बेगूसराय।सिमरिया सिक्स। लाइन का अब सियासत दो महापुरुष के बीच हो रही है श्रीबाबू की प्रतिमा के लिए बीहट में जल उठीं मशालें मल्हीपुर सिक्सलेन गोलंबर पर आदमकद प्रतिमा की मांग सिमरिया सिक्स। लाइन का अब सियासत दो महापुरुष के बीच हो रही है श्रीबाबू की प्रतिमा के लिए बीहट में जल उठीं मशालें मल्हीपुर सिक्सलेन गोलंबर पर आदमकद प्रतिमा की मांग को लेकर सड़क पर उतरे लोग, गूंजा।‘श्रीबाबू की प्रतिमा कहां लगेगी? मल्हीपुर गोलंबर पर’ विश्वकर्मा चौक से फर्टिलाइजर रेलवे केबिन होते हुए बीहट बाजार तक निकला मशाल जुलूस; समिति ने कहा—जनजागरण अभियान अब और होगा व्यापक बेगूसराय/बीहट। बिहार केसरी डॉ. श्रीकृष्ण सिन्हा ‘श्रीबाबू’ की आदमकद प्रतिमा उनकी कर्मभूमि बेगूसराय में स्थापित करने की मांग अब जनआंदोलन का रूप लेती जा रही है।। बीहट की सड़कों पर दर्जनों जलती मशालों और तिरंगे के साथ निकला जुलूस इसी जनभावना का जोरदार प्रदर्शन रहा। बीहट नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या-35 स्थित मल्हीपुर गांव के सिक्सलेन गोलंबर पर श्रीबाबू की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग को लेकर निकले मशाल जुलूस में स्थानीय लोगों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया। जुलूस के दौरान ‘श्रीबाबू अमर रहें’, ‘मल्हीपुर चौक पर श्रीबाबू की प्रतिमा लगाना होगा’, ‘श्रीबाबू की प्रतिमा कहां लगेगी—मल्हीपुर गोलंबर पर’ और ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारों से बीहट की सड़कें गूंजती रहीं। हाथों में जलती मशालें और तिरंगा थामे प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि श्रीबाबू की प्रतिमा स्थापना की मांग अब केवल एक मांग नहीं, बल्कि सम्मान, स्मृति और अपनी ऐतिहासिक विरासत को पुनर्स्थापित करने का अभियान बन चुकी है। मशाल जुलूस का नेतृत्व ‘बिहार केसरी’ श्रीबाबू प्रतिमा निर्माण समिति के संयोजक सह बेगूसराय नगर निगम के पूर्व उपमहापौर राजीव रंजन, सह। संयोजक, भीम आर्मी के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं युवा अधिवक्ता विकास कुमार आजाद तथा क्षेत्रीय विकास मोर्चा के महासचिव शिवशंकर पासवान उर्फ फुलेना पासवान ने किया। विश्वकर्मा चौक से शुरू हुआ मशाल जुलूस राष्ट्रीय राजमार्ग के रास्ते फर्टिलाइजर रेलवे केबिन पहुंचा। वहां से जुलूस बीहट बाजार की ओर बढ़ा और चांदनी चौक पहुंचकर समाप्त हुआ। पूरे मार्ग में मशालों की रोशनी, तिरंगे और नारों ने माहौल को आंदोलनकारी बना दिया। ‘जिस धरती को औद्योगिक पहचान दिलाई, उसी धरती पर प्रतिमा क्यों नहीं?’ समिति के संयोजक राजीव रंजन ने कहा कि बिहार केसरी डॉ. श्रीकृष्ण सिन्हा बेगूसराय के औद्योगिक विकास के प्रमुख शिल्पकारों में रहे हैं। रिफाइनरी, थर्मल, फर्टिलाइजर और राजेंद्र सेतु जैसी विकास परियोजनाओं से जुड़ी उनकी विकास-दृष्टि ने बेगूसराय को औद्योगिक पहचान दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि जिस महापुरुष ने बेगूसराय के विकास की मजबूत आधारशिला रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उनकी अपनी कर्मभूमि