रानेश्वर प्रखंड के लाकड़ाघाटी गांव में मुख्य मार्ग से कब्रिस्तान तक जाने वाले रास्ते के निर्माण कार्य में कथित तौर पर भारी अनियमितता बरती गई है, जिसके चलते यह पथ महज कुछ ही समय में जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। ग्रामीणों ने इस मामले में गंभीर सवाल उठाए हैं और कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा किया है। यह लगभग 500-600 मीटर लंबा रास्ता लाकड़ाघाटी, कुकड़ीभाषा, पलासपाड़ा और भुईकुमड़ा गांवों के मुस्लिम समुदाय के लोगों के शवों को कब्रिस्तान तक पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों का कहना है कि कच्ची मिट्टी का रास्ता होने के कारण खासकर बरसात के मौसम में शव ले जाने और जनाज़े में शामिल होने वाले लोगों को काफी परेशानी होती थी। इसी समस्या को देखते हुए सरकारी स्तर के विकास मद के तहत इस कच्ची मिट्टी वाले रास्ते पर पीसीसी पथ का निर्माण खंड-खंड में शुरू किया गया था। बताया गया है कि 4-5 साल पहले 200-300 फीट तक पीसीसी पथ बनाया गया, और फिर अगले वर्ष कुछ और हिस्सा तैयार किया गया, जिससे यह पथ कई हिस्सों में निर्मित हुआ है। हालांकि, शुक्रवार को कार्यस्थल का दौरा करने पर देखा गया कि पीसीसी का अधिकतर हिस्सा टूट चुका है, फट चुका है, उखड़ चुका है और इसमें दरारें आ गई हैं, जिससे यह पूरी तरह से जर्जर हो गया है। आरोप है कि कार्य में जमकर अनियमितता बरती गई है, जिस कारण पथ का यह हाल हुआ है। हाल ही में इसी स्थान पर लगभग 200 फीट तक पीसीसी पथ का निर्माण किया गया है, जिस पर भी भारी अनियमितता बरतने का आरोप है। इसके अतिरिक्त, करीब 200 फीट पर पीसीसी पथ निर्माण हेतु ईंट की सोलिंग भी की गई है, जिसमें अनियमितता बरतने की बात कही जा रही है। कार्यस्थल के पास कुछ मात्रा में गिट्टी, बालू और 200-250 ईंटें पड़ी मिलीं। आरोप है कि निर्माण कार्य में मयूराक्षी नदी के बालू घाट से उठाए गए अवैध बालू का इस्तेमाल हो रहा है, और ईंटें भी बिना खनन अनुज्ञप्ति के उपयोग की जा रही हैं। यह भी कहा गया है कि कार्य एस्टीमेट के अनुसार नहीं किया जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि कार्यस्थल के पास कार्य विवरण हेतु कोई सूचनापट्ट नहीं लगाया गया है, जिससे यह पुष्टि नहीं हो पा रही है कि कार्य किस मद से हो रहा है, जिसे भ्रष्टाचार का संकेत माना जा रहा है। निर्माण के कुछ ही समय बाद पीसीसी पथ का टूट जाना विभागीय कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है और इस पूरी परियोजना में हुई लापरवाही को उजागर करता है।
रानेश्वर प्रखंड के लाकड़ाघाटी गांव में मुख्य मार्ग से कब्रिस्तान तक जाने वाले रास्ते के निर्माण कार्य में कथित तौर पर भारी अनियमितता बरती गई है, जिसके चलते यह पथ महज कुछ ही समय में जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। ग्रामीणों ने इस मामले में गंभीर सवाल उठाए हैं और कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा किया है। यह लगभग 500-600 मीटर लंबा रास्ता लाकड़ाघाटी, कुकड़ीभाषा, पलासपाड़ा और भुईकुमड़ा गांवों के मुस्लिम समुदाय के लोगों के शवों को कब्रिस्तान तक पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों का कहना है कि कच्ची मिट्टी का रास्ता होने के कारण खासकर बरसात के मौसम में शव ले जाने और जनाज़े में शामिल होने वाले लोगों को काफी परेशानी होती थी। इसी समस्या को देखते हुए सरकारी स्तर के विकास मद के तहत इस कच्ची मिट्टी वाले रास्ते पर पीसीसी पथ का निर्माण खंड-खंड
