पिपरिया रेलवे स्टेशन पर एक भयावह जमीनी हकीकत सामने आई है, जहाँ 10 से 12 साल के मासूम बच्चे नशे और जिस्मानी शोषण का शिकार हो रहे हैं। एक ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, जिन बच्चों की उम्र हाथों में किताबें थामने की है, वे खुलेआम 'सुलोचन' (नशा) सूंघकर अपना बचपन गटर में बहा रहे हैं। जब इन बच्चों के सिर नशा चढ़कर बोलता है और जेब में पैसे नहीं होते, तब स्टेशन के आसपास मंडराने वाले कुछ दरिंदे उनकी इस मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। बच्चों ने कैमरे के पीछे रोते हुए बताया कि कुछ लोग आते हैं, बहुत गंदी-गंदी बातें करते हैं, और उन्हें अपने साथ चलने को कहते हैं, जिसके बदले में वे 'सुलोचन' (नशा) खरीद कर देने का लालच देते हैं। ये चमचमाते प्लेटफॉर्म और रात की रोशनी के पीछे एक ऐसा दलदल छुपा है, जिसकी बदबू से पूरा पिपरिया शर्मसार हो रहा है। यह सिर्फ नशे का मामला नहीं है, बल्कि मासूमों के साथ होने वाली सीधी दरिंदगी है, जिसे समाज और कानून दोनों ही अनदेखा कर रहे हैं। सवाल उठाया गया है कि स्टेशन पर पुलिस की गाड़ियां घूमती हैं, आरपीएफ के जवान बूट खटखटाते हैं और जीआरपी के दफ्तर भी हैं, फिर भी क्या इन वर्दीवालों को स्टेशन के कोनों में दुबके, नशा करते ये मासूम बच्चे दिखाई नहीं देते? साथ ही, यह भी पूछा गया है कि 'सुलोचन' जैसी जानलेवा चीज़ इन बच्चों तक कैसे पहुँच रही है और कौन सी दुकानें उन्हें यह ज़हर बेच रही हैं। चाइल्डलाइन की टीमों पर आरोप लगाया गया है कि वे एसी कमरों में बैठकर कागज़ काले करती हैं, जबकि स्टेशन पर बचपन सरेआम नीलाम हो रहा है। AIMA MEDIA के संपादक राकेश निषाद ने चेतावनी दी है कि अगर आज पिपरिया के लोगों और प्रशासन ने इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो अपराधी केवल वो दरिंदे नहीं होंगे, बल्कि वे सभी गुनहगार होंगे जो यह सब चुपचाप देख रहे हैं। रिपोर्ट में स्टेशन पर किसी बच्चे की लाश मिलने या किसी का बचपन पूरी तरह उजड़ जाने से पहले इन बच्चों को इस नरक से निकालने की पुरज़ोर अपील की गई है।
पिपरिया रेलवे स्टेशन पर एक भयावह जमीनी हकीकत सामने आई है, जहाँ 10 से 12 साल के मासूम बच्चे नशे और जिस्मानी शोषण का शिकार हो रहे हैं। एक ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, जिन बच्चों की उम्र हाथों में किताबें थामने की है, वे खुलेआम 'सुलोचन' (नशा) सूंघकर अपना बचपन गटर में बहा रहे हैं। जब इन बच्चों के सिर नशा चढ़कर बोलता है और जेब में पैसे नहीं होते, तब स्टेशन के आसपास मंडराने वाले कुछ दरिंदे उनकी इस मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिश करते
हैं। बच्चों ने कैमरे के पीछे रोते हुए बताया कि कुछ लोग आते हैं, बहुत गंदी-गंदी बातें करते हैं, और उन्हें अपने साथ चलने को कहते हैं, जिसके बदले में वे 'सुलोचन' (नशा) खरीद कर देने का लालच देते हैं। ये चमचमाते प्लेटफॉर्म और रात की रोशनी के पीछे एक ऐसा दलदल छुपा है, जिसकी बदबू से पूरा पिपरिया शर्मसार हो रहा है। यह सिर्फ नशे का मामला नहीं है, बल्कि मासूमों के साथ होने वाली सीधी दरिंदगी है, जिसे समाज और कानून दोनों ही अनदेखा कर रहे
हैं। सवाल उठाया गया है कि स्टेशन पर पुलिस की गाड़ियां घूमती हैं, आरपीएफ के जवान बूट खटखटाते हैं और जीआरपी के दफ्तर भी हैं, फिर भी क्या इन वर्दीवालों को स्टेशन के कोनों में दुबके, नशा करते ये मासूम बच्चे दिखाई नहीं देते? साथ ही, यह भी पूछा गया है कि 'सुलोचन' जैसी जानलेवा चीज़ इन बच्चों तक कैसे पहुँच रही है और कौन सी दुकानें उन्हें यह ज़हर बेच रही हैं। चाइल्डलाइन की टीमों पर आरोप लगाया गया है कि वे एसी कमरों में बैठकर कागज़
काले करती हैं, जबकि स्टेशन पर बचपन सरेआम नीलाम हो रहा है। AIMA MEDIA के संपादक राकेश निषाद ने चेतावनी दी है कि अगर आज पिपरिया के लोगों और प्रशासन ने इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो अपराधी केवल वो दरिंदे नहीं होंगे, बल्कि वे सभी गुनहगार होंगे जो यह सब चुपचाप देख रहे हैं। रिपोर्ट में स्टेशन पर किसी बच्चे की लाश मिलने या किसी का बचपन पूरी तरह उजड़ जाने से पहले इन बच्चों को इस नरक से निकालने की पुरज़ोर अपील की गई है।
- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संस्कारधानी जबलपुर आगमन पर नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा उनका आत्मीय स्वागत किया गया। राष्ट्रपति के शहर में पहुँचने पर वहाँ उत्साह का माहौल देखा गया। नागरिकों ने राष्ट्रपति के स्वस्थ और सफल प्रवास की शुभकामनाएँ व्यक्त करते हुए उनका सादर अभिनंदन किया।1
