15 सितंबर से प्रदेश भर में चूल्हा बन्द हड़ताल स्व सहायता समूहो की लंबित मांगों को लेकर आर -पार की लड़ाई का ऐलान 15 सितंबर से प्रदेशभर में चूल्हा बंद हड़ताल 2.32 लाख रसोइयों और 96 हजार महिला स्व-सहायता समूहों की लंबित मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान पांढुर्णा। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (मध्यान्ह भोजन) और आंगनबाड़ी केंद्रों में संचालित सांझा चूल्हा योजना से जुड़े महिला स्व-सहायता समूहों एवं रसोइया बहनों की लंबित मांगों को लेकर प्रांतीय महिला स्व सहायता समूह महासंघ मध्यप्रदेश ने आंदोलन का ऐलान किया है। महासंघ ने 15 सितंबर 2026 से पूरे प्रदेश में चूल्हा बंद हड़ताल करने की घोषणा की है। महासंघ की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती सरिता ओमप्रकाश सिंह बघेल ने कहा कि प्रदेश में करीब 2 लाख 32 हजार रसोइया बहनें वर्षों से अल्प मानदेय पर स्कूली बच्चों के लिए भोजन तैयार करने का कार्य कर रही हैं। इसके बावजूद उन्हें समय पर मेहनताना नहीं मिलने, खाद्यान्न एवं लागत राशि में देरी तथा काम के बढ़ते बोझ जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। महासंघ ने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 से 2026 तक जून माह में किए गए 15 दिनों के कार्य का मेहनताना रसोइयों को नहीं दिया गया, जबकि इसी अवधि में शिक्षकों को पूरा वेतन मिलता है। संगठन ने इसे रसोइया महिलाओं के साथ आर्थिक भेदभाव बताते हुए तत्काल भुगतान की मांग की है। महासंघ के अनुसार विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ने पर शिक्षकों की संख्या निर्धारित अनुपात में बढ़ाई जाती है, लेकिन भोजन बनाने वाली रसोइयों की संख्या उसी अनुपात में नहीं बढ़ाई जाती। 100 बच्चों पर केवल दो रसोइयों से भोजन तैयार कराने से काम का अतिरिक्त बोझ महिलाओं पर पड़ता है। संगठन ने छात्र संख्या के अनुपात में रसोइयों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। इसी तरह मध्यान्ह भोजन एवं सांझा चूल्हा योजना की लागत राशि और खाद्यान्न कई-कई महीनों तक लंबित रहने का आरोप लगाया गया है। महासंघ का कहना है कि तीन-चार महीने तक राशि और खाद्यान्न नहीं मिलने से महिला स्व-सहायता समूहों को अपनी जेब से व्यवस्था करनी पड़ती है, जिससे वे आर्थिक संकट में फंस जाते हैं। संगठन ने प्रत्येक माह समय पर लागत राशि और छात्र संख्या के अनुसार पर्याप्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने की मांग की है। महासंघ ने 60 वर्ष की उम्र में रसोइयों को योजना से पृथक करने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए वर्षों तक सेवा देने वाली महिलाओं के भविष्य एवं आर्थिक सुरक्षा के लिए ठोस नीति बनाने की मांग की है। प्रदेश अध्यक्ष बघेल ने कहा कि सरकार ने समय रहते मांगों का निराकरण नहीं किया तो 15 सितंबर से प्रदेशभर में मध्यान्ह भोजन और सांझा चूल्हा कार्यक्रम के चूल्हे बंद रहेंगे। आंदोलन को आगे चरणबद्ध तरीके से व्यापक रूप देने की चेतावनी भी दी गई है। जिला अध्यक्ष स्व-सहायता समूह कल्पना कलम्बे ने कहा कि रसोइया एवं महिला स्व-सहायता समूहों की समस्याओं का तत्काल समाधान होना चाहिए। उन्होंने सरकार से हड़ताल से पहले लंबित भुगतान, खाद्यान्न और अन्य समस्याओं का निराकरण करने की मांग की। महासंघ ने स्पष्ट किया कि आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के विरोध में नहीं, बल्कि महिला स्व-सहायता समूहों और रसोइया बहनों के अधिकार, सम्मान एवं न्याय के लिए किया जा रहा है।
