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उत्तर प्रदेश के टहरौली क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से बारिश न होने के कारण खरीफ की फसलों को लेकर किसानों की चिंता काफी बढ़ गई है। तहसील टहरौली क्षेत्र के किसानों ने अपने खेतों में उड़द, मूंग, धान और मूंगफली जैसी खरीफ फसलों की बुवाई तो कर दी है, लेकिन अब पानी न बरसने से इन फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है। बंगरा बंगरी गांव के किसान लालाराम सेन ने बताया कि करीब 5 दिनों से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी बारिश नहीं हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र के किसान परेशान हैं। आसमान में बादल मंडराते देखकर किसानों को राहत की उम्मीद तो जगती है, लेकिन बारिश न होने से उनकी उम्मीदें टूट जाती हैं। पानी के अभाव में फसलों को होने वाले नुकसान के कारण अब किसानों के सामने अपनी रोजी-रोटी का भी गंभीर संकट गहराने लगा है।

20 hrs ago
user_Ankit Gotam
Ankit Gotam
रिपोर्टर टहरौली, झांसी, उत्तर प्रदेश•
20 hrs ago

उत्तर प्रदेश के टहरौली क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से बारिश न होने के कारण खरीफ की फसलों को लेकर किसानों की चिंता काफी बढ़ गई है। तहसील टहरौली क्षेत्र के किसानों ने अपने खेतों में उड़द, मूंग, धान और मूंगफली जैसी खरीफ फसलों की बुवाई तो कर दी है, लेकिन अब पानी न बरसने से इन फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है। बंगरा बंगरी गांव के किसान लालाराम सेन ने बताया कि करीब 5 दिनों से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी बारिश नहीं हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र के किसान परेशान हैं। आसमान में बादल मंडराते देखकर किसानों को राहत की उम्मीद तो जगती है, लेकिन बारिश न होने से उनकी उम्मीदें टूट जाती हैं। पानी के अभाव में फसलों को होने वाले नुकसान के कारण अब किसानों के सामने अपनी रोजी-रोटी का भी गंभीर संकट गहराने लगा है।

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित टहरौली तहसील में बुंदेलखंड किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने उपजिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा है। 'देश बचाओ अभियान' के तहत भारतीय किसान यूनियन की तरफ से किसान मित्र लेखराज पटेल ने बुधवार को दोपहर 2 बजे उपजिलाधिकारी का ध्यान भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड डील) की ओर आकर्षित किया और इसका कड़ा विरोध जताया। किसानों का कहना है कि यह डील देश के छोटे किसानों और पशुपालकों के लिए केवल एक डेथ वारंट ही नहीं है, बल्कि इसका सीधा और घातक असर हमारी अर्थव्यवस्था तथा करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी पर पड़ेगा। किसानों ने मांग की है कि उनके हितों को ध्यान में रखते हुए इस ट्रेड डील को तुरंत वापस लिया जाए, अन्यथा वे दिल्ली में एक बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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    उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित टहरौली तहसील में बुंदेलखंड किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने उपजिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा है। 'देश बचाओ अभियान' के तहत भारतीय किसान यूनियन की तरफ से किसान मित्र लेखराज पटेल ने बुधवार को दोपहर 2 बजे उपजिलाधिकारी का ध्यान भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड डील) की ओर आकर्षित किया और इसका कड़ा विरोध जताया।

किसानों का कहना है कि यह डील देश के छोटे किसानों और पशुपालकों के लिए केवल एक डेथ वारंट ही नहीं है, बल्कि इसका सीधा और घातक असर हमारी अर्थव्यवस्था तथा करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी पर पड़ेगा। किसानों ने मांग की है कि उनके हितों को ध्यान में रखते हुए इस ट्रेड डील को तुरंत वापस लिया जाए, अन्यथा वे दिल्ली में एक बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
    user_Sanjay kushwaha
    Sanjay kushwaha
    Local News Reporter टहरौली, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के टहरौली क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से बारिश न होने के कारण खरीफ की फसलों को लेकर किसानों की चिंता काफी बढ़ गई है। तहसील टहरौली क्षेत्र के किसानों ने अपने खेतों में उड़द, मूंग, धान और मूंगफली जैसी खरीफ फसलों की बुवाई तो कर दी है, लेकिन अब पानी न बरसने से इन फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है। बंगरा बंगरी गांव के किसान लालाराम सेन ने बताया कि करीब 5 दिनों से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी बारिश नहीं हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र के किसान परेशान हैं। आसमान में बादल मंडराते देखकर किसानों को राहत की उम्मीद तो जगती है, लेकिन बारिश न होने से उनकी उम्मीदें टूट जाती हैं। पानी के अभाव में फसलों को होने वाले नुकसान के कारण अब किसानों के सामने अपनी रोजी-रोटी का भी गंभीर संकट गहराने लगा है।
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    उत्तर प्रदेश के टहरौली क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से बारिश न होने के कारण खरीफ की फसलों को लेकर किसानों की चिंता काफी बढ़ गई है। तहसील टहरौली क्षेत्र के किसानों ने अपने खेतों में उड़द, मूंग, धान और मूंगफली जैसी खरीफ फसलों की बुवाई तो कर दी है, लेकिन अब पानी न बरसने से इन फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है।

