा मामले में जयराम महतो समेत 11 पर प्राथमिकी, जेएलकेएम ने पुलिस पर उठाए सवाल....
धनबाद के बरवाअड्डा थाना में कथित हंगामे को लेकर विधायक जयराम महतो समेत 11 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज हुई है। पुलिस ने गाली-गलौज, धमकी, धक्का-मुक्की, सरकारी कार्य में बाधा और बंद आरोपित को छुड़ाने के प्रयास के आरोप लगाए हैं। जयराम महतो ने आरोपों से इनकार किया है। जेएलकेएम ने निष्पक्ष जांच की मांग की | jharkhandnews  | jlkm | jiladarpan  | viralvideochallenge
    user_Bishnu mahapatra
    Bishnu mahapatra
    Local News Reporter चांडिल, सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    15 min ago
  • jharkhand | chandil : बरवाअड्डा थाना हंगामा मामले में जयराम महतो समेत 11 पर प्राथमिकी, जेएलकेएम ने पुलिस पर उठाए सवाल.... #viral #controversy jharkhand | chandil : बरवाअड्डा थाना हंगामा मामले में जयराम महतो समेत 11 पर प्राथमिकी, जेएलकेएम ने पुलिस पर उठाए सवाल.... जिला_दर्पण 📲 9471102055 (wa) धनबाद के बरवाअड्डा थाना में कथित हंगामे को लेकर विधायक जयराम महतो समेत 11 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज हुई है। पुलिस ने गाली-गलौज, धमकी, धक्का-मुक्की, सरकारी कार्य में बाधा और बंद आरोपित को छुड़ाने के प्रयास के आरोप लगाए हैं। जयराम महतो ने आरोपों से इनकार किया है। जेएलकेएम ने निष्पक्ष जांच की मांग की | jharkhandnews | jlkm | jiladarpan | viralvideochallenge
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    jharkhand | chandil : बरवाअड्डा थाना हंगामा मामले में जयराम महतो समेत 11 पर प्राथमिकी, जेएलकेएम ने पुलिस पर उठाए सवाल....
#viral #controversy 
jharkhand | chandil : बरवाअड्डा थाना हंगामा मामले में जयराम महतो समेत 11 पर प्राथमिकी, जेएलकेएम ने पुलिस पर उठाए सवाल....
जिला_दर्पण 📲 9471102055 (wa)
धनबाद के बरवाअड्डा थाना में कथित हंगामे को लेकर विधायक जयराम महतो समेत 11 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज हुई है। पुलिस ने गाली-गलौज, धमकी, धक्का-मुक्की, सरकारी कार्य में बाधा और बंद आरोपित को छुड़ाने के प्रयास के आरोप लगाए हैं। जयराम महतो ने आरोपों से इनकार किया है। जेएलकेएम ने निष्पक्ष जांच की मांग की | jharkhandnews | jlkm | jiladarpan  | viralvideochallenge
    user_Jila Darpan
    Jila Darpan
    Local News Reporter चांडिल, सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    42 min ago
  • *चक्रधरपुर थाना परिसर में पुलिस जवानों को बांधी गई राखी, एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन ने मनाया रक्षा बंधन उत्सव* चक्रधरपुर | चक्रधरपुर थाना परिसर में रक्षा बंधन के अवसर पर एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन की ओर से विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान महिलाओं ने पुलिस पदाधिकारियों और जवानों को राखी बांधकर उनके प्रति सम्मान और भाई-बहन के अटूट रिश्ते का संदेश दिया। चक्रधरपुर थाना परिसर में रक्षा बंधन का पर्व इस बार कुछ खास अंदाज में मनाया गया। एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में महिलाओं ने पुलिसकर्मियों को राखी बांधकर उनके प्रति सम्मान और अपनत्व जाहिर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता फाउंडेशन की नीतू साहू ने की। इस दौरान महिलाओं ने थाना प्रभारी अवधेश कुमार सहित पुलिस पदाधिकारियों और जवानों की कलाई पर राखी बांधी कर उनकी लंबी उम्र, उज्ज्वल भविष्य तथा सुरक्षित सेवा की कामना की। महिलाओं ने कहा कि पुलिस के जवान समाज की सुरक्षा के लिए दिन-रात अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में रक्षा बंधन के अवसर पर उन्हें राखी बांधना सिर्फ एक पर्व मनाना नहीं, बल्कि पुलिस और समाज के बीच विश्वास, भाईचारे और सहयोग को मजबूत करने का संदेश है। वहीं, पुलिस पदाधिकारियों ने भी महिलाओं को रक्षा बंधन की शुभकामनाएं दीं और समाज