में शुरू किया गया था। बताया गया है कि 4-5 साल पहले 200-300 फीट तक पीसीसी पथ बनाया गया, और फिर अगले वर्ष कुछ और हिस्सा तैयार किया गया, जिससे यह पथ कई हिस्सों में निर्मित हुआ है। हालांकि, शुक्रवार को कार्यस्थल का दौरा करने पर देखा गया कि पीसीसी का अधिकतर हिस्सा टूट चुका है, फट चुका है, उखड़ चुका है और इसमें दरारें आ गई हैं, जिससे यह पूरी तरह से जर्जर हो गया है। आरोप है कि कार्य में जमकर अनियमितता बरती गई है, जिस कारण पथ का यह हाल हुआ है। हाल ही में इसी स्थान पर लगभग 200 फीट तक पीसीसी पथ का निर्माण किया गया है, जिस पर भी भारी अनियमितता बरतने का आरोप है। इसके अतिरिक्त, करीब 200 फीट पर पीसीसी पथ निर्माण हेतु ईंट की सोलिंग भी की गई है, जिसमें अनियमितता बरतने
की बात कही जा रही है। कार्यस्थल के पास कुछ मात्रा में गिट्टी, बालू और 200-250 ईंटें पड़ी मिलीं। आरोप है कि निर्माण कार्य में मयूराक्षी नदी के बालू घाट से उठाए गए अवैध बालू का इस्तेमाल हो रहा है, और ईंटें भी बिना खनन अनुज्ञप्ति के उपयोग की जा रही हैं। यह भी कहा गया है कि कार्य एस्टीमेट के अनुसार नहीं किया जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि कार्यस्थल के पास कार्य विवरण हेतु कोई सूचनापट्ट नहीं लगाया गया है, जिससे यह पुष्टि नहीं हो पा रही है कि कार्य किस मद से हो रहा है, जिसे भ्रष्टाचार का संकेत माना जा रहा है। निर्माण के कुछ ही समय बाद पीसीसी पथ का टूट जाना विभागीय कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है और इस पूरी परियोजना में हुई लापरवाही को उजागर करता है।
- दुमका जिले के रानेश्वर प्रखंड स्थित लाकड़ाघाटी गाँव में कब्रिस्तान तक जाने वाले पीसीसी पथ का कार्य नियमों की अनदेखी के कारण जर्जर अवस्था में पहुँच गया है। इस पीसीसी पथ के निर्माण कार्य में बरती गई अनियमितताओं के चलते सड़क की हालत बद से बदतर हो गई है।1
- झारखंड के दुमका जिले के जरमुंडी प्रखंड में केंदुवाटिकर ग्राम/वार्ड के निवासी मंगल कोल ने सार्वजनिक कुएं की मरम्मत हेतु स्थानीय मुखिया और प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) को एक आवेदन पत्र सौंपा है। आवेदन में बताया गया है कि मोहल्ले का सार्वजनिक कुआं काफी समय से जर्जर स्थिति में है, जिससे उसकी जगत (दीवार) टूट गई है और कुएं का पानी दूषित हो गया है। इस गंभीर समस्या के कारण स्थानीय निवासियों को स्वच्छ जल की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। प्रार्थी ने जनहित का हवाला देते हुए अनुरोध किया है कि जल्द से जल्द इस कुएं की मरम्मत और साफ-सफाई कराई जाए ताकि जल संकट का समाधान हो सके।4
- एक चलती कार अचानक आग के गोले में तब्दील हो गई। इस घटना में गाड़ी में सवार तीन लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए चलती कार से कूदकर खुद को सुरक्षित कर लिया।1
- निरसा/रामकनाली में फ्लाईओवर निर्माण कार्य के दौरान जान गंवाने वाले मजदूर अभिजीत मुर्मू के मामले में, जीत एशिया प्रोजेक्ट ऑफिस पर लगभग 9 घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद एक समझौता हो गया है। यह सहमति कंपनी और मृतक के परिजनों के बीच बनी, जिसमें जेएमएम जिला अध्यक्ष लख्खी सोरेन, रामकनाली मुखिया सुक्कलाल मरांडी और स्थानीय ग्रामीण भी मौजूद थे। समझौते के अनुसार, कंपनी ने मृतक के परिजनों को तत्काल सहायता के तौर पर कुल 8 लाख रुपये देने पर सहमति व्यक्त की है। इसमें से 28 मई को दाह-संस्कार और श्राद्ध कार्य के लिए 1 लाख रुपये नकद दिए गए, जबकि शेष 7 लाख रुपये 29 मई 