गणतंत्र दिवस पर अभय जैन ग्रंथालय में हुआ विशेष कार्यक्रम। बीकानेर l77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर अभय जैन ग्रंथालय में एक गरिमामय एवं विचारोत्तेजक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्व गुरुदीप आश्रम, जयपुर के महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानेश्वर पुरी जी रहे। सर्वप्रथम मुख्य अतिथि द्वारा ध्वजारोहण किया गया, जिसके पश्चात राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानेश्वर पुरी जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि गणतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं बल्कि चेतना, संस्कृति और ज्ञान परंपरा की रक्षा का संकल्प है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन पांडुलिपियाँ हमारी आत्मा हैं, जिनमें वेद, दर्शन, विज्ञान, आयुर्वेद और सामाजिक मूल्यों का अमूल्य ज्ञान सुरक्षित है। यदि इनका संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियाँ अपनी जड़ों से कट जाएँगी। उन्होंने पांडुलिपि संरक्षण को राष्ट्र सेवा का कार्य बताते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग से इसमें सहभागिता का आह्वान किया।इस अवसर पर अभय जैन ग्रंथालय के निदेशक ऋषभ नाहटा ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए अपने विचार रखे। उन्होंने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत संचालित ज्ञान भारतम् मिशन के माध्यम से ग्रंथालय में चल रहे पांडुलिपि सर्वेक्षण, संरक्षण, डिजिटलीकरण एवं शोध कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह मिशन भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित कर उसे वैश्विक मंच तक पहुँचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।कार्यक्रम का संचालन मोहित बिस्सा द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। कार्यक्रम के दौरान गणतंत्र दिवस की भावना, भारतीय संविधान, सांस्कृतिक चेतना एवं पांडुलिपि संरक्षण जैसे विषयों पर सार्थक जोर दिया गया ।इस अवसर पर एडवकेट रविन्द्र बरडिया, डॉ. संदीप व्यास, लव कुमार देराश्री,नवरत्न चोपड़ा, मोहित बिस्सा, लक्ष्मी कांत उपाध्याय, गौरव आचार्य, जसवंत सिंह एवं वीरेंद्र सहित अनेक प्रबुद्धजन, शोधार्थी एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।कार्यक्रम का समापन भारतीय सांस्कृतिक धरोहर, ज्ञान परंपरा एवं पांडुलिपि संरक्षण को राष्ट्र निर्माण का अभिन्न अंग मानते हुए उसे सुरक्षित रखने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
गणतंत्र दिवस पर अभय जैन ग्रंथालय में हुआ विशेष कार्यक्रम। बीकानेर l77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर अभय जैन ग्रंथालय में एक गरिमामय एवं विचारोत्तेजक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्व गुरुदीप आश्रम, जयपुर के महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानेश्वर पुरी जी रहे। सर्वप्रथम मुख्य अतिथि द्वारा ध्वजारोहण किया गया, जिसके पश्चात राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानेश्वर पुरी जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि गणतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं बल्कि चेतना, संस्कृति और ज्ञान परंपरा की रक्षा का संकल्प है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन पांडुलिपियाँ हमारी आत्मा हैं, जिनमें वेद, दर्शन, विज्ञान, आयुर्वेद और सामाजिक मूल्यों का अमूल्य ज्ञान सुरक्षित है। यदि इनका संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियाँ अपनी जड़ों से कट जाएँगी। उन्होंने पांडुलिपि संरक्षण को राष्ट्र सेवा का कार्य बताते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग से इसमें सहभागिता का आह्वान किया।इस अवसर पर अभय जैन ग्रंथालय के निदेशक ऋषभ नाहटा ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए अपने विचार रखे। उन्होंने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत संचालित ज्ञान भारतम् मिशन के माध्यम से ग्रंथालय में चल रहे पांडुलिपि सर्वेक्षण, संरक्षण, डिजिटलीकरण एवं शोध कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह मिशन भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित कर उसे वैश्विक मंच तक पहुँचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।कार्यक्रम का संचालन मोहित बिस्सा द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। कार्यक्रम के दौरान गणतंत्र दिवस की भावना, भारतीय संविधान, सांस्कृतिक चेतना एवं पांडुलिपि संरक्षण जैसे विषयों पर सार्थक जोर दिया गया ।इस अवसर पर एडवकेट रविन्द्र बरडिया, डॉ. संदीप व्यास, लव कुमार देराश्री,नवरत्न चोपड़ा, मोहित बिस्सा, लक्ष्मी कांत उपाध्याय, गौरव आचार्य, जसवंत सिंह एवं वीरेंद्र सहित अनेक प्रबुद्धजन, शोधार्थी एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।कार्यक्रम का समापन भारतीय सांस्कृतिक धरोहर, ज्ञान परंपरा एवं पांडुलिपि संरक्षण को राष्ट्र निर्माण का अभिन्न अंग मानते हुए उसे सुरक्षित रखने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
