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बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने भरत तिवारी जी की शहादत स्थली का दौरा किया। इस दौरान, उन्होंने वहाँ के विस्थापितों से सीधे मुलाकात की और उनसे बातचीत की।
रमेश कुमार सुदामा
बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने भरत तिवारी जी की शहादत स्थली का दौरा किया। इस दौरान, उन्होंने वहाँ के विस्थापितों से सीधे मुलाकात की और उनसे बातचीत की।
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- बिहार में कुल 113 जातियां अत्यंत पिछड़ा वर्ग में आती हैं, जिनमें से यह दावा किया गया है कि केवल 10 से 12 जातियां ही सत्ता का सुख भोग रही हैं। आरोप है कि सत्ता की 92% हिस्सेदारी पर इन्हीं चुनिंदा 10-12 जातियों का एकाधिकार बना हुआ है। अन्य जातियों के सदस्य दशकों से ताली बजाने और दरी बिछाने का काम कर रहे हैं। आईपी गुप्ता पैन के अनुसार, बिहार में 113 जातियों का वास्तविक हक सिर्फ 10 से 12 जाति के लोग खा रहे हैं।1
- आरा से मिली जानकारी के अनुसार, भरत भूषण तिवारी का मामला अब पेचीदा होता जा रहा है। उनकी बहन रूबी देवी ने सरकार से पांच सूत्री मांगें रखी हैं और चेतावनी दी है कि यदि ये मांगें पूरी नहीं की गईं, तो उनकी मां भूख हड़ताल पर चली जाएंगी। भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद से उनके परिजन लगातार किसी अनहोनी की आशंका से डरे हुए हैं। रूबी देवी ने बताया कि रात के समय एक वाहन उनके घर के बाहर लगातार चक्कर लगाता रहता है, जिससे उन्हें कुछ गलत होने का संदेह हो रहा है। परिजनों ने सरकार से कार्रवाई की मांग की है। रूबी देवी ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी पांच सूत्री मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो उनकी मां भूख हड़ताल पर बैठने के लिए विवश होंगी।1
- भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री और पद्म भूषण से सम्मानित स्वर्गीय राम विलास पासवान की जयंती के अवसर पर 5 जुलाई 2026, रविवार को आरा में एक भव्य समारोह का आयोजन किया जाएगा। यह जयंती समारोह सुबह 11:00 बजे श्री कृष्ण चेतना समिति सभागार में संपन्न होगा। इस आयोजन को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) बिहार के प्रदेश कार्य समिति सदस्य विजय सिंह ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से इस समारोह में शामिल होकर स्व. राम विलास पासवान को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने की अपील की। सिंह ने इस मौके पर कहा कि स्वर्गीय पासवान सामाजिक न्याय, गरीबों, दलितों और वंचितों की आवाज थे, और उनके विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।1
- निष्पक्ष पत्रकार पाठक जी विष्णु द्वारा लिखी गई कविता 'ताना बड़ी अजीब होला' समाज और महिलाओं द्वारा दिए जाने वाले तानों की विचित्र प्रकृति और पुरुषों पर उनके गहरे प्रभाव को दर्शाती है। कवि कहते हैं कि हर युग में पुरुषों को पल-पल ऐसे ताने सुनने पड़ते हैं। कविता में सीता माता की अग्निपरीक्षा का उदाहरण दिया गया है, जहाँ बताया गया कि यह राम की नहीं, बल्कि दुनिया वालों की इच्छा थी। राधा-कृष्ण जैसे पौराणिक प्रेमियों की कहानियों को छोड़कर, कवि कहते हैं कि ऐसे ताने और उन पर आधारित कहानियाँ हर घर में व्याप्त हैं, जो समाज और स्त्री के तानों की अजीबोगरीब प्रकृति को फिर से उजागर करती हैं। कवि यह भी बताते हैं कि कोई भी व्यक्ति इन तानों से अछूता नहीं है, चाहे वह एक सामान्य श्रमिक हो या धन-संपत्ति का मालिक। हर कोई उन्हें थोड़ा-बहुत सुनता है; कुछ लोग सुनकर भूल जाते हैं, जबकि कुछ लोग इन बातों को लेकर आँखें मूँद लेते हैं। कविता एक महत्वपूर्ण सीख देती है कि सच्ची बात पर कभी आँच नहीं आती, इसलिए इन बातों को ध्यान से सुनना चाहिए। अंत में, कवि सलाह देते हैं कि किसी की बातों को दिल पर नहीं लेना चाहिए, अन्यथा व्यक्ति मयखाने का रास्ता पकड़ सकता है। यह कविता स्वयं कवि के अपने ज्ञान से लिखी गई है।1
- Post by CHANDAN KUMAR1
- भोजपुर आरा में कल, 5 जुलाई 2026 को भारत सरकार के पूर्व मंत्री स्वर्गीय राम विलास पासवान जी का जयंती समारोह आयोजित किया जाएगा। पद्म भूषण से सम्मानित स्वर्गीय राम विलास पासवान जी की याद में यह कार्यक्रम श्री कृष्ण चेतना समिति सभागार में दिन के 11:00 बजे से शुरू होगा। इस समारोह को लेकर जिला अध्यक्ष राजेश्वर पासवान ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी है। उन्होंने सभी लोगों से इस जयंती समारोह में शामिल होने की अपील की है।1
- आज दिनांक 5 जुलाई, 2026 को बिहार निषाद संघ के पूर्व अध्यक्ष स्व. ई. हरेंद्र प्रसाद निषाद जी की प्रथम पुण्यतिथि मनाई जा रही है। यह श्रद्धांजलि सभा पटना, बिहार में गांधी मैदान से सटे दक्षिणी इलाके में स्थित राजस्थान आईएमएस हॉल में आयोजित की जा रही है।1
- जिला पार्षद पूनम कुशवाहा ने एक क्रिकेट मैच का उद्घाटन किया।1
- इसुआपुर सारण हवारी विकास संगठन ने जैथर जंगली मियां के द्वार पर बिहार मुस्लिम पसमांदा समाज के लिए राजनीतिक भागीदारी की जोरदार मांग उठाई है। संगठन ने स्पष्ट किया कि यह भागीदारी आरक्षण और संख्या बल के आधार पर सुनिश्चित की जानी चाहिए, जिससे समाज को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।1