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नौतन प्रखंड के मंगलपुर गुदरिया पंचायत में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 152 पर जीविका द्वारा तैयार किए गए पोशाक का वितरण किया गया। केंद्र की सेविका अनीता देवी ने 40 बच्चों के बीच इन पोशाकों का वितरण किया। नए कपड़े पाकर बच्चे काफी खुश नजर आए और खुशी से झूम उठे। जीविका की इस पहल से आंगनबाड़ी के बच्चों के चेहरे खिल उठे। इस दौरान सहायिका, अभिभावक और स्थानीय लोग भी उपस्थित रहे।
Abhishek Kumar Shrivastava
नौतन प्रखंड के मंगलपुर गुदरिया पंचायत में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 152 पर जीविका द्वारा तैयार किए गए पोशाक का वितरण किया गया। केंद्र की सेविका अनीता देवी ने 40 बच्चों के बीच इन पोशाकों का वितरण किया। नए कपड़े पाकर बच्चे काफी खुश नजर आए और खुशी से झूम उठे। जीविका की इस पहल से आंगनबाड़ी के बच्चों के चेहरे खिल उठे। इस दौरान सहायिका, अभिभावक और स्थानीय लोग भी उपस्थित रहे।
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- पश्चिमी चंपारण जिले के बेतिया अनुमंडल अंतर्गत बहुरवा पंचायत के वार्ड नंबर 3 में नल जल योजना की स्थिति खराब है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, सरकार द्वारा पीने के पानी के लिए शुरू की गई यह योजना, इसके लागू होने के बाद केवल एक साल तक ही चली। एक साल तक पानी आने के बाद, तब से लेकर आज तक कई सालों से इसमें पानी नहीं आया है। शिकायत की जा रही है कि इस महत्वपूर्ण योजना की कोई जांच पड़ताल नहीं हो रही है।1
- यह वीडियो पीएच स्केल से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान करेगा, जिसमें अम्ल, क्षार और लवण की जाँच के तरीके भी शामिल हैं। दर्शक जानेंगे कि पीएच स्केल क्या होता है, इसके मुख्य उपयोग क्या हैं, और इसे किसने तथा कब खोजा था। वीडियो में पीएच स्केल के आवश्यक गुणधर्मों, पीएच मान की परिभाषा और पीएच मान की गणना कैसे की जाती है, जैसे विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। यह शैक्षिक सामग्री विशेष रूप से पीएच स्केल की अवधारणा को गहराई से समझने के लिए तैयार की गई है।1
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- सुगौली प्रखंड की तीन पंचायतों में निर्धारित समय के अनुसार सहयोग शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों के माध्यम से सैकड़ों मामलों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया। शिविरों में विधायक, विशेष पदाधिकारी और स्थानीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।1
- उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के तमकुही राज क्षेत्र में मुख्यमंत्री योगी ने 424 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं की सौगात दी है। हालांकि, इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी द्वारा की गई किसी टिप्पणी या बयान को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि उन्होंने आखिर ऐसा क्या कह दिया।1
- गोपालगंज जिले में आपसी रंजिश ने एक बार फिर खूनी रूप ले लिया, जहाँ पूर्व के विवाद को लेकर एक 40 वर्षीय युवक की चाकू से गोदकर निर्मम हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान कुचायकोट थाना क्षेत्र के रामपुर माधो बलुआ टोला निवासी हरकेश यादव के पुत्र मोहन यादव के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, मोहन यादव रविवार की शाम को मठिया नंदलाल बाजार में घरेलू सामान खरीदने गए थे, जिसके बाद कथित तौर पर पहले से घात लगाए बैठे लोगों ने उन्हें जबरन अपने साथ ले लिया और फिर उनका कोई पता नहीं चला। सोमवार की सुबह मोहन यादव की पत्नी लीलावती देवी ने कुचायकोट थाने में अपने पति के अचानक गायब होने को लेकर एक आवेदन दिया, जिसमें उन्होंने किसी अनहोनी की आशंका जताते हुए पुलिस प्रशासन से जल्द से जल्द पति को सकुशल बरामद करने की गुहार लगाई थी। इसी बीच, परिजनों ने रामदेव यादव के पुत्र संदीप यादव और बाबूलाल यादव के पुत्र रवि यादव पर मोहन यादव का अपहरण कर सुनसान दियारा क्षेत्र में ले जाकर चाकू से गोदकर हत्या करने और शव को गुमनिया दियारा स्थित विजयपुर चंवर में फेंकने का आरोप लगाया है। सोमवार देर शाम को बिशम्भरपुर थाना क्षेत्र में शव मिलने की सूचना से इलाके में सनसनी फैल गई। स्थानीय लोगों की सूचना पर मौके पर पहुँची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया। घटनास्थल पर एफएसएल की टीम भी बुलाई गई, जिसने कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। पुलिस की प्रारंभिक जाँच में हत्या के पीछे पुरानी रंजिश की आशंका जताई जा रही है, और मामले के सभी पहलुओं से गहनता से जाँच की जा रही है। घटना के बाद से मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, और वे आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी तथा कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस भी मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।1
- पश्चिम चम्पारण के बैरिया-नौतन प्रखंड क्षेत्र में मंगलवार को राज्य सरकार के निर्देश पर ग्राम पंचायतों में 'सहयोग शिविर' आयोजित किए गए, जिनका उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना था। इन शिविरों में, विशेषकर बैकुंठवा पंचायत के राजकीय मध्य विद्यालय, जयनगर में आयोजित शिविर में, अतिक्रमण, गली-नाली निर्माण के अभाव और रिश्वतखोरी के आरोप प्रमुख मुद्दे बनकर उभरे। बैकुंठवा शिविर में विधायक नारायण प्रसाद, बीडीओ शैलेंद्र कुमार सिंह, सीओ अलका कुमारी और प्रमुख कृष्ण देव चौधरी सहित प्रखंड व अंचल के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। इस दौरान मुखिया अफरोज नैयर ने अपनी निजी जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए सीओ को लिखित आवेदन दिया, जबकि महिलाओं ने पंचायत में गली-नाली निर्माण न होने का मुद्दा उठाया। वहीं, अग्निपीड़ित अर्जुन सहनी ने अंचल नाजिर सह प्रधान सहायक मनोज कुमार पर मुआवजा दिलाने के लिए प्रति पीड़ित दो हजार रुपये रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगाया। ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए, विधायक नारायण प्रसाद ने लोगों को शांत कराया और उनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। बीडीओ शैलेंद्र कुमार सिंह ने भी यह सुनिश्चित किया कि शिविर में मिली सभी शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा किया जाएगा। इसी क्रम में, खड्डा पंचायत के पंचायत सरकार भवन में भी मुखिया रीता देवी की देखरेख में सहयोग शिविर का आयोजन हुआ, जहाँ प्रभारी सचिव अभय कुमार सिंह ने विधायक और अन्य अधिकारियों के साथ विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण कर लोगों की समस्याओं को सुना। अधिकारियों ने जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराई।1
- यह वीडियो प्राचीन भारत के इतिहास की एक 'अनकही सच्चाई' को उजागर करने का वादा करता है, जहाँ यह सवाल उठाया गया है कि क्या प्राचीन भारत में महिलाएँ पुरुषों की तुलना में अधिक पढ़ी-लिखी थीं। वीडियो में विस्तार से बताया जाएगा कि 'ब्राह्मण काल' में नारियों को किस प्रकार शिक्षा प्रदान की जाती थी और उस समय महिलाओं की शिक्षा व्यवस्था कैसी थी। इसके अतिरिक्त, इसमें आधुनिक युग और प्राचीन काल की महिलाओं की शिक्षा व्यवस्था के बीच के अंतर पर भी गहराई से चर्चा की जाएगी।1
- राहुल सर पीसीबी द्वारा प्रस्तुत एक वीडियो प्राचीन भारत में महिलाओं की शिक्षा व्यवस्था पर विस्तार से प्रकाश डालने वाला है। यह वीडियो विशेष रूप से ब्राह्मण काल में नारियों को दी जाने वाली शिक्षा प्रणाली और उस समय की शिक्षा व्यवस्था पर केंद्रित होगा, जिसका उद्देश्य प्राचीन शिक्षा प्रणाली और ब्राह्मण कालीन शिक्षा व्यवस्था का विश्लेषण करना है। वीडियो इस महत्वपूर्ण सवाल का जवाब तलाश करेगा कि क्या प्राचीन भारत में महिलाएँ पुरुषों से अधिक शिक्षित थीं, जिसे 'इतिहास की अनकही सच्चाई' के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। साथ ही, यह प्राचीन काल और वर्तमान युग की महिलाओं की शिक्षा व्यवस्था के बीच के अंतर को भी स्पष्ट करेगा।1