गावां में सीओ के खिलाफ धरना, रात में भी डटे मुखिया-जनप्रतिनिधि; डीसी से हटाने की मांग गावां में सीओ के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना, रात में भी डटे रहे मुखिया व जनप्रतिनिधि रिपोर्ट कौशल पांडेय गावां। अंचलाधिकारी के कथित तानाशाही रवैये और विभिन्न मांगों को लेकर गावां प्रखंड मुख्यालय परिसर में मुखिया संघ के बैनर तले अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया गया है। धरना शुरू होने के बाद देर रात तक भी मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी धरना स्थल पर डटे रहे। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। धरना प्रदर्शन के दौरान बिरने पंचायत के मुखिया चंदन यादव ने सीओ के रवैये को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। वहीं विधायक प्रतिनिधि मुन्ना सिंह ने मांग की कि गावां अंचलाधिकारी को अविलंब हटाया जाए, अन्यथा आंदोलन लगातार जारी रहेगा। जिला परिषद सदस्य पवन चौधरी ने कहा कि गावां में प्रशासनिक व्यवस्था बेलगाम हो गई है। इसे सुधारने के लिए सभी लोगों को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। वहीं मंडल अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने सीओ से तानाशाही रवैया छोड़ने की मांग करते हुए कहा कि जनता अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना जानती है। पंसस अकलेश यादव ने कहा कि सीओ को अपने कथित रवैये के लिए माफी मांगनी होगी। वहीं सांख मुखिया प्रियंका देवी ने कहा कि अधिकारी जनता के सेवक हैं, उन्हें खुद को जनता का मालिक समझना बंद करना चाहिए। धरना के दौरान नागेश्वर यादव ने गावां क्षेत्र में कोयला और बोल्डर लोड वाहनों से कथित वसूली और एंट्री फीस लिए जाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने जमीन से जुड़े एक मामले का जिक्र करते हुए कहा कि जिस जमीन को बचाने के लिए ग्रामीण एकजुट थे, वहां कथित तौर पर धारा 163 लागू कर दी गई। उन्होंने इस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। धरना स्थल पर देर रात तक जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी बनी रही। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर प्रशासन की ओर से ठोस पहल होने तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान सीओ के खिलाफ कई जनप्रतिनिधियों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की और प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। हालांकि, लगाए गए आरोपों और वसूली संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित अंचलाधिकारी अथवा प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
गावां में सीओ के खिलाफ धरना, रात में भी डटे मुखिया-जनप्रतिनिधि; डीसी से हटाने की मांग गावां में सीओ के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना, रात में भी डटे रहे मुखिया व जनप्रतिनिधि रिपोर्ट कौशल पांडेय गावां। अंचलाधिकारी के कथित तानाशाही रवैये और विभिन्न मांगों को लेकर गावां प्रखंड मुख्यालय परिसर में मुखिया संघ के बैनर तले अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया गया है। धरना शुरू होने के बाद देर रात तक भी मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी धरना स्थल पर डटे रहे। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। धरना प्रदर्शन के दौरान बिरने पंचायत के मुखिया चंदन यादव ने सीओ के रवैये को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। वहीं विधायक प्रतिनिधि मुन्ना सिंह ने मांग की कि गावां अंचलाधिकारी को अविलंब हटाया जाए, अन्यथा आंदोलन लगातार जारी रहेगा। जिला परिषद सदस्य पवन चौधरी ने कहा कि गावां में प्रशासनिक व्यवस्था बेलगाम हो गई है। इसे सुधारने के लिए सभी लोगों को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। वहीं मंडल अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने सीओ से तानाशाही रवैया छोड़ने की मांग करते हुए कहा कि जनता अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना जानती है। पंसस अकलेश यादव ने कहा कि सीओ को अपने कथित रवैये के लिए माफी मांगनी होगी। वहीं सांख मुखिया प्रियंका देवी ने कहा कि अधिकारी जनता के सेवक हैं, उन्हें खुद को जनता का मालिक समझना बंद करना चाहिए। धरना के दौरान नागेश्वर यादव ने गावां क्षेत्र में कोयला और बोल्डर लोड वाहनों से कथित वसूली और एंट्री फीस लिए जाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने जमीन से जुड़े एक मामले का जिक्र करते हुए कहा कि जिस जमीन को बचाने के लिए ग्रामीण एकजुट थे, वहां कथित तौर पर धारा 163 लागू कर दी गई। उन्होंने इस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। धरना स्थल पर देर रात तक जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी बनी रही। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर प्रशासन की ओर से ठोस पहल होने तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान सीओ के खिलाफ कई जनप्रतिनिधियों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की और प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। हालांकि, लगाए गए आरोपों और वसूली संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित अंचलाधिकारी अथवा प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