- बीकानेर l77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर अभय जैन ग्रंथालय में एक गरिमामय एवं विचारोत्तेजक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्व गुरुदीप आश्रम, जयपुर के महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानेश्वर पुरी जी रहे। सर्वप्रथम मुख्य अतिथि द्वारा ध्वजारोहण किया गया, जिसके पश्चात राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानेश्वर पुरी जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि गणतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं बल्कि चेतना, संस्कृति और ज्ञान परंपरा की रक्षा का संकल्प है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन पांडुलिपियाँ हमारी आत्मा हैं, जिनमें वेद, दर्शन, विज्ञान, आयुर्वेद और सामाजिक मूल्यों का अमूल्य ज्ञान सुरक्षित है। यदि इनका संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियाँ अपनी जड़ों से कट जाएँगी। उन्होंने पांडुलिपि संरक्षण को राष्ट्र सेवा का कार्य बताते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग से इसमें सहभागिता का आह्वान किया।इस अवसर पर अभय जैन ग्रंथालय के निदेशक ऋषभ नाहटा ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए अपने विचार रखे। उन्होंने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत संचालित ज्ञान भारतम् मिशन के माध्यम से ग्रंथालय में चल रहे पांडुलिपि सर्वेक्षण, संरक्षण, डिजिटलीकरण एवं शोध कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह मिशन भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित कर उसे वैश्विक मंच तक पहुँचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।कार्यक्रम का संचालन मोहित बिस्सा द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। कार्यक्रम के दौरान गणतंत्र दिवस की भावना, भारतीय संविधान, सांस्कृतिक चेतना एवं पांडुलिपि संरक्षण जैसे विषयों पर सार्थक जोर दिया गया ।इस अवसर पर एडवकेट रविन्द्र बरडिया, डॉ. संदीप व्यास, लव कुमार देराश्री,नवरत्न चोपड़ा, मोहित बिस्सा, लक्ष्मी कांत उपाध्याय, गौरव आचार्य, जसवंत सिंह एवं वीरेंद्र सहित अनेक प्रबुद्धजन, शोधार्थी एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।कार्यक्रम का समापन भारतीय सांस्कृतिक धरोहर, ज्ञान परंपरा एवं पांडुलिपि संरक्षण को राष्ट्र निर्माण का अभिन्न अंग मानते हुए उसे सुरक्षित रखने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।1
- श्रीडूंगरगढ़ हाईवे पर भीषण टक्कर, स्लीपर बस और ट्रेलर में लगी आग1
- अस्थमा हों नजला ज़ुकाम हो खांसी आना बलग़म आना छींक आना सांस लेने में दिक्कत हो हों एलर्जी हो। 75686281431
- चीन ने फोम और कॉन्क्रीट से मकान बनाने की एक अनोखी और सस्ती तकनीक विकसित की है, जिससे ईंट, पत्थर और मजदूरों की जरूरत कम हो जाएगी। इस तकनीक में फोम कॉन्क्रीट का उपयोग किया जाता है, जो हल्का, ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल होता है। फोम कॉन्क्रीट के फायदे: हल्का और ऊर्जा-कुशल फोम कॉन्क्रीट हल्का होता है, जिससे निर्माण की लागत कम होती है और ऊर्जा की बचत होती है। सस्ता फोम कॉन्क्रीट की कीमत ईंट और पत्थर की तुलना में कम होती है। तेजी से निर्माण: फोम कॉन्क्रीट से मकान बनाने की प्रक्रिया तेज होती है, जिससे समय और मजदूरी की बचत होती है। पर्यावरण के अनुकूल फोम कॉन्क्रीट पर्यावरण के अनुकूल होता है, क्योंकि इसमें कोई हानिकारक पदार्थ नहीं होता है।1
- जोधपुर जिले में सनसनीखेज मामला पत्नी से नाराज युवक ने साले की काटी नाक1
- आत्मिक श्रद्धांजलि पुष्पांजलि शत-शत नमन। आज 9:30 पर बारामती में एक विमान हादसे में महाराष्ट्र के सहकारिता के बब्बर शेर और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार का निधन हो गया है उनके साथ पांच और साथी बैठे थे। उनके निधन पर एनसीपी पार्टी के सुप्रीमो शरद पवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृहमंत्री अमित शाह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फर्नांडिस उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे। हजारों लोगों ने उनके निधन पर गहन शोक व्यक्त किया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल ने भी उनके निधन वर्षों व्यक्त किया है। अभी तक अधिकारीक तौर पर उनके निधन की पुष्टि नहीं की जा सकी है। अजीत पवार अपने पीछे भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनकी अर्धांगिनी और दो बेटे परिवार में है। वह भी गम के सागर में डूबे हुए हैं। उनके निधन से एनसी पी पार्टी के हजारों कार्यकर्ता और महाराष्ट्र के सारे लोग शोक की लहर में डूबे हैं। और अपने महबूब नेता को अकारण काल के गाल में सामने पर गहन शोक व्यक्त कर रहे हैं। राजस्थान ब्रेकिंग न्यूज़ चैनल हेड रमेश गांधी ने भी उनके निधन पर गहनशोक व्यक्त किया है।1
- पुराना दिल्ली रोड , शिव मंदिर शाहपुरा के पास में सरकारी कुएं कि जमीन पर बिल्डिंग,अवैध निर्माण के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर आम जनता में आक्रोश,अवैध निर्माण को केवल समय बीत जाने या प्रशासन की लापरवाही के कारण नियमित (Regularize) नहीं किया, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनी किसी भी संरचना को, चाहे वह कितनी भी पुरानी क्यों न हो, हटाया जाना चाहिए।1
- आंखों में मोतियाबिंद हों चश्मा लगा हो आंखों में पानी आना लाली रहना तों इस प्रोडक्ट को इस्तेमाल करें। 75686281431