15 सितंबर से प्रदेश भर में चूल्हा बन्द हड़ताल स्व सहायता समूहो की लंबित मांगों को लेकर आर -पार की लड़ाई का ऐलान 15 सितंबर से प्रदेशभर में चूल्हा बंद हड़ताल 2.32 लाख रसोइयों और 96 हजार महिला स्व-सहायता समूहों की लंबित मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान पांढुर्णा। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (मध्यान्ह भोजन) और आंगनबाड़ी केंद्रों में संचालित सांझा चूल्हा योजना से जुड़े महिला स्व-सहायता समूहों एवं रसोइया बहनों की लंबित मांगों को लेकर प्रांतीय महिला स्व सहायता समूह महासंघ मध्यप्रदेश ने आंदोलन का ऐलान किया है। महासंघ ने 15 सितंबर 2026 से पूरे प्रदेश में चूल्हा बंद हड़ताल करने की घोषणा की है। महासंघ की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती सरिता ओमप्रकाश सिंह बघेल ने कहा कि प्रदेश में करीब 2 लाख 32 हजार रसोइया बहनें वर्षों से अल्प मानदेय पर स्कूली बच्चों के लिए भोजन तैयार करने का कार्य कर रही हैं। इसके बावजूद उन्हें समय पर मेहनताना नहीं मिलने, खाद्यान्न एवं लागत राशि में देरी तथा काम के बढ़ते बोझ जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। महासंघ ने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 से 2026 तक जून माह में किए गए 15 दिनों के कार्य का मेहनताना रसोइयों को नहीं दिया गया, जबकि इसी अवधि में शिक्षकों को पूरा वेतन मिलता है। संगठन ने इसे रसोइया महिलाओं के साथ आर्थिक भेदभाव बताते हुए तत्काल भुगतान की मांग की है। महासंघ के अनुसार विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ने पर शिक्षकों की संख्या निर्धारित अनुपात में बढ़ाई जाती है, लेकिन भोजन बनाने वाली रसोइयों की संख्या उसी अनुपात में नहीं बढ़ाई जाती। 100 बच्चों पर केवल दो रसोइयों से भोजन तैयार कराने से काम का अतिरिक्त बोझ महिलाओं पर पड़ता है। संगठन ने छात्र संख्या के अनुपात में रसोइयों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। इसी तरह मध्यान्ह भोजन एवं सांझा चूल्हा योजना की लागत राशि और खाद्यान्न कई-कई महीनों तक लंबित रहने का आरोप लगाया गया है। महासंघ का कहना है कि तीन-चार महीने तक राशि और खाद्यान्न नहीं मिलने से महिला स्व-सहायता समूहों को अपनी जेब से व्यवस्था करनी पड़ती है, जिससे वे आर्थिक संकट में फंस जाते हैं। संगठन ने प्रत्येक माह समय पर लागत राशि और छात्र संख्या के अनुसार पर्याप्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने की मांग की है। महासंघ ने 60 वर्ष की उम्र में रसोइयों को योजना से पृथक करने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए वर्षों तक सेवा देने वाली महिलाओं के भविष्य एवं आर्थिक सुरक्षा के लिए ठोस नीति बनाने की मांग की है। प्रदेश अध्यक्ष बघेल ने कहा कि सरकार ने समय रहते मांगों का निराकरण नहीं किया तो 15 सितंबर से प्रदेशभर में मध्यान्ह भोजन और सांझा चूल्हा कार्यक्रम के चूल्हे बंद रहेंगे। आंदोलन को आगे चरणबद्ध तरीके से व्यापक रूप देने की चेतावनी भी दी गई है। जिला अध्यक्ष स्व-सहायता समूह कल्पना कलम्बे ने कहा कि रसोइया एवं महिला स्व-सहायता समूहों की समस्याओं का तत्काल समाधान होना चाहिए। उन्होंने सरकार से हड़ताल से पहले लंबित भुगतान, खाद्यान्न और अन्य समस्याओं का निराकरण करने की मांग की। महासंघ ने स्पष्ट किया कि आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के विरोध में नहीं, बल्कि महिला स्व-सहायता समूहों और रसोइया बहनों के अधिकार, सम्मान एवं न्याय के लिए किया जा रहा है।
