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सड़को पर अवैध पार्किंग हर जगह है बड़े बड़े शोरूम वाले सड़क पर कब्जा कर बैठे है लेकिन ये नगर निगम के कर्मचारियों को सिर्फ ग़रीब ठेले वाले ही दिखते है। चुनाव तो गरीबों के मतदान से जीतते हैं। वही सरकार के पिल्ले गरीबों को परेशान करते हैं
Daily Taza News
सड़को पर अवैध पार्किंग हर जगह है बड़े बड़े शोरूम वाले सड़क पर कब्जा कर बैठे है लेकिन ये नगर निगम के कर्मचारियों को सिर्फ ग़रीब ठेले वाले ही दिखते है। चुनाव तो गरीबों के मतदान से जीतते हैं। वही सरकार के पिल्ले गरीबों को परेशान करते हैं
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- डीएम व एसपी ने सुनी जनसमस्याएं बहराइच 02 मई। आमजन की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए प्रत्येक माह के प्रथम एवं तृतीय शनिवार को आयोजित होने वाले सम्पूर्ण समाधान दिवसों की कड़ी में माह मई के तृतीय शनिवार को तहसील नानपारा में जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी की अध्यक्षता में सम्पूर्ण समाधान दिवस आयोजित हुआ। इस अवसर पर डीएम ने पुलिस अधीक्षक विष्वजीत श्रीवास्तव, मुख्य विकास अधिकारी सुनील कुमार धनवंता, उप जिलाधिकारी मोनालिसा जौहरी, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संजय कुमार, डीडीओ राज कुमार व अन्य अधिकारियों के साथ फरियादियों की समस्याओं की गम्भीरतापूर्वक सुनवाई की और निस्तारण के लिए सम्बन्धित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये। डीएम ने क्षेत्र के व्यक्तियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए।उन्होनें स्पष्ट किया कि जनशिकायतों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक शिकायत का समाधान पारदर्शी एवं प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया जाए तथा शिकायत के निस्तारण से शिकायतकर्ता को भी अनिवार्य रूप से अवगत कराया जाए। सम्पूर्ण समाधान दिवस के दौरान डीएम की एक सराहनीय पहल भी देखने को मिली। उन्होंने क्षेत्र से आये सभी शिकायतकर्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उनके बैठने के लिए समुचित कुर्सियों की व्यवस्था कराई। साथ ही बढ़ती गर्मी को देखते हुए उपस्थित लोगों के लिए ठंडे पानी की भी व्यवस्था कराई गई, जिससे फरियादियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। सम्पूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर जिला पूर्ति अधिकारी नरेन्द्र तिवारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार सिंह, जिला गन्ना अधिकारी आनन्द कुमार शुक्ला सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, सम्बन्धित खण्ड विकास अधिकारी, खण्ड शिक्षा अधिकारी, सीडीपीओ व थानाध्यक्ष व अन्य अधिकारी मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि तहसील नानपारा में प्राप्त 40 प्रार्थना-पत्रों में से 11 का निस्तारण मौके पर किया गया। तहसील कैसरगंज में प्राप्त 54 प्रार्थना-पत्रों के सापेक्ष 08, तहसील सदर बहराइच में प्राप्त 32 के सापेक्ष 02, मिहींपुरवा (मोतीपुर) में प्राप्त 20 के सापेक्ष 01, पयागपुर में प्राप्त 35 के सापेक्ष 05 व महसी में प्राप्त 16 प्रार्थना-पत्रों के सापेक्ष 01 का मौके पर निस्तारण किया गया। :ःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःः1
- 📍 नानपारा, बहराइच शनिवार को आयोजित तहसील समाधान दिवस उस समय अचानक सुर्खियों में आ गया, जब एक पीड़ित महिला जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के सामने पहुंचकर फूट-फूटकर रोने लगी और न्याय की गुहार लगाने लगी। महिला ने अधिकारियों के समक्ष आत्मदाह की चेतावनी दी, जिससे मौके पर मौजूद लोगों और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। 👉 पीड़िता का आरोप है कि उसकी जमीन को अवैध रूप से बेच दिया गया, और वह पिछले दो वर्षों से न्याय के लिए दर-दर भटक रही है। 👉 कई बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अब तक उसे कोई ठोस राहत नहीं मिल सकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर मौजूद अधिकारियों ने जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।1
