कोलार नहर परियोजना नहर की जर्जर हालत से किसानों में फसल खराब होना का डर कोलार डैम परियोजना की नहर बनी किसानों के लिए संकट, तजपुरा में बढ़ा खतरा बुधनी (विधानसभा क्रमांक 156), जिला सीहोर। क्षेत्र के ग्राम तजपुरा में इन दिनों कोलार डैम परियोजना से निकली नहर किसानों के लिए चिंता का कारण बन गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों पुरानी नहर के किनारों का समय पर रखरखाव नहीं किया गया, जिसके कारण उसकी बॉर्डर जगह-जगह से कमजोर और जर्जर हो चुकी है। ग्रामीणों द्वारा साझा की गई तस्वीरों में साफ दिखाई देता है कि नहर में पानी निर्धारित स्तर से अधिक बह रहा है। कई स्थानों पर पानी किनारों से रिसकर खेतों की ओर जा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द मरम्मत कार्य नहीं कराया गया तो नहर टूटने की आशंका है, जिससे अचानक जलभराव होकर भारी फसल नुकसान हो सकता है। किसानों की हालत चिंताजनक तजपुरा के किसान बताते हैं कि इस समय खेतों में खड़ी फसल तैयार होने की स्थिति में है। लगातार झिरपते पानी के कारण खेतों की उपजाऊ मिट्टी खराब हो रही है। कई किसानों के खेतों में पानी भरने से फसल पीली पड़ने लगी है। किसानों का कहना है कि एक ओर खाद, बीज और सिंचाई की लागत बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर यदि नहर टूट गई या पानी अधिक मात्रा में छोड़ा गया तो उनकी पूरी मेहनत बर्बाद हो सकती है। ग्राम के किसान सुंदरलाल सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से कई बार मौखिक शिकायत करने की बात कही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि विभाग समय पर न तो नहर की सफाई करवा रहा है और न ही क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत। परियोजना की पृष्ठभूमि कोलार डैम मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य पेयजल आपूर्ति और सिंचाई सुविधा प्रदान करना है। वर्षों पहले बनी इस परियोजना की नहर प्रणाली अब कई स्थानों पर मरम्मत की मांग कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित निरीक्षण और सुदृढ़ीकरण न होने से ऐसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। संभावित खतरा यदि नहर का जलस्तर नियंत्रित नहीं किया गया और कमजोर किनारों को मजबूत नहीं किया गया, तो बरसात या अधिक जल प्रवाह की स्थिति में नहर टूट सकती है। ऐसी स्थिति में किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, साथ ही गांव में जलभराव की समस्या भी खड़ी हो सकती है। प्रशासन से मांग तजपुरा के ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि: नहर का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए कमजोर और जर्जर किनारों की मरम्मत की जाए जलस्तर नियंत्रित रखने के लिए निगरानी बढ़ाई जाए किसानों को संभावित नुकसान से बचाने हेतु अग्रिम कदम उठाए जाएं अब देखना यह है कि संबंधित विभाग किसानों की इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेता है और राहत पहुंचाने के लिए क्या कदम उठाता है।
कोलार नहर परियोजना नहर की जर्जर हालत से किसानों में फसल खराब होना का डर कोलार डैम परियोजना की नहर बनी किसानों के लिए संकट, तजपुरा में बढ़ा खतरा बुधनी (विधानसभा क्रमांक 156), जिला सीहोर। क्षेत्र के ग्राम तजपुरा में इन दिनों कोलार डैम परियोजना से निकली नहर किसानों के लिए चिंता का कारण बन गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों पुरानी नहर के किनारों का समय पर रखरखाव नहीं किया गया, जिसके कारण उसकी बॉर्डर जगह-जगह से कमजोर और जर्जर हो चुकी है। ग्रामीणों द्वारा साझा की गई तस्वीरों में साफ दिखाई देता है कि नहर में पानी निर्धारित स्तर से अधिक बह रहा है। कई स्थानों पर पानी किनारों से रिसकर खेतों की ओर
जा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द मरम्मत कार्य नहीं कराया गया तो नहर टूटने की आशंका है, जिससे अचानक जलभराव होकर भारी फसल नुकसान हो सकता है। किसानों की हालत चिंताजनक तजपुरा के किसान बताते हैं कि इस समय खेतों में खड़ी फसल तैयार होने की स्थिति में है। लगातार झिरपते पानी के कारण खेतों की उपजाऊ मिट्टी खराब हो रही है। कई किसानों के खेतों में पानी भरने से फसल पीली पड़ने लगी है। किसानों का कहना है कि एक ओर खाद, बीज और सिंचाई की लागत बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर यदि नहर टूट गई या पानी अधिक मात्रा में छोड़ा गया तो उनकी पूरी मेहनत बर्बाद हो सकती है। ग्राम के किसान