- जनसुनवाई में नागरिकों ने रखीं विभिन्न समस्याएं अपर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को दिए आवेदनों के त्वरित एवं नियमानुसार निराकरण के निर्देश पांढुर्णा/15 सितंबर 2026/ कलेक्टर सभाकक्ष में मंगलवार को अपर कलेक्टर श्रीमती ज्योति ठाकुर की अध्यक्षता में जनसुनवाई आयोजित की गई। जनसुनवाई में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों ने अपनी विभिन्न समस्याओं से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए। अपर कलेक्टर श्रीमती ठाकुर ने नागरिकों की समस्याओं को गंभीरतापूर्वक सुना तथा संबंधित अधिकारियों को आवेदनों का नियमानुसार परीक्षण कर त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जनसुनवाई में आबादी/स्वामित्व सर्वे के दौरान हुई तकनीकी त्रुटि को सुधारने एवं शासकीय मद से हटाकर आवेदक के नाम पट्टा बहाल करने संबंधी आवेदन प्राप्त हुआ। इसके साथ ही बिजली चोरी के संबंध में लाइनमैन एवं जेई द्वारा पंचनामा बनाए जाने, ग्राम पंचायत भुयारी के ग्राम बेलगांव के वार्ड क्रमांक 13 में अधूरे नाली निर्माण कार्य को पूर्ण कराने, प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कराने तथा दिव्यांग आवेदक को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने संबंधी आवेदन भी प्रस्तुत किए गए। इसी प्रकार संत ज्ञानेश्वर वारकरी सेवा समिति, पांढुर्णा को दान में दी गई भूमि की अनावेदक द्वारा अन्य व्यक्ति के नाम रजिस्ट्री किए जाने की जांच कर भूमि वापस दिलाने, कर्ज माफी सहित अन्य व्यक्तिगत एवं स्थानीय समस्याओं से संबंधित आवेदन भी नागरिकों द्वारा प्रस्तुत किए गए। अपर कलेक्टर श्रीमती ज्योति ठाकुर ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसुनवाई में प्राप्त प्रत्येक आवेदन का गंभीरता से परीक्षण कर पात्रतानुसार नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा पात्र आवेदकों को शासन के प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक राहत उपलब्ध कराई जाए। जनसुनवाई में संयुक्त कलेक्टर सुश्री नेहा सोनी, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पांढुर्णा श्रीमती अलका एक्का, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सौसर श्री सिद्धार्थ पटेल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।2
- Jay Shri dadaji ki 15 September 2026 Rishi panchmi ke uplaksh mein dadaji Darbar mein Mela lagne ja raha hai jila pandhurna tahsil sausar post pipla naranvar gram Mehrakhapa Madhya Pradesh MP 28 lakhon ki sankhya mein shradhalu aate Hain dadaji Darbar mehrakhapa Nishan lekar Bhagat2
- गन्ने का दाम 600 करने और फसल नुकसान का मुआवजा देने की मांग गन्ने का दाम 600 करने और फसल नुकसान का मुआवजा देने की मांग देशव्यापी ज्ञापन दिवस पर भारतीय किसान संघ का प्रदर्शन, प्रधानमंत्री- मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा बैतूल। देशव्यापी ज्ञापन दिवस के तहत भारतीय किसान संघ की तहसील इकाई ने मंगलवार 15 सितंबर को किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया। देशभर के किसानों की समस्याओं को लेकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। वहीं बैतूल की स्थानीय किसान समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर तहसीलदार को भी ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन में कृषि लागत, फसल क्षतिपूर्ति, सिंचाई, बिजली और किसानों से जुड़ी अन्य समस्याओं के निराकरण की मांग की गई। किसान संघ ने वर्ष 2026-27 के लिए गन्ने का मूल्य 600 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित करने की