- सतगावां थाना क्षेत्र ईटाय पंचायत के ग्राम मोहनपुर सांप काटने के बाद डेढ़ महीने बाद युवक की मौत,इस युवक को बचाने के लिए 4 से 5 लाख रुपये भी खर्चा किया गया लेकिन युवक नहीं बचा,क्या इसके परिजनों को सरकार के द्वारा मुआवजा मिलना चाहिए। सतगावां थाना क्षेत्र ईटाय पंचायत के ग्राम मोहनपुर सांप काटने के बाद डेढ़ महीने बाद युवक की मौत,इस युवक को बचाने के लिए 4 से 5 लाख रुपये भी खर्चा किया गया लेकिन युवक नहीं बचा,क्या इसके परिजनों को सरकार के द्वारा मुआवजा मिलना चाहिए।1
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- फरक्का जल संधि के नवीनीकरण के विरोध में जदयू ने उठाई बिहार के हक की आवाज, नवादा में प्रेस वार्ता नवादा: भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को हुई 30 वर्षीय फरक्का जल संधि की अवधि इस साल 12 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रही है। इस ऐतिहासिक मोड़ पर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने बिहार के जल अधिकारों की रक्षा के लिए सबसे बुलंद आवाज उठाई है। इसी सिलसिले में आज नवादा जदयू जिला कार्यालय में जिला अध्यक्ष राजकिशोर प्रसाद दांगी के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया, जिसमें पार्टी के इस कड़े और स्पष्ट स्टैंड को मीडिया के सामने रखा गया।प्रेस वार्ता में जिला अध्यक्ष ने बताया कि जदयू ने केंद्र सरकार से स्पष्ट मांग की है कि इस संधि का मौजूदा स्वरूप में किसी भी कीमत पर नवीनीकरण न किया जाए। जदयू का स्टैंड पूरी तरह साफ है - सत्ता रहे या न रहे, बिहार के पानी और उसके हक पर कोई समझौता नहीं होगा।क्यों है यह संधि बिहार के खिलाफ? 1बिहार की अनदेखी: 1996 में जब तत्कालीन एच.डी. देवगौड़ा केंद्र सरकार और बिहार की लालू प्रसाद सरकार के समय यह समझौता हुआ, तब बिहार को निर्णय प्रक्रिया में शामिल ही नहीं किया गया और राज्य के हितों को ताक पर रख दिया गया। 2-30 साल का दंश: फरक्का बैराज के कारण भारी मात्रा में गाद (सिल्ट) जमने से बिहार के बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार सहित 12 जिले हर साल चार महीने बाढ़ की विभीषिका झेलते हैं, जबकि सूखे के दिनों में पानी की भारी किल्लत हो जाती है। 3-भविष्य की सुरक्षा (2050 तक की सोच): बिहार सरकार के आकलन के मुताबिक वर्ष 2050 तक राज्य को 2,000 क्यूसेक अतिरिक्त जल की आवश्यकता होगी। इसलिए जदयू की मांग है कि भविष्य की कोई भी नई व्यवस्था अगले 50 वर्षों की कृषि, पेयजल, उद्योग और भू-जल सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही बनाई जाए। नीतीश कुमार की निरंतर लड़ाई और 'नीतीश संवाद' यात्रा:नेताओं ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शुरू से ही फरक्का बैराज के इस मौजूदा स्वरूप के कड़े विरोधी रहे हैं। इसी हक की लड़ाई को जन-जन तक पहुँचाने के लिए पार्टी ने 5 सितंबर से 'नीतीश संवाद' यात्रा की शुरुआत की है, जो बक्सर से शुरू होकर गंगा किनारे बसे सभी 12 जिलों से होते हुए कटिहार तक जाएगी। जनता दल यूनाइटेड पार्टी का बयान को दोहराते हुए कहा गया कि "यह कोई राजनीतिक या सांप्रदायिक मुद्दा नहीं है, बल्कि पानी की कमी से सबको तकलीफ होगी। यह बिहार के भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के जल अधिकार की लड़ाई है।" मौके पर प्रदेश जदयू की उपाध्यक्ष प्रोफेसर प्रमिला प्रजापति,कार्यालय प्रभारी किशोरी सिंह,मीडिया प्रभारी तन्ने पठान,कार्यालय सचिव लड्डू, त्रिवेणी प्रसाद,दीपू कुमार,करण कुमार,लक्ष्मण कुमार,संजय चौधरी,विनोद चौधरी सहित दर्जनों जदयू कार्यकर्ता मौजूद थे! तन्ने पठान मीडिया प्रभारी जिला जदयू नवादा1
- #नवादा में खुलेगा आंख का बड़ा अस्पताल #रोटरी क्लब ऑफ नवादा का ऐलान #जीवन ज्योति पब्लिक स्कूल वाले आरपी साहू देंगे 4 कट्ठा जमीन #मुक्ति धाम का भी होगा कायाकल्प #रोटरी क्लब ऑफ नवादा के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की बैठक में लिये गए कई निर्णय #डिस्ट्रिक्ट गवर्नर भी हुई शामिल #और भी जानिए..!1
