पलेरा क्षेत्र के थाना बम्हौरी कला अंतर्गत ग्राम कुड़याला में शनिवार को अवैध शराब की बिक्री के विरोध में महिलाओं का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा। गांव-गांव में अवैध तरीके से बिक रही शराब के कारण अपराध, लड़ाई-झगड़े, घरेलू हिंसा और महिलाओं पर अत्याचार बढ़ने से नाराज़ होकर बड़ी संख्या में महिलाएं एकजुट हुईं और मुख्य सड़क पर चक्का जाम कर दिया, जिससे जतारा-पलेरा मार्ग पर आवागमन घंटों बाधित रहा। प्रदर्शनकारी महिलाओं का आरोप है कि गांव में खुलेआम अवैध शराब बिक रही है, जिससे सामाजिक वातावरण दूषित हो रहा है और युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। उन्होंने बताया कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते उन्हें शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सड़क पर उतरना पड़ा। सूचना मिलने पर बम्हौरी कला पुलिस मौके पर पहुंची और महिलाओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन महिलाएं अवैध शराब के कारोबार पर पूर्ण रोक लगाने की अपनी मांग पर अड़ी रहीं और जाम हटाने को तैयार नहीं हुईं। इस चक्का जाम के कारण जतारा-पलेरा मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा और क्षेत्र की यातायात व्यवस्था चरमरा गई। लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि अवैध शराब की बिक्री पर शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो वे अपने आंदोलन को और व्यापक रूप देंगी। समाचार लिखे जाने तक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी महिलाओं से चर्चा कर स्थिति सामान्य करने के प्रयास में जुटे हुए थे।
पलेरा क्षेत्र के थाना बम्हौरी कला अंतर्गत ग्राम कुड़याला में शनिवार को अवैध शराब की बिक्री के विरोध में महिलाओं का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा। गांव-गांव में अवैध तरीके से बिक रही शराब के कारण अपराध, लड़ाई-झगड़े, घरेलू हिंसा और महिलाओं पर अत्याचार बढ़ने से नाराज़ होकर बड़ी संख्या में महिलाएं एकजुट हुईं और मुख्य सड़क पर चक्का जाम कर दिया, जिससे जतारा-पलेरा मार्ग पर आवागमन घंटों बाधित रहा। प्रदर्शनकारी महिलाओं का आरोप है कि गांव में खुलेआम अवैध शराब बिक रही है, जिससे सामाजिक वातावरण दूषित हो रहा है और युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। उन्होंने बताया कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते उन्हें शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सड़क पर उतरना पड़ा।
सूचना मिलने पर बम्हौरी कला पुलिस मौके पर पहुंची और महिलाओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन महिलाएं अवैध शराब के कारोबार पर पूर्ण रोक लगाने की अपनी मांग पर अड़ी रहीं और जाम हटाने को तैयार नहीं हुईं। इस चक्का जाम के कारण जतारा-पलेरा मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा और क्षेत्र की यातायात व्यवस्था चरमरा गई। लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि अवैध शराब की बिक्री पर शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो वे अपने आंदोलन को और व्यापक रूप देंगी। समाचार लिखे जाने तक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी महिलाओं से चर्चा कर स्थिति सामान्य करने के प्रयास में जुटे हुए थे।
- मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के बम्होरी कलां थाना क्षेत्र में अवैध शराब की खुलेआम बिक्री के विरोध में महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया है। महिलाओं ने पलेरा-जतारा रोड पर घंटों तक जाम लगाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया, जिसके चलते सड़क पर आवागमन बुरी तरह प्रभावित रहा। ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र के गांव-गांव में अवैध शराब परोसी जा रही है, जिसने सरकार के 'नशा मुक्ति अभियान' को पूरी तरह मज़ाक बना दिया है। पुलिस द्वारा समझाइश दिए जाने के बाद ही जाम खोला जा सका और यातायात सुचारु हो पाया। यह घटना स्थानीय स्तर पर अवैध शराब के व्यापक प्रसार और इसके खिलाफ जनता के बढ़ते असंतोष को उजागर करती है।1
- टीकमगढ़ जिले के अजनौर में गरीबों के हक पर डाका डालने का मामला सामने आया है। यहां एक राशन की दुकान को सील कर दिया गया है, जहाँ से 119 क्विंटल अनाज गायब पाया गया है। यह कार्रवाई गरीबों के लिए आए अनाज की कथित हेराफेरी को लेकर की गई है।1
- टीकमगढ़ जिले के पलेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक बार फिर विवादों में घिर गया है, जहाँ मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा और डॉक्टरों के बीच चल रहे विवाद का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार सुरक्षा संगठन के प्रदेश प्रमुख सचिव राम रतन दीक्षित और उनकी टीम ने इन शिकायतों के बाद अस्पताल का औचक निरीक्षण किया और अव्यवस्थाओं को अपनी आँखों से देखने के बाद सीएमएचओ डॉक्टर अनुरागी को भी अवगत कराया। आरोप है कि डॉक्टर मुकेश साहू, जिनका बंधपत्र अप्रैल 2026 में समाप्त हो चुका है, वे अब भी ओपीडी में बैठकर मरीजों का उपचार कर रहे हैं और सरकारी क्वार्टर में निवास कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने चिंता व्यक्त की है कि ऐसी स्थिति में यदि किसी मरीज की हालत बिगड़ती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। इसके अतिरिक्त, मरीजों को अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों के बजाय बाहर की कमीशन वाली दवाइयां लिखी जा रही हैं, जिससे गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। अस्पताल में डॉक्टरों के बीच लगातार विवाद की स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण मरीजों को भीषण गर्मी में घंटों भटकना पड़ता है। मरीजों और उनके परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर टी-शर्ट और चप्पल पहने हुए थे, जिससे उन्हें पहचानना मुश्किल हो रहा था। इस पूरे मामले में डॉ. अंकित राजपूत और डॉ. महेंद्र पटेल के नाम भी चर्चा में हैं। कुछ दिनों पहले अस्पताल परिसर में डॉक्टर के चेंबर में एक आवारा कुत्ते के आराम करते हुए फोटो सामने आने के बाद स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अस्पताल में साफ-सफाई और अनुशासन की स्थिति बेहद खराब है, और जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है, चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।2
- शुक्रवार की रात करीब 9:30 बजे मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। आसमान में काले बादल छाने के साथ ही तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश शुरू हो गई। पिछले कई दिनों से भीषण तपन और उमस झेल रहे टीकमगढ़ वासियों के लिए यह बारिश बड़ी राहत बनकर आई है। नौतपा की झुलसाने वाली गर्मी के बीच हुई इस बारिश और ठंडी हवाओं के चलते शहर का तापमान लुढ़ककर 27 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है, जिससे वातावरण में अच्छी ठंडक घुल गई है। बारिश के दौरान लगभग 9 मील प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चलीं, जिसने परेशान लोगों को काफी सुकून प्रदान किया है।1
- टीकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायत अजनौर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की एक राशन दुकान पर खाद्य विभाग ने छापा मारा है। इस कार्रवाई में बड़ी अनियमितता उजागर हुई, जहाँ भारी मात्रा में राशन कम पाया गया, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल दुकान को सील कर दिया। जानकारी के अनुसार, खाद्य विभाग को ग्रामीणों से पिछले दो महीनों से पात्र हितग्राहियों को राशन न मिलने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए, खाद्य इंस्पेक्टर सपना सेन अपनी टीम के साथ अजनौर पहुँचीं और राशन दुकान की जाँच की। जाँच के दौरान, दुकान में उपलब्ध राशन का ऑनलाइन स्टॉक से मिलान किया गया, जिसमें एक बड़ा अंतर सामने आया। रिकॉर्ड के अनुसार, दुकान में 23 क्विंटल 51 किलो चावल और 96 क्विंटल 37 किलो गेहूं मौजूद होना चाहिए था, लेकिन मौके पर कुल 119 क्विंटल से अधिक खाद्यान्न का हिसाब नहीं मिला। ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि उन्हें दो माह से राशन नहीं मिल रहा था, जिससे कई गरीब परिवारों को परेशानी हो रही थी। छापेमार कार्रवाई की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और राशन वितरण व्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की। खाद्य विभाग ने प्रथम दृष्टया गड़बड़ी पाए जाने पर राशन दुकान को सील कर दिया है और संबंधित संचालक के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की विस्तृत जाँच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।1
- पलेरा क्षेत्र के थाना बम्हौरी कला अंतर्गत ग्राम कुड़याला में शनिवार को अवैध शराब की बिक्री के विरोध में महिलाओं का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा। गांव-गांव में अवैध तरीके से बिक रही शराब के कारण अपराध, लड़ाई-झगड़े, घरेलू हिंसा और महिलाओं पर अत्याचार बढ़ने से नाराज़ होकर बड़ी संख्या में महिलाएं एकजुट हुईं और मुख्य सड़क पर चक्का जाम कर दिया, जिससे जतारा-पलेरा मार्ग पर आवागमन घंटों बाधित रहा। प्रदर्शनकारी महिलाओं का आरोप है कि गांव में खुलेआम अवैध शराब बिक रही है, जिससे सामाजिक वातावरण दूषित हो रहा है और युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। उन्होंने बताया कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते उन्हें शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सड़क पर उतरना पड़ा। सूचना मिलने पर बम्हौरी कला पुलिस मौके पर पहुंची और महिलाओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन महिलाएं अवैध शराब के कारोबार पर पूर्ण रोक लगाने की अपनी मांग पर अड़ी रहीं और जाम हटाने को तैयार नहीं हुईं। इस चक्का जाम के कारण जतारा-पलेरा मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा और क्षेत्र की यातायात व्यवस्था चरमरा गई। लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि अवैध शराब की बिक्री पर शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो वे अपने आंदोलन को और व्यापक रूप देंगी। समाचार लिखे जाने तक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी महिलाओं से चर्चा कर स्थिति सामान्य करने के प्रयास में जुटे हुए थे।2