अजमेर देहली गेट में नारकीय हालात,नालों के गंदे पानी से 'नापाक' हो रहे जायरीन.* जुम्मे की नमाज के दिन भी सड़कों पर बहता है सीवरेज का गंदा पानी. अजमेर। सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के समीप स्थित देहली गेट क्षेत्र इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। क्षेत्र के नालों से ओवरफ्लो होकर सड़कों पर बहता गंदा पानी न केवल स्थानीय निवासियों के लिए मुसीबत बना हुआ है, बल्कि इबादत के लिए आने वाले जायरीनों की आस्था को भी चोट पहुँचा रहा है। आस्था के मार्ग पर गंदगी का पहरा दरगाह के पास होने के कारण इस मार्ग से रोजाना हजारों जायरीन दरगाह और आसपास की मस्जिदों में नमाज अदा करने गुजरते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विशेष रूप से जुम्मे (शुक्रवार) के दिन, जब जायरीनों की भारी भीड़ होती है, तब स्थिति और भी विकराल हो जाती है। नमाज के लिए शुद्धता (पाकीजगी) अनिवार्य है, लेकिन सड़कों पर फैले कीचड़ और गंदे पानी की छींटें पड़ने से जायरीन 'नापाक' हो जाते हैं, जिससे उनमें गहरा रोष व्याप्त है। निगम की कार्यशैली पर खड़े हो रहे सवाल..क्षेत्रवासियों का आरोप है कि शिकायत करने पर नगर निगम के कर्मचारी खानापूर्ति के लिए मौके पर जरूर आते हैं, लेकिन समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। "कर्मचारी आते हैं और थोड़ी-बहुत सफाई करके चले जाते हैं, लेकिन कुछ ही घंटों बाद नाले फिर से उफनने लगते हैं। आखिर नालों की गहराई से सफाई क्यों नहीं की जा रही है. सड़कों पर लगातार गंदा पानी जमा रहने से पूरे क्षेत्र में असहनीय दुर्गंध फैली रहती है। इससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। जायरीनों और दुकानदारों का कहना है कि प्रशासन की इस अनदेखी से पर्यटन और शहर की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
अजमेर देहली गेट में नारकीय हालात,नालों के गंदे पानी से 'नापाक' हो रहे जायरीन.* जुम्मे की नमाज के दिन भी सड़कों पर बहता है सीवरेज का गंदा पानी. अजमेर। सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के समीप स्थित देहली गेट क्षेत्र इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। क्षेत्र के नालों से ओवरफ्लो होकर सड़कों पर बहता गंदा पानी न केवल स्थानीय निवासियों के लिए मुसीबत बना हुआ है, बल्कि इबादत के लिए आने वाले जायरीनों की आस्था को भी चोट पहुँचा रहा है। आस्था के मार्ग पर गंदगी का पहरा दरगाह के पास होने के कारण इस मार्ग से रोजाना हजारों जायरीन दरगाह और आसपास की मस्जिदों में नमाज अदा करने गुजरते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विशेष रूप से जुम्मे (शुक्रवार) के दिन, जब जायरीनों की भारी भीड़ होती है, तब स्थिति और भी विकराल हो जाती है। नमाज के लिए शुद्धता (पाकीजगी) अनिवार्य है, लेकिन सड़कों पर फैले कीचड़ और गंदे पानी की छींटें पड़ने से जायरीन 'नापाक' हो जाते हैं, जिससे उनमें गहरा रोष व्याप्त है। निगम की कार्यशैली पर खड़े हो रहे सवाल..क्षेत्रवासियों का आरोप है कि शिकायत करने पर नगर निगम के कर्मचारी खानापूर्ति के लिए मौके पर जरूर आते हैं, लेकिन समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। "कर्मचारी आते हैं और थोड़ी-बहुत सफाई करके चले जाते हैं, लेकिन कुछ ही घंटों बाद नाले फिर से उफनने लगते हैं। आखिर नालों की गहराई से सफाई क्यों नहीं की जा रही है. सड़कों पर लगातार गंदा पानी जमा रहने से पूरे क्षेत्र में असहनीय दुर्गंध फैली रहती है। इससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। जायरीनों और दुकानदारों का कहना है कि प्रशासन की इस अनदेखी से पर्यटन और शहर की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
- Post by Kailash Fulwari1
- JLN अस्पताल में अवस्थाओं पर भड़के मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एक बेड पर 2 मरीजों को लेटाने पर लगाई फटकार आज अजमेर के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल ओर अस्पताल अधीक्षक डॉ अनिल सामरिया ने अस्पताल के विभिन्न वार्डो का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान एक बेड पर 2 मरीजों को लेटा देख मेडिकल कॉलेज के प्रिंसीपल डॉ. सामरिया भड़क गये ओर अस्पताल स्टाफ को कड़ी फटकार लगा दी। आज सुबह ही पीली खान क्षेत्र में गैस बर्निंग में घायल हुए मरीज को गर्मी में लेटा रखा था और उसके साथ में एक अन्य मरीज को भी लेटा रखा था जिसे देख मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य भड़क गए और व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए।1
- दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर चलती कार बनी आग का गोला, 5 लोग जिंदा जले, वैष्णो देवी से लौट रहा था परिवार राजस्थान के अलवर में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दिल दहला देने वाला हादसा हो गया. यहां एक परिवार वैष्णो देवी से लौट रहा था, तभी कार में अचानक आग लग गई. इसमें पांच लोग जिंदा जल गए. हादसे में तीन महिलाएं, एक पुरुष और एक बच्ची शामिल हैं. वहीं घटना के समय ड्राइवर कार से कूद गया, उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है. राजस्थान के अलवर में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बुधवार की देर रात दिल दहला देने वाला हादसा हो गया. यहां लक्ष्मणगढ़ थाना क्षेत्र के मौजपुर के पास चलती कार में अचानक आग लग गई. देखते ही देखते कार आग का गोला बन गई और उसमें सवार एक परिवार के पांच लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई. मृतकों में तीन महिलाएं, एक पुरुष और एक बच्ची शामिल हैं. सभी मध्य प्रदेश के श्योपुर के रहने वाले थे और वैष्णो देवी के दर्शन कर अपने घर लौट रहे थे.1
- Post by Raghunath rajput1
- Post by Kamlesh udai1
- * आगामी जनगणना 2027 को लेकर नागौर जिला कलक्टर का संदेश * नागौर जिला कलक्टर देवेन्द्र कुमार ने आगामी जनगणना 2027 के तहत जिले के सभी नागरिकों से स्व-गणना (Self Enumeration) में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की है। उन्होंन कहा कि जनगणना देश की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसस े विकास योजनाओं और सरकारी नीतियों का सही निर्धारण होता है। सभी नागरिक निर्धारित समय पर सही और पूर्ण जानकारी देकर प्रशासन का सहयोग करें। स्व-गणना के माध्यम से नागरिक स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं, जिसस प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल बनेगी। आइए, जिम्मेदार नागरिक बनकर जनगणना 2027 को सफल बनाएं। #Nagaur #Census2027 #JanGananna #DistrictCollector #Rajasthan1
- बेसहारा सांड का हमला: 90 वर्षीय बुजुर्ग गंभीर घायल, शहर में आवारा पशुओं का बढ़ता आतंक सेंदड़ा (ब्यावर) शीतल कुमारी प्रजापति ब्यावर शहर में आवारा पशुओं का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। पाली बाजार से चमन चौराहा मार्ग पर आज एक दर्दनाक घटना सामने आई । जहां एक बेसहारा सांड ने 90 वर्षीय सेवानिवृत्त अध्यापक पर हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सांड ने बुजुर्ग को अपने सींगों में फंसा कर जोर से उछाल दिया । जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में उनकी कई हड्डियां टूट गईं ।वहीं कमर में गंभीर चोट (स्पाइन व स्लिप डिस्क) भी आई है। स्थानीय लोगों की मदद से घायल बुजुर्ग को तुरंत अमृतकौर अस्पताल में भर्ती कराया गया । जहां उनका उपचार जारी है। बढ़ती समस्या,बेबस नागरिक शहर में लंबे समय से आवारा पशुओं का आतंक बना हुआ है। आए दिन बच्चे, बुजुर्ग और राहगीर इनका शिकार बन रहे हैं । लेकिन समस्या के समाधान की दिशा में ठोस कदम नजर नहीं आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं हैं। केवल बयानबाजी और औपचारिकताओं तक ही कार्रवाई सीमित रह जाती है। जनता में आक्रोश घटना के बाद क्षेत्रवासियों में रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि हर बार ऐसी घटनाओं के बाद कुछ समय के लिए चर्चा होती है । लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकलता। यह घटना एक बार फिर प्रशासन के सामने बड़ा सवाल खड़ा करती है कि आखिर कब तक शहरवासी इस तरह के खतरों के बीच जीवन जीने को मजबूर रहेंगे। आवारा पशुओं की समस्या पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।3
- जोधपुर के बिलाड़ा में तीन साल का बच्चा खेलते-खेलते पिता की कार में बंद हो गया. भीषण गर्मी के कारण कार के अंदर तापमान बढ़ गया और दम घुटने से उसकी मौत हो गई. परिजन देर से उसे ढूंढ पाए और अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया1