वाराणसी के चौबेपुर थाना क्षेत्र में पैसे के लालच में एक नाबालिग किशोरी को अगवा कर बेचने का रोंगटे खड़ा कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां घर में सो रही 17 साल की एक नाबालिग किशोरी को ₹1,00,000 में कानपुर के एक खरीदार को बेच दिया गया, जिसके बाद मथुरा के एक युवक से उसकी जबरदस्ती शादी करवा दी गई। यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब पीड़ित किशोरी के चाचा ने इसकी सूचना पुलिस को दी। ह्यूमन ट्रैफिकिंग के इस मामले में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुकदमा दर्ज किया और किशोरी को बेचने वाली एक महिला, खरीदार और शादी करने वाले शख्स समेत कुल पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, सूत्रों के अनुसार इस मामले में लापरवाही बरतने को लेकर चौबेपुर थाना प्रभारी वीरेंद्र सोनकर पर बड़ी कार्रवाई की गई है। वाराणसी पुलिस कमिश्नर ने शुक्रवार को हुई क्राइम मीटिंग के दौरान लापरवाही के आरोप में चौबेपुर थाना प्रभारी वीरेंद्र सोनकर को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है।
वाराणसी के चौबेपुर थाना क्षेत्र में पैसे के लालच में एक नाबालिग किशोरी को अगवा कर बेचने का रोंगटे खड़ा कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां घर में सो रही 17 साल की एक नाबालिग किशोरी को ₹1,00,000 में कानपुर के एक खरीदार को बेच दिया गया, जिसके बाद मथुरा के एक युवक
से उसकी जबरदस्ती शादी करवा दी गई। यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब पीड़ित किशोरी के चाचा ने इसकी सूचना पुलिस को दी। ह्यूमन ट्रैफिकिंग के इस मामले में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुकदमा दर्ज किया और किशोरी को बेचने वाली एक महिला, खरीदार और शादी करने वाले शख्स समेत कुल पांच लोगों
को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, सूत्रों के अनुसार इस मामले में लापरवाही बरतने को लेकर चौबेपुर थाना प्रभारी वीरेंद्र सोनकर पर बड़ी कार्रवाई की गई है। वाराणसी पुलिस कमिश्नर ने शुक्रवार को हुई क्राइम मीटिंग के दौरान लापरवाही के आरोप में चौबेपुर थाना प्रभारी वीरेंद्र सोनकर को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है।
- वाराणसी में भगवा वस्त्र धारण कर खुद को पत्रकार बताने वाले एक शख्स द्वारा दुकान-दुकान पहुंचकर मंथली मांगने का मामला सामने आया है। यह व्यक्ति साइकिल पर सवार होकर घूमता है और दुकानदारों से ₹3000 महीना मांगता है। पैसे न देने पर वह दुकानदारों को उनके खिलाफ खबर लिखने और दुकान बंद करवा देने की धमकी देता है। इसकी अजीब कार्यप्रणाली यह है कि यह पुलिस को देखते ही नमस्कार करने लगता है, लेकिन दुकानदारों को देखते ही सीधे महीना मांगने पर अड़ जाता है। इस वसूली से परेशान होकर एक पीड़ित दुकानदार ने स्थानीय लंका पुलिस से शिकायत भी दर्ज कराई है, लेकिन पुलिस की ओर से अब तक इस मामले का कोई हल नहीं निकाला गया है। वहीं, चर्चा यह भी है कि यह भगवाधारी शख्स दिमाग से थोड़ा स्पेशल है।4
- वाराणसी के सिगरा स्पोर्ट्स स्टेडियम में प्रशिक्षण लेने वाले बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिए एक बेहद बुरी खबर आई है, जहां स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने बैडमिंटन प्रशिक्षण शुल्क में चार सौ फीसदी की भारी बढ़ोतरी कर दी है। इंडोर हॉल में करीब तीन महीने के लंबे अंतराल के बाद प्रशिक्षण तो दोबारा शुरू किया गया, लेकिन अब खिलाड़ियों को हर महीने एक हजार रुपये के बजाय सीधे चार हजार रुपये की भारी-भरकम फीस देनी होगी। स्मार्ट सिटी के अभियंता सौमित्र के अनुसार, बैडमिंटन प्रशिक्षण का नया मासिक शुल्क चार हजार रुपये ही निर्धारित किया गया है, हालांकि राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को अपना प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने पर फीस में बीस प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इस फैसले के बाद सिगरा स्टेडियम में खिलाड़ियों और अभिभावकों के बीच भारी आक्रोश देखा जा रहा है। बैडमिंटन खिलाड़ी निखिल ने गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी अधिक बढ़ोतरी से कई प्रतिभाशाली बच्चे खेल छोड़ने को मजबूर हो जाएंगे। उन्होंने सरकार के खेल प्रोत्साहन के दावों को आड़े हाथों लेते हुए सवाल उठाया कि एक तरफ जहां खेलों को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ सामान्य और गरीब परिवारों के बच्चों के लिए खेल जारी रखना अब बेहद मुश्किल हो गया है। इससे यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि यह कदम खेल को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है या केवल कमाई का जरिया बनाने के लिए।1
- वाराणसी के सदर में डॉ. दयाशंकर मिश्र ने जनसंख्या के अनुपात में वृक्षों की संख्या बढ़ाने को जरूरी बताया है।1
- वाराणसी के सिगरा स्पोर्ट्स स्टेडियम से खिलाड़ियों के लिए एक बुरी खबर आई है, जहां स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने बैडमिंटन प्रशिक्षण शुल्क में चार सौ फीसदी की भारी बढ़ोतरी कर दी है। अब यहां प्रशिक्षण लेने वाले खिलाड़ियों को हर महीने एक हजार रुपये के बजाय सीधे चार हजार रुपये फीस देनी होगी। स्टेडियम के इंडोर हॉल में करीब तीन महीने के लंबे अंतराल के बाद बैडमिंटन प्रशिक्षण दोबारा शुरू किया गया था, लेकिन इस भारी-भरकम फीस ने खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। स्मार्ट सिटी के अभियंता सौमित्र के अनुसार, बैडमिंटन प्रशिक्षण का नया मासिक शुल्क चार हजार रुपये ही निर्धारित किया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को अपना प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने पर फीस में बीस प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इस फैसले के बाद सिगरा स्टेडियम में खिलाड़ियों और अभिभावकों के बीच भारी आक्रोश देखा जा रहा है। बैडमिंटन खिलाड़ी निखिल ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस बढ़ोतरी से कई प्रतिभाशाली बच्चे खेल छोड़ने को मजबूर हो जाएंगे। सरकार एक तरफ जहां खेलों को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ इतनी अधिक फीस बढ़ाने से अब सामान्य और गरीब परिवारों के बच्चों के लिए खेल जारी रखना बेहद मुश्किल हो गया है, जिससे यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि यह कदम खेल को बढ़ावा देने के लिए है या केवल कमाई का जरिया।1
- उत्तर प्रदेश मानव अधिकार आयोग ने मेरठ कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस वाहन में मौजूद अधिवक्ता रवि गौतम के साथ एसएसपी मेरठ अविनाश पांडेय द्वारा कथित मारपीट और संबंधित पुलिस कार्रवाई के मामले में केस दर्ज कर लिया है। यह कार्रवाई आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर द्वारा की गई शिकायत पर की गई है, जिसके बाद आयोग ने केस संख्या 14615/24/54/2026 दर्ज किया है। अमिताभ ठाकुर ने अपनी शिकायत में इस घटना से जुड़े वीडियो एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित कराने, अधिवक्ता रवि गौतम का स्वतंत्र बयान दर्ज कराने और पूरे मामले की मेरठ पुलिस से स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि पुलिस के प्रभावी नियंत्रण में मौजूद किसी भी व्यक्ति के साथ किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा कथित तौर पर मारपीट किया जाना गंभीर मानवाधिकार और पुलिस जवाबदेही का विषय है। उन्होंने आयोग से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर उत्तरदायित्व निर्धारित करने और दोषियों के खिलाफ समुचित कार्रवाई किए जाने की मांग उठाई है।2