पर एक भी प्रमुख सार्वजनिक स्थल पर आदमकद प्रतिमा का न होना समाज के लिए आत्ममंथन का विषय है। राजीव रंजन ने कहा कि मल्हीपुर सिक्सलेन गोलंबर पर श्रीबाबू की प्रतिमा स्थापित कर उसे ‘स्टैच्यू ऑफ डेवलपमेंट’ के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, ताकि बेगूसराय में प्रवेश करने वाली हर पीढ़ी अपने उस शिल्पकार को देख सके, जिसने इस क्षेत्र के औद्योगिक और सामाजिक विकास की कल्पना की थी। उन्होंने कहा कि प्रतिमा स्थापना की मांग को लेकर जनजागरण अभियान लगातार जारी रहेगा। ‘श्रीबाबू के योगदान को दल या विचारधारा की सीमा में बांधना इतिहास के साथ अन्याय’ युवा अधिवक्ता विकास कुमार आजाद ने कहा कि श्रीबाबू बिहार के इतिहास के ऐसे व्यक्तित्व हैं, जिनके योगदान का मूल्यांकन राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर किया जाना चाहिए। सामाजिक न्याय, समानता और विकास के लिए उनके संघर्ष को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनके प्रति रही सामूहिक उपेक्षा पर अब समाज को गंभीर आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इतिहास को केवल पढ़ने की नहीं, बल्कि सही परिप्रेक्ष्य में समझने और आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है। ‘कर्मभूमि के प्रवेश द्वार पर ही स्थापित हो श्रीबाबू की प्रतिमा’ क्षेत्रीय विकास मोर्चा के महासचिव शिवशंकर पासवान उर्फ फुलेना पासवान ने कहा कि श्रीबाबू आधुनिक बिहार के नवनिर्माण के प्रमुख शिल्पकार और सामाजिक न्याय के पुरोधा थे। उन्होंने सामाजिक भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ महत्वपूर्ण संघर्ष किया तथा वंचित एवं दलित समाज के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि मल्हीपुर सिक्सलेन गोलंबर केवल एक चौराहा नहीं, बल्कि बेगूसराय में प्रवेश करने वाला प्रमुख मार्ग है। इसलिए यहां श्रीबाबू की आदमकद प्रतिमा स्थापित होना आने वाली पीढ़ियों के लिए एक जीवंत इतिहास-पाठ होगा। फुलेना पासवान ने कहा कि श्रीबाबू ने बिहार में उद्योग, शिक्षा, कृषि, सिंचाई, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली तथा सामाजिक न्याय आधारित विकास को नई दिशा दी। उनके योगदान को किसी राजनीतिक दल, विचारधारा या क्षेत्र की सीमा में बांधना उचित नहीं है। ‘सदियों तक प्रेरणा देता रहे स्टैच्यू ऑफ डेवलपमेंट’ निर्माण समिति के मुख्य प्रवक्ता एवं बहुजन एक्टिविस्ट विजय पासवान ने कहा कि श्रीबाबू महान स्वतंत्रता सेनानी, अखंड बिहार के प्रधानमंत्री एवं बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री, आधुनिक बिहार के निर्माता तथा बेगूसराय के औद्योगिक विकास के स्वप्नदर्शी शिल्पकार थे। उन्होंने गढ़पुरा में अंग्रेजों के काले नमक कानून के खिलाफ नमक सत्याग्रह का नेतृत्व किया और स्वतंत्रता आंदोलन के साथ-साथ राष्ट्र एवं बिहार के नवनिर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि दलित-पिछड़े समाज सहित आम लोगों के बीच से उठी प्रतिमा स्थापना की यह आवाज अब दबने वाली नहीं है। लोकतांत्रिक तरीके से जनजागरण अभियान को गांव-गांव और समाज के हर वर्ग तक ले जाया जाएगा। ‘65 साल बाद भी प्रतिमा नहीं होना सामूहिक कृतघ्नता का उदाहरण’ निर्माण समिति के कोषाध्यक्ष जयंत कुमार पासवान ने कहा कि श्रीबाबू ने बेगूसराय के विकास के लिए अनेक उल्लेखनीय कार्य किए। उनके विकास कार्यों से लाखों नौजवानों, मजदूरों, इंजीनियरों, तकनीशियनों और अन्य लोगों के लिए रोजगार एवं आजीविका के अवसर पैदा हुए। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद और चिंताजनक है कि अपनी मृत्यु के छह दशक से अधिक समय बाद भी श्रीबाबू की कर्मभूमि बेगूसराय में किसी प्रमुख सार्वजनिक महत्व के स्थान पर उनकी एक भी आदमकद प्रतिमा स्थापित नहीं हो सकी है। जयंत पासवान ने कहा कि जिन्होंने बिहार और बेगूसराय के विकास के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया, उनके सम्मान के लिए समाज को अब खड़ा होना होगा। उन्होंने कहा कि मल्हीपुर सिक्सलेन गोलंबर पर स्थापित होने वाली प्रतिमा केवल पत्थर या धातु की प्रतिमा नहीं, बल्कि श्रीबाबू के त्याग, देशभक्ति, सादगी, ईमानदारी, दूरदर्शिता, कर्मठता और विकास-दृष्टि का प्रेरणा-स्थल होगी। गढ़पुरा से बीहट तक जुड़ी श्रीबाबू की विरासत गढ़पुरा नमक सत्याग्रह गौरव यात्रा समिति के राष्ट्रीय महासचिव राजीव कुमार, महासचिव रमेश महतो, सचिव मुकेश विक्रम यादव एवं डोमन महतो ने कहा कि श्रीबाबू का जीवन संघर्ष, त्याग और बिहार के विकास के प्रति समर्पण का प्रतीक है। बेगूसराय के औद्योगिक विकास में उनका योगदान ऐतिहासिक है। मल्हीपुर सिक्सलेन गोलंबर पर उनकी प्रतिमा स्थापित होने से जिले में प्रवेश करने वाली नई पीढ़ी को उनके जीवन और योगदान से परिचित होने का अवसर मिलेगा। इनकी रही भागीदारी मशाल जुलूस में नूरपुर के मुखिया प्रतिनिधि राजेश चौधरी एवं उनके पुत्र, राजवाड़ा के रितेश कुमार, बरौनी के कांग्रेस नेता संजय सिंह, असुरारी के रणजीत कुमार पटेल, बीहट के कमल वत्स, मनीष कुमार, बबलू पासवान, शशिभूषण सिंह, अशोक रजक, रितेश पासवान, मुकेश सिंह, संतोष कुमार, रजनीश कुमार, अमित कुमार, चंदन कुमार, पंकज साह, चुलबुल कुमार, रामशंकर सिंह, रंजन कुमार, शुभम कुमार सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एवं समिति के सदस्य शामिल हुए। बीहट में श्रीबाबू की प्रतिमा स्थापना की मांग को लेकर निकले मशाल जुलूस में हाथों में मशाल व तिरंगा लिए शामिल लोग तथा आगे बैनर के साथ प्रतिमा निर्माण समिति के सदस्य। अगर इसे और ज्यादा ‘लीड स्टोरी’ बनाना हो तो मेरी पहली पसंद की हेडलाइन: श्रीबाबू की प्रतिमा के लिए बीहट में जल उठीं मशालें ‘श्रीबाबू की प्रतिमा कहां लगेगी—मल्हीपुर गोलंबर पर’ के नारों से गूंजा बीहट यह हेडलाइन आपके उपलब्ध फोटो के दृश्य प्रभाव से भी सबसे अच्छी तरह मेल खाती है—मशालें तिरंगा बैनर भीड़ नारे, यानी खबर का पूरा आंदोलनकारी भाव एक ही फ्रेम में आ जाता ह
