निष्पक्ष पत्रकार पाठक जी विष्णु द्वारा लिखी गई कविता 'ताना बड़ी अजीब होला' समाज और महिलाओं द्वारा दिए जाने वाले तानों की विचित्र प्रकृति और पुरुषों पर उनके गहरे प्रभाव को दर्शाती है। कवि कहते हैं कि हर युग में पुरुषों को पल-पल ऐसे ताने सुनने पड़ते हैं। कविता में सीता माता की अग्निपरीक्षा का उदाहरण दिया गया है, जहाँ बताया गया कि यह राम की नहीं, बल्कि दुनिया वालों की इच्छा थी। राधा-कृष्ण जैसे पौराणिक प्रेमियों की कहानियों को छोड़कर, कवि कहते हैं कि ऐसे ताने और उन पर आधारित कहानियाँ हर घर में व्याप्त हैं, जो समाज और स्त्री के तानों की अजीबोगरीब प्रकृति को फिर से उजागर करती हैं। कवि यह भी बताते हैं कि कोई भी व्यक्ति इन तानों से अछूता नहीं है, चाहे वह एक सामान्य श्रमिक हो या धन-संपत्ति का मालिक। हर कोई उन्हें थोड़ा-बहुत सुनता है; कुछ लोग सुनकर भूल जाते हैं, जबकि कुछ लोग इन बातों को लेकर आँखें मूँद लेते हैं। कविता एक महत्वपूर्ण सीख देती है कि सच्ची बात पर कभी आँच नहीं आती, इसलिए इन बातों को ध्यान से सुनना चाहिए। अंत में, कवि सलाह देते हैं कि किसी की बातों को दिल पर नहीं लेना चाहिए, अन्यथा व्यक्ति मयखाने का रास्ता पकड़ सकता है। यह कविता स्वयं कवि के अपने ज्ञान से लिखी गई है।
निष्पक्ष पत्रकार पाठक जी विष्णु द्वारा लिखी गई कविता 'ताना बड़ी अजीब होला' समाज और महिलाओं द्वारा दिए जाने वाले तानों की विचित्र प्रकृति और पुरुषों पर उनके गहरे प्रभाव को दर्शाती है। कवि कहते हैं कि हर युग में पुरुषों को पल-पल ऐसे ताने सुनने पड़ते हैं। कविता में सीता माता की अग्निपरीक्षा का उदाहरण दिया गया है, जहाँ बताया गया कि यह राम की नहीं, बल्कि दुनिया वालों की इच्छा थी। राधा-कृष्ण जैसे पौराणिक प्रेमियों की कहानियों को छोड़कर, कवि कहते हैं कि ऐसे ताने और उन पर आधारित कहानियाँ हर घर में व्याप्त हैं, जो समाज और स्त्री के तानों की अजीबोगरीब प्रकृति को फिर से उजागर करती हैं। कवि यह भी बताते हैं कि कोई भी व्यक्ति इन तानों से अछूता नहीं है, चाहे वह एक सामान्य श्रमिक हो या धन-संपत्ति का मालिक। हर कोई उन्हें थोड़ा-बहुत सुनता है; कुछ लोग सुनकर भूल जाते हैं, जबकि कुछ लोग इन बातों को लेकर आँखें मूँद लेते हैं। कविता एक महत्वपूर्ण सीख देती है कि सच्ची बात पर कभी आँच नहीं आती, इसलिए इन बातों को ध्यान से सुनना चाहिए। अंत में, कवि सलाह देते हैं कि किसी की बातों को दिल पर नहीं लेना चाहिए, अन्यथा व्यक्ति मयखाने का रास्ता पकड़ सकता है। यह कविता स्वयं कवि के अपने ज्ञान से लिखी गई है।
- बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव निवासी भारत भूषण तिवारी की बहन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया है।1
- खाद्य मंत्री अशोक चौधरी ने रविवार को भोजपुर जिले के बेलौटी गांव का दौरा किया, जहाँ उन्होंने भारत तिवारी के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान मंत्री चौधरी ने परिजनों को आश्वासन दिया कि उन्हें न्याय अवश्य मिलेगा और हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। मंत्री ने एनकाउंटर की घटना पर सवाल उठाते हुए पूछा कि उस समय एसडीएम वहाँ क्या कर रहे थे। मंत्री के आगमन पर आसपास के लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गए, और उन्हें भारत तिवारी के परिवार से काफी देर तक बातचीत करते हुए देखा गया।1
- बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने भरत तिवारी जी की शहादत स्थली का दौरा किया। इस दौरान, उन्होंने वहाँ के विस्थापितों से सीधे मुलाकात की और उनसे बातचीत की।1
- पद्म भूषण स्व. रामविलास पासवान की जयंती आरा में बड़े धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर श्री कृष्ण चेतना समिति के सभागार में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेताओं ने उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी। जिलाध्यक्ष राजेश्वर पासवान के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित नेताओं ने स्व. रामविलास पासवान के विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।1
- जिला पार्षद पूनम कुशवाहा ने एक क्रिकेट मैच का उद्घाटन किया।1
- आरा के गोठहुला पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि संजय यादव ने सभी पंचायत वासियों से ७ जुलाई को आयोजित होने वाले सहयोग शिविर को लेकर विशेष अपील की। उन्होंने इस अवसर पर मीडिया के सामने अन्य विभिन्न मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।1
- निष्पक्ष पत्रकार पाठक जी विष्णु द्वारा लिखी गई कविता 'ताना बड़ी अजीब होला' समाज और महिलाओं द्वारा दिए जाने वाले तानों की विचित्र प्रकृति और पुरुषों पर उनके गहरे प्रभाव को दर्शाती है। कवि कहते हैं कि हर युग में पुरुषों को पल-पल ऐसे ताने सुनने पड़ते हैं। कविता में सीता माता की अग्निपरीक्षा का उदाहरण दिया गया है, जहाँ बताया गया कि यह राम की नहीं, बल्कि दुनिया वालों की इच्छा थी। राधा-कृष्ण जैसे पौराणिक प्रेमियों की कहानियों को छोड़कर, कवि कहते हैं कि ऐसे ताने और उन पर आधारित कहानियाँ हर घर में व्याप्त हैं, जो समाज और स्त्री के तानों की अजीबोगरीब प्रकृति को फिर से उजागर करती हैं। कवि यह भी बताते हैं कि कोई भी व्यक्ति इन तानों से अछूता नहीं है, चाहे वह एक सामान्य श्रमिक हो या धन-संपत्ति का मालिक। हर कोई उन्हें थोड़ा-बहुत सुनता है; कुछ लोग सुनकर भूल जाते हैं, जबकि कुछ लोग इन बातों को लेकर आँखें मूँद लेते हैं। कविता एक महत्वपूर्ण सीख देती है कि सच्ची बात पर कभी आँच नहीं आती, इसलिए इन बातों को ध्यान से सुनना चाहिए। अंत में, कवि सलाह देते हैं कि किसी की बातों को दिल पर नहीं लेना चाहिए, अन्यथा व्यक्ति मयखाने का रास्ता पकड़ सकता है। यह कविता स्वयं कवि के अपने ज्ञान से लिखी गई है।1