- *स्थान: [mohmmad pur] आज सुबह करीब 6:00 बजे अचानक मौसम ने करवट ली, जिससे पूरा इलाका घने काले बादलों की आगोश में समा गया। देखते ही देखते बादलों की तेज़ गड़गड़ाहट (Thunderstorm) ने लोगों की नींद उड़ा दी।1
- Post by रामानंद सागर1
- उत्तर प्रदेश का सिद्धार्थनगर कहने को तो यहां विकास की बड़ी-बड़ी इमारतें खड़ी हो रही हैं, लेकिन इन इमारतों के पीछे छिपी जर्जर हकीकत ने आज एक मां की गोद उजाड़ दी। ये साठ फीट ऊंची पानी की टंकी, जो प्यास बुझाने के लिए बनी थी, आज मातम का प्रतीक बन गई है। तस्वीरें डराने वाली हैं। महज एक रील बनाने की चाहत में कुछ मासूम बच्चे इस टंकी के ऊपर जा चढ़े। उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि जिस सीढ़ी के सहारे वो ऊपर जा रहे हैं, वो मौत का फंदा बन चुकी है। अचानक एक ज़ोरदार आवाज़ हुई जर्जर सीढ़ी टूटकर नीचे गिर गई और कुछ ही सेकंड में बच्चों की हंसी, चीखों में तब्दील हो गई। हादसा दिल दहला देने वाला था। एक मासूम की मौके पर ही जान चली गई। दो बच्चे इस वक्त अस्पताल के आईसीयू में अपनी आखिरी सांसों के लिए जंग लड़ रहे हैं। और वो दो बच्चे? जो ऊपर रह गए थे... कल्पना कीजिए उस खौफ की। साठ फीट की ऊंचाई, पैर रखने को जर्जर कंक्रीट और नीचे उतरने का हर रास्ता बंद। दो घंटे तक वो बच्चे मौत को अपने सामने देखते रहे। प्रशासन जागा, क्रेन मंगाई गई, शोर मचा लेकिन यहीं विकास के दावों की पोल खुल गई। टंकी तक पहुंचने के लिए सड़क ही नहीं थी। चारों तरफ दलदल, जहां सिस्टम के पहिए धंस गए। जब ज़मीन पर रास्ते बंद हो गए, तो आसमान से उम्मीद की किरण जागी। मुख्यमंत्री कार्यालय और राहत आयुक्त के समन्वय के बाद भारतीय वायु सेना को मोर्चा संभालना पड़ा। रविवार की सुबह जब यम आई सत्तरह हेलीकॉप्टर के पंखों की गड़गड़ाहट सुनाई दी, तब जाकर उन मासूमों की सांस में सांस आई। वायु सेना के जवानों ने जांबाजी दिखाते हुए दोनों बच्चों को सुरक्षित नीचे उतारा। ऑपरेशन सफल रहा, लेकिन क्या हम इसे जीत कह सकते हैं?1
- Post by Sandeep Kumar Patrakaar1
- बाराबंकी के दो मासूम भाइयों की दिल्ली में तालाब में डूब कर मौत, शव पहुंचे गांव तो मचा कोहराम बाराबंकी। कुर्सी थाना क्षेत्र के बसारा गांव के अरविंद कुमार के दो मासूम बच्चे की राजधानी दिल्ली के द्वारिका क्षेत्र में तालाब में डूबकर मौत हो गई। बच्चों के शव गांव पहुंचे तो कोहरा मच गया। दो सगे भाइयों की मौत से बसारा गांव में मातम पसरा ह। कुर्सी थाना क्षेत्र के बसारा गांव निवासी अरविंद कुमार करीब चार साल पहले रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली गए थे। वहीं मजदूरी कर वह अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे और बच्चों की पढ़ाई भी करवा रहे थे। अरविंद कुमार के दो बेटे वीर (11 ) और रवि (8 ) दिल्ली में उनके साथ रहकर पढ़ाई कर रहे थे। 29 अप्रैल 2026 को दोनों भाई अपने एक पड़ोसी बच्चे के साथ स्कूल से लौटने के बाद खेलने निकले थे। खेलते-खेलते तीनों द्वारका सेक्टर-24 स्थित एक गहरे तालाब में नहाने चले गए। करीब 10 फीट गहरे तालाब में उतरते ही तीनों बच्चे तैर नहीं पाए और डूब गए। इस हादसे में तीनों की मौत हो गई। सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। शुक्रवार शाम पिता अरविंद कुमार दोनों बेटों के शव लेकर बसरा गांव पहुंचे । शनिवार सुबह दोनों पुत्रों का अंतिम संस्कार गांव में किया गया ।1
- सड़को पर अवैध पार्किंग हर जगह है बड़े बड़े शोरूम वाले सड़क पर कब्जा कर बैठे है लेकिन ये नगर निगम के कर्मचारियों को सिर्फ ग़रीब ठेले वाले ही दिखते है। चुनाव तो गरीबों के मतदान से जीतते हैं। वही सरकार के पिल्ले गरीबों को परेशान करते हैं1