बेगूसराय।सिमरिया सिक्स। लाइन का अब सियासत दो महापुरुष के बीच हो रही है श्रीबाबू की प्रतिमा के लिए बीहट में जल उठीं मशालें मल्हीपुर सिक्सलेन गोलंबर पर आदमकद प्रतिमा की मांग सिमरिया सिक्स। लाइन का अब सियासत दो महापुरुष के बीच हो रही है श्रीबाबू की प्रतिमा के लिए बीहट में जल उठीं मशालें मल्हीपुर सिक्सलेन गोलंबर पर आदमकद प्रतिमा की मांग को लेकर सड़क पर उतरे लोग, गूंजा।‘श्रीबाबू की प्रतिमा कहां लगेगी? मल्हीपुर गोलंबर पर’ विश्वकर्मा चौक से फर्टिलाइजर रेलवे केबिन होते हुए बीहट बाजार तक निकला मशाल जुलूस; समिति ने कहा—जनजागरण अभियान अब और होगा व्यापक बेगूसराय/बीहट। बिहार केसरी डॉ. श्रीकृष्ण सिन्हा ‘श्रीबाबू’ की आदमकद प्रतिमा उनकी कर्मभूमि बेगूसराय में स्थापित करने की मांग अब जनआंदोलन का रूप लेती जा रही है।। बीहट की सड़कों पर दर्जनों जलती मशालों और तिरंगे के साथ निकला जुलूस इसी जनभावना का जोरदार प्रदर्शन रहा। बीहट नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या-35 स्थित मल्हीपुर गांव के सिक्सलेन गोलंबर पर श्रीबाबू की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग को लेकर निकले मशाल जुलूस में स्थानीय लोगों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया। जुलूस के दौरान ‘श्रीबाबू अमर रहें’, ‘मल्हीपुर चौक पर श्रीबाबू की प्रतिमा लगाना होगा’, ‘श्रीबाबू की प्रतिमा कहां लगेगी—मल्हीपुर गोलंबर पर’ और ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारों से बीहट की सड़कें गूंजती रहीं। हाथों में जलती मशालें और तिरंगा थामे प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि श्रीबाबू की प्रतिमा स्थापना की मांग अब केवल एक मांग नहीं, बल्कि सम्मान, स्मृति और अपनी ऐतिहासिक विरासत को पुनर्स्थापित करने का अभियान बन चुकी है। मशाल जुलूस का नेतृत्व ‘बिहार केसरी’ श्रीबाबू प्रतिमा निर्माण समिति के संयोजक सह बेगूसराय नगर निगम के पूर्व उपमहापौर राजीव रंजन, सह। संयोजक, भीम आर्मी के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं युवा अधिवक्ता विकास कुमार आजाद तथा क्षेत्रीय विकास मोर्चा के महासचिव शिवशंकर पासवान उर्फ फुलेना पासवान ने किया। विश्वकर्मा चौक से शुरू हुआ मशाल जुलूस राष्ट्रीय राजमार्ग के रास्ते फर्टिलाइजर रेलवे केबिन पहुंचा। वहां से जुलूस बीहट बाजार की ओर बढ़ा और चांदनी चौक पहुंचकर समाप्त हुआ। पूरे मार्ग में मशालों की रोशनी, तिरंगे और नारों ने माहौल को आंदोलनकारी बना दिया। ‘जिस धरती को औद्योगिक पहचान दिलाई, उसी धरती पर प्रतिमा क्यों नहीं?’ समिति के संयोजक राजीव रंजन ने कहा कि बिहार केसरी डॉ. श्रीकृष्ण सिन्हा बेगूसराय के औद्योगिक विकास के प्रमुख शिल्पकारों में रहे हैं। रिफाइनरी, थर्मल, फर्टिलाइजर और राजेंद्र सेतु जैसी विकास परियोजनाओं से जुड़ी उनकी विकास-दृष्टि ने बेगूसराय को औद्योगिक पहचान दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि जिस महापुरुष ने बेगूसराय के विकास की मजबूत आधारशिला रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उनकी अपनी कर्मभूमि पर