- फरक्का जल संधि पर जदयू का जनजागरूकता अभियान, 12 जिलों में चलेगा ‘नीतीश संवाद’ नवादा ! फरक्का (गंगा) जल संधि के मुद्दे को लेकर जनता दल (यूनाइटेड) ने बिहार के हितों और जल अधिकारों को लेकर जनजागरूकता अभियान शुरू किया है। पार्टी की ओर से शुक्रवार को जिला मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ कार्यक्रम की जानकारी दी गई। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा एवं प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के नेतृत्व में गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों—बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार—में संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पार्टी के अनुसार, अभियान की शुरुआत 5 सितंबर को बक्सर से हुई और इसका समापन कटिहार में होगा। प्रेसवार्ता में जिलाध्यक्ष ने कहा कि जदयू का स्पष्ट स्टैंड है कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई फरक्का जल संधि बिहार के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि हाल में संसद के मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने राज्यसभा में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और संधि के नवीनीकरण पर सवाल खड़े किए। पार्टी का कहना है कि फरक्का जल संधि के कारण शुष्क मौसम में बिहार के हिस्से का पानी बांग्लादेश को देना पड़ता है, जबकि राज्य में सिंचाई, पेयजल और उद्योगों के लिए पानी की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। जदयू नेताओं ने दावा किया कि इससे बिहार के कई इलाकों में जल संकट और सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होती है। जदयू की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में फरक्का के पास गंगा में जल प्रवाह और बांग्लादेश को छोड़े जाने वाले पानी के आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया। पार्टी ने कहा कि यह केवल गंगा के पानी का मामला नहीं है, बल्कि बिहार की आंतरिक नदियों से निकलने वाले पानी के बांग्लादेश तक पहुंचने से जुड़ा विषय भी है। प्रेसवार्ता के दौरान नेताओं ने कहा कि फरक्का बराज के कारण गाद जमा होने से नदी का तल ऊंचा होने और उत्तर बिहार में बाढ़ की समस्या बढ़ने का भी आरोप लगाया। वहीं, शुष्क मौसम में जल संधि के कारण बिहार के हिस्से का पानी बांग्लादेश को दिए जाने की बात कही गई। जदयू ने कहा कि फरक्का जल संधि का मुद्दा अब केवल बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय विमर्श का विषय बन चुका है। पार्टी का उद्देश्य जनजागरूकता अभियान के माध्यम से बिहार के जल अधिकारों से जुड़े सवालों को केंद्र सरकार और देश के सामने मजबूती से रखना है। इस अवसर पर नेताओं ने कहा कि ‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’ अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए फरक्का जल संधि पर पुनर्विचार करने की मांग की।1
- गावां में सीओ के खिलाफ धरना, रात में भी डटे मुखिया-जनप्रतिनिधि; डीसी से हटाने की मांग गावां में सीओ के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना, रात में भी डटे रहे मुखिया व जनप्रतिनिधि रिपोर्ट कौशल पांडेय गावां। अंचलाधिकारी के कथित तानाशाही रवैये और विभिन्न मांगों को लेकर गावां प्रखंड मुख्यालय परिसर में मुखिया संघ के बैनर तले अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया गया है। धरना शुरू होने के बाद देर रात तक भी मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी धरना स्थल पर डटे रहे। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। धरना प्रदर्शन के दौरान बिरने पंचायत के मुखिया चंदन यादव ने सीओ के रवैये को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। वहीं विधायक प्रतिनिधि मुन्ना सिंह ने मांग की कि गावां अंचलाधिकारी को अविलंब हटाया जाए, अन्यथा आंदोलन लगातार जारी रहेगा। जिला परिषद सदस्य पवन चौधरी ने कहा कि गावां में प्रशासनिक व्यवस्था बेलगाम हो गई है। इसे सुधारने के लिए सभी लोगों को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। वहीं मंडल अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने सीओ से तानाशाही रवैया छोड़ने की मांग करते हुए कहा कि जनता अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना जानती है। पंसस अकलेश यादव ने कहा कि सीओ को अपने कथित रवैये के लिए माफी मांगनी होगी। वहीं सांख मुखिया प्रियंका देवी ने कहा कि अधिकारी जनता के सेवक हैं, उन्हें खुद को जनता का मालिक समझना बंद करना चाहिए। धरना के दौरान नागेश्वर यादव ने गावां क्षेत्र में कोयला और बोल्डर लोड वाहनों से कथित वसूली और एंट्री फीस लिए जाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने जमीन से जुड़े एक मामले का जिक्र करते हुए कहा कि जिस जमीन को बचाने के लिए ग्रामीण एकजुट थे, वहां कथित तौर पर धारा 163 लागू कर दी गई। उन्होंने इस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। धरना स्थल पर देर रात तक जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी बनी रही। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर प्रशासन की ओर से ठोस पहल होने तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान सीओ के खिलाफ कई जनप्रतिनिधियों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की और प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। हालांकि, लगाए गए आरोपों और वसूली संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित अंचलाधिकारी अथवा प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।1