मांग प्रमुखता से उठाई। वहीं खरीफ फसल में सोयाबीन, धान और मक्का को हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराकर भू-राजस्व संहिता की धारा 4-6 के तहत क्षतिपूर्ति राशि तथा फसल बीमा क्लेम दिलाने की मांग की गई। सोसायटियों द्वारा बीमा राशि काटे जाने के बावजूद किसानों को रसीद नहीं दिए जाने पर आपत्ति जताते हुए बैंकों के माध्यम से रसीद उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। ज्ञापन में आबादी भूमि के ड्रोन सर्वे में सामने आई त्रुटियों का भौतिक सत्यापन कराने और भू-सुधार का विकल्प देने की मांग की गई। साथ ही कम वर्षा को देखते हुए कम पानी में होने वाली फसलों के बीज उपलब्ध कराने तथा लागत अनुदान की राशि डीबीटी के माध्यम से किसानों के खातों में भेजने की मांग रखी गई। फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए तार फेंसिंग पर 60 प्रतिशत सब्सिडी और सभी फसलों का लाभकारी मूल्य निर्धारित करने की मांग भी शामिल है। सिंचाई व्यवस्था को लेकर संघ ने घोघरी डैम परियोजना के अधूरे निर्माण कार्य आगामी रबी सीजन तक पूरा कर नहर और पाइपलाइन के माध्यम से सिंचाई शुरू कराने की मांग की। बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए एक ट्रांसफार्मर खराब होने पर पूरे स्टेशन का फीडर बंद करने के बजाय संबंधित ट्रांसफार्मर का डीओ या जंपर काटकर सुधार कार्य करने का सुझाव दिया गया, ताकि अन्य किसानों की बिजली आपूर्ति प्रभावित न हो। इसके अलावा रबी सीजन के लिए ई-टोकन व्यवस्था में प्रति एकड़ खाद का कोटा बढ़ाने, ग्राम उमरी दरगाह के पास ओवरलोड की समस्या के समाधान के लिए अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाने, शहरी क्षेत्र के किसानों पर लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर निरस्त करने तथा नगरीय किसानों को डीबीटी के माध्यम से सोलर पंप अनुदान में प्राथमिकता देने की मांग की गई। ज्ञापन सौंपने के दौरान भारतीय किसान संघ के तहसील अध्यक्ष नकुल भूसारे, संभागीय कार्यालय मंत्री नकुल सिंह चंदेल, नगर अध्यक्ष संतोष पाल, आशाराम ढावले, नगर उपाध्यक्ष अमर नाथ चौधरी और वरिष्ठ मार्गदर्शक दीपक कपूर सहित बड़ी संख्या में किसान एवं संगठन के सदस्य मौजूद रहे।1
- मुलताई में जुआ फड़ पर पुलिस की दबिश, 6 आरोपी गिरफ्तार मुलताई। पुलिस अधीक्षक बैतूल वीरेन्द्र जैन के निर्देश, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमलेश खरपूसे एवं एसडीओपी मुलताई एस.के. सिंह के मार्गदर्शन में थाना मुलताई पुलिस ने जुआ फड़ पर कार्रवाई करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। थाना प्रभारी निरीक्षक विकास पटेल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने 13 सितंबर को मुखबिर की सूचना पर नेहरू वार्ड स्थित नागदेव मंदिर के बाजू वाली गली की टपरी पर दबिश दी। मौके पर ताश के पत्तों से रुपये-पैसों का दांव लगाकर जुआ खेल रहे धनराज प्रजापति, गोविंद उर्फ गुड्डू साहू, सुरेन्द्र विश्वकर्मा, नरेन्द्र विश्वकर्मा, ऋषि साहू एवं आसिफ सिंघानिया को पकड़ा गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹1,225 नकद और 52 ताश के पत्ते जब्त किए। आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 770/26, धारा 13 जुआ एक्ट के तहत मामला दर्ज कर विवेचना में लिया गया। सभी को सूचना नोटिस तामील कर न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए। कार्रवाई में थाना प्रभारी विकास पटेल, प्र.आर. गजराज सिंह सहित आरक्षक विवेक, नरेन्द्र कुशवाह, प्रिंश अहिरवार, सेवाराम पवार, गोपाल परिहार एवं अरविंद पटेल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।1