बंगरा बंगरी गांव के किसान लालाराम सेन ने बताया कि करीब 5 दिनों से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी बारिश नहीं हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र के किसान परेशान हैं। आसमान में बादल मंडराते देखकर किसानों को राहत की उम्मीद तो जगती है, लेकिन बारिश न होने से उनकी उम्मीदें टूट जाती हैं। पानी के अभाव में फसलों को होने वाले नुकसान के कारण अब किसानों के सामने अपनी रोजी-रोटी का भी गंभीर संकट गहराने लगा है।
    user_Ankit Gotam
    Ankit Gotam
    रिपोर्टर टहरौली, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    20 hrs ago
  • निवाड़ी जिले के पृथ्वीपुर निवासी शिक्षक अरविंद त्रिवेदी ने ईंधन संरक्षण की एक अनोखी मिसाल पेश की है। प्रधानमंत्री के ईंधन बचत के संदेश से प्रेरित होकर उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल छोड़ दी है और अब वे साइकिल से ही स्कूल पहुंच रहे हैं।
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    निवाड़ी जिले के पृथ्वीपुर निवासी शिक्षक अरविंद त्रिवेदी ने ईंधन संरक्षण की एक अनोखी मिसाल पेश की है। प्रधानमंत्री के ईंधन बचत के संदेश से प्रेरित होकर उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल छोड़ दी है और अब वे साइकिल से ही स्कूल पहुंच रहे हैं।
    user_Hemant verma
    Hemant verma
    South Indian restaurant Niwari, Madhya Pradesh•
    13 hrs ago
  • निवाड़ी के टेहरका में एक किसान ने अपनी जमीन पर कब्जे और इस मामले में प्रशासन द्वारा की जा रही लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित किसान का आरोप है कि उसकी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है, लेकिन इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लगातार लापरवाही बरती जा रही है।
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    निवाड़ी के टेहरका में एक किसान ने अपनी जमीन पर कब्जे और इस मामले में प्रशासन द्वारा की जा रही लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित किसान का आरोप है कि उसकी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है, लेकिन इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लगातार लापरवाही बरती जा रही है।
    user_Ashish Patrkar
    Ashish Patrkar
    Newspaper publisher निवाड़ी, निवाड़ी, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में गरीबों को बांटे जाने वाले राशन में जानवर की खोपड़ी और हड्डियां मिलने का एक बेहद गंभीर और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। इस घटना के बाद टीकमगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की पूरी व्यवस्था पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। गरीबों को मिलने वाले अनाज में ऐसी चीजें मिलना सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा और पूरी व्यवस्था की बड़ी विफलता को उजागर करता है।
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    मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में गरीबों को बांटे जाने वाले राशन में जानवर की खोपड़ी और हड्डियां मिलने का एक बेहद गंभीर और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। इस घटना के बाद टीकमगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की पूरी व्यवस्था पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। गरीबों को मिलने वाले अनाज में ऐसी चीजें मिलना सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा और पूरी व्यवस्था की बड़ी विफलता को उजागर करता है।
    user_NB17 न्यूज़ चैनल
    NB17 न्यूज़ चैनल
    निवाड़ी, निवाड़ी, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • मध्य प्रदेश में पंडोखर सरकार गुरु शरण महाराज ने बागेश्वर धाम के भाई पर अपनी एक बड़ी प्रतिक्रिया दी है।
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    मध्य प्रदेश में पंडोखर सरकार गुरु शरण महाराज ने बागेश्वर धाम के भाई पर अपनी एक बड़ी प्रतिक्रिया दी है।
    user_पत्रकार जितेंद्र सिंह कौरव
    पत्रकार जितेंद्र सिंह कौरव
    Voice of people भांडेर, दतिया, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • झांसी की टहरौली तहसील के ग्राम बंगरी बंगरा में श्मशान घाट पर बुनियादी सुविधाओं के अभाव के चलते ग्रामीणों को भारी बारिश के बीच तिरपाल तानकर अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर होना पड़ा। गांव के रहने वाले 40 वर्षीय कैंसर पीड़ित ओमप्रकाश अहिरवार लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझने के बाद जिंदगी की जंग हार गए। जब उनकी अंतिम यात्रा श्मशान घाट पहुंची, तो अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के लिए टीन शेड की व्यवस्था न होने के कारण सभी के सामने शव को मुखाग्नि देने की गंभीर चिंता खड़ी हो गई। ग्रामीणों ने काफी देर तक बारिश रुकने का इंतजार किया, लेकिन जब बारिश नहीं थमी तो मजबूरन तिरपाल का सहारा लेकर मृतक को अंतिम विदाई दी गई। इस घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने सरकारी व्यवस्थाओं पर तीखे सवाल खड़े किए हैं, जिससे विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खुल गई है। मृतक अपने पीछे एक 8 वर्षीय मासूम लड़का और दो लड़कियां छोड़ गए हैं, और सिर से पिता का साया उठ जाने के कारण रो-रोकर परिजनों का बुरा हाल बना हुआ है।
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    झांसी की टहरौली तहसील के ग्राम बंगरी बंगरा में श्मशान घाट पर बुनियादी सुविधाओं के अभाव के चलते ग्रामीणों को भारी बारिश के बीच तिरपाल तानकर अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर होना पड़ा। गांव के रहने वाले 40 वर्षीय कैंसर पीड़ित ओमप्रकाश अहिरवार लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझने के बाद जिंदगी की जंग हार गए। जब उनकी अंतिम यात्रा श्मशान घाट पहुंची, तो अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के लिए टीन शेड की व्यवस्था न होने के कारण सभी के सामने शव को मुखाग्नि देने की गंभीर चिंता खड़ी हो गई।