2026 को मृतक के पिता बुधन मुर्मू के खाते में आरटीजीएस के माध्यम से भेजे जाएंगे। इसके अतिरिक्त, कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए दुर्घटना बीमा प्रावधान के तहत लगभग 16.50 से 17 लाख रुपये की दावा राशि नियमानुसार एक से डेढ़ महीने के भीतर श्रम आयुक्त, धनबाद के सरकारी खाते में जमा की जाएगी। कंपनी ने संबंधित विभाग और श्रम आयुक्त को दुर्घटना की सूचना देने की भी जानकारी दी है। समझौता पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय दोनों पक्षों की आपसी सहमति से और बिना किसी दबाव के लिया गया है, तथा भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाई जाएगी।3
- पाकुड़ के नगर प्रशासक अमरेंद्र चौधरी ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के आदेश पर एक वीडियो जारी किया है, जिसमें होल्डिंग टैक्स के पुनरीक्षण और उस पर मिलने वाली छूट का विवरण दिया गया है। इस निर्देश के तहत, शहर में हर दो साल में सर्किल रेट बढ़ने पर होल्डिंग टैक्स में सीधे 10% की बढ़ोतरी की जाएगी, और यह पुनरीक्षण अनिवार्य रूप से लागू हो रहा है। हालांकि, प्रशासन ने ईमानदारी से टैक्स भरने वाले उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी छूट की पेशकश भी की है। यदि उपभोक्ता अपना होल्डिंग टैक्स ऑनलाइन भरते हैं, तो उन्हें सीधे 5% की अतिरिक्त छूट मिलेगी। वहीं, कार्यालय में आकर टैक्स जमा करने पर 2.5% की छूट का लाभ उठाया जा सकता है। इसके अलावा, महिला, ट्रांसजेंडर, सीनियर सिटीजन और दिव्यांग उपभोक्ताओं को 5% की अतिरिक्त छूट दी जाएगी, जिससे उन्हें कुल मिलाकर 15% तक की राहत मिल सकती है।1
- मेहरमा प्रखंड क्षेत्र के बलबड्डा स्थित राम सुन्दर राम विद्यालय परिसर में कुर्मी समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मेहरमा, महगामा और ठाकुरगंगटी प्रखंडों से बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। बैठक के दौरान समाज के उत्थान, संगठन की मजबूती और उसके विस्तार पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि समाज की प्रगति के लिए एकजुटता आवश्यक है, और संगठन को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए सभी सदस्यों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उपस्थित लोगों ने शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष बल दिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य कुर्मी समाज को मजबूत करना, सामाजिक एकता को बढ़ावा देना और संगठन के विस्तार के माध्यम से समाज के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करना था। साथ ही, यह निर्णय लिया गया कि समाज को संगठित करने और उसकी समस्याओं के समाधान के लिए भविष्य में नियमित रूप से बैठकें आयोजित की जाएंगी।1
- बिहार के बांका जिले में देर रात एक सुनसान जंगल में जिला पुलिस की गाड़ी का टायर पंचर हो जाने से वह खराब हो गई। ऐसे मुश्किल वक्त में शिवेश मिश्रा ने 'शेर वाले जिगड़े' के साथ आगे बढ़कर पुलिस की मदद की। इस घटना को लेकर DM कलेक्टर कार्यालय बांका और बांका बिहार न्यूज़ में सराहना की गई है।1
- झारखंड के दुमका जिले अंतर्गत जरमुंडी प्रखंड की चुरखेड़ा पंचायत के केंदुआतिकर गांव में अत्यंत ही घटिया व्यवस्था होने का आरोप लगाया गया है। स्थानीय लोगों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सवाल उठाया है कि आखिर इस खराब व्यवस्था का ज़िम्मेदार कौन है। यह प्रश्न किया गया है कि क्या इसके लिए पंचायत अधिकारी जवाबदेह हैं या प्रखंड अधिकारी।1