- ग्राम दहीपानी में नल-जल योजना कागजों पर सिमटी, पाइपलाइन होने के बाद भी कुएं और गढ्ढों से पानी ढोने को मजबूर हैं ग्रामीण, आठनेर विकासखण्ड अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत अंम्बाड़ा के अंतर्गत आने वाले ग्राम दहीपानी में पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बारिश के दिनों में ग्रामीण बुंद बुंद पानी के मशक्कत करते नजर आ रहे हैं। शासन और प्रशासन के दावों के विपरीत, गांव में बिछाई गई नल-जल योजना की पाइपलाइन शो पीस की वस्तु बनकर रह गई है। पाइपलाइन होने के बावजूद उसमें एक बूंद पानी नहीं पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीण मटमेला पानी पिने को मजबूर हैं। जान जोखिम में डालकर बिना मुंडेर और फिसलन जैसे कुओं से पानी निकाल रहें हैं ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने सरपंच सहित जनप्रतिनिधियों को मामले से अवगत कराया परन्तु आज तक कोई ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से नल-जल योजना की जांच और निराकरण की मांग की है। 1
- मध्यप्रदेश में छात्रसंघ चुनाव शीघ्र बहाल किए जाएं : अभाविप छिंदवाड़ा। मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में वर्ष 2017 से बंद छात्रसंघ चुनावों को पुनः प्रारंभ करने की मांग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् छिंदवाड़ा ने प्रदेश सरकार से शीघ्र चुनाव बहाल करने की मांग की है। अभाविप ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकारों की पुनर्स्थापना के साथ-साथ उनमें नेतृत्व क्षमता, सामाजिक चेतना, उत्तरदायित्व एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। शैक्षणिक परिसरों में विद्यार्थियों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाने और उनके समाधान के लिए निर्वाचित छात्र प्रतिनिधित्व आवश्यक है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् सदैव छात्रहित, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लोकतांत्रिक परंपराओं के सुदृढ़ीकरण एवं राष्ट्र निर्माण में विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता के लिए कार्य करती रही है। परिषद् द्वारा समय-समय पर विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों एवं अधिवेशनों में पारित शैक्षिक प्रस्तावों के माध्यम से सरकार से छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग की जाती रही है। अभाविप ने कहा कि माननीय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा भी छात्रसंघ चुनाव के संबंध में राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसके पश्चात सरकार की ओर से सितंबर माह में चुनाव आयोजित कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक चुनाव संबंधी कोई आधिकारिक सूचना अथवा चुनाव सारणी जारी नहीं की गई है। इससे प्रदेश के विद्यार्थी समुदाय में निराशा का भाव है। अतः अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् छिंदवाड़ा प्रदेश सरकार से मांग करती है कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप अकादमिक कैलेंडर के अनुसार तथा लिंगदोह समिति की अनुशंसाओं के आधार पर प्रत्यक्ष, पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध छात्रसंघ चुनाव शीघ्र आयोजित किए जाएं। अभाविप का स्पष्ट मत है कि छात्रसंघ चुनाव शैक्षणिक परिसरों में लोकतांत्रिक संस्कृति एवं विद्यार्थी नेतृत्व को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। प्रदेश सरकार विद्यार्थियों की इस दीर्घकालिक एवं न्यायसंगत मांग पर संवेदनशीलता से विचार करते हुए अविलंब छात्रसंघ चुनाव बहाल करे। जिला संयोजक पियूष श्रीवास जी ने कहा कि प्रदेश के लाखों विद्यार्थी लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सरकार को विद्यार्थियों की लोकतांत्रिक भावनाओं का सम्मान करते हुए अब किसी प्रकार की देरी किए बिना छात्रसंघ चुनाव की आधिकारिक घोषणा करनी चाहिए। अभाविप विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकारों एवं छात्रहित के लिए सदैव आवाज उठाती रहेगी।4