एक भी प्रमुख सार्वजनिक स्थल पर आदमकद प्रतिमा का न होना समाज के लिए आत्ममंथन का विषय है। राजीव रंजन ने कहा कि मल्हीपुर सिक्सलेन गोलंबर पर श्रीबाबू की प्रतिमा स्थापित कर उसे ‘स्टैच्यू ऑफ डेवलपमेंट’ के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, ताकि बेगूसराय में प्रवेश करने वाली हर पीढ़ी अपने उस शिल्पकार को देख सके, जिसने इस क्षेत्र के औद्योगिक और सामाजिक विकास की कल्पना की थी। उन्होंने कहा कि प्रतिमा स्थापना की मांग को लेकर जनजागरण अभियान लगातार जारी रहेगा। ‘श्रीबाबू के योगदान को दल या विचारधारा की सीमा में बांधना इतिहास के साथ अन्याय’ युवा अधिवक्ता विकास कुमार आजाद ने कहा कि श्रीबाबू बिहार के इतिहास के ऐसे व्यक्तित्व हैं, जिनके योगदान का मूल्यांकन राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर किया जाना चाहिए। सामाजिक न्याय, समानता और विकास के लिए उनके संघर्ष को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनके प्रति रही सामूहिक उपेक्षा पर अब समाज को गंभीर आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इतिहास को केवल पढ़ने की नहीं, बल्कि सही परिप्रेक्ष्य में समझने और आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है। ‘कर्मभूमि के प्रवेश द्वार पर ही स्थापित हो श्रीबाबू की प्रतिमा’ क्षेत्रीय विकास मोर्चा के महासचिव शिवशंकर पासवान उर्फ फुलेना पासवान ने कहा कि श्रीबाबू आधुनिक बिहार के नवनिर्माण के प्रमुख शिल्पकार और सामाजिक न्याय के पुरोधा थे। उन्होंने सामाजिक भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ महत्वपूर्ण संघर्ष किया तथा वंचित एवं दलित समाज के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि मल्हीपुर सिक्सलेन गोलंबर केवल एक चौराहा नहीं, बल्कि बेगूसराय में प्रवेश करने वाला प्रमुख मार्ग है। इसलिए यहां श्रीबाबू की आदमकद प्रतिमा स्थापित होना आने वाली पीढ़ियों के लिए एक जीवंत इतिहास-पाठ होगा। फुलेना पासवान ने कहा कि श्रीबाबू ने बिहार में उद्योग, शिक्षा, कृषि, सिंचाई, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली तथा सामाजिक न्याय आधारित विकास को नई दिशा दी। उनके योगदान को किसी राजनीतिक दल, विचारधारा या क्षेत्र की सीमा में बांधना उचित नहीं है। ‘सदियों तक प्रेरणा देता रहे स्टैच्यू ऑफ डेवलपमेंट’ निर्माण समिति के मुख्य प्रवक्ता एवं बहुजन एक्टिविस्ट विजय पासवान ने कहा कि श्रीबाबू महान स्वतंत्रता सेनानी, अखंड बिहार के प्रधानमंत्री एवं बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री, आधुनिक बिहार के निर्माता तथा बेगूसराय के औद्योगिक विकास के स्वप्नदर्शी शिल्पकार थे। उन्होंने गढ़पुरा में अंग्रेजों के काले नमक कानून के खिलाफ नमक सत्याग्रह का नेतृत्व किया और स्वतंत्रता आंदोलन के साथ-साथ राष्ट्र एवं बिहार के नवनिर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि दलित-पिछड़े समाज सहित आम लोगों के बीच से उठी प्रतिमा स्थापना की यह आवाज अब दबने वाली नहीं है। लोकतांत्रिक तरीके से जनजागरण अभियान को गांव-गांव और समाज
