बेसहारा सांड का हमला: 90 वर्षीय बुजुर्ग गंभीर घायल, शहर में आवारा पशुओं का बढ़ता आतंक सेंदड़ा (ब्यावर) शीतल कुमारी प्रजापति ब्यावर शहर में आवारा पशुओं का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। पाली बाजार से चमन चौराहा मार्ग पर आज एक दर्दनाक घटना सामने आई । जहां एक बेसहारा सांड ने 90 वर्षीय सेवानिवृत्त अध्यापक पर हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सांड ने बुजुर्ग को अपने सींगों में फंसा कर जोर से उछाल दिया । जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में उनकी कई हड्डियां टूट गईं ।वहीं कमर में गंभीर चोट (स्पाइन व स्लिप डिस्क) भी आई है। स्थानीय लोगों की मदद से घायल बुजुर्ग को तुरंत अमृतकौर अस्पताल में भर्ती कराया गया । जहां उनका उपचार जारी है। बढ़ती समस्या,बेबस नागरिक शहर में लंबे समय से आवारा पशुओं का आतंक बना हुआ है। आए दिन बच्चे, बुजुर्ग और राहगीर इनका शिकार बन रहे हैं । लेकिन समस्या के समाधान की दिशा में ठोस कदम नजर नहीं आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं हैं। केवल बयानबाजी और औपचारिकताओं तक ही कार्रवाई सीमित रह जाती है। जनता में आक्रोश घटना के बाद क्षेत्रवासियों में रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि हर बार ऐसी घटनाओं के बाद कुछ समय के लिए चर्चा होती है । लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकलता। यह घटना एक बार फिर प्रशासन के सामने बड़ा सवाल खड़ा करती है कि आखिर कब तक शहरवासी इस तरह के खतरों के बीच जीवन जीने को मजबूर रहेंगे। आवारा पशुओं की समस्या पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
बेसहारा सांड का हमला: 90 वर्षीय बुजुर्ग गंभीर घायल, शहर में आवारा पशुओं का बढ़ता आतंक सेंदड़ा (ब्यावर) शीतल कुमारी प्रजापति ब्यावर शहर में आवारा पशुओं का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। पाली बाजार से चमन चौराहा मार्ग पर आज एक दर्दनाक घटना सामने आई । जहां एक बेसहारा सांड ने 90 वर्षीय सेवानिवृत्त अध्यापक पर हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सांड ने बुजुर्ग को अपने सींगों में फंसा कर जोर से उछाल दिया । जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में उनकी कई हड्डियां टूट
गईं ।वहीं कमर में गंभीर चोट (स्पाइन व स्लिप डिस्क) भी आई है। स्थानीय लोगों की मदद से घायल बुजुर्ग को तुरंत अमृतकौर अस्पताल में भर्ती कराया गया । जहां उनका उपचार जारी है। बढ़ती समस्या,बेबस नागरिक शहर में लंबे समय से आवारा पशुओं का आतंक बना हुआ है। आए दिन बच्चे, बुजुर्ग और राहगीर इनका शिकार बन रहे हैं । लेकिन समस्या के समाधान की दिशा में ठोस कदम नजर नहीं आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं हैं। केवल बयानबाजी और
औपचारिकताओं तक ही कार्रवाई सीमित रह जाती है। जनता में आक्रोश घटना के बाद क्षेत्रवासियों में रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि हर बार ऐसी घटनाओं के बाद कुछ समय के लिए चर्चा होती है । लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकलता। यह घटना एक बार फिर प्रशासन के सामने बड़ा सवाल खड़ा करती है कि आखिर कब तक शहरवासी इस तरह के खतरों के बीच जीवन जीने को मजबूर रहेंगे। आवारा पशुओं की समस्या पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
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- स्पीड ब्रेकर ऐसा बनाओ कि स्कूटी जहाज़ बन जाए।1
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- बरगी डैम हादसा: आखिरी सांस तक बेटे को सीने से लगाए रही मां, रेस्क्यू टीम भी हुई भावुक जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में हुए टूरिस्ट बोट हादसे के बाद सामने आया एक मार्मिक दृश्य हर किसी को भीतर तक झकझोर गया। शुक्रवार (1 मई) सुबह रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक महिला और उसके करीब चार साल के मासूम बेटे का शव एक साथ मिला। यह दृश्य इतना भावुक कर देने वाला था कि अनुभवी रेस्क्यू कर्मियों की आंखें भी नम हो गईं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हादसे के वक्त मां ने अपने बच्चे को एक ही लाइफ जैकेट के भीतर सीने से कसकर चिपका रखा था। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वह अंतिम क्षण तक अपने बेटे को बचाने की जंग लड़ रही हो। दिल दहला देने वाला दृश्य रेस्क्यू टीम जब पानी में लापता लोगों की तलाश कर रही थी, तभी मां-बेटे का शव एक साथ मिला। महिला के हाथ बच्चे की पीठ पर इस कदर जकड़े हुए थे कि दोनों को अलग करना भी मुश्किल हो गया। यह दृश्य मौके पर मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर गया और कुछ पल के लिए वहां सन्नाटा छा गया। कई परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़ इस दर्दनाक हादसे में कई लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कुछ लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) द्वारा लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। घायलों का उपचार जारी है और प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति बन गया है। हालांकि, मां और बेटे की यह तस्वीर हमेशा उस अटूट ममता की मिसाल बनकर याद की जाएगी, जो अंतिम सांस तक अपने बच्चे की रक्षा में डटी रही।1
- मोहरा कल्ला गांव मे मेन बस स्टैंड पर इतनी हालत खराब है कि आये दिन एक न एक वाहन चालक इन खडो मे नहाते जरूर है महीने मे एक बार इस रस्ते से SDM साहाब तहसील दार साहाब VDO साहाब कोई न कोई निकलते ही रहते है मगर इसके बावजूद भी इस रस्ते का मरमत कार्य नही हो सका2
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