- बुलंदशहर के खुर्जा कोतवाली क्षेत्र के बुर्ज उस्मान मुहल्ले में 11 हजार केवी की हाईटेंशन विद्युत लाइन की चपेट में आए पोते को बचाने के प्रयास में दादा की करंट लगने से मौत हो गई। शुक्रवार को बरसात के कारण स्कूल बंद होने की वजह से 12 वर्षीय अहद अपने घर की छत पर अकेला पतंग उड़ा रहा था। इसी दौरान उसकी पतंग मकान के बाहर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन में अटक गई। अहद ने लोहे के पाइप से पतंग उतारने का प्रयास किया, जिससे पाइप तार से छूते ही तेज धमाका हुआ और वह करंट की चपेट में आ गया। धमाके की आवाज सुनकर नीचे बैठे 65 वर्षीय दादा इसरार तुरंत छत की ओर भागे। उन्होंने जैसे ही अपने पोते को बचाने के लिए उठाया, वे खुद भी करंट की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए। परिजन दोनों को तुरंत जटिया अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने इसरार को मृत घोषित कर दिया। वहीं गंभीर रूप से झुलसे अहद को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया, जहां उसका उपचार चल रहा है। इस हादसे के वक्त अहद के पिता अबरार पॉटरी में मजदूरी करने गए हुए थे। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और ऊर्जा निगम के कर्मचारी अस्पताल पहुंचे और मामले की जांच-पड़ताल की। अधीक्षण अभियंता प्रथम हर्षित श्रीवास्तव ने बताया कि किशोर द्वारा लोहे के पाइप से पतंग उतारने के प्रयास के कारण यह हादसा हुआ, जिसमें उसे बचाने गए दादा की जान चली गई। एसडीओ ने इस घटना के संबंध में स्थानीय कोतवाली पुलिस को सूचित किया है और आम जनता से अपील की है कि वे कभी भी हाईटेंशन लाइन से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करें।1
- वाराणसी के सदर क्षेत्र में स्थित उगापुर विद्युत उपकेंद्र पर सुरक्षा जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया।1
- वाराणसी से अयोध्या जंक्शन जा रही मरुधर एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 14853) के S5 कोच में सफर कर रहे एक परिवार को दबंगई और गंभीर बदसलूकी का सामना करना पड़ा। 10 जून 2026 को हुई इस घटना में, पीड़ित परिवार के पास लोअर बर्थ की सीट संख्या 17 और 20 का कंफर्म टिकट था। लेकिन सीट संख्या 18, 19, 21 और 22 पर पहले से अवैध कब्जा जमाए बैठे कुछ लोगों ने उन्हें अपनी ही सीट पर बैठने से रोक दिया। विरोध करने पर उन लोगों ने पीड़ित परिवार को 'गंवार' बताते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग किया और टिकट दिखाने के बाद भी लगातार बदतमीजी की। अगल-बगल के यात्रियों के समझाने पर पीड़ित परिवार को बैठने की जगह तो मिल गई, लेकिन आरोपियों ने उनका बैग सीट के नीचे रखने से मना कर दिया और उसे गोद में लेकर बैठने को कहा, जबकि उनका अपना सामान पूरी सीट पर भरा हुआ था। हद तो तब हो गई जब सीट नंबर 20 पर बैठी एक 69 वर्षीय बुजुर्ग महिला को इन लोगों ने बार-बार धक्का दिया और उन्हें चलती ट्रेन से बाहर फेंकने की धमकी तक दे डाली। पीड़ित के अनुसार, इन 4 सीटों पर कुल 6 लोग दादागिरी करते हुए यात्रा कर रहे थे, जिनमें से दो लोग नशे की हालत में लग रहे थे। इस पूरे घटनाक्रम के कारण पीड़ित परिवार को भारी शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। पीड़ित ने इस संबंध में रेलवे में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन रेलवे पुलिस ने उनसे तब संपर्क किया जब आरोपी ट्रेन से उतर चुके थे और पुलिस ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि अब वे कुछ नहीं कर सकते। वाराणसी से अयोध्या तक पूरी यात्रा के दौरान ट्रेन में कोई टीटीई या रेलवे स्टाफ नहीं चढ़ा, जिससे ये लोग पकड़े नहीं जा सके। शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई न होने से निराश पीड़ित ने मांग की है कि रेलवे के पास बर्थ नंबर 18, 19, 21 और 22 के यात्रियों का जो विवरण है, उसके आधार पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ये लोग किसी अन्य यात्री के साथ ऐसा दुर्व्यवहार न कर सकें।1