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झालावाड़ के पनवाड़ क्षेत्र के बिशनखेड़ी गांव में स्थित लक्ष्मीनाथ मंदिर से जुड़ा एक पुराना विवाद आज एक बड़े टकराव में बदल गया। इस मंदिर की 30 बीघा कीमती जमीन और उसके मालिकाना हक को लेकर ग्रामीण और पुजारी पक्ष के बीच लंबे समय से गतिरोध बना हुआ था। ग्रामीण इस जर्जर हो चुके प्राचीन मंदिर का नवनिर्माण कराना चाहते हैं, लेकिन पुजारी पक्ष इसका विरोध कर रहा है। इस मामले को लेकर प्रशासन के साथ हुई सुलह की बातचीत भी पहले विफल रही थी। आज उस वक्त माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया, जब प्रशासन और पुलिस की टीम पुजारी के पक्ष में जमीन पर कब्ज़ा दिलाने के लिए मौके पर पहुंची। इस कार्रवाई से नाराज़ ग्रामीणों ने प्रशासन का खुलकर विरोध किया और उनके आमने-सामने आ गए। हालात पर काबू पाने के प्रयासों के तहत मौके पर एडिशनल एसपी और भारी पुलिस जाप्ता तैनात किया गया है।
Pradeep Nagar
झालावाड़ के पनवाड़ क्षेत्र के बिशनखेड़ी गांव में स्थित लक्ष्मीनाथ मंदिर से जुड़ा एक पुराना विवाद आज एक बड़े टकराव में बदल गया। इस मंदिर की 30 बीघा कीमती जमीन और उसके मालिकाना हक को लेकर ग्रामीण और पुजारी पक्ष के बीच लंबे समय से गतिरोध बना हुआ था। ग्रामीण इस जर्जर हो चुके प्राचीन मंदिर का नवनिर्माण कराना चाहते हैं, लेकिन पुजारी पक्ष इसका विरोध कर रहा है। इस मामले को लेकर प्रशासन के साथ हुई सुलह की बातचीत भी पहले विफल रही थी। आज उस वक्त माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया, जब प्रशासन और पुलिस की टीम पुजारी के पक्ष में जमीन पर कब्ज़ा दिलाने के लिए मौके पर पहुंची। इस कार्रवाई से नाराज़ ग्रामीणों ने प्रशासन का खुलकर विरोध किया और उनके आमने-सामने आ गए। हालात पर काबू पाने के प्रयासों के तहत मौके पर एडिशनल एसपी और भारी पुलिस जाप्ता तैनात किया गया है।
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- ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक धरोहरों से समृद्ध झालावाड़ जिले में गागरोन दुर्ग आज भी सबसे प्रमुख पर्यटन पहचान बना हुआ है। देश-विदेश से पर्यटक इस विश्व प्रसिद्ध जलदुर्ग को देखने पहुंचते हैं, जिसकी स्थापत्य कला और ऐतिहासिक महत्व नदियों से घिरे होने के कारण इसे जिले के अन्य पर्यटन स्थलों से अलग पहचान दिलाता है। पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार, गागरोन दुर्ग झालावाड़ का सबसे चर्चित और सर्वाधिक आकर्षण वाला पर्यटन स्थल माना जाता है। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि यह तीन ओर से जल से घिरा हुआ है, जिसके कारण इसे 'जलदुर्ग' की श्रेणी में शामिल किया गया है। यह स्थल ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। हालांकि झालरापाटन का सूर्य मंदिर, गढ़ पैलेस, चंद्रभागा मंदिर, भवानी नाट्यशाला और कोलवी की बौद्ध गुफाएं भी जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हैं, लेकिन लोकप्रियता और पहचान के मामले में गागरोन दुर्ग को जिले का नंबर-1 पर्यटन स्थल माना जाता है। पर्यटन से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि गागरोन दुर्ग के आसपास आधारभूत सुविधाओं और प्रचार-प्रसार को और बढ़ावा दिया जाए, तो यह स्थल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है।1
- हिमालय की पहाड़ियों में स्थित शिमला, कुल्लू और मनाली में सैलानी बेहद शानदार नज़ारों का आनंद ले रहे हैं। यहाँ का दृश्य इतना मनमोहक है कि जो एक बार इस जगह घूमने आता है, उसका वापस जाने का मन नहीं करता। अटल टनल के पास का नज़ारा वाकई देखने लायक है, जहाँ सैलानी हिमालय की वादियों में खूब लुत्फ़ उठा रहे हैं।4
- छीपाबड़ौद स्थित स्टेडियम में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की तैयारियों के तहत समुद्र मंथन प्राणायाम का आयोजन किया गया।1
- पिपलिया क्षेत्र के गुराडिया झाला गांव में थाना भवानीमंडी और पिपलिया चौकी पुलिस द्वारा एक संयुक्त साइबर जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भवानीमंडी थाना से लटूर जी मीणा और उनकी टीम के साथ-साथ पिपलिया चौकी प्रभारी जयदीप सिंह और उनकी टीम ने भाग लिया। अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रहने और उनसे बचाव के तरीकों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करना था।1
- राजस्थान शहरी सेवा शिविर 2026 के अंतर्गत, राज्य में अवैध कॉलोनियों के नियमन के लिए विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इन शिविरों का आयोजन राजस्थान भर में 12 जून से शुरू होकर 15 जून तक चलेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य अवैध कॉलोनियों को नियमित करना है।1
- छिपाबड़ौद स्टेडियम में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों ज़ोरों पर हैं, जहाँ शारीरिक लचीलेपन के लिए आगे और पीछे ताली बजाने जैसे योगाभ्यास किए जा रहे हैं। आयोजकों ने सभी से इस अवसर पर आकर योगाभ्यास में शामिल होने का आग्रह किया है। इसके साथ ही, उन्होंने अपने योग वीडियो को लाइक, कमेंट करने और मित्रों तथा परिवार के सदस्यों के साथ साझा करने का भी अनुरोध किया है।1
- झालावाड़ के पनवाड़ क्षेत्र के बिशनखेड़ी गांव में स्थित लक्ष्मीनाथ मंदिर से जुड़ा एक पुराना विवाद आज एक बड़े टकराव में बदल गया। इस मंदिर की 30 बीघा कीमती जमीन और उसके मालिकाना हक को लेकर ग्रामीण और पुजारी पक्ष के बीच लंबे समय से गतिरोध बना हुआ था। ग्रामीण इस जर्जर हो चुके प्राचीन मंदिर का नवनिर्माण कराना चाहते हैं, लेकिन पुजारी पक्ष इसका विरोध कर रहा है। इस मामले को लेकर प्रशासन के साथ हुई सुलह की बातचीत भी पहले विफल रही थी। आज उस वक्त माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया, जब प्रशासन और पुलिस की टीम पुजारी के पक्ष में जमीन पर कब्ज़ा दिलाने के लिए मौके पर पहुंची। इस कार्रवाई से नाराज़ ग्रामीणों ने प्रशासन का खुलकर विरोध किया और उनके आमने-सामने आ गए। हालात पर काबू पाने के प्रयासों के तहत मौके पर एडिशनल एसपी और भारी पुलिस जाप्ता तैनात किया गया है।1