में शांति, सौहार्द तथा आपसी सहयोग बनाए रखने की अपील की। रक्षा बंधन के इस आयोजन ने थाना परिसर में भाई-बहन के रिश्ते के साथ-साथ पुलिस और आम लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव की एक खूबसूरत तस्वीर पेश की। चक्रधरपुर थाना परिसर में आयोजित यह रक्षा बंधन उत्सव सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास का संदेश देते हुए संपन्न हुआ। एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन के अध्यक्ष नीतू साहू, दिप्पी कौर, कांचन छाबरा, ममता अग्रवाल, सबिता चुंग , सुषमा साव, मोनिका साव, किरन चौहान, पूनम देवी, मंजू मिश्रा, मीना भागेरिया, आशा कुमारी सहित महिलाएं एवं युवती उपस्थित रही।
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    *चक्रधरपुर थाना परिसर में पुलिस जवानों को बांधी गई राखी, एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन ने मनाया रक्षा बंधन उत्सव*


चक्रधरपुर | चक्रधरपुर थाना परिसर में रक्षा बंधन के अवसर पर एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन की ओर से विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान महिलाओं ने पुलिस पदाधिकारियों और जवानों को राखी बांधकर उनके प्रति सम्मान और भाई-बहन के अटूट रिश्ते का संदेश दिया।
चक्रधरपुर थाना परिसर में रक्षा बंधन का पर्व इस बार कुछ खास अंदाज में मनाया गया। एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में महिलाओं ने पुलिसकर्मियों को राखी बांधकर उनके प्रति सम्मान और अपनत्व जाहिर किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता फाउंडेशन की नीतू साहू ने की। इस दौरान महिलाओं ने थाना प्रभारी अवधेश कुमार सहित पुलिस पदाधिकारियों और जवानों की कलाई पर राखी बांधी कर उनकी लंबी उम्र, उज्ज्वल भविष्य तथा सुरक्षित सेवा की कामना की।
महिलाओं ने कहा कि पुलिस के जवान समाज की सुरक्षा के लिए दिन-रात अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में रक्षा बंधन के अवसर पर उन्हें राखी बांधना सिर्फ एक पर्व मनाना नहीं, बल्कि पुलिस और समाज के बीच विश्वास, भाईचारे और सहयोग को मजबूत करने का संदेश है।
वहीं, पुलिस पदाधिकारियों ने भी महिलाओं को रक्षा बंधन की शुभकामनाएं दीं और समाज में शांति, सौहार्द तथा आपसी सहयोग बनाए रखने की अपील की।
रक्षा बंधन के इस आयोजन ने थाना परिसर में भाई-बहन के रिश्ते के साथ-साथ पुलिस और आम लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव की एक खूबसूरत तस्वीर पेश की।
चक्रधरपुर थाना परिसर में आयोजित यह रक्षा बंधन उत्सव सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास का संदेश देते हुए संपन्न हुआ।
एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन के अध्यक्ष नीतू साहू, दिप्पी कौर, कांचन छाबरा, ममता अग्रवाल, सबिता चुंग , सुषमा साव, मोनिका साव, किरन चौहान, पूनम देवी, मंजू मिश्रा, मीना भागेरिया, आशा कुमारी सहित महिलाएं एवं युवती उपस्थित रही।
    user_Jay Kumar
    Jay Kumar
    Local News Reporter चक्रधरपुर, पश्चिम सिंहभूम, झारखंड•
    1 hr ago
  • दिल्ली के बाद अब पटना में 6 साल के आदित्य Zen Alpha ने छात्रों को लेकर किया SP से बहस बोले सम्राट चौधरी को.. दिल्ली के बाद अब पटना में 6 साल के आदित्य Zen Alpha ने छात्रों को लेकर किया SP से बहस बोले सम्राट चौधरी को.. #ZenAlpha #samratchaudhary #BiharPolice #BiharNews #
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    दिल्ली के बाद अब पटना में 6 साल के आदित्य Zen Alpha ने छात्रों को लेकर किया SP से बहस बोले सम्राट चौधरी को..


दिल्ली के बाद अब पटना में 6 साल के आदित्य Zen Alpha ने छात्रों को लेकर किया SP से बहस बोले सम्राट चौधरी को..
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    user_Mohammad Adnan
    Mohammad Adnan
    Local News Reporter गोलमुरी-कम-जुगसलाई, पूर्वी सिंहभूम, झारखंड•
    9 hrs ago
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