- कृषि समाचार मक्के की फसल कम होने की संभावना किसान चिंतन में जन जीवन में असर बारिश कम होने का असर कृषि और किसानों की चिंता बढ़ गई है जैसे तैसे मक्का की फसल हो जाएगी किंतु मध्य प्रदेश में गेहूं की फसल में किसानों की चिंता बढ़ सकती है उसका असर आम इंसान को पड़ेगा1
- पांढुर्ना में तेंदुए का खौफ: गाय के बछड़े को बनाया शिकार, मुआवजे और सुरक्षा को लेकर भारतीय किसान संघ की बैठक के बाद कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन पांढुर्ना जिले के ग्राम हिवरा सेनाड़वार में डेम के किनारे जंगली जानवर तेंदुआ देखे जाने की एक गंभीर घटना सामने आई है, जिसने एक किसान की गाय के बछड़े को गंभीर रूप से घायल कर दिया और इलाज के दौरान उस बछड़े की मौत हो गई. इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों में भारी दहशत और भय का माहौल बना हुआ है. जंगली जानवरों के लगातार बढ़ते आतंक, भूली जलाशय परियोजना के मुआवजे और क्षेत्र की अन्य गंभीर समस्याओं को लेकर भारतीय किसान संघ (म.प्र.) महाकौशल प्रांत जिला पांढुर्ना की एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी बिंदुओं पर चर्चा के बाद कलेक्टर महोदय को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया. भारतीय किसान संघ द्वारा आयोजित इस बैठक के बाद सौंपे गए ज्ञापन में भूली जलाशय परियोजना से जुड़ा एक प्रमुख और अहम मुद्दा उठाया गया है, जिसके तहत मांग की गई है कि डूब क्षेत्र में आने वाले सभी छोटे किसानों और गरीब परिवारों की भूमि, मकान एवं आजीविका का उचित मूल्यांकन किया जाए तथा उन्हें न्यायसंगत मुआवजा प्रदान किया जाए. किसानों ने यह भी मांग रखी है कि बिना किसी समुचित मुआवजे और उचित पुनर्वास व्यवस्था के किसी भी परिवार को उनके स्थान से विस्थापित न किया जाए. इसके साथ ही ज्ञापन में क्षेत्र की कई अन्य प्रमुख समस्याओं को भी विस्तार से शामिल किया गया है, जिनमें मुख्य रूप से जंगली तेंदुए, नीलगाय और जंगली सुअरों को तुरंत अपने नियंत्रण में लेने की मांग की गई है ताकि क्षेत्र के किसान और उनके मवेशी सुरक्षित रह सकें. ज्ञापन में देवराव चोपड़े, सुभाष पराडकर, सुरज टोपले, गेन्दलाल देशमुख, ज्ञानेश्वर पराडकर एवं अन्य कई किसानों की गायों को जंगली जानवरों द्वारा घायल किए जाने और उनकी मौत हो जाने का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है. किसानों की अन्य समस्याओं पर बात करते हुए ग्राम पिपलपानी में हो रही ब्लॉस्टिंग से किसानों को हो रही भारी परेशानी का मुद्दा उठाया गया है और इसे तुरंत बंद करने की मांग की गई है. इसके अलावा ग्राम हिवरा सेनाड़वार के डैम की दीवारों पर जमी घास को साफ करने, दुकानों और समितियों में मिलने वाले रासायनिक खाद के नमूनों को जांच के लिए लैब में भेजने ताकि यह पता चल सके कि खाद में पोषक तत्व हैं या नहीं, भूली जलाशय के डूब क्षेत्र वाले किसानों के राजस्व रिकार्ड में सुधार करने तथा पांढुर्ना जिले के तमाम किसानों के खेतों के नक्शों में आवश्यक सुधार करने जैसी महत्वपूर्ण मांगें भी प्रशासन के समक्ष रखी गई हैं.1