पूर्वजों की धरती से गूंजा शंखनाद: शंकराचार्य ने शुरू की 81 दिवसीय ‘गविष्टि यात्रा’ साफ संदेश विकास कुमार शर्मा गोरखपुर। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गोरखपुर की पावन धरती से 81 दिवसीय ‘गविष्टि यात्रा’ का भव्य शंखनाद करते हुए गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने का आह्वान किया। शनिवार को तीन दिवसीय प्रवास पर गोरखपुर पहुंचे शंकराचार्य का पहला कदम सीधे उनकी जड़ों की ओर बढ़ा, जहां उन्होंने सहजनवा क्षेत्र के पैतृक गांव इटार पनिका पहुंचकर पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित की। गांव पहुंचने पर उन्होंने टेकधर ब्रह्मस्थान पर विधिवत पूजा-अर्चना की और लगभग एक घंटे तक ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान गांव के बुजुर्गों ने उनके पूर्वजों से जुड़े संस्मरण साझा किए, जिससे वातावरण भावुक और गौरवपूर्ण हो उठा। अपने संबोधन में शंकराचार्य ने रविवार से गोरखपुर से ‘गविष्टि यात्रा’ की शुरुआत की घोषणा करते हुए बताया कि यह यात्रा उत्तर प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाना और गौ संरक्षण के प्रति जनजागरूकता फैलाना है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “कई लोगों ने इस यात्रा को लेकर जान का खतरा बताया, इसलिए पहले अपने पूर्वजों की धरती पर आकर आशीर्वाद लेने आया हूं। यह भूमि बलिदान और परंपरा की प्रतीक रही है।” साथ ही उन्होंने सत्ता पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भले ही परिस्थितियां विपरीत हों, लेकिन “परम सत्ता” उनके साथ है, जिससे यह यात्रा सफल होगी। काफिले और तैयारियों की झलक: शंकराचार्य लगभग एक दर्जन वाहनों के काफिले के साथ विशेष रथ पर सवार होकर गांव पहुंचे। उनके साथ साधु-संतों, बटुकों और करीब 50 अनुयायियों का दल मौजूद रहा। वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। गोरखपुर प्रवास के दौरान वे सहारा एस्टेट स्थित अपने शिष्य अधिवक्ता मनीष पांडेय के आवास पर ठहरेंगे। प्रशासन ने ‘गविष्टि यात्रा’ के आयोजन के लिए 29 शर्तों के साथ अनुमति प्रदान की है। जनआंदोलन की ओर बढ़ते कदम: शंकराचार्य ने ग्रामीणों से इस यात्रा में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि गौ संरक्षण का यह अभियान जनआंदोलन का रूप लेगा। पूर्वजों की मिट्टी से आशीर्वाद लेकर निकली यह यात्रा अब प्रदेश की राजनीति और समाज में व्यापक चर्चा का विषय बन चुकी है। गोरखपुर से उठी यह आवाज अब पूरे उत्तर प्रदेश में गूंजने को तैयार है। आईए सुनते हैं कि शंकराचार्य ने अपने अभिवादन में क्या कुछ कहा ?
पूर्वजों की धरती से गूंजा शंखनाद: शंकराचार्य ने शुरू की 81 दिवसीय ‘गविष्टि यात्रा’ साफ संदेश विकास कुमार शर्मा गोरखपुर। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गोरखपुर की पावन धरती से 81 दिवसीय ‘गविष्टि यात्रा’ का भव्य शंखनाद करते हुए गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने का आह्वान किया। शनिवार को तीन दिवसीय प्रवास पर गोरखपुर पहुंचे शंकराचार्य का पहला कदम सीधे उनकी जड़ों की ओर बढ़ा, जहां उन्होंने सहजनवा क्षेत्र के पैतृक गांव इटार पनिका पहुंचकर पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित की। गांव पहुंचने पर उन्होंने टेकधर ब्रह्मस्थान पर विधिवत पूजा-अर्चना की और लगभग एक घंटे तक ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान गांव के बुजुर्गों ने उनके पूर्वजों से जुड़े संस्मरण साझा किए, जिससे वातावरण भावुक और गौरवपूर्ण हो उठा। अपने संबोधन में शंकराचार्य ने रविवार से गोरखपुर से ‘गविष्टि यात्रा’ की शुरुआत की घोषणा करते हुए बताया कि यह यात्रा उत्तर प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाना और गौ संरक्षण के प्रति जनजागरूकता फैलाना है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “कई लोगों ने इस यात्रा को लेकर जान का खतरा बताया, इसलिए पहले अपने पूर्वजों की धरती पर आकर आशीर्वाद लेने आया हूं। यह भूमि बलिदान और परंपरा की प्रतीक रही है।” साथ ही उन्होंने सत्ता पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भले ही परिस्थितियां विपरीत हों, लेकिन “परम सत्ता” उनके साथ है, जिससे यह यात्रा सफल होगी। काफिले और तैयारियों की झलक: शंकराचार्य लगभग एक दर्जन वाहनों के काफिले के साथ विशेष रथ पर सवार होकर गांव पहुंचे। उनके साथ साधु-संतों, बटुकों और करीब 50 अनुयायियों का दल मौजूद रहा। वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। गोरखपुर प्रवास के दौरान वे सहारा एस्टेट स्थित अपने शिष्य अधिवक्ता मनीष पांडेय के आवास पर ठहरेंगे। प्रशासन ने ‘गविष्टि यात्रा’ के आयोजन के लिए 29 शर्तों के साथ अनुमति प्रदान की है। जनआंदोलन की ओर बढ़ते कदम: शंकराचार्य ने ग्रामीणों से इस यात्रा में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि गौ संरक्षण का यह अभियान जनआंदोलन का रूप लेगा। पूर्वजों की मिट्टी से आशीर्वाद लेकर निकली यह यात्रा अब प्रदेश की राजनीति और समाज में व्यापक चर्चा का विषय बन चुकी है। गोरखपुर से उठी यह आवाज अब पूरे उत्तर प्रदेश में गूंजने को तैयार है। आईए सुनते हैं कि शंकराचार्य ने अपने अभिवादन में क्या कुछ कहा ?