ग्रामीणों ने काफी देर तक बारिश रुकने का इंतजार किया, लेकिन जब बारिश नहीं थमी तो मजबूरन तिरपाल का सहारा लेकर मृतक को अंतिम विदाई दी गई। इस घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने सरकारी व्यवस्थाओं पर तीखे सवाल खड़े किए हैं, जिससे विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खुल गई है। मृतक अपने पीछे एक 8 वर्षीय मासूम लड़का और दो लड़कियां छोड़ गए हैं, और सिर से पिता का साया उठ जाने के कारण रो-रोकर परिजनों का बुरा हाल बना हुआ है।
    user_प्रदीप यादव दादा पत्रकार बबीना
    प्रदीप यादव दादा पत्रकार बबीना
    Local News Reporter झांसी, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • झांसी जिले की टहरौली तहसील के अंतर्गत ग्राम बंगरी बंगरा में श्मशान घाट पर बदहाली के कारण मानवीय संवेदनाएं भी हार गईं। गांव में रहने वाले 40 वर्षीय कैंसर पीड़ित ओमप्रकाश अहिरवार लंबे समय से इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और आखिर में वह जिंदगी की जंग हार गए। जब मृतक की अंतिम यात्रा श्मशान घाट पहुंची, तो अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के लिए टीन शेड की कोई व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण ग्रामीणों और परिजनों को भारी चिंता सताने लगी। मजबूर ग्रामीणों ने काफी देर तक बारिश रुकने का इंतजार किया, लेकिन जब बारिश नहीं थमी तो उन्होंने तिरपाल का सहारा लेकर अंतिम विदाई की प्रक्रिया पूरी की। इस घटना से सरकारी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खुल गई है। मृतक अपने पीछे एक 8 वर्षीय मासूम बेटा और दो बेटियां छोड़ गया है, जिनके सिर से पिता का साया उठ जाने के कारण परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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    झांसी जिले की टहरौली तहसील के अंतर्गत ग्राम बंगरी बंगरा में श्मशान घाट पर बदहाली के कारण मानवीय संवेदनाएं भी हार गईं। गांव में रहने वाले 40 वर्षीय कैंसर पीड़ित ओमप्रकाश अहिरवार लंबे समय से इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और आखिर में वह जिंदगी की जंग हार गए। जब मृतक की अंतिम यात्रा श्मशान घाट पहुंची, तो अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के लिए टीन शेड की कोई व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण ग्रामीणों और परिजनों को भारी चिंता सताने लगी।

मजबूर ग्रामीणों ने काफी देर तक बारिश रुकने का इंतजार किया, लेकिन जब बारिश नहीं थमी तो उन्होंने तिरपाल का सहारा लेकर अंतिम विदाई की प्रक्रिया पूरी की। इस घटना से सरकारी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खुल गई है। मृतक अपने पीछे एक 8 वर्षीय मासूम बेटा और दो बेटियां छोड़ गया है, जिनके सिर से पिता का साया उठ जाने के कारण परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
    user_Sanjay kushwaha
    Sanjay kushwaha
    Local News Reporter टहरौली, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
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