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एक व्यक्ति ने जानकारी साझा की है कि उनके गाँव की एक लड़की और एक लड़का एक होटल में गए थे, जहाँ उन्होंने 'गलत काम' किया।
Kamlesh Kumar
एक व्यक्ति ने जानकारी साझा की है कि उनके गाँव की एक लड़की और एक लड़का एक होटल में गए थे, जहाँ उन्होंने 'गलत काम' किया।
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- एक व्यक्ति ने जानकारी साझा की है कि उनके गाँव की एक लड़की और एक लड़का एक होटल में गए थे, जहाँ उन्होंने 'गलत काम' किया।1
- मुजफ्फरपुर जिले के कटरा प्रखंड क्षेत्र में एक स्कूल के शिक्षक पर लगे आरोपों को लेकर एक अधिवक्ता ने महत्वपूर्ण बात कही है। अधिवक्ता ने बताया है कि यह पूरा मामला पदभार लेने-देने से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, स्थानीय होने के कारण एक शिक्षक लगातार दूसरे शिक्षकों पर आरोप गढ़ते रहते हैं। अधिवक्ता ने इन आरोपों को निराधिकार बताते हुए इस पूरे मामले की जांच की मांग की है।2
- यह पोस्ट सीधे तौर पर दर्शकों या पाठकों से सवाल करती है कि क्या 'बिकाऊ मीडिया' को उनके स्वास्थ्य की परवाह है। इसमें मीडियाकर्मियों की मंशा पर संदेह व्यक्त किया गया है और पूछा गया है कि क्या वे वास्तव में लोगों के स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को महत्व देते हैं।1
- मुजफ्फरपुर जिले के बोचहाँ प्रखंड अंतर्गत बलुआहा गाँव में एक भू-माफिया पर गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ित ने बताया है कि भू-माफिया ने उन्हें किडनैप कर धमकाया और उनकी घरारी की जमीन की रजिस्ट्री जबरन अपने नाम करवा ली।1
- सोशल मीडिया पर एक वीडियो को लेकर वलसाड के DPS स्कूल, राजबाग के एक शिक्षक शकील अहमद अंसारी और स्कूल को बंद करने की पुरज़ोर अपील की जा रही है। इस संदेश में लोगों से आग्रह किया गया है कि वे इस वीडियो को अपने सभी WhatsApp संपर्कों और ग्रुपों में बिना किसी नंबर को छोड़े व्यापक रूप से साझा करें। अपील करने वाले का स्पष्ट कहना है कि वीडियो को इतना वायरल किया जाए कि शिक्षक शकील अहमद अंसारी और स्कूल दोनों बंद हो जाएं। पोस्ट में दावा किया गया है कि वीडियो के वायरल होने से 'काफी फर्क पड़ता है और कार्यवाही होती है'। साथ ही, यह भी हिदायत दी गई है कि जिन्हें इस मामले में कोई दया न आए, वे अपनी 'टाइपिंग' बंद रखें, जो इस अपील के पीछे के तीव्र भावनात्मक और अटल रुख को दर्शाता है।1
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- कुछ लोगों ने धरना-प्रदर्शन और मांगों को लेकर चल रही गतिविधियों की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, यह स्पष्ट नहीं है कि लोग वास्तव में अपनी मांगें रख रहे हैं या फिर यह सब एक-दूसरे को बरगलाने का नाटक मात्र है। यह भी कहा गया है कि जब कोई भी किसी की मदद के लिए हाथ आगे नहीं बढ़ाता, तो ऐसे में कुछ लोग बड़ी-बड़ी मांगें पूरी करवाने की होड़ में क्यों खड़े हैं। इस पूरी कवायद पर संदेह जताते हुए सवाल किया जा रहा है कि क्या ये गतिविधियाँ वाकई अपनी मांग रखने का प्रयास हैं, या केवल धरना और मांग के नाम पर एक-दूसरे को बरगलाने का काम किया जा रहा है।1
- एक नागरिक ने अपनी बात रखते हुए सवाल उठाया है कि जब सामान्यतः हर चीज़ का महीना 30 या 31 दिन का होता है, तो फिर मोबाइल फोन का रिचार्ज केवल 28 दिन का ही क्यों होता है।1