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- भारत की जनगणना-2027 को जनपद में सकुशल सम्पन्न कराने व जनपदवासियों के जागरूकता हेतु विभिन्न माध्यमों से किया जा रहा है प्रचार-प्रसार - एडीएम_____________________ राघवेन्द्र त्रिपाठी संवाददाता विधान केसरी संत कबीर नगर संत कबीर नगर 03 मई 2026, अपर जिलाधिकारी(वि0/रा0)/जिला जनगणना अधिकारी जयप्रकाश ने बताया है कि वर्तमान समय में जनगणना-2027 को जनपद में सकुशल सम्पन्न कराने हेतु शासन के निर्देशानुसार प्रथम चक्र में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (HLO) हेतु प्रशिक्षण कार्य चल रहा है। उन्होंने बताया कि जनगणना-2027 का कार्य जनहित में सहज एवं सुगम बनाने हेतु नागरिकों की सुविधा एवं उनको जागरूक करने के लिये विभिन्न विभागों द्वारा निर्धारित तिथियों के अनुसार कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।नागरिकों की सुविधा एवं जागरूकता के क्रम में पंचायती राज विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में डुग्गी मुनादी तथा नगर निकायों द्वारा शहरी क्षेत्रों में माइक से व्यापक प्रचार-प्रसार का कार्य किया जा रहा है। अपर जिलाधिकारी ने बताया कि इसके अतिरिक्त प्रशिक्षण कार्य के उपरान्त जागरूक रैली एवं अन्य माध्यमों से स्वगणना (दिनाँक 07 मई 2026 से दिनाँक 21 मई 2026 तक) के लिए लिंक/पोर्टल se.census.gov.in पर जाकर घर बैठे स्वगणना किये जाने हेतु विभिन्न माध्यमों से ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में नागरिकों को जागरूक किया जा रहा है।1
- गोरखपुर के सहारा स्टेट में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभाओं में 81 दिनों की यात्रा करके गायों की रक्षा को लेकर चलाया जाएगा जागरूकता अभियान।1
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- साफ संदेश विकास कुमार शर्मा गोरखपुर। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गोरखपुर की पावन धरती से 81 दिवसीय ‘गविष्टि यात्रा’ का भव्य शंखनाद करते हुए गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने का आह्वान किया। शनिवार को तीन दिवसीय प्रवास पर गोरखपुर पहुंचे शंकराचार्य का पहला कदम सीधे उनकी जड़ों की ओर बढ़ा, जहां उन्होंने सहजनवा क्षेत्र के पैतृक गांव इटार पनिका पहुंचकर पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित की। गांव पहुंचने पर उन्होंने टेकधर ब्रह्मस्थान पर विधिवत पूजा-अर्चना की और लगभग एक घंटे तक ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान गांव के बुजुर्गों ने उनके पूर्वजों से जुड़े संस्मरण साझा किए, जिससे वातावरण भावुक और गौरवपूर्ण हो उठा। अपने संबोधन में शंकराचार्य ने रविवार से गोरखपुर से ‘गविष्टि यात्रा’ की शुरुआत की घोषणा करते हुए बताया कि यह यात्रा उत्तर प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाना और गौ संरक्षण के प्रति जनजागरूकता फैलाना है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “कई लोगों ने इस यात्रा को लेकर जान का खतरा बताया, इसलिए पहले अपने पूर्वजों की धरती पर आकर आशीर्वाद लेने आया हूं। यह भूमि बलिदान और परंपरा की प्रतीक रही है।” साथ ही उन्होंने सत्ता पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भले ही परिस्थितियां विपरीत हों, लेकिन “परम सत्ता” उनके साथ है, जिससे यह यात्रा सफल होगी। काफिले और तैयारियों की झलक: शंकराचार्य लगभग एक दर्जन वाहनों के काफिले के साथ विशेष रथ पर सवार होकर गांव पहुंचे। उनके साथ साधु-संतों, बटुकों और करीब 50 अनुयायियों का दल मौजूद रहा। वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। गोरखपुर प्रवास के दौरान वे सहारा एस्टेट स्थित अपने शिष्य अधिवक्ता मनीष पांडेय के आवास पर ठहरेंगे। प्रशासन ने ‘गविष्टि यात्रा’ के आयोजन के लिए 29 शर्तों के साथ अनुमति प्रदान की है। जनआंदोलन की ओर बढ़ते कदम: शंकराचार्य ने ग्रामीणों से इस यात्रा में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि गौ संरक्षण का यह अभियान जनआंदोलन का रूप लेगा। पूर्वजों की मिट्टी से आशीर्वाद लेकर निकली यह यात्रा अब प्रदेश की राजनीति और समाज में व्यापक चर्चा का विषय बन चुकी है। गोरखपुर से उठी यह आवाज अब पूरे उत्तर प्रदेश में गूंजने को तैयार है। आईए सुनते हैं कि शंकराचार्य ने अपने अभिवादन में क्या कुछ कहा ?1
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- जन समर्पण पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भाजपा पर लगाया सीधा आरोप कहा इन लोगों ने भगवान राम को चूस लिया है अब अंबेडकर को भी चूसना चाहते हैं।1