- कटनी वन विभाग ने एक ऐसे 'मास्टरस्ट्रोक' का दावा किया है, जिसके तहत जंगल के उस 'दुश्मन' लैंटाना का इस्तेमाल फैक्ट्रियों में किया जाएगा, जिसे जानवर भी नहीं खाते। इस नई पहल को लेकर यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या यह कदम फैक्ट्रियों की आग को बुझाने में मददगार होगा, या फिर उसे और बढ़ाने का काम करेगा।1
- कटनी जिले के डोकरिया स्थित राशन दुकान में ग्रामीणों ने समूह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दुकान पर उन्हें निर्धारित मात्रा से कम राशन दिया जा रहा है।1
- मध्य प्रदेश में एक पत्रकार को गरीब ब्राह्मण समाज की बेटी के साथ हुए बलात्कार के मामले में न्याय दिलाने वाली खबर प्रकाशित करना महंगा पड़ गया है। खबर छापने के बाद पत्रकार पुष्पेंद्र लोधी को लगातार धमकियां मिल रही हैं, साथ ही उनके खिलाफ एक मामला भी दर्ज किया गया है। पीड़ित को न्याय दिलाने के प्रयास में लगे पत्रकार पुष्पेंद्र लोधी के खिलाफ यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पुलिस प्रशासन पहले भी अत्याचार करने वाले बेईमानों के खिलाफ गरीब शोषित वर्ग को न्याय दिलाने वाली खबरें छापने वाले पत्रकारों को जेल भेज चुका है। इसी संदर्भ में एक घटना तब सामने आई थी, जब मृतक महेंद्र सिंह लोधी को न्याय दिलाने के लिए पत्रकार दमोह कलेक्टरेट पहुंचे थे। उस दौरान दमोह कलेक्टरेट के भीतर ओबीसी, एससी, एसटी वर्ग और पत्रकारों पर ब्राह्मणवादी पत्रकारों द्वारा हमला किया गया था, लेकिन पुलिस प्रशासन दमोह ने उन मनुवादी ब्राह्मणवादी पत्रकारों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की, जिन्होंने कलेक्टरेट के अंदर ही हमला किया था। ऐसे में यह गंभीर सवाल उठता है कि क्या एक निर्दोष पत्रकार को इस तरह से न्याय से जुड़ी खबरें प्रकाशित करने का कोई अधिकार नहीं है।1
- मैहर जिले के अमरपाटन में संचालित मानसी गैस एजेंसी पर हाल ही में हुई प्रशासनिक कार्रवाई और FIR दर्ज होने के बाद स्थानीय गैस उपभोक्ताओं की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। इस सख्त कार्रवाई के चलते अमरपाटन के हजारों गैस कनेक्शनों को यहाँ से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थानांतरित कर दिया गया है, जिससे क्षेत्र के हजारों उपभोक्ताओं के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। एजेंसी बंद होने के कारण अब आम लोगों को घरेलू गैस सिलेंडर भरवाने के लिए भीषण गर्मी और व्यस्तता के बीच 25 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ रहा है। अमरपाटन और आसपास के ग्रामीण इलाकों से आए परेशान उपभोक्ताओं ने बताया कि एजेंसी संचालक की गलती या प्रशासनिक कमियों का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने की गुहार लगाई है, ताकि इस मामले का पूरी तरह समाधान होने तक स्थानीय स्तर पर ही गैस सिलेंडरों का वितरण सुनिश्चित किया जा सके और लोगों को अनावश्यक भटकना न पड़े। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इतनी दूर जाने से न केवल उनका कीमती समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि आर्थिक बोझ भी लगातार बढ़ रहा है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन जनता की इस बेहद जरूरी मांग पर क्या कदम उठाता है।1
- नौरोजाबाद नगर परिषद में उस समय माहौल गरमा गया जब जनप्रतिनिधियों ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) की कार्यशैली को लेकर खुलकर नाराजगी जताई। पार्षदों ने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए सीएमओ पर गंभीर आरोप लगाए। पार्षदों का आरोप है कि सीएमओ नियमित रूप से समय पर कार्यालय नहीं पहुंचते और कई बार कार्यालय से भी अनुपस्थित रहते हैं, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।3
- महाराष्ट्र में एक निर्माणाधीन हनुमान मंदिर की छत गिरने से एक दुखद दुर्घटना हुई है। इस हादसे में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है। मलबे से निकाले गए लगभग 25 घायलों को तुरंत अस्पताल पहुँचाया गया है, जहाँ उनका उपचार जारी है। प्रशासन द्वारा राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं।1
- जेके सीमेंट प्लांट द्वारा करवाए जा रहे सीसी निर्माण कार्य के दौरान एक सड़क में ट्रैक्टर फंस गया। यह घटना उस समय हुई जब सड़क का एक हिस्सा खुदा पड़ा था, जिससे ट्रैक्टर के आवागमन में बाधा आई और वह वहीं फंस गया।1