सुंदरलाल सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से कई बार मौखिक शिकायत करने की बात कही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि विभाग समय पर न तो नहर की सफाई करवा रहा है और न ही क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत। परियोजना की पृष्ठभूमि कोलार डैम मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य पेयजल आपूर्ति और सिंचाई सुविधा प्रदान करना है। वर्षों पहले बनी इस परियोजना की नहर प्रणाली अब कई स्थानों पर मरम्मत की मांग कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित निरीक्षण और सुदृढ़ीकरण न होने से ऐसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। संभावित खतरा यदि नहर का जलस्तर नियंत्रित नहीं किया
गया और कमजोर किनारों को मजबूत नहीं किया गया, तो बरसात या अधिक जल प्रवाह की स्थिति में नहर टूट सकती है। ऐसी स्थिति में किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, साथ ही गांव में जलभराव की समस्या भी खड़ी हो सकती है। प्रशासन से मांग तजपुरा के ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि: नहर का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए कमजोर और जर्जर किनारों की मरम्मत की जाए जलस्तर नियंत्रित रखने के लिए निगरानी बढ़ाई जाए किसानों को संभावित नुकसान से बचाने हेतु अग्रिम कदम उठाए जाएं अब देखना यह है कि संबंधित विभाग किसानों की इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेता है और राहत पहुंचाने के लिए क्या कदम उठाता है।
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- कोलार डैम परियोजना की नहर बनी किसानों के लिए संकट, तजपुरा में बढ़ा खतरा बुधनी (विधानसभा क्रमांक 156), जिला सीहोर। क्षेत्र के ग्राम तजपुरा में इन दिनों कोलार डैम परियोजना से निकली नहर किसानों के लिए चिंता का कारण बन गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों पुरानी नहर के किनारों का समय पर रखरखाव नहीं किया गया, जिसके कारण उसकी बॉर्डर जगह-जगह से कमजोर और जर्जर हो चुकी है। ग्रामीणों द्वारा साझा की गई तस्वीरों में साफ दिखाई देता है कि नहर में पानी निर्धारित स्तर से अधिक बह रहा है। कई स्थानों पर पानी किनारों से रिसकर खेतों की ओर जा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द मरम्मत कार्य नहीं कराया गया तो नहर टूटने की आशंका है, जिससे अचानक जलभराव होकर भारी फसल नुकसान हो सकता है। किसानों की हालत चिंताजनक तजपुरा के किसान बताते हैं कि इस समय खेतों में खड़ी फसल तैयार होने की स्थिति में है। लगातार झिरपते पानी के कारण खेतों की उपजाऊ मिट्टी खराब हो रही है। कई किसानों के खेतों में पानी भरने से फसल पीली पड़ने लगी है। किसानों का कहना है कि एक ओर खाद, बीज और सिंचाई की लागत बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर यदि नहर टूट गई या पानी अधिक मात्रा में छोड़ा गया तो उनकी पूरी मेहनत बर्बाद हो सकती है। ग्राम के किसान सुंदरलाल सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से कई बार मौखिक शिकायत करने की बात कही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि विभाग समय पर न तो नहर की सफाई करवा रहा है और न ही क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत। परियोजना की पृष्ठभूमि कोलार डैम मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य पेयजल आपूर्ति और सिंचाई सुविधा प्रदान करना है। वर्षों पहले बनी इस परियोजना की नहर प्रणाली अब कई स्थानों पर मरम्मत की मांग कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित निरीक्षण और सुदृढ़ीकरण न होने से ऐसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। संभावित खतरा यदि नहर का जलस्तर नियंत्रित नहीं किया गया और कमजोर किनारों को मजबूत नहीं किया गया, तो बरसात या अधिक जल प्रवाह की स्थिति में नहर टूट सकती है। ऐसी स्थिति में किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, साथ ही गांव में जलभराव की समस्या भी खड़ी हो सकती है। प्रशासन से मांग तजपुरा के ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि: नहर का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए कमजोर और जर्जर किनारों की मरम्मत की जाए जलस्तर नियंत्रित रखने के लिए निगरानी बढ़ाई जाए किसानों को संभावित नुकसान से बचाने हेतु अग्रिम कदम उठाए जाएं अब देखना यह है कि संबंधित विभाग किसानों की इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेता है और राहत पहुंचाने के लिए क्या कदम उठाता है।4
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