के हर वर्ग तक ले जाया जाएगा। ‘65 साल बाद भी प्रतिमा नहीं होना सामूहिक कृतघ्नता का उदाहरण’ निर्माण समिति के कोषाध्यक्ष जयंत कुमार पासवान ने कहा कि श्रीबाबू ने बेगूसराय के विकास के लिए अनेक उल्लेखनीय कार्य किए। उनके विकास कार्यों से लाखों नौजवानों, मजदूरों, इंजीनियरों, तकनीशियनों और अन्य लोगों के लिए रोजगार एवं आजीविका के अवसर पैदा हुए। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद और चिंताजनक है कि अपनी मृत्यु के छह दशक से अधिक समय बाद भी श्रीबाबू की कर्मभूमि बेगूसराय में किसी प्रमुख सार्वजनिक महत्व के स्थान पर उनकी एक भी आदमकद प्रतिमा स्थापित नहीं हो सकी है। जयंत पासवान ने कहा कि जिन्होंने बिहार और बेगूसराय के विकास के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया, उनके सम्मान के लिए समाज को अब खड़ा होना होगा। उन्होंने कहा कि मल्हीपुर सिक्सलेन गोलंबर पर स्थापित होने वाली प्रतिमा केवल पत्थर या धातु की प्रतिमा नहीं, बल्कि श्रीबाबू के त्याग, देशभक्ति, सादगी, ईमानदारी, दूरदर्शिता, कर्मठता और विकास-दृष्टि का प्रेरणा-स्थल होगी। गढ़पुरा से बीहट तक जुड़ी श्रीबाबू की विरासत गढ़पुरा नमक सत्याग्रह गौरव यात्रा समिति के राष्ट्रीय महासचिव राजीव कुमार, महासचिव रमेश महतो, सचिव मुकेश विक्रम यादव एवं डोमन महतो ने कहा कि श्रीबाबू का जीवन संघर्ष, त्याग और बिहार के विकास के प्रति समर्पण का प्रतीक है। बेगूसराय के औद्योगिक विकास में उनका योगदान ऐतिहासिक है। मल्हीपुर सिक्सलेन गोलंबर पर उनकी प्रतिमा स्थापित होने से जिले में प्रवेश करने वाली नई पीढ़ी को उनके जीवन और योगदान से परिचित होने का अवसर मिलेगा। इनकी रही भागीदारी मशाल जुलूस में नूरपुर के मुखिया प्रतिनिधि राजेश चौधरी एवं उनके पुत्र, राजवाड़ा के रितेश कुमार, बरौनी के कांग्रेस नेता संजय सिंह, असुरारी के रणजीत कुमार पटेल, बीहट के कमल वत्स, मनीष कुमार, बबलू पासवान, शशिभूषण सिंह, अशोक रजक, रितेश पासवान, मुकेश सिंह, संतोष कुमार, रजनीश कुमार, अमित कुमार, चंदन कुमार, पंकज साह, चुलबुल कुमार, रामशंकर सिंह, रंजन कुमार, शुभम कुमार सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एवं समिति के सदस्य शामिल हुए। बीहट में श्रीबाबू की प्रतिमा स्थापना की मांग को लेकर निकले मशाल जुलूस में हाथों में मशाल व तिरंगा लिए शामिल लोग तथा आगे बैनर के साथ प्रतिमा निर्माण समिति के सदस्य। अगर इसे और ज्यादा ‘लीड स्टोरी’ बनाना हो तो मेरी पहली पसंद की हेडलाइन: श्रीबाबू की प्रतिमा के लिए बीहट में जल उठीं मशालें ‘श्रीबाबू की प्रतिमा कहां लगेगी—मल्हीपुर गोलंबर पर’ के नारों से गूंजा बीहट यह हेडलाइन आपके उपलब्ध फोटो के दृश्य प्रभाव से भी सबसे अच्छी तरह मेल खाती है—मशालें तिरंगा बैनर भीड़ नारे, यानी खबर का पूरा आंदोलनकारी भाव एक ही फ्रेम में आ जाता ह
- 08/09/2026 :शाम्हो बेगूसराय बाढ़ में डूब गए वृद्ध आदमी की तलाश जारी । आज की बड़ी घटना कुरहा शाम्हो से आ रही है । Mobile Tv News1
- उजियारपुर प्रखंड अंतर्गत गाँवपुर पंचायत के मुखिया संघ प्रखंड अध्यक्ष अजय कुमार सरकारी आवास को लेकर क्या कुछ कहा जानिए?1
- बेगूसराय सुजा भर्रा मे पांच दिवसीय जन्माष्टमी मेला शुरू निशुल्क पेयजल का उद्घाटन बेगूसराय सुजा भर्रा मे पांच दिवसीय जन्माष्टमी मेला शुरू निशुल्क पेयजल का उद्घाटन सदर प्रखंड के सुजा पंचायत के भर्रा में जन्माष्टमी मेला के अवसर पर निशुल्क पेयजल समिति का उद्घाटन वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अरविंद कुमार के द्वारा किया गया उद्घाटन समारोह में मौजूद अतिथियों को निशुल्क पेयजल समिति के कार्यकर्ताओं ने चादर पुष्पगुच्छ से सम्मानित किया डॉक्टर अरविंद कुमार ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण राजा कंस को मारने के लिए पृथ्वी पर आए थे ब्रज के लोगों को अत्याचार और यातनाओं से मुक्ति दिलाई वह सभी के लिए आदर्श थे उनके बताए मार्ग पर चलना चाहिए मौके पर निः शुल्क पेयजल समिति के अध्यक्ष सुधीर कुमार शिक्षक पप्पूकुमार चौधरी राहुलशर्मा जमींदार कुंदन कुमार अजयकुमारसाहू उर्फ लालू शंभू दास रोहितकुमार शर्मा सहित सैकड़ो लोग मौजूद थे3
- बेगूसराय- चेरियाबरियारपुर थाना की पुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान के तहत 01 वास्तविक धारक को किया मोबाइल सुपुर्द, SP ने दी जानकारी चेरियाबरियारपुर थाना की पुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान के तहत 01 वास्तविक धारक को मोबाइल सुपुर्द करने का काम किया है. इस बात की जानकारी सोमवार की देर रात 10:00 बजे एसपी मनीष ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए दी. इस संबंध में SP ने बताया कि बेगूसराय पुलिस खोए हुए मोबाइल अथवा चोरी किए गए मोबाइल को ऑपरेशन मुस्कान के तहत बरामद करते हुए वास्तविक भारत को सुपुर्द करने का काम करती है. इस कार्य से आमलोगों में खुशी का वातावरण है.1
- बाढ़ पीड़ितों के बीच लगातार राहत पहुंचा रहे भोला सिंह, तीन शिविरों में बांटी खाद्य सामग्री और दवाइयां मोकामा में बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच लगातार राहत पहुंचाने का काम जारी है। समाजसेवी भोला सिंह बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए लगातार राहत सामग्री लेकर शिविरों तक पहुंच रहे हैं। आज मोकामा प्रखंड कार्यालय स्थित राहत शिविर, सिद्धनाथ मंदिर राहत शिविर और सूर्य मंदिर के पास राहत शिविर में पहुंचकर बाढ़ पीड़ितों के बीच फल, खाने-पीने की सामग्री और जरूरी दवाइयों का वितरण किया गया। बाढ़ की इस मुश्किल घड़ी में राहत शिविरों में रह रहे जरूरतमंद लोगों के बीच पहुंचकर उनकी जरूरतों को समझना और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना, निश्चित तौर पर राहत का काम है। लगातार राहत पहुंचाने के इस प्रयास से बाढ़ प्रभावित परिवारों को काफी मदद मिल रही है। ऐसे समय में जरूरतमंदों के साथ खड़ा होना मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल पेश करता है।1
- भारत सरकार एवं बिहार सरकार की सभी online सेवा उपलब्ध है। भारत सरकार एंव बिहार सरकार की सभी online सेवा उपलब्ध हैं अब एक स्थान पर सभी सेवा का लाभ ले । सम्पर्क करे kk digital CSC center पंचमहला मोकामाघाट मोबाइल 99344548061
- समस्तीपुर नगर निगम वार्ड नंबर 46 के पार्षद प्रतिनिधि से जानिए खास रिपोर्ट स Samastipur..1
- बूढ़ी गंडक नदी के महेशवारा ठाकुरबाड़ी घाट से अज्